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#Chanakya #ChanakyaNeeti #ChanakyaQuotes #Kautilya #Vishnugupta #Arthashastra
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00:00प्रित्योर्मा मृत्यम् गमया
00:30सर्वे पिसुखिन संतु, सर्वे संतु निरामया, सर्वे भत्राणि पश्यंतु, मा कश्चित दुख्धा भाद्धवे
00:50जोख शांति ही, अंतरिक्ष शांति ही, प्रुथि विशांति ही, आपश शांति ही, ओषधया शांति ही, वनस्पतया शांति ही,
01:18शांति- ही विष्वे देवाः शांति काम शांति क्रोध शांति ही शांति ही शांति ही
01:32ब्रम्ह शान्ति ही सर्व शान्ति ही शान्ति रेव शान्ति ही साम शान्ति रेधी
01:48यतो यत समीह सेत तो नूम भयं कुरू शन्न पुरु प्रजाव्यो भयन अपशुप्या
02:03सुशान्ति रभवतू
02:18धोरों को चोर की तरह उठा कर ले जाने वाले राजनीति ये नहीं होते पिशुना आंभी बूर्ख है और उसका पिता आंभी राज प्रद्धावस्था में विवच्छ है
02:33पर एक बार तक्ष शिला में आचारे विश्ण गुप्त से सलाह कर लेनी चाहिए वंद्रिवार आचारे विश्ण गुप्त तक्ष शिला में मेरे सहपाटी रह चुते हैं
02:42आचारे विश्णुगुप्त राजनीती का पाठ जरूर पढ़ाते हैं पर राजनीती से अलिक्त रहते हैं
02:52उनकी द्रश्टी में भारत के सभी जनपद एक समान है वो जनपदों के संघर्ष में नहीं पढ़ेंगे
03:00यदि उन्हें हमारी योजना की गंध भी आई तो वो हमें रोकने में भी समर्थ हैं इसलिए मैंने केकई के गुप्तचरों को
03:12तक्ष शिला के गुरुकुल से दूर रहने के लिए कहा है मैं तक्ष शिला में वर्षों तक गुप्तचर का काम कर चुका हूं पर आचारिय से कभी मुठ्वय नहीं हुई
03:24अच्छा ही हुआ जो बज गए वरना बहार से शांत दिखाई देने वाला व्यव्यक्ति भीतर से ज्वाला मुखी है
03:37महराराज परवेश्व की जह हो
03:48मंत्रिवर तक्ष शिला के आकरमन के संबंध में
03:55आपने विचार तो किया ही होगा
03:57महराज तक्ष शिला द्वारा अकारण ही कभी सीमा विवात कर
04:04कभी जलवितरन विवात कर केकई की शांती को भंग करने के प्रियासों को
04:10सदा के लिए खत्म कर देना चाहिए
04:12पर बंत्रिवर वे हमारे राष्ट्र के सीमा रक्षक हैं हमें पुन है एक बार उनसे मिलकर शान्ति पूरक बात करनी चाहिए पर वे स्वयम को स्वतंतर राष्ट्र समस्ते हैं गांधार शकुनी का देश महराज उन्हें योगेश्वर कृष्ण में नहीं समझा सके
04:31और कब तक हम शान्ति की बात करते रहेंगे हम हमेशा शान्ति बनाए रखने का प्रयास करते रहे हैं परिनाम सरूप केकई ने अपने नागरीकों को खोया है अपना पशुधन खोया है अपनी भूमी खोई है वह हमारी भूमी हडप करते जा रहे हैं और हम उनके समझ शान्त
05:01महराज गांधार की स्वतंत्रता एक दिन हमारे लिए गातक से दोगी जहां आमपी जैसा शाशक हो वो अपने स्वार्थों के लिए अपनी मात्र भूमी को विदाव पर लगा देगा
05:14अतर केकई का हित्त इसी में है कि वो गांधार की सीमाओ की रक्षा का बार स्वयम वहन करें अर्थात गांधार पर केकई का अधिपत्त्य हां पर यह तो नीती विरुद्ध होगा
05:30आमभी की मुर्खता के दंड हम समस्त तक्षिला को तो नहीं दे सकते पर्यदी सीमांत प्देश इसी तरह परिस्तितियों का लाग उठाते हुए हमें अपनी बात मानने पर विवश करते रहे तो भारत का भविश्ट सुरक्षित नहीं रहेगा महाराज तक्षिला भारत का
06:00यह ठीक नहीं है, तो आप लोगोने क्या धिन नहीं लिया?
06:04महराज यदीभात तक्षिसिला की सीमाओं के भीतर से केकय की सीमा में अनतिकरत दुरूप से दूसरे जन्रपदों के नागरी को को भेश सकता है
06:15हमारी सीमाओं पर आकर हमारा पशुधन चुरा सकता है हमारी सीमाओं पर उत्पात मचा सकता है तो हम भी उसके द्वार पर जाकर उत्पात मचा सकते हैं कहके को एक बार आपनी शक्ति का प्रदर्शन करना ही होगा महराज आप लोग एक बार पुनहें विचार कर लीजे महरा
06:45पादेश पाते ही मृत्युन जय तक्ष्चिला पहुंच जाएगा और अपनी योजनाओं को कार्यानवित कर देगा हमारे गुप्तचर अश्टा वक्र और चक्रवाग वर्षों से तक्ष्चिला में निवास कर रहे हैं उन्हें पहले से ही सावधान किया जा चुका है वर्ष
07:15में वादक बाचक और सेवक के रूप में हमारे कई वीर काम कर रहे हैं महराज आपकी आग्या पाते ही नट नर्तक गुप्त चर्थ और वितस्ता नदी के पूर्वी तड़ पर खड़ी हमारी सेना तक्ष्चिला पर अक्रमण कर देगी
07:33और क्या यह कूठ युद्ध नीति सम्मत होगा महराज नीतियों का पालन करने वाले से नीत पूर्वक युद्ध किया जाता है धर्म का अनुसरन करने वाले से धर्म युद्ध किया जाता है पर जिनके लिए नीति और मर्यादा का कोई मूले नहीं होता उनके साथ कैसे नी
08:03तो ठीक है, तस दिवस पश्चात तक्ष शिला पर अक्रमन कादेश दे दिया जाए
08:11तिन जे, साब धान रहना, के के कि प्रतिष्ठा आप तुम्हारे आतों में, महाराज, आप निश्चिंत रहें
08:33कि प्रतिष्बस, तो देओन् mm
08:51कि असाए
08:53हुआ हुआ हुआ हुआ है
09:23हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ है फिग談 उडता और
09:41है, हते है एक हाई हो
09:53कर तो कर दो तो
10:23करना भुच्ट्स प्रतुदयनगर में आचुका है किसी सवय की ताथ में ही तो बैठे दे हूं
10:43कि मिश्चिंत रह्वस्थ तेरे मार गूले विजय ही विजय है
10:53प्रणाम स्विकार हो प्रभू बच्स माता की बराबर सिवा करना शिग्री राजपत पाएगा माता में भक्ति अटल रहे कल्यान होगा
11:18प्रणाम स्विकार हो प्रभू प्रणाम राज माता
11:21अपने सेवकूं को भेजकर मुंडों के लिए विल्ब पत्र मंगवा दें तो कल्यान होगा जटिल उपासना के लिए जा रहे हैं
11:31जाओ सेवकूं निकट के व्रिक्षों से विल्ब पत्र तोड़ लाओ
11:35मैं राज माता नहीं हूँ देव मैं मंत्री सुशीन की पत्नी हूँ चमा करें राज माता नीती को कौन टाल सकता है
11:49से तिरे माते पे राज माता के लक्षन विधाता ने लिख 550 चानता
11:54कुछ दिनों पहले कुछ मुंडों ने भी इह कहा था पर मुझे विश्वास नहीं हुआ
11:59था मुंड तो वही पढ़ेंगे जो तेरी माथे पे लिखा है राजमाता तेरी कोक से यूवराज जन्म ले चुका है आगे नियती अटल है सेवक आ जाए तो उन्हें शिवाले में भेज़ देना
12:12कि मुंड तो वही पढ़ेंगे जो तेरी माथे पे लिखा है तेरी माथे पे राजमाता के लक्षन विधाता ने लिखे है उसकी वही चानता है
12:32दासी दासी आज मेरे यूवराज के लिए को सुन्दर पकवान बना क्या यूवराज आम भी आज खरा रहे हैं नहीं रे मैं तो अपने पुत्र की बात कर रही हूं आज पड़ी प्रसन दिखाए दे रहे हैं देवी अरे
13:02दिखाए देवी, तू भी प्रसन होूप, शीगल ही तु राजमहिशी की प्रमुक तासी होगी
13:06मेरा ऐसा भागये कहां जो राजमहिशी की मैं तासी बनूँ
13:11एक बात तो बता क्या मैं राजमहिशी नहीं दिखाए देती आप बहुत संदर है देवी
13:18कि अधाय देवी अंकिता के उद्गार सुन मैं सीधे आपके पास तोड़ी चली आई
13:24मेरे लिए क्या अग्या है देव
13:29कि यह रहा तुमारा पुरुसकारदा से
13:47कि अधाया है तुम जास अधियो
14:17कि अधाया है आग्या है आप इसपर पैठीगे नहीं कुछ समझ नहीं पा रहा हूं दे
14:24कर आषिनाउर्जी आप दिरीयरिक्त किया गया है मन्जीवड आप इसको पैढ़ होता है
14:38होता है मान्जीवल राजनीती में ऐसा ही होता है
14:44राजनीती में भ्यक्ति नहीं आसन है और नहीं तुक्क होता है
14:53वोकल आपका भी होसकता है, कुछ लोग जन्म से आसन पाते हैं, मंत्रिवर, कुछ लोग आसन हत्याते हैं, आपने अभी तक आसन नहीं कहने किया, मंत्रिवर, पर इस पर तो आपका आजय कार है, यो व्राज, घलत कह रहे हैं आप, मंत्रिवर, मेरे पास आसन हो और आपके प
15:23को खत्याना चाहिए चाहे क्यों ना इसके लिए अनीती का आचरण किया जाए अथो शड़ेंत्रों की रचना की जाए चाहे क्यों ना इसके लिए अपने ही स्वामी के शत्रों के साथ संथी की जाए मैं आपके कहने का अर्थ नहीं समझ रहा हूं युव राज दास नहीं कहा
15:53सुषेन के युवराज ये समय अठ्खेलियों का नहीं है अब उन विशायों पर भी गंभीरता पूर्वर बिचार होना चाहिए जिनके लिए आपने मुझे यहां बुलाया है
16:02पहले इसमें केंकें पर तक्र yapıyorsunशित द्वारा के गए आक्रमंण को ले चिंतत हो आप क्यो चिंतत होते हैं मन्तिरिवर्
16:09वेल केका तक्षिशिला पर आक्रमन होगा वो उस युद्ध में केका साहथ देने के कारण आपका गुप्त संधी की शर्तों के अनुसार राजय विशेग भी होगा मंत्री वर्च यदि मैं अनर्थ प्रलाब कर रहा हूं मंत्री वर्च तो तक्षिशिला का शासक बनने का सो�
16:39में कैके अथ्वा अविसार के गुड़ पुरुशों की कोई चाल है मुझे तो लगता है कि कैके वा अविसार के बार-बार प्रैतन करने के पश्चात भी शस्त्र यूद में विजय न मिलने के कारण अब उन्होंने मंत्र युध आरम कर दिया है और उस मंत्र युध के सू
17:09कराने की ताक में बैठे ऐसी स्थिती में अविश्वास का हलका सा अघाद भी राज परिवार को छिन भिन कर सकता है आप उस व्यक्ति को जिसने मुझ पर शडियंत्र का आरोप लगाया है महराज आंबिराज के सन्मुक प्रस्तुत कर सत्य सत्य की जाच करवाई
17:24आये आये राजमाता आप मंत्री वर सुशेंड को राजय फिशेक के रूप में क्या उपहार देंगी राजमाईशी क्षमा करें युवराज इसमें मंत्री वर का कोई दोश नहीं है मैं ही मूर्ख थी जो मैंने उन जटूलों पर विश्वास किया वपनिक्षूद्र बु�
17:54दोश तो मंत्री वर सुशेंड के महत्व कांच्शी स्वभाव का है युवराज मैं आपसे सत्य ही कह रही हूं आज प्राता तक्षिला में ब्रह्मन कर रहे दो जटिलों और मुंदों के समुहों ने मार्ग में मुझे दिकप्रमित किया वह उन्तुष्ट जटिलों ने मेर
18:24कि आप शीग रही राज मैशी अध्वा राज माता बनेगी मेरे अपरात को क्षिमा करें देव युवराज मैं विश्वास पूरवक कह सकता हूं कि तक्षशिला के शत्रों द्वारा राज परिवार में फूट डालने का क्रम प्रारंभ हो चुका है हमें शीग रही सावध
18:54करके प्रयासों का प्रतिकार करना है मंत्रीवर मैं आपको स्वयम को निर्दोश प्रमानिक करने का एक अवसर देता हूं कि कल सुबह तक कुन जटिलों को मेरे समक्ष उपस्तित नहीं किया गया तो तक शिचिला के राजकुल के विरूत शड्यंत्र रशनी के अबरात में �
19:24हुआ हुआ हुआ है
19:54माजा Mümm
19:57आज आपने पन्य हर्द पर कुछ मुंड और दोगों देखा है नहीं
20:02में
20:08मशला की मशल्यूा है
20:22प्रतेक महापत्, राजपत्, देवपत्, वाराथ्याओं पर जटलों को ढूंडा जा चुका है, पर जटलों का कहीं कुछी में दिखाई नहीं पर रहा है, तक्षिछिला के पंथागारों अपन्य हटों में भी मुंदों अथ्वा जटलों को किसी नहीं देखा, नगर के प्
20:52यदि कोई व्यक्ति शंकासपत सिती में दिखाई पड़ता है, तो उसे बंदी बना लो, जटलों का नुप्थ होना हमारे लिए जीवन मनन का प्रश्ण हो सकता है, मुझसे सतत संपार्थ बनाए रखो, जो आग्या मंत्री दाख
21:06सज्जनों, ये दुकूल देखिए, पार्सपूरी के कुशल कंतुवायों के हाथों से ये बुना गया, पार्सपूरी के ही रंगरेजों ने इसे रंगा और सुंदरता प्रदान की, सौंदर को देखने से उसका मुल बढ़ता है, पर इस दुकूल का स्मुल्यांकन, तक्ष
21:36प्रणाम मंत्रीवर, आपने आज्यां दी होती, तो मैं स्वेम पढ़ने लेकर आपके भौन पर उपस्तित हो जाता है, मंत्रीवर हासन ग्रहन करें, अपने प्रेशी के सुंदर रंगों की शोभा बनाएगा, तो स्रीमान गुद्धिमान गुन्वान करते हैं, मंत्रीवर,
22:06सम्मान करना चाहते हैं, इसलिए तुम से पूछ रहा हूँ कि यदि तुमने जटिलों को देखा हो, तो उन्हें ढूंडने में आसानी होगी, जटिलों मुंडों में मेरी कोई शर्धा नहीं मंत्रीवर, आप भी उनके फेर में मत पढ़िये, श्रिष्ठी, यदि तुम प�
22:36रहतनों करते रहो
23:06कि नहीं रहो अचे पहे हो थोड़िये, श्रिष्ठी, दोग्दि तुम यदिओने में क्या थिंए, जब रहा हुआ कि जब शर्धाइर नहीं में में रहा हुआ के ज़िये घुमने शर्धा?
23:18कर दो
23:48झाल झाल
24:18था जूरो करें
24:48सबी को साधान कर दो आंभी के सानिक सतर्क हैं आधे पहर के पाश्चात हमारी योजना कार्यार्वित हो जाएगी
25:02जहां तक हो सके राजपुर्शों को मादक द्रव्यों में धुत्त कर दो
25:07कि राप तुरी के अंग दिम परहर में तुम्हें पुना सूचना मिलेगी परंतो तक्षिशिला के गोड़ों पुर्शों से साधान रहना
25:26कर दो
25:56कर दो कर दो दो
26:26परिचारी के आसव और अरिष्ट का एक एक घट और दे रहना क्या बाते सेवा तक्षिशीला की प्रतिस्टीत गणिका है आज पूरी तक्षिशीला को आसव मेरे मेदक अरिष्ट और मधु में डुबो देना चाहती है जो पल पल गणिकाओं की सेवत आसव के लिए दोड़
26:56अब मुझे भी अपने आतों से एक चशक पिला दो ना अब जाते हो यह अब
27:05कर दो
27:07कर दो
27:14कर दो
27:17कर दो
27:21कर दो
27:26कर दो
27:41कर दो
27:49कर दो
27:51कर दो
27:55बखर कर दोब बसारा कर दो है
28:25क्वार।
28:55प्रिखाने हैं प्रिखाने हैं?
28:57प्रिखाने हैं?
28:58आपर एना?
29:25प्रिखाने हैं?
29:27प्रिखाने हैं?
29:29प्रिखाने हैं?
29:31प्रिखाने हैं?
29:33प्रिखाने हैं?
29:35प्रिखाने हैं?
29:37प्रिखाने हैं?
29:39प्रिखाने हैं?
29:41प्रिखाने हैं?
29:43प्रिखाने हैं?
29:45प्रिखाने हैं?
29:47प्रिखाने हैं?
29:49प्रिखाने हैं?
29:51प्रिखाने हैं?
29:55तक चुशिला ने मासी हो
30:25õesचर में, मासी कर देया लाए
30:29वासी कर देते हो
30:34लोगे मासी कर दोओे लोगे
30:35घृ घृ याए
30:40मासी, आहीं, जा दोदो चसो laquelle फ्चाया sout mental
30:50कामेला एक बासो चक चक्ट connect
30:55एक दिन राजकुमार अपनी प्रियसी को छोड़ दूर चला गया प्रियसी उसकी प्रतिक्षा करती रही दिवस मास वर्ष बीद गये पर वो न लौता
31:23और यहां उसका बुढ़ा पिता अपने पुत्र की प्रतिक्षा कर रहा है तो दूसरी और बुढ़े राजा का मंत्री पुत्र की अनुपस्तिती में प्राजा के विरुद शड़यंत्र रच रहा है उस नीच की द्रश्टी राजकुमार की प्रियसी पर भी है उसने बुढ़
31:53प्रिये बहुत दिनों के बाद यह अवसर मिला है ना राज पुरूशों की अपनी विवस्ता होती है प्रिये
32:05राज की ए उत्तरदाइतों से मुक्ती नहीं मिलती चाहिए प्रेम करने के लिए भी मुक्त नहीं हो सकते आप
32:16मेरी मुक्ती तो तुम हो
32:20सुनो
32:47अपने अपने स्वामियों को उनके निवास्थान पर ले जाओ
32:51रात्री का तीसरा पहर बीटने को है
33:17हैं अपने श्काली को है
33:47कर दो दो अ कर दो एंग
34:17कर दो
34:47प्रणाम रित तुन्जे यहां मैं लक्षमी पती हूँ आस्था वक्र
35:13तक्षशिला के अंतपूर में कल केकई का कौन सा गुड़ पुरुश प्रवेश करेगा लश्यूई पते कल प्रादह कुमार आंभी की भारिया की दासी के साथ तक्षशिला के गर्माने श्रेश्थे अस्टा वक्र अपने बहुमूर ने पढ़ने के साथ अंतपूर में प्र�
35:43अंतपूर से संपर्क स्थापित करने का यही एक मार्ग था तो उसके लिए दासे ही मिली मूर्ख है राज सिवा से मुक्त करा उससे विवाह करने का मैंने वचन दिया है तो अपने वचन का पालन ने करोगे अश्टा वक्र श्रम तो बहुत किया है और कैष्ट भी बहुत �
36:13यह हुँने वचना है और यह हुँने वचना है और
36:32यहुँने फ़ग भी करने का यह दो मेंगलन पालन दोंगा है
36:43चोड़ो, चोड़ो मुझे से ना पती
36:48ग्रोध करते समय तुम और भी सुन्दर लगते हैं शुपते
36:52कि मैं किसी दिन तुम्हारी हत्या करने पर ततपर हो जाओं तो
36:56साक्षाद देवी लगो
36:57पुझे बहकाऊ मत से ना पती
36:59ग्रोध बश किसी दिन मैं अपनी जीवन का अंग कर लोगे
37:02शुपते
37:03क्यों? मेरा अंग नहीं देख सकते
37:07और मुझे मेरा अधिकार भी नहीं देना चाते
37:09मैं पूरी तरह से तुम्हारा ही तो हूँ
37:12तुम मेरे भीतर जल रही अगनी को नहीं समझ पाओगे सेना पती
37:16मैं पल-पल तुम्हारी प्रतीक्षा में जलती रहती हूँ
37:20आओ, मेरे निकटाओ
37:22नहीं, आज तुम्हे भी प्रतीक्षा करनी होगी
37:24मैं कहती हूँ छोड़ो मुझे वरना आज कुछ अनिष्ट हो जाएगा
37:28आज तुम्हारा जोजी चाहता है को
37:31अब परिणाम की परवा नहीं है मुझे
37:34तो फिर आज भी इतनी देर से क्यों आए
37:39शुब्दय आज आमभी के साथ सारा दिन नगर में गुपता रहा
37:44नजाने कहां से उसके मन में केकई के गुप्च शड्यंत्रों का भाय बैठ गया है
37:56आज सारा दिन नगर की प्रत्यक वीथी में जटिलों और मुंडों को ढूंडता रहा
38:02मंतरी सुशेंड भी यही कह रहे थे रजाने क्या हो गया है उसे यदि विवराज आमभी आज भी आ गय तो
38:09नाम मतलोस मूर्ग का उसी के करण सारा राज परिवार दुखी है कभी वितस्ता के जल का वितरन कभी सीमा विवाद को लेकर अनायास ही केकैसे विवाद करता रहता है
38:19अपने सेना पती मुझ से डाकू और लुटेरों के काम करवाता है एक राज्य का सेना पती भोरों को भगा कर लाता है तो केकै इस विवाद का अंत क्यों नहीं कर देता कैसे होगा सारे विवाद गढ़े हुए विवाद है और केकै विवाद का अंत कर दे तो भी तक्षिला
38:49आम्भी की दृष्टी पर्वतेश्वर की पुत्री पर है और साथ ही केकई की कामना भी
38:54पर ऐसे मूर्ख को अपनी पुत्री देगा कौन
38:58केकई राज कई बार उसका प्रस्ताफ तुकरा चुके है
39:02अपनी सीमाय सुद्रड करने के बजाए वो केक है और अभिसार से शत्रता कर बैठा है
39:10कि एए क्या सोच रही है कुछ नहीं आज आसब नहीं पिलाओगी
39:19क्या विचार कर रहे हैं आप
39:41प्राता होते ही महराज आंभी राज के समक्ष सत्य घटना का निविधन कर देना
39:48अंभी रस दयालू है वे अवश्यक्षमा कर देंगे तुम आंभी को नहीं जानती अंकिते मैंने निरनेक कर लिया है
39:59सुर्योदय से पहले ही हमें तक शिशला का त्याग करना होगा
40:04क्या इसकी अत्रिक्त कोई मार्ग नहीं है जीवित रहने का शायद इसके अलावा और कोई मार्ग नहीं है
40:10आज बड़ा विचित्र व्यभार कर रहे हूं तुम शुबदे
40:13पता नहीं कब व्यक्ति अभीने करते करते सुहम अपनी भावनाओं से खेलने लगता है सेना पती
40:20कौन अभीने कर रहा है
40:22मैं
40:27बहुत भावोख हो रहे हूं तुम आच
40:30इस्त्री को तुम नहीं समझोगे सेना पती
40:34ए ए क्या हुआ अथ में
40:39कुछ नहीं
40:42ओम द्योगो शांति ही
40:59अंतरिक्ष शांति ही
41:04प्रिथि विशांति ही
41:06आपः शांति ही
41:10ओशधया शांति ही
41:15वनस्पतया शांति ही
41:18विश्वेदेवा शांति ही
41:22ब्रह्मा शांति ही
41:24शांति ही
41:25सर्वा शांति ही
41:27शांति ही
41:29शांति रेव शांति ही
41:32साम शांति रेधी
41:35ओम ओम द्योभु शांति ही, अंतरिक्षा शांति ही, पृथिविशांति ही, आपः शांति ही, ओषधया शांति ही, वनस्पतया शांति ही,
42:03शांति ही विष्वे देवा हा शांति ही प्रह्मा शांति ही शांति ही सर्वाश्ण