00:00प्रित्योर्मा मृत्यम् गमया
00:30सर्वे पिसुखिन संतु सर्वे संतु निरामया सर्वे भत्राणि पश्चंतु मा कश्चित दुख्धा भाद्भवे
00:50गयोह शांति ही अंतरिक्षा शांति ही पुथी विशांति ही आपशांति ही
01:09शांति ही ओषधया शांति ही वनस्पताया शांति ही विश्वेदेवा शांति ही काम शांति ही
01:26क्रोध शांति ही रम्ह शांति ही सर्व शांति ही शांति ही शांति रेव शांति ही साम शांति रेधी
01:48यतो यत समीह सेत तो नूम भयं कुरू
01:56शन्न पुरु प्रजाव्यो भयन पशुप्या
02:03सुछने भाबादो
02:10सुछने भाबादो
02:33झाल झाल
03:03कर दो, ठस형 का अजये हैं!
03:33वालते! वालते!
04:03अब्सन मुखनाई नियुख अचैजाई भाह।
04:24पुझ अजिए।
04:25अजिए आरि आरिए निए।
04:31अजय काई?
05:01महामंत्री आधिरात के बाद से घर से गायब है
05:09तुमने महामंत्री को जाते देखा था?
05:10महामंत्री को सभी जानते हैं
05:13उहें कुछ नहीं होगा
05:14तुम अभी घर जाओ, मैं कल सुभे
05:17नहीं, मिलिन, तब तक बहुत देर हो जाएगी
05:19मैं चनक के यह जा रही थी
05:21कि तुम मार्ग में प्रह्रियों को देकर दरकर लोट आए हो
05:24देखो भामनी
05:30मिलिन, तुम तो महामंत्री के सुख दुख के साथ हो
05:33तुम के आज मेरी मदद नहीं करोगे
05:35ठीक है, मैं महामंत्री को ढुंता हूँ
05:51करते हैं
06:21कर दो कर दो
06:51कर दो कर दो
07:21कर दो कर दो
07:31कर दो
07:37वो नाली ही लु नाली है
08:07अगरा वनादा ऐसे से क्लिव मुझे नहीं केल अधो उसा अधा ना कहाँ है
08:24मेरे मगट को जाना जाते हैं इससे पहले मैं उन्हें उजार दूंगा छोड़ो मुझे चोड़ो जाओ
08:33जाकर धरनंद को सूचर दो कि मैं यहां उसके स्वन मुद्राइन उड़ा रहा हूं जाओ
08:39तुम्हें शिशुपाल वंगत की शपत जो आग एक शब भी कह और यहां पल भी रुके
08:44जाओ घर जाओ भामेनी तुमारी प्रतिक्षा कर रही है
09:00पॉख भटने से पहले मैं तुमारे घर आऊँ जाओ
09:09मुझे लेश मात्र भी अपेक्षा नहीं थी
09:35कि वह विक्षिप्तों की भाती पाटली पुत्र की वीथियों में स्वर्मुद्राय विखेरता जिश्टी घोचर होगा
09:40क्या वे शक्ता थी इस दुसाहस की ?
09:44कल पाटली पुत्र में कोई भी दुरघटना हुई
09:48तो उसका उतरदायत कौन वहन करेगा महामंत्री ?
09:52उसके लिए मैं उतरदाय नहीं हूं मिलिंद !
09:55शक्तार तुम महामंत्री हो इसलिए धनन से लड़ने का साहस कर रहे हो !
09:59पर एक साधारन आदमी सत्ता से नहीं लड़ सकता !
10:02और कल जब तुम महामंत्री के पत से फैंक दिये जाओगे !
10:05तो तुम भी एक साधारन आदमी ही होगे !
10:08तो क्या ?
10:10मैं अपनी आखों से ब्रस्टाचार होते देखता रहूं ?
10:12शक्तार तुम ब्रस्टाचार से कम धनन से ज़्यादा लड़ रहे हो !
10:15तुमारी लड़ाई रक्तिगत होती जा रही है !
10:18तुम धनन को चुनादी देने जा रहे हो पर सारे मागत तो घरों में चुप बैठे है !
10:22इस लालाई में सिर्फ तुम ढूटोगे !
10:26मैं मरने से नहीं ड़ता हूँ !
10:28तो लो ! आदम हत्या कर लो !
10:30बिलिंद !
10:31भामीनी ये आदमी पागल हो गया है !
10:33मैं तुम्हारे मित्र हूँ !
10:38और मित्र होने के अधिकार से कहता हूँ !
10:41तुम धनन से नहीं लड़ोगे !
10:44मैं तुम्हारे साथ हूँ !
10:46पर मुझे एक बचन दो !
10:47के पाटली पुत्र में कोई भी उपद्रव !
10:49तुम्हारे कारण नहीं होगा !
10:52हं !
10:54तुम्हारे में जाँ !
10:58तुम्हारे में जाँ !
11:14पिता जी को संभालना !
11:18हम !
11:24तुम्हामात्य।
11:25महाराज धननन्द।
11:26महामंत्री शप्टार के संबन्द में क्या विचार कर रहे हैं ?
11:27अमात्य।
11:28महाराज धननन्द।
11:29तुम्हामात्य।
11:30महाराज धननन्द।
11:31महामंत्री शप्टार के संबन्द में क्या विचार कर रहे हैं ?
11:36तुम्हामात्य।
11:37महाराज धननन्द।
11:38महामंत्री शप्टार के संबन्द में क्या विचार कर रहे हैं ?
11:40तुम्हामात्य।
11:48तुम्हामात्य।
11:49महाराज धननन्द।
11:50महामंत्री शप्टार के संबन्द में क्या विचार कर रहे हैं ?
11:53अमात्य।
11:54आप महाराज धननन्द के सेवक हैं
11:56उनके विचारों को पढ़ने का प्रयास मत करिए !
11:59मात्र उनके आदेशों का पालन करते रही है
12:02रणाम महामात्य
12:12महामात्य पौर मिलिन
12:14अपने परमित्र शक्तार के घर से
12:16आज पराता काल निकलते हुए देखे गए हैं
12:18परमित्र
12:19परमित्र ही या परमशत्र होगा
12:22लोकाल जई
12:23पाउर मिलिन को अपने मित्रता का निर्भा करने का अदेश दे दो
12:27राजनीती में मित्रता का कोई स्थान नहीं होता
12:44यह बात पाउर मिलिन को आज समझ में आएगी
12:53पार मिलिन!
13:23यह कैसे हो सकता है शक्तार मेरा मित्र है पार मिलिन यह आदेश तुम तक महुचाना मेरा काम था इसका पालन करना ना करना तुम्हारी इच्छा पर नर्वर करता है
13:51को पार मिलिन कर इसका है
13:57है यह बालन करना मिलिन आए उसक्तार रा किरी इसक्तारा
14:03यहार किस्स वसन सब्सक्तिर नर्वाण करता है
14:09यहाँ प्रक्तार्मपद्वद्वच्वफट करते है
14:13करी कर दो जो उने से कर दो कर दो हम और कर दो आ जाएगा, आएगा अ कर दो.
14:43लुपिता है
15:13刺激 नहीं सिर भागे सा औरादा?
15:19शजर लॉड芋 मेचार्ण जजाखिए सिर्गार्ण जाटर लॉड़ाज मेचारॉ
15:46शजरा रॉड़ड़
15:48शक्टार
15:50मिलिन
15:55तू भीतर को नहीं है आरा
15:59सब ठीक तो है ना मिलिन
16:17तुम बोलते क्यों नहीं मिलिन
16:21तुम्हे और तुम्हारे पुत्रों को महराज धनन ने बुलाया है शक्तार
16:25तुम
16:27सत्य छिपा रहे हो मिलिन
16:30सत्य सुनने का सहस है तू सुनो
16:32मैं तुम्हे और तुम्हारे पुत्रों को बंदी बनाने आया हूँ
16:35मिलिन
16:38पौर कहो, तुम्हारे घर महाराज धनन का सेवक पौर मिलिंद आया है, तो सुनो पौर मिलिंद, क्या मैं अपने अपराद जान सकता हूँ?
16:47कल रात राजकोर से लाखों स्वरन मुद्राय चुरा कर, बाटली पुत्र की भीथियों में बिखेरने का तुम पर आरोप है।
16:54ठीक है पौर मिलिंद, तुम अपने कर्तब्वय का निर्वाह करो, मैं मिलिंद के मित्त्र के अधिकार से कह रहा हूँ, कोई उपद्रब नहीं करूँगा, पर एक पल ठेरो, मैं अपने पुत्रों को बुला लूँगा।
17:13क्या बात है पिता जी? मेरे दुनों पुत्रों को आज महराज धननन ने मिलने के लिए बुलाया है।
17:29हमसे पिता की तरह बोले है पिता जी? मगत के महामंत्री से नहीं, पर अपने पिता से तो ये अपेक्षा रखते हैं, कि वो हमसे सची बोलेगा।
17:36महराज धननन को मेरे पुत्रों से क्या काम हो सकता है महामंत्री? बोले है पिता जी।
17:46इसका उत्तर तुम्हें तुम्हारा पिता भी नहीं दे सकता। चलो मेरे साथ। नहीं, मैं नहीं जाओंगा।
17:56और ना मैं किसी को जाने दूँगा।
17:58जाना तो होगा बेटे। तुम्हारी अर्ठियों को कंधा दे सकूँ इतना कठोर नहीं हुआँ मैं।
18:07और मैं तुम्हारे कंधों पर मरगर तक जाना चाहूँगा। धननन तीन चिताओं की लकड़ियों पर घर आसानी से दे देगा।
18:18इसलिए कहता हूँ बेटे जिवित रहो। तुष्टों की अर्ठियों उठाने के लिए मुझे तुम्हारे कंधों के भी जरूर पड़ेगी।
18:27तो चलिए पिताजी आज महराज धननन को शट्टार के पुत्रों का परिचय जरूर मिलेगा।
18:48आप अपने अश्व पर ही आएंगे महामंत्री।
19:18का नएंगे महामंतर के वाह रगेंगे मいत शेताएंगे मिलेगचा अर्दू ओया।
19:25प्लिए मöhंअगे एंपने एंपने मीजिए उर।
19:33मोझे प्ला के फित Some शेता प्मांतर की आएंगे मैं प्लाएंगे आए यापा इात प्ला के प्लाएंगे वी प्लावे advice
19:38नहीं झाल फो उसमbar अराफ जिंट है झाल झाल
19:49कि एल रोग ऑल झाल
19:58जर ऑफ
20:08कर दोखरूद का रातों!
20:30कर दो तर कि रेखने
20:34जल WHY। जल, Çaँ जल जलँ!!
20:38कर दो CERMe
20:48कर दो
20:52कर दो
20:59कर दो
21:03आट पşूआ झाल
21:33जारए मान्सिर को मत्री को बारागे
21:37मत्री बारागे
21:38अरब इसक्री को
21:40सो जिन दिने- màंसिर ने
21:43जित डेंजिये
21:44जहित डरी तबरा हम जाट
21:46जार जांद जाए यकार्थ
21:49जाल जां आननंने this
21:52पुमक्र!
21:54जादे दो मत्री
21:57पिताजी, मामन्ती शक्टार और उनके पुत्रा को बंदी मेना जा चुका है
22:27कर दो कर दो है
22:57शास्त्रों ने कहा, राजा इश्वर का रूप है, हमने माना, हमने उसके आदेशों को ब्रह्म्यवाक की माना, पर वे भूल बैठा कि हमारे विश्वास से ही उसका अस्तित्त्त है,
23:16उसने वजन दिया था कि वह हमारे योगशेम का वहन करेगा, पर उसने विश्वास घात किया, किस अधार पर मगत के नागरी के विश्वास करेंगे, कि उनका भविश मगत के शासक के हातों में सुरक्षित है,
23:32जबकि मागदों का लोक प्रत्रिली महामंत्री शक्टार, राज की का रवास में सत्ता के समक्ष सत्त को मुख्रित कने का दंड भोगरा है,
23:43महामंत्री शक्टार की ये स्थिति है, तो किल मगत के नागरी को का क्या होगा?
23:47चारो वेदो, ल्याय वधर्म शास्तर के ग्याता, वगत तीनो आश्रमों के प्रतिनीदियों से बनी इस परिशत से मेरी प्रात्रा है,
24:05कि परिशत गली गून कर, नगर के मार्ग अवरुद कर, महराद धन्नन के वरुद, गरत प्रचार कर है, अचार ये चनक को रोके।
24:17परिशत तो सनात्कों के ग्यात की परिक्षा लेता है, उनका सम्मान करता है, एवं शास्तर संबंदी विवादों का निरने करता है, अचार ये चनक को रादेश देना, परिशत के अधकार छेत्र से बाहर की बात है, वह अधकार तो महराज धनन का है,
24:41पर क्या शास्तर शिक्षक को विद्रोव अशाडियंत्र का सुत्तर पात करने की अनुमति देते हैं।
24:47मैं चात्त प्रतिनिती, वेदो को साक्षी रखकर आप से पूछता हूँ।
24:53महामात्यवक्रनास, जो शिक्षक अपने ज्यान के छत्र से समाज की रक्षा करता है, उससे आज सत्ता को भय क्यों लग रहा है?
25:02महामात्यवक्रनास, शिक्षक को हम भविश्य का निर्माता मानते हैं, तो बदलती हुई परिस्थित्यों में शाश्वत सत्य, मूल्य, वग्यान के प्रकाश में वर्तमान में परिवर्तन करने का उसको अधिकार है।
25:23शास्त्रों का पालन करने वाला, शास्त्रों का रचैता भी होता है, महामात्यवक्रनास, जिस शिक्षक की गोद में निर्मान, वो प्रलय, तोनों खेलते हैं, या वह कभी शर्यंत रच सकता है?
25:40यदि आचारी चनक को मगत के भविश्च के लिए पूरे मगत को भी चुनोती देनी पड़े, तो भी या परिशद उन्हें रोक नहीं सकती।
25:53मैंने इस टालना चाहता हूं देव।
25:56नियती अटल है।
26:00मगत का एक शिक्षक पाडली पुत्र की वीचियों में विद्रो करने के लिए नहीं खड़ा हूं।
26:21परसत्त के स्वर को संबल पुर्दान करने के लिए मागनों को पुकार रहा हूं।
26:25रहstate मगत की मंद्री पुछे कि महहमंत्री शक्टार को बंदी क्यूं मनाया गया।
26:34किस अपराज के लिए पाडली पुत्र के और कि मिलिंद्ध महमंत्री शक्टार reader की संतानलों को बंदी मनायें।
26:39और क्यूं मगत का मात्वर्ग इस घटना के बाद मूह है।
26:44कि संभवत अमगत का मात्वर्ग भी इसको चक्र में समलित है और यह ऐसा है तो पाडली पुत्र की उच्च टालिकाउं में बैठें मात्वर्ग वह मगत के राश्तंत्र को इस्मन करा दूं कि मगत के भागी विधाता मात्र वे नहीं है अभी तो मगत जनपत के वे नागरिक �
27:14जो मागतों का पूशन कर रहा है और गर्म में आकार ले रहा वो शिचू भी मगत का भाग विधाता है
27:21मगत का राश्तंत्र भी हमारी आख अविलाशाओं और विश्वासों पटी का है वो भी हमारे निवावस्त से बना है
27:31और उसी विश्वास का अधार ले, मैं मागत के राज्तन से पूछता हूँ, कि किस भैसे अक्रान थी मागत की सर्वोच सत्ता, कि पाटली पुत्च में दो छात्रों को दिन धाड़े पाटली पुत्च के राजमार्गों पर गसीदा गया।
27:47मैं बूचता हूँ मागत के उन नागरिकों से, जो उन जात्रों की दुर्दशा देख कर भी मौन थे।
28:17कि एक दिन बॉण्डर उठेगा, जो मगत के राज्टंच को धूल में मिला देगा।
28:47देवी का मन मोईत हो जाएगा।
28:49मेरे निवास तक पहुंचा देना।
28:51जैसी आगया देवी।
28:52देवी सुमूखी यह शूख देखिए।
28:54स्रावस्तिज़ मैं इसे लाया हूँ।
28:55आप सही मदूर बोलता है।
28:57आपके अभ्यागतों का यहां मन बहलाएगा।
28:59मेरा निवेदने की आप इसे ले जाएए।
29:01मुल्य मात्र तिन पण है।
29:03मेरे सेवक से मुल्य ले ले रहा।
29:05जैसी आगया देवी की।
29:07रावस्तिज़ में आपके देवी की।
29:26क्या होगा।
29:28आचार श्रण जा रहे है।
29:29कहां जा रहे है आप लुक।
29:31अभी आ रहे देवी।
29:37लादो चाना लादो
30:07लाला लाल नाड़, लाला।
30:37पाटली पुत्र के मारगों को अवरुद कर। मैं मगत की सत्ता को अवहन नहीं दे रहा हूं।
31:07पाटली पुत्र के नागरी यन्याय देख रहे थी।
31:37अगर यही वर्तमान है मगत का तो मगत का भविश्या होगा।
31:43कब तक हम सहंगे धनन्द के त्याचार या त्याचार का प्रतिकार करने की हमें शक्ती नहीं रही।
31:51शक्ती नहीं रही।
31:53शक्ती की भासा समझ में आती है।
31:57शक्ती की भासा समझ में आती है।
32:09विश्णू विश्णू यह में मुर्ख बना रहा है।
32:11पहले तो चोर बना तो आप धननान बंक है।
32:13कहता है कि में पखले नहीं जाओंगा।
32:15वो ठीक कह रहा है।
32:16सत्ता का के चतुरा नहीं चल सकती।
32:18नहीं सच।
32:19� उस्थे तो बस शक्ती की भासा समझ में आती है।
32:22दुणा उसे।
32:38विश्णू विश्णू विश्णू विश्णू पणयान में तुमारे PC अमारे देने नाम ने सामने करे है।
32:49कर दो कर दो
33:19मेरे रज्य में पलने वाले कुकुर
33:49इसको भी, इसके में तुशतार क्मास पहुचादू
34:00कर दो
34:09कर दो कर दो कर दो
34:39कर दो
35:05वां जूदिए
35:35कर दो, प्यार दो कर दो, आ दो
36:05कि व यजग में अजब अग्टा बुन अजग
36:10कि अ अजग जगे
36:13कि अजग
36:15कि अ
36:17कि अम
36:19अजग
36:21कि अरॉब
36:23अजग
36:24कि अजग
36:25मैं आजग
36:27मैं आजग
36:28विश्नु विश्नु विश्नु तेरे पिता कहा है विश्नु मैं तुझसे पूछ रही हूं तेरे पिता कहा है विश्नु तु बोलता क्यों नहीं
36:58पागल हो गया? क्या? तो बोलता क्यों ने?
37:00अग्र तुझे जणक की पत्नी होने का घर्व है और मेरी मां होने का अभिमान—तो यह प्रशनका भीमत पुछना
37:08मा, यदि तुझे अपने पति के मरने का शुक मनाना है तो मना ले
37:14पर
37:16मैं आशु बहा कर अपने पीता के पुन्यों को नहीं दूँगा सुन तेरे पती को धुननन्द की सिपाई उठा ले गए
37:24मुझे तुछ पर विश्वास नहीं हो रहा है विश्णू सत्य बड़ा कथोर होता है मा पर तेरे पिता जीवित भी तो हो सकते हैं
37:36मैं तुझे सानु भुति के कोई शब्द नहीं कहूंगा कोई आश्वास्तन नहीं दूँगा तुझे इस सच्चाई के साथ ही जीना होगा कि तेरा पती जीवित नहीं है
37:44मैं विश्णू वे भला एक शिक्षप को क्यों मारेंगे वे उन्हें बंधी बनाकर कारागार में रखेंगे पर मारेंगे नहीं हाँ
37:56वे भला एक ब्रामण को क्यों मारेंगे
37:59मेरा मन कहता है तेरे पिता जिवित है
38:03तो भी ब्रह्मे जीना चाहती है
38:05उसी ब्रह्मे जिसमें तेरा पती जीता था
38:07कि मगत के लोग उसके साहिता को आएंगे
38:10अगर तेरा पती जिवित भी है
38:12तो उसे रोज थोड़ा थोड़ा मारा जाएगा
38:14इसलिए तोड़ दे अपने जुटे विश्वास को
38:16नहीं, मेरा मन कहता है
38:18तेरे पिता जिवित है
38:20तेरा पती कोई मामूली चोर या हत्यारा नहीं था
38:23वो सच के लिए लड़ने वाला था
38:25और सच के लिए लड़ने वालों को कारागार की सला के नहीं
38:27मृत्यों ही रोख सकती है
38:29तेरा पती, तेरा पती
38:31तुझे मुझे पर बिलकुल दया नहीं आती
38:33क्या वो तेरा पता नहीं था
38:35जो मरा है, वो तेरा पती था
38:38मेरा पता तो मेरे रदय में है
38:39मेरे रखता के कान कान में है
38:41मेरे दुमनियों में चानक ही तो बह रहा है
38:43वो मर ही नहीं सकता
38:45वो जी रहा है
38:46जीएगा मेरे साथ
38:47चानक के पुत्र चानक के साथ हमेशा जीएगा
38:51तो सुनो चानक्य
38:53मेरा पती भी नहीं मरा
38:56वो मेरे पुत्र चानक्य में जिवित है
38:59तो वचन देमा यदि पीता जिवित भी हो तो तू उनके प्राणों की बिग धननन से अत्वा किसी भी मागस से नहीं मागेगी
39:06वचन देती हूं चानक्य
39:10निति शास्त्रा मृतम धीमान
39:20अर्थ शास्त्र महोदधे
39:24समुत्रदे नमस्तस्मै विष्णु गुप्ताय वेध्रसे
39:32यस्यामिचारबच्रेन बच्रत ज्वलनते जस्रह
39:40पपातमूलतह श्रीमान
39:45सुपर्वानन्दपर्वतह
39:48निति शास्त्रा मृतम धीमान
39:53अर्थ शास्त्र महोदधे
39:57समुत्रदे नमस्तस्मै विष्णु गुप्ताय वेधसे
40:05यस्यामिचारबच्रेन बच्रत ज्वलनते जस्रह
40:13पपातमूलतह श्रीमान
40:17सुपर्वानन्दपर्वतह
40:21निति शास्त्रा मृतम धीमान
40:25सबस्त्रा मृतम धीमान
40:27पुर्वत्वानन के जड़ी ओपातम धीमान
40:31क्ष्वान यशपर्वान
40:33बच्रे वेधसे
40:35अर्वान
40:37निति शास्त्रा मृतमृत्पश्श्ण