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00:00हमारी 70 साथ पुरानी दुश्मनी उनके साथ मेरी और मेहमल की शादी से खतम हो सकती है
00:19ऐसे कैसे उसकी तो कल मंगनी हुई है
00:26मंगनी माइ फुट वुजब चाहिए टूट जाएगी
00:29हमं बात तो यह भी ठीक है
00:35यह दुश्मनी एक लड़का लड़की की महबत से शुरू ही थे
00:39महबत सक्सेसफल नहीं हुई और दुश्मनी सक्सेसफुल हो गयी
00:42दो प्यार करने वालों की जान गए і और 222 दुश्मनी आठ्वालों की
00:47इनकी दुश्मनी के वैसे शेहर के लोग बहुत डरते थे
00:50जब लड़की बार बार किसी का जिक्र करें कि मुझे फ़लान लड़के से नफरत हो गई
00:55कुंडा है एक नंबर का
00:57अच्छा तो ये कैसे पता चल गया अचानक?
01:01अचानक नहीं, पूरी बातचीत हुई है
01:03मैंने भी कह दिया
01:05गोली मार दे तेरी गोली से मर जाओंगा
01:07लेकिन इस मारिया के तानों से नहीं मरूंगा
01:10ये क्यूं कहना पड़ा?
01:12ये छोड़ी आप
01:12ये देखिए कि मैं टकरा गया हूँ उससे
01:15मरने से नहीं डरा मैं
01:17तो समझ ले न, उसी फलान लड़के से मुहबबत हो भी है उसको
01:21तो उस सारी कहानी में मैं कहा हूँ
01:22बहादरी जिसम के ताकत में नहीं, इरादे के ताकत में होती है
01:27आप बस नाम के मंटो हैं
01:30मंटो नहीं हैं
01:33येस
01:34मैं मंटो नहीं है
01:36कहाना में जोग कर रहा था, ऐसी ही.
01:40अब परिंदों और पैट्स के साथ कोई सीरियस बात तो नहीं होती ना?
01:44हम, उस दिन मेरी मॉमो को बिल्डी कहा.
01:49आज अपनी बतख को मिस्मारिया.
01:50मतलब हमारी बेस्ती करके, खुद की दिल की भड़ास निकालते है.
01:54वाउ.
01:55तुम बचकर कैसे आगए?
01:59एना हैरत की बात?
02:02You know what?
02:04वो अब मेरी अच्छी वाली पुपो बन गई है.
02:07अबबा के सामने ना कहना के वो तुमारी पुपो बन गई है.
02:10क्यो?
02:13क्राश थी अबबा का सुरह या बेगम.
02:16हुआ हुआ हुआ, अमनी को पता है?
02:18वो आगे तो जाएंगे अपनी मर्जी से.
02:21पिर जाते हैं मिलनुगा?
02:24अच्छा जाओ, पुपी साहिबा से मिल लो.
02:27उनका दावा है के मुझ से ज्यादा माँ है उसकी.
02:30कंबख जाएगा मेरे लाडलों के पास.
02:42और बैट कर बताएगा
02:45के पुपो गेता था तुमारी अम्माक.
02:48हजरत आइम.
03:01हुआ है.
03:13कर दो
03:43मेरा बच्छा हो जाओ
03:52मैने से समझाती है वो तुमा साथ कोई लड़ाई शक्रण नहीं करेगा परेशन मतो जाओ
04:13वीवर्ज महरीन एक चोटे से गाओ के तालीमी अपता खुद्दार और सुल्जी हुई लड़की थी जिसने शेहर आकर अपनी मेहनत से एक स्कुल्ट्री में टीचर की नवकरी हासिल की वो खौब तो देखती थी मगर हकीकत का सामना करना भी जानती थी
04:42अली एक बड़े बिजनिसमेन का बेटा जो अपने वालिद के कारुबार में मस्रूब था महरीन से उस वक्त मिला जब उसकी कवनी निगाओं में स्कूल सपोर्ट प्रोग्राम शुरू किया अली पहली नजर में ही महरीन की साथगी और वकार फर दिल हार बेटा
04:57मगर महरीन ने कभी अमीर लड़कों पर इतिमाद नहीं किया था उजने अली को सखती से नजर अंदास किया
05:05मगर अली बाहज नाया वो बार बार स्कूल आता बच्चों के ले किताबे लाता और हर मोका पर महरीन की इज़त से वाद करता
05:13अहिस्ता इस्ता महरीन का दिल भी नरम पढ़ने लगा मगर वो जानती थी
05:18कि दोनों की दुन्या अलग है और शायद यरिशा सिर्फ एक परेव हो
05:23एक दिन अली ने भाके दातर पर निकाह की पेशक्ष की
05:26तो महरीन ने सचाई से का मैं सिर्फ तब मानूंगी अगर तुम मेरे गाओ के लिए कुछ कर दिकाओ
05:33सिर्फ मेरे ले ने ही
05:35इन सब के लिए जिनके खुआब अदूरे है अली ने ये चिलन्ज कबोल किया
05:39और छे महीनों में गाओ में एक लाइबरीरी वाटर पल्ट्रेशन प्लांट और एक चोटा साकले ने कौल दिया
05:47महरीन ने जब ये सब देखा तो इसके हांके नम हो गई
05:50उसने पहले बार किसी अमीर शखस को बगएर किसे दिकावे के खलूस से कुछ करते देखा
05:57वो रिष्टा कबोल करने पर राजी हो गई
05:59मगर अब अली के वालदें ने इंकार कर दिया
06:02उनके लिए महरीन सिर्फ गाओ की लड़की थी
06:05जो उनके बेटे के लिए मुदून नहीं थी
06:07अली ने बगएर जजग कहा अगर वो मेरे साथ नहीं
06:11तो कुछ भी नहीं और अपना बिजनिस चोड़कर गाओ में रहने लगा
06:15एक साल गुजर गया
06:17महरीन के वालदीन भी अली की कुरबाने को देखकर हिरान रह गए
06:21आखिरकार अली के वालद को इसास हुआ
06:24कि उनका बेटा सिर्फ महबत नहीं इनसानियत का सबक दे रहा है
06:28वो गाओ आये सबके सामने बेटे के महबत को तसलीम किया
06:32और महरीन के इज़त से बहु बना लेकर गया
06:36और ये कहानी साबित कर गए कि महबत जब खलूस से हो
06:40तो कोई परक कोई देवार उसे रुख नहीं सकती
06:43वीवर्ज महरीन एक चोटे से गाओ के तालीमी अपता
06:48खुदार और सुल्जी हुई लड़की थी
06:50जिसने शहर आकर अपनी मेहनत से
06:53एक स्कूल्टी में टीचर की नवकरी हासिल की
06:56वो खुआप तो देखती थी
06:58मगर हकीकत का सामना करना भी जानती थी
07:01अली एक बड़े बिजनसमेन का बेटा
07:04जो अपने वालिद के कारुबार में मस्रूब था
07:06महरीन से उस वक मिला
07:08जब उसकी कवनी ने गाव में स्कूल सपोर्ट प्रोग्राम शुरू किया
07:12अली पहली नजर में ही महरीन की साथगी और वकार फर दिल हार बेटा
07:16मगर महरीन ने कभी अमीर लड़कों पर इतिमाद नहीं किया था
07:21उजने अली को सखती से नजर अंदास किया
07:23मगर अली बाजनाया वो बार बार स्कूल आता
07:27बच्चों के ले किताबे लाता
07:29और हर मोका पर महरीन की इज़त से वाद करता
07:32अहिस्ता इस्ता महरीन का दिल भी नरम पढ़ने लगा
07:35मगर वो जानती थी
07:37कि दोनों की दुनिया अलग है
07:39और शायद यरिशा सिर्फ एक परेब हो
07:41एक दिन अली ने भाकएदा तोर पर निकाह की पेशक्ष की
07:45तो महरीन ने सच्चाई से कहा
07:47मैं सिर्फ तब मानूंगी
07:49अगर तुम मेरे गाओ के लिए कुछ कर दिखाओ
07:51सिर्फ मेरे ले ने ही
07:54इन सब के लिए जिनके खुआब अदूरे है
07:56अली ने ये चिलन्ज कबोल किया
07:58और ची महीनों में गाओ में एक लाइबरिरी
08:01वाटर पल्ट्रेशन प्लांट और एक चोटा साकले ने कॉल दिया
08:05महरीन ने जब ये सब देखा
08:08तो इसके आंके नम हो भी
08:09उसने पहले बार किसी अमीर शख्स को
08:12बगएर किसे दिकावे के खलूस से कुछ करते देखा
08:16वो रिश्टा कबोल करने पर राजी हो गई
08:18मगर अब अली के वालदें ने इंकार कर दिया
08:21उनके लिए महरीन सिर्फ गाओ की लड़की थी
08:23जो उनके बेटे के लिए मौजू नहीं थी
08:26अली ने बगएर जज़क कहा
08:28अगर वो मेरे साथ नहीं तो कुछ भी नहीं
08:31और अपना बिजनिस चोड़कर गाओ में रहने लगा
08:34एक साल गुजर गया
08:36महरीन के वालदीन भी
08:37अली के कुरवाने को देखकर
08:39हिरान रह गए
08:40आखिरकार अली के वालद को इसास हुआ
08:43कि उनका बेटा सिर्फ महबत
08:44नहीं इनसानियत का सबक दे रहा है
08:46वो गावाए सबके सामने
08:49बेटे के महबत को तसलिम किया
08:50और महरीन के इज़त से
08:53बहु बना लेकर गया
08:55और ये कहानी साबित कर गी
08:57के महबत जब खलूस से हो
08:59तो कोई परक कोई देवार उसे रुक नहीं सकती
09:02वीवर्ज महरीन एक चोटे से
09:05गाव के तालीमी अपता
09:06खुदार और सुल्जी हुई लड़की थी
09:09जिसने शेहर आकर
09:11अपनी मेहनत से
09:12एक स्कूल्टी में टीचर की नवकरी हासल की
09:15वो खुआप तो देखती थी
09:16मगर हकीकत का सामना
09:19करना भी जानती थी
09:20अली एक बड़े बिजनसमेन का बेटा
09:23जो अपने वालिद के कारुबार में मस्रूब था
09:25महरीन से उस वक मिला
09:27जब उसकी कवनी ने गाव में स्कूल सपोर्ट प्रोग्राम शुरू किया
09:31अली पहली नजर में ही महरीन की साथगी
09:33और वकार फर दिल हार बेटा
09:35मगर महरीन ने
09:36कभी अमीर लड़कों पर इतिमाद नहीं किया था
09:39उसने अली को सखती से नजर अंदास किया
09:42मगर अली बाहज नाया
09:44वो बार बार स्कूल आता
09:46बच्चों के ले किताबे लाता
09:48और हर मोका पर महरीन की इज़त से बात करता
09:51अहिस्ता हिस्ता महरीन का दिल भी नरम पढ़ने लगा
09:54मगर वो जानती थी
09:56कि दोनों की दुनिया अलग है
09:58और शायद यरिशा सिर्फ एक परेब हो
10:00एक दिन अली ने बाकईदा तोर पर निकाह की पेशक्ष की
10:03तो महरीन ने सच्चाई से कहा
10:06मैं सिर्फ तब मानूंगी
10:08अगर तुम मेरे गाओं के लिए कुछ कर दिकाओ
10:10सिर्फ मेरे ले ने ही
10:12इन सब के लिए जिनके खुआब दूरे है
10:15अली ने ये चिलन्ज कबोल किया
10:17और चे महीनों में गाओं में एक लाइबरीरी
10:20वाटर पल्ट्रेशन प्लांट और एक चोटा साकले ने कॉल दिया
10:24महरेन ने जब ये सब देखा
10:26तो इसके आंके नम हो गी
10:28उसने पहले बार किसी अमीर शख्स को
10:30बगएर किसी दिकावे के खलूस से कुछ करते देखा
10:35वो रिश्टा कबोल करने पर राजी हो गई
10:37मगर अब अली के वालदें ने इंकार कर दिया
10:40उनके लिए महरेन सिर्फ गाओं की लड़की थी
10:42जो उनके बेटे के लिए मुदू नहीं थी
10:45अली ने बगएर जजग कहा
10:46अगर वो मेरे साथ नहीं तो कुछ भी नहीं
10:50और अपना बिजनिस चोड़कर गाओं में रहने लगा
10:52एक साल गुजर गया
10:55महरेन के वालदीन भी
10:56अली के कुरबाने को देखकर
10:58हिरान रह गए
10:59आखिरकार अली के वालद को एसास हुआ
11:01कि उनका बेटा सिर्फ महबत नहीं
11:03इनसानियत का सबक दे रहा है
11:05वो गावाए सबके सामने
11:07बेटे के महबत को तसलिम किया
11:09और महरेन के इज़त से
11:12बहु बना लेकर गया
11:14और ये कहानी साबित कर गई
11:16कि महबत जब खुलूस से हो
11:18तो कोई परक कोई देवार उसे रुख नहीं सकती
11:21वीवर्ज महरेन एक चोटे से
11:24गाव के तालीमी अपता
11:25खुदार और सुलिह हुई लड़की थी
11:28जिसने शेहर आकर
11:30अपनी मेहनत से
11:31एक सकूल्टी में टीचर की नवकरी हासिल की
11:34वो खुआप तो देखती थी
11:35मगर हकीकत का सामना
11:38करना भी जानती थी
11:39अली एक बड़े बिजनसमेन का बेटा
11:42जो अपने वालिद के कारुबार में मस्रूब था
11:44महरेन से उस वक मिला
11:46जब उसकी कवनी नगाव में सकूल सपोर्ट प्रोग्राम शुरू किया
11:49अली पहली नजर में ही महरेन की साथगी
11:52और वकार फर दिल हार बेटा
11:54मगर महरेन ने
11:55कभी अमीर लड़कों पर इतिमाद नहीं किया था
11:58उसने अली को सखती से नजर अन्दास किया
12:01मगर अली बाहज नाया
12:03वो बार बार स्कूल आता
12:05बच्चों के ले किताबे लाता
12:07और हर मोका पर महरेन की इज़त से वाद करता
12:10अहिस्ता हिस्ता महरेन का दिल भी नरम पढ़ने लगा
12:13मगर वो जानती थी
12:15कि दोनों की दुनिया अलग है
12:17और शायद यरिशा सिर्फ एक परेब हो
12:19एक दिन अली ने भाकेदा तोर पर निकाह की पेशक्ष की
12:22तो महरेन ने सच्चाई से कहा
12:25मैं सिर्फ तब मानूंगी
12:27अगर तुम मेरे गाओ के लिए कुछ कर दिखाओ
12:29सिर्फ मेरे ले ने ही
12:31इन सब के लिए जिनके खुआब अदूरे है
12:33अली ने ये चिलन्ज कबोल किया
12:36और ची महीनों में गाओ में एक लाइबरीरी
12:39वाटर पल्ट्रेशन प्लांट और एक चोटा साकले ने कॉल दिया
12:43महरेन ने जब ये सब देखा
12:45तो इसके आंके नम हो गी
12:47उसने पहले बार किसी अमीर शख्स को
12:49बगएर किसे दिकावे के खलूस से कुछ करते देखा
12:53वो रिश्टा कबोल करने पर राजी हो गई
12:56मगर अब अली के वालदेन ने इंकार कर दिया
12:59उनके ले महरेन सिर्फ गाओ के लड़की थी
13:01जिनके बेटे के लिए मौजू नहीं थी
13:04अली ने बगएर जजग कहा
13:05अगर वो मेरे साथ नहीं तो कुछ भी नहीं
13:09और अपना बिजनिस चोड़कर गाओ में रहने लगा
13:11एक साल गुजर गया
13:14महरेन के वालदीन भी
13:15अली के कुरवाने को देखकर
13:17हिरान रहे गए
13:18आखिरकार अली के वालद को एसास हुआ
13:20कि उनका बेटा सिर्फ महबत नहीं
13:22इनसानियत का सबक दे रहा है
13:24वो गावाए सब के सामने
13:26बेटे के महबत को तसलिम किया
13:28और महरेन के इज़त से
13:31बहु बना लेकर गया
13:33और ये कहानी साबित कर गी
13:35कि महबत जब खुलूस से हो
13:37तो कोई परक कोई देवार उसे रुख नहीं सकती
13:39विवर्ज महरेन एक चोटे से
13:43गाव के तालीमी अपता
13:44खुदार और सुल्जी हुई लड़की थी
13:47जिसने शेहर आकर
13:49अपनी मेहनत से
13:50एक स्कुल्ट्री में टीचर की नवकरी हासिल की
13:53वो खुआप तो देखती थी
13:54मगर हकीकत का सामना
13:57करना भी जानती थी
13:58अली एक बड़े बिजनसमेन का बेटा
14:00जो अपने वालिद के कारुबार में मस्रूब था
14:03महरेन से उस वक मिला
14:04जब उसकी कवनी नगाव में स्कूल सपोर्ट प्रोग्राम शुरू किया
14:08अली पहली नजर में ही महरेन की साथगी
14:11और वकार फर दिल हार बेटा
14:13मगर महरेन ने
14:14कभी अमीर लड़कों पर इतिमाद नहीं किया था
14:17उजने अली को सखती से नजर अंदास किया
14:20मगर अली बाहज नाया
14:22वो बार बार स्कूल आता
14:24बच्चों के ले किताबे लाता
14:26और हर मोका पर महरेन की इज़त से बात करता
14:28अहिस्ता इस्ता महरेन का दिल भी नरम पढ़ने लगा
14:32मगर वो जानती थी
14:33कि दोनों की दुनिया अलग है
14:36और शायद यरिशा सिर्फ एक परेब हो
14:38एक दिन अली ने भाकएदा तोर पर निकाह की पेशक्ष की
14:41तो महरेन ने सच्चाई से कहा
14:44मैं सिर्फ तब मानूंगी
14:45अगर तुम मेरे गाउ के लिए कुछ कर दिकाओ
14:48सिर्फ मेरे ले ने ही
14:50इन सब के लिए जिनके खुआब अदूरे है
14:52अली ने ये चिलन्ज कबोल किया
14:54और चे महीनों में गाउ में एक लाइबरिरी
14:58वाटर पल्ट्रेशन प्लांट और एक चोटा साकले ने कॉल दिया
15:02महरेन ने जब ये सब देखा
15:04तो इसके आंके नम हो गई
15:06उसने पहले बार किसी अमीर शख्स को
15:08बगएर किसी दिकावे के खलूस से कुछ करते देखा
15:12वो रिश्टा कबोल करने पर राजी हो गई
15:15मगर अब अली के वालदें ने इंकार कर दिया
15:18उनके लिए महरेन सिर्फ गाउ की लड़की थी
15:20जिनके बेटे के लिए मौजू नहीं थी
15:22अली ने बगएर जजग कहा
15:24अगर वो मेरे साथ नहीं तो कुछ भी नहीं
15:28और अपना बिजनिस चोड़कर गाउ में रहने लगा
15:30एक साल गुजर गया
15:32महरेन के वालदीन भी
15:34अली के कुरबाने को देखकर
15:36हिरान रहे गए
15:37आखिरकार अली के वालद को हिसास हुआ
15:39कि उनका बेटा सिर्फ महबत नहीं
15:41इनसानियत का सबक दे रहा है
15:43वो गावाए सब के सामने
15:45बेटे के महबत को तसलिम किया
15:47और महरेन के इज़त से
15:50बहु बना लेकर गया
15:52और ये कहानी साबित कर गए
15:54कि महबत जब खुलूस से हो
15:55तो कोई परक कोई देवार उसे रुक नहीं सकती
15:58वीवर्ज महरेन एक चोटे से गाव के तालीमी अपता
16:03खुदार और सुल्जी हुई लड़की थी
16:05जिसने शेहर आकर अपनी मेहनत से
16:09एक स्कूल्टी में टीचर की नवकरी हासिल की
16:12वो खुआप तो देखती थी
16:13मगर हकीकत का सामना करना भी जानती थी
16:17अली एक बड़े बिजनसमेन का बेटा
16:19जो अपने वालिद के कारुबार में मस्रूब था
16:22महरेन से उस वक मिला
16:23जब उसकी कवनी ने गावमी स्कूल सपोर्ट प्रोग्राम शूरू किया
16:27अली पहली नजर में ही महरेन की साथगी और वकार फर दिल हार बेटा
16:32मगर महरेन ने कभी अमीर लड़कों पर इतिमाद नहीं किया था
16:36उजने अली को सखती से नजर अदास किया
16:39मगर अली बाजनाया वो बार बार स्कूल आता
16:43बच्चों के ले किताबे लाता
16:44और हर मोका पर महरेन की इज़त से बात करता
16:47अहिस्ता इस्ता महरेन का दिल भी नरम पढ़ने लगा
16:51मगर वो जानती थी
16:53कि दोनों की दुनिया अलग है
16:55और शायद यरिशा सिर्फ एक परेब हो
16:57एक दिन अली ने भाकेदा तोर पर निकाह की पेशक्ष की
17:00तो महरेन ने सच्चाई से कहा
17:02मैं सिर्फ तब मानूंगी
17:04अगर तुम मेरे गाउ के लिए कुछ कर दिखाओ
17:07सिर्फ मेरे ले ने ही
17:09इन सब के लिए जिनके खुआब अदूरे है
17:11अली ने ये चिलन्ज कबोल किया
17:13और ची महीनों में गाउ में एक लाइबरिरी
17:16वाटर पल्ट्रेशन प्लांट और एक चोटा साकले ने कॉल दिया
17:20महरेन ने जब ये सब देखा
17:23तो इसके आंके नम हो भी
17:25उसने पहले बार किसी अमीर शख्स को
17:27बगएर किसी दिकावे के खलूस से कुछ करते देखा
17:31वो रिश्टा कबोल करने पर राजी हो गई
17:34मगर अब अली के वालदें ने इंकार कर दिया
17:36अनके लिए महरेन सिर्फ गाउ की लड़की थी
17:39जिनके बेटे के लिए मुदून नहीं थी
17:41अली ने बगएर जजग कहा
17:43अगर वो मेरे साथ नहीं तो कुछ भी नहीं
17:47और अपना बिजनिस चोड़कर गाउ में रहने लगा
17:49एक साल गुजर गया
17:51महरेन के वालदीन भी
17:53अली के कुरबाने को देखकर
17:55हिरान रहे गए
17:56आखिरकार अली के वालद को इसास हुआ
17:58कि उनका बेटा सिर्फ महबत नहीं
18:00इनसानियत का सबक दे रहा है
18:02वो गावाए सब के सामने
18:04बेटे के महबत को तसलिम किया
18:06और महरेन के इज़त से
18:09बहु बना लेकर गया
18:10और ये कहानी साबित कर गी
18:12के महबत जब खलूस से हो
18:14तो कोई परक कोई देवार उसे रुक नहीं सकती
18:17विवर्ज महरेन एक चोटे से गाव के तालीमी अपता
18:22खुदार और सुल्जी हुई लड़की थी
18:24जिसने शेहर आकर अपनी मेहनत से
18:27एक स्कूल्टी में टीचर की नवकरी हासल की
18:30वो खुआप तो देखती थी
18:32मगर हकीकत का सामना करना भी जानती थी
18:36अली एक बड़े बिजनसमेन का बेटा
18:38जो अपने वालिद के कारुबार में मस्रूब था
18:41महरेन से उस वक मिला
18:42जब उसकी कवनी ने गाव में स्कूल सपोर्ट प्रोग्राम शुरू किया
18:46अली पहली नजर में ही महरें की साथगी और वकार फर दिल हार बेटा
18:51मगर महरेन ने कभी अमीर लड़कों पर इतिमाद नहीं किया था
18:55उजने अली को सखती से नजर अंदास किया
18:58मगर अली बाहज नाया वो बार बार स्कूल आता
19:02बच्चों के ले किताबे लाता
19:03और हर मोका पर महरेन की इज़त से वाद करता
19:06आहिस्ता हिस्ता महरेन का दिल भी नरम पढ़ने लगा
19:10मगर वो जानती थी
19:11कि दोनों की दुनिया अलग है
19:13और शायद यरिशा सिर्फ एक परेब हो
19:16एक दिन अली ने बाकेदत और पर निकाह की पेश्किश की
19:19तो महरेन ने सच्चाई से कहा
19:21मैं सिर्फ तब मानूंगी
19:23अगर तुम मेरे गाओ के लिए कुछ कर दिखाओ
19:26सिर्फ मेरे ले ने ही
19:28इन सब के लिए जिनके खुआब अदूरे है
19:30अली ने ये चिलन्ज कबोल किया
19:32और ची महीनों में गाओ में एक लाइबरीरी
19:35वाटर पल्ट्रेशन प्लांट और एक चोटा साकले ने कॉल दिया
19:39महरेन ने जब ये सब देखा
19:42तो इसके हांके नम हो गी
19:44उसने पहले बार किसी अमीर शख्स को
19:46बगएर किसे दिकावे के खलूस से कुछ करते देखा
19:50वो रिश्टा कबोल करने पर राजी हो गई
19:52मगर अब अली के वालदें ने इंकार कर दिया
19:55उनके लिए महरेन सिर्फ गाओ की लड़की थी
19:58जो उनके बेटे के लिए मोजू नहीं थी
20:00अली ने बगएर जजग कहा
20:02अगर वो मेरे साथ नहीं तो कुछ भी नहीं
20:05और अपना बिजनिस चोड़कर गाओ में रहने लगा
20:08एक साल गुजर गया
20:10महरेन के वालदीन भी
20:12अली के कुरबाने को देखकर
20:13हिरान रह गए
20:15आखिरकार अली के वालद को इसास हुआ
20:17कि इनका बेटा सिर्फ महबत नहीं
20:19इनसानियत का सबक दे रहा है
20:21वो गावाए सबके सामने
20:23बेटे के महबत को तसलिम किया
20:25और महरेन के इज़त से
20:28बहु बना लेकर गया
20:29और ये कहानी साबित कर गई
20:31कि महबत जब खुलूस से हो
20:33तो कोई परक कोई देवार उसे रुख नहीं सकती
20:36वीवर्ज महरेन एक चोटे से
20:39गाव के तालीमी अपता
20:41खुदार और सुलिह हुई लड़की थी
20:43जिसने शेहर आकर
20:45अपनी मेहनत से
20:46एक स्कूल्टी में टीचर की नवकरी हासिल की
20:49वो खुआप तो देखती थी
20:51मगर हकीकत का सामना
20:53करना भी जानती थी
20:54अली एक बड़े बिजनसमेन का बेटा
20:57जो अपने वालिद के कारुबार में मस्रूब था
20:59महरेन से उस वक मिला
21:01जब उसकी कवनी नगाव में स्कूल सपोर्ट प्रोग्राम शूरू किया
21:05अली पहली नजर में ही महरेन की साथगी
21:07और वकार फर दिल हा और बेटा
21:09मगर महरेन ने
21:11कभी अमीर लड़कों पर इतिमाद नहीं किया था
21:14उसने अली को सखती से नजर अन्दास किया
21:17मगर अली बाहज नाया
21:19वो बार बार स्कूल आता
21:20बच्चों के ले किताबे लाता
21:22और हर मोका पर महरेन की इज़त से वाद करता
21:25अहिस्ता हिस्ता महरेन का दिल भी नरम पढ़ने लगा
21:28मगर वो जानती थी
21:30कि दोनों की दुनिया अलग है
21:32और शायद यरिशा सिर्फ एक परेब हो
21:35एक दिन अली ने बाकईदा तोर पर निकाह की पेशक्ष की
21:38तो महरेन ने सच्चाई से कहा
21:40मैं सिर्फ तब मानूंगी
21:42अगर तुम मेरे गाओं के लिए कुछ कर दिकाओ
21:45सिर्फ मेरे ले ने ही
21:47इन सब के लिए जिनके खुआब अदूरे है
21:49अली ने ये चिलन्ज कबोल किया
21:51और चे महीनों में गाओं में एक लाइबरिरी
21:54वाटर पल्ट्रेशन प्लांट और एक चोटा साकले ने कॉल दिया
21:58महरेन ने जब ये सब देका
22:01तो इसके आंके नम हो गी
22:02उसने पहले बार किसी अमीर शख्स को
22:05बगएर किसे दिकावे के खलूस से कुछ करते देगा
22:09वो रिश्टा कबोल करने पर राजी हो गई
22:11मगर अब अली के वालदेन ने इंकार कर दिया
22:14अनके ले महरेन सिर्फ गाओं के लड़की थी
22:17जो उनके बेटे के लिए मोजू नहीं थी
22:19अली ने बगएर जजग कहा
22:21अगर वो मेरे साथ नहीं तो कुछ भी नहीं
22:24और अपना बिजनिस चोड़कर गाओं में रहने लगा
22:27एक साल गुजर गया
22:29महरेन के वालदीन भी
22:30अली के कुरबाने को देखकर
22:32हिरान रहे गए
22:33आखिरकार अली के वालद को इसास हुआ
22:36कि उनका बेटा सिर्फ महबत नहीं
22:38इनसानियत का सबक दे रहा है
22:40वो गावाए सब के सामने
22:42बेटे के महबत को तसलिम किया
22:44और महरेन के इज़त से
22:46बहु बना लेकर गया
22:48और ये कहानी साबित कर गी
22:50कि महबत जब खुलूस से हो
22:52तो कोई परक कोई देवार उसे रुख नहीं सकती
22:55वीवर्ज महरेन एक चोटे से
22:58गाव के तालीमी अपता
23:00खुदार और सुल्जी हुई लड़की थी
23:02जिसने शेहर आकर
23:04अपनी मेहनत से
23:05एक स्कूल्टी में टीचर की नवकरी
23:07हासल की वो खुआप तो देखती थी
23:10मगर हकीकत का सामना
23:12करना भी जानती थी
23:13अली एक बड़े बिजनसमेन का बेटा
23:16जो अपने वालिद के कारुबार में
23:18मस्रूब था महरेन से उस वक मिला
23:20जब उसकी कवनी निगाव में स्कूल
23:22सपोर्ट प्रोग्राम शुरू किया
23:24अली पहली नजर में ही महरें की साथगी
23:26और वकार फर दिल हार बेटा
23:28मगर महरेन ने
23:30कभी अमीर लड़कों पर इतिमाद नहीं किया था
23:33उजने अली को सखती से
23:34नजर अंदास किया
23:35मगर अली बाहज नाया
23:38वो बार बार स्कूल आता
23:39बच्चों के ले किताबे लाता
23:41और हर मोका पर महरेन की इज़त से वाद करता
23:44आहिस्त आहिस्ते महरेन का दिल भी नरम पढ़ने लगा
23:47मगर वो जानती थी
23:49कि दोनों की दुनिया अलग है
24:04सिर्फ महरेन ने ही
24:05इन सब के लिए जिनके खुआब अदूरे है
24:08अली ने ये चिलन्ज कबोल किया
24:10और छे महीनों में गाउ में एक लाइबरीरी
24:13वाटर पल्ट्रेशन प्लांट और एक चोटा साक्ले ने कॉल दिया
24:17महरेन ने जब ये सब देका
24:20तो इसके हांके नम हो गई
24:21उसने पहले बार किसी अमीर शख्स को
24:24बगएर किसे दिकावे के खलूस से कुछ करते देगा
24:28वो रिश्टा कबोल करने पर राजी हो गई
24:30मगर अब अली के वालदें ने इंकार कर दिया
24:33उनके लिए महरेन सिर्फ गाउ की लड़की थी
24:50अली की कुर्बानियों को देखकर हिरान रहे गए
24:52आखिरकार अली के वालद को इसास हुआ
24:54कि उनका बेटा सिर्फ महबत नहीं इंसानियत का सबक दे रहा है
24:58वो गावाए सब के सामने बेटे के महबत को तसलिम किया
25:02और महरेन के इज़त से बहु बना लेकर गया
25:07और ये कहानी साबित कर गी के महबत जब खुलूस से हो
25:11तो कोई परक कोई देवार उसे रुक नहीं सकती
25:14वीवर्ज महरेन एक चोटे से गाव के तालीमी अपताग
25:19खुदार और सुल्जी हुई लड़की थी
25:21जिसने शेहर आकर अपनी मेहनत से
25:24एक स्कूल्टी में टीचर की नवकरी हासिल की
25:27वो खुआप तो देखती थी
25:28मगर हकीकत का सामना करना भी जानती थी
25:32अली एक बड़े बिजनसमेन का बेटा
25:35जो अपने वालिद के कारुबार में मस्रूब था
25:37महरेन से उस वक मिला
25:39जब उसकी कवनी ने गावमी स्कूल सपोर्ट प्रोग्राम शुरू किया
25:43अली पहली नजर में ही महरेन की साथगी
25:45और वकार फर दिल हार बेटा
25:47मगर महरेन ने कभी अमीर लड़कों पर इतिमाद नहीं किया था
25:51उजने अली को सखती से नजर अदास किया
25:54मगर अली बाहज नाया
25:56वो बार बार स्कूल आता
25:58बच्चों केले किताबे लाता
26:00और हर मोका पर महरेन की इज़त से वाद करता
26:03अहिस्ता इस्ता महरेन का दिल भी नरम पढ़ने लगा
26:06मगर वो जानती थी
26:07कि दोनों की दुनिया अलग है
26:10और शायद यरिशा सिर्फ एक परेब हो
26:12एक दिन अली ने भाकेदा तोर पर निकाह की पेशक्ष की
26:15तो महरेन ने सच्चाई से कहा
26:18मैं सिर्फ तब मानूंगी
26:20अगर तुम मेरे गाओ के लिए कुछ कर दिखाओ
26:22सिर्फ मेरे ले ने ही
26:24इन सब के लिए जिनके खुआब अदूरे है
26:27अली ने ये चिलन्ज कबोल किया
26:29और ची महीनों में गाओ में एक लाइबरिरी
26:32वाटर पल्ट्रेशन प्लांट और एक चोटा साकले ने कॉल दिया
26:36महरेन ने जब ये सब देखा
26:38तो इसके आंके नम हो गी
26:40उसने पहले बार किसी अमीर शख्स को
26:42बगएर किसे दिकावे के खलूस से कुछ करते देखा
26:47वो रिश्टा कबोल करने पर राजी हो गई
26:49मगर अब अली के वालदें ने इंकार कर दिया
26:52अनके लिए महरेन सिर्फ गाओ की लड़की थी
26:54जिनके बेटे के लिए मौजू नहीं थी
26:57अली ने बगएर जजग कहा
26:58अगर वो मेरे साथ नहीं तो कुछ भी नहीं
27:02और अपना बिजनिस चोड़कर गाओ में रहने लगा
27:04एक साल गुजर गया
27:07महरेन के वालदीन भी
27:08अली के कुरवाने को देखकर
27:10हिरान रहे गए
27:11आखिरकार अली के वालद के एसास हुआ
27:13कि उनका बेटा सिर्फ महबत नहीं
27:15इनसानियत का सबक दे रहा है
27:17वो गावाए सब के सामने
27:19बेटे के महबत को तसलिम किया
27:21और महरेन के इज़त से
27:24बहु बना लेकर गया
27:26और ये कहानी साबित कर गी
27:28के महबत जब खलूस से हो
27:30तो कोई परक कोई देवार उसे रुख नहीं सकती
27:33विवर्ज महरेन एक चोटे से गाव के तालीमी अपता
27:37खुदार और सुल्जी हुई लड़की थी
27:40जिसने शेहर आकर अपनी मेहनत से
27:43एक स्कूल्टी में टीचर की नवकरी हासल की
27:46वो खुआप तो देखती थी
27:47मगर हकीकत का सामना करना भी जानती थी
27:51अली एक बड़े बिजनसमेन का बेटा
27:54जो अपने वालिद के कारुबार में मस्रूब था
27:56महरेन से उस वक मिला
27:58जब उसकी कवनी ने गाव में स्कूल सपोर्ट प्रोग्राम शुरू किया
28:01अली पहली नजर में ही महरें की साथगी और वकार फर दिल हार बेटा
28:06मगर महरेन ने कभी अमीर लड़कों पर इतिमाद नहीं किया था
28:10उसने अली को सखती से नजर अंदास किया
28:13मगर अली बाहस नाया वो बार बार स्कूल आता
28:17बच्चों के ले किताबे लाता और हर मोका पर महरेन की इज़त से वाद करता
28:22अहिस्ता हिस्ता महरेन का दिल भी नरम पढ़ने लगा
28:25मगर वो जानती थी
28:27के दोनों की दुनिया अलग है और शायद यरिशा सिर्फ एक परेब हो
28:31एक दिन अली ने बाकेदत और पर निकाह की पेशक्ष की
28:34तो महरेन ने सच्चाई से कहा
28:37मैं सिर्फ तब मानूंगी अगर तुम मेरे गाओ के लिए कुछ कर दिकाओ
28:41सिर्फ मेरे ले ने ही
28:43इन सब के लिए जिनके खुआब अदूरे है अली ने ये चिलन्ज कबोल किया
28:47और शे महीनों में गाओ में एक लाइबरीरी वाटर पल्ट्रेशन प्लांट और एक चोटा साकले ने कॉल दिया
28:55महरेन ने जब ये सब देखा तो इसके आंके नम हो गी
28:59उसने पहले बार किसी अमीर शख्स को बगएर किसी दिकावे के खलूस से कुछ करते देखा
29:05वो रिश्टा कबोल करने पर राजी हो गई
29:08मगर अब अली के वालदें ने इंकार कर दिया
29:11उनके लिए महरेन सिर्फ एक गाव की लड़की थी
29:13जो उनके बेटे के लिए मोजून नहीं थी
29:16अली ने बगएर जजग कहा
29:17अगर वो मेरे साथ नहीं तो कुछ भी नहीं
29:21और अपना बिजनिस चोड़कर गाव में रहने लगा
29:23एक साल गुजर गया
29:26महरेन के वालदीन भी अली की कुर्बानियों को देखकर हिरान रहे गए
29:30आखिरकार अली के वालद को इसास हुआ
29:32कि उनका बेटा सिर्फ महबत नहीं इनसानियत का सबक दे रहा है
29:36वो गावाय सबके सामने बेटे के महबत को तसलिम किया
29:40और महरेन के इज़त से बहु बना लेकर गया
29:45और ये कहानी थाबित कर गई कि महबत जब खुलूस से हो तो कोई परक कोई देवार उसे रुक नहीं सकती
29:51वीवर्ज महरेन एक चोटे से गाव के तालीमी अपताग खुद्दार और सुल्जी हुई लड़की थी
29:59जिसने शेहर आकर अपनी मेहनत से एक स्कूल्टी में टीचर की नवकरी हासल की
30:05वो खुआप तो देखती थी मगर हकीकत का सामना करना भी जानती थी
30:10अली एक बड़े बिजनसमेन का बेटा जो अपने वालिद के कारुबार में मस्रूब था
30:15महरीन से उस वक मिला जब उसकी कवनी निगाव में स्कूल सपोर्ट प्रोग्राम शुरू किया
30:20अली पहली नजर में ही महरीन की साथगी और वकार फर दिल हार बेटा
30:25मगर महरीन ने कभी अमीर लड़कों पर इतिमाद नहीं किया था
30:29उजने अली को सखती से नजर अंदास किया
30:32मगर अली बाज नाया वो बार बार स्कूल आता
30:36बच्चों के ले किताबे लाता और हर मोका पर महरीन की इज़त से वाद करता
30:40आहिस्ता इस्ता महरीन का दिल भी नरम पढ़ने लगा
30:44मगर वो जानती थी
30:45कि दोनों की दुनिया अलग है और शायद यरिशा सिर्फ एक परेब हो
30:50एक दिन अली ने बाकईदा तोर पर निकाह की पेशक्ष की
30:53तो महरीन ने सच्चाई से का
30:56मैं सिर्फ तब मानूंगी अगर तुम मेरे गाओ के लिए कुछ कर दिकाओ
31:00सिर्फ मेरे लेने ही
31:02इन सब के लिए जिनके खुआब अदूरे है अली ने ये चिलन्ज कबोल किया
31:06और शे महीनों में गाओ में एक लाइबरिरी वाटर पल्ट्रेशन प्लांट और एक चोटा साकले ने कॉल दिया
31:14महरीन ने जब ये सब देखा तो इसके आंके नम हो गई
31:18उसने पहले बार किसी अमीर शख्स को बगएर किसी दिकावे के खलूस से कुछ करते देखा
31:24वो रिश्टा कबोल करने पर राजी हो गई
31:27मगर अब अली के वालदेन ने इंकार कर दिया
31:30उनके ले महरीन सिर्फ एक गाव की लड़की थी
31:32जोनके बेटे के लिए मुदून नहीं थी
31:34अली ने बगएर जजग कहा
31:36अगर वो मेरे साथ नहीं तो कुछ भी नहीं
31:40और अपना बिजनिस चोड़कर गाव में रहने लगा
31:42एक साल गुजर गया
31:44महरीन के वालदीन भी अली के कुर्वाने को देखकर हिरान रहे गए
31:49आखिरकार अली के वालद को एसास हुआ
31:51कि उनका बेटा सिर्फ महबत नहीं इनसानियत का सबग दे रहा है
31:55वो गावाय सबके सामने बेटे के महबत को तसलिम किया
31:59और महरीन के इज़त से बहु बना लेकर गया
32:04और ये कहानी थाबित कर गई कि महबत जब खुलूस से हो तो कोई परक कोई देवार उसे रुख नहीं सकती
32:10विवर्ज महरीन एक चोटे से गाओ के तालीमी अपता, खुद्दार और सुल्जी हुई लड़की थी
32:17जिसने शेहर आकर अपनी मेहनत से एक स्कूल्टी में टीचर की नवकरी हासल की
32:24वो खुआप तो देखती थी मगर हकीकत का सामना करना भी जानती थी
32:29अली एक बड़े बिजनसमेन का बेटा जो अपने वालिद के कारुबार में मस्रूब था
32:34महरीन से उस वक मिला जब उसकी कवनी निगाव में स्कूल सपोर्ट प्रोग्राम शुरू किया
32:39अली पहली नजर में ही महरीन की साथगी और वकार फर दिल हार बेटा
32:44मगर महरीन ने कभी अमीर लड़कों पर इतिमाद नहीं किया था
32:48उजने अली को सखती से नजर अंदास किया
32:51मगर अली बाहज नाया वो बार बार स्कूल आता
32:55बच्चों के ले किताबे लाता और हर मोका पर महरीन की इज़त से वाद करता
32:59अहिस्त अहिस्त महरीन का दिल भी नरम पढ़ने लगा
33:03मगर वो जानती थी
33:04कि दोनों की दुनिया अलग है और शायद यरिशा सिर्फ एक परेब हो
33:09एक दिन अली ने भाकेदत और पर निकाह की पेशक्ष की
33:12तो महरीन ने सच्चाई से कहा
33:14मैं सिर्फ तब मानूंगी अगर तुम मेरे गाओ के लिए कुछ कर दिकाओ
33:19सिर्फ मेरे ले ने ही
33:21इन सब के लिए जिनके खुआब अदूरे है अली ने ये चिलन्ज कबोल किया
33:25और शे महीनों में गाओ में एक लाइबरिरी वाटर पल्ट्रेशन प्लांट और एक चोटा साकले ने कॉल दिया
33:32महरीन ने जब ये सब देखा तो इसके आंके नम हो गी
33:37उसने पहले बार किसी अमीर शख्स को बगएर किसे दिकावे के खलूस से कुछ करते देखा
33:43वो रिश्टा कबोल करने पर राजी हो गई
33:46मगर अब अली के वालदें ने इंकार कर दिया
33:48उनके ले महरीन सिर्फ एक गाव की लड़की थी
33:51जिनके बेटे के लिए मौजू नहीं थी
33:53अली ने बगएर जजग कहा
33:55अगर वो मेरे साथ नहीं तो कुछ भी नहीं
33:59और अपना बिजनिस चौड़कर गाव में रहने लगा
34:01एक साल गुजर गया
34:03महरीन के वालदीन भी
34:05अली की कुर्बानियों को देखकर
34:07हिरान रह गए आखिरकार अली के वालद को इसास हुआ
34:10कि उनका बेटा सिर्फ महबत नहीं
34:12इंसानियत का सबक दे रहा है
34:14वो गावाए सब के सामने
34:16बेटे के महबत को तसलिम किया
34:18और महरीन के इजद से
34:21बहु बना लेकर गया
34:22और ये कहानी साबित कर गई
34:24कि महबत जब खुलूस से हो
34:26तो कोई परक कोई देवार उसे रुख नहीं सकती
34:29विवर्ज महरीन एक चोटे से
34:32गाव के तालीमी अपता
34:34खुदार और सुलिह हुई लड़की थी
34:36जिसने शेहर आकर
34:38अपनी मेहनत से एक स्कुल्ट्री में
34:41टीचर की नवकरी हासिल की
34:42वो खुब तो देखती थी
34:44मगर हकीकत का सामना
34:46करना भी जानती थी
34:48अली एक बड़े बिजनसमेन का बेटा
34:50जो अपने वालिद के कारुबार में मस्रूब था
34:53महरीन से उस वक्त मिला
34:54जब उसकी कवनी ने गावमी स्कूल
34:56सपोर्ट प्रोग्राम शुरू किया
34:58अली पहली नजर में ही महरीन की साथगी
35:01और वकार फर दिल हार बेटा
35:03मगर महरीन ने
35:04कभी अमीर लड़कों पर इतिमाद नहीं किया था
35:07उसने अली को सक्ती से नजर अंदास किया
35:10मगर अली बाज नाया
35:12वो बार बार स्कूल आता
35:14बच्चों के ले किताबे लाता
35:15और हर मोका पर महरीन की इज़त से वाद करता
35:18अहिस्ता इस्ता महरीन का दिल भी नरम पढ़ने लगा
35:21मगर वो जानती थी
35:23कि दोनों की दुनिया अलग है
35:25और शायद यरीशा सिर्फ एक परेब हो
35:28एक दिन अली ने बाकईदा तोर पर निकाह की पेशक्ष की
35:31तो महरीन ने सच्चाई से का
35:33मैं सिर्फ तब मानूंगी
35:35अगर तुम मेरे गाउ के लिए कुछ कर दिखाओ
35:38सिर्फ मेरे लेने ही
35:40इन सब के लिए जिनके खुआब अदूरे है
35:42अली ने ये चिलन्ज कबोल किया
35:44और ची महीनों में गाउ में एक लाइबरीरी
35:47वाटर पल्ट्रेशन प्लांट और एक चोटा साकले ने कॉल दिया
35:51महरीन ने जब ये सब देका
35:54तो इसके हांके नम हो गए
35:56उसने पहले बार किसी अमीर शख्स को
35:58बगएर किसे दिकावे के खलूस से कुछ करते देगा
36:02वो रिश्टा कबोल करने पर राजी हो गई
36:04मगर अब अली के वालदें ने इंकार कर दिया
36:07उनके लिए महरीन सिर्फ गाउ की लड़की ती
36:24अली की कुर्बानियों को देखकर हिरान रहे गए
36:27आखिरकार अली के वालद को इसास हुआ
36:29कि उनका बेटा सिर्फ महबत नहीं इंसानियत का सबक दे रहा है
36:33वो गावाए सब के सामने बेटे के महबत को तसलीम किया
36:37और महरीन के इज़त से बहु बना लेकर गया
36:41और ये कहानी साबित कर गई के महबत जब खलूस से हो
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36:48विवर्ज महरीन एक चोटे से गाव के तालीमी अपताग
36:53खुदार और सुल्जी हुई लड़की थी
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36:58एक स्कूल्टी में टीचर की नवकरी हासिल की
37:01वो खुआप तो देखती थी
37:03मगर हकीकत का सामना करना भी जानती थी
37:06अली एक बड़े बिजनसमेन का बेटा
37:09जो अपने वालिद के कारुबार में मस्रूब था
37:11महरीन से उस वक मिला
37:13जब उसकी कवनी ने गाव में स्कूल सपोर्ट प्रोग्राम शुरू किया
37:17अली पहली नजर में ही महरीन की साथगी और वकार फर दिल हार बेटा
37:21मगर महरीन ने कभी अमीर लड़कों पर इतिमाद नहीं किया था
37:26उजने अली को सखती से नजर अंदास किया
37:29मगर अली बाजनाया वो बार बार स्कूल आता
37:32बच्चों के ले किताबे लाता
37:34और हर मोका पर महरीन की इज़त से वाद करता
37:37अहिस्ता हिस्ता महरीन का दिल भी नरम पढ़ने लगा
37:40मगर वो जानती थी
37:42कि दोनों की दुनिया अलग है
37:44और शायद यरिशा सिर्फ एक परेब हो
37:47एक दिन अली ने भाकाईदा तोर पर निकाह की पेशक्ष की
37:50तो महरीन ने सच्चाई से कहा
37:52मैं सिर्फ तब मानूंगी
37:54अगर तुम मेरे गाउ के लिए कुछ कर दिकाओ
37:57सिर्फ मेरे ले ने ही
37:59इन सब के लिए जिनके खुआब अदूरे है
38:01अली ने ये चिलन्ज कबोल किया
38:03और ची महीनों में गाउ में एक लाइबरीरी
38:06वाटर पल्ट्रेशन प्लांट और एक चोटा साकले ने कॉल दिया
38:10महरेन ने जब ये सब देखा
38:13तो इसके आंके नम हो भी
38:14इसने पहले बार किसी अमीर शाहस
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