Skip to playerSkip to main content
  • 8 months ago

Category

📚
Learning
Transcript
00:00करीम, मैं एक परंपरावादी परिवार से हूँ
00:09मेरे परिवार में ये प्रथा रही है कि
00:18महीने के कुछ दिनों में महिलाएं
00:23पूजा घर और मंदिर तो क्या रसोई घरों में भी नहीं जाती है
00:31तो ऐसी महनिता हमेशा से चलती आई है
00:41लिकिन अप इछले कुछ सालों से मेरी पीड़ी की जो लड़कियां थी
00:53उन्होंने इस तरह की प्रथा को मानना बंद कर दिया था
01:00और इधर हाल में यह हुआ कि एक काफी कोई प्रसिद्ध गुरु जी हैं
01:14उनका वीडियो आया जिसमें उन्होंने अपनी तरफ से कोई बड़ा वैग्यानिक कारण दे करके समझाया कि क्यूं
01:26मासिक धर्म के दिनों में महिलाओं को पूजा घरों और मंत्रों गयरा में नहीं जाना चाहिए
01:36तो कह रही है वैसे तो वीडियो अंग्रेजी में था पर उसका हिंदी में भी आ गया अनुवाज जैसा कुछ तो मेरी माता जी ने देख लिया
01:51और माता जी ने जब से देखा है तब से जो प्रशनकरता देवी जी इनको परेशान करना शुरू कर दिया है
02:02तो माता जी का जो पुराना हट था घर की पुरानी परथा को ले करके वो फिरसे जागरत हो गया है
02:13तो माता जी अब इनको कह रही हैं कि δेखो हमारी जो पुरानी परथा थी परमपरा थी वो गलत नहीं थी
02:21अब तो इतने बड़े गुरु जी ने भी हमारी पुरानी प्रथा के पक्ष में बात कर दी है
02:31वो भी अंग्रेजी में
02:32तो
02:35कहरी हैं मेरे पास अब कोई बहुत अच्छे तरक नहीं बच रहे हैं
02:43मां को समझाने के लिए मां आएं मोसी होसी है
02:45क्या इस बात में कुछ है दम के महीने के कुछ दिनों में महिलाएं पवित्र हो जाती है
02:54और मंदिर नहीं जा सकती
02:55कोई दम नहीं है देवी जी इस तरह की किसी बात में
03:02शरीर थोड़े ही जाता है
03:08मंदिर शरीर का कल्यान करने थोड़े ही मंदिर जाते हो
03:12मन में दोश होते हैं न
03:19मन का दोश मिटाने मंदिर जाते हो
03:23शरीर का दोश मिटाने तो अस्पताल जाते हो
03:25शरीर में अगर कोई विकार है तो उसको ठीक करने कहां जाते हो
03:32अस्पताल जाते हो
03:33मंदिर तो मन का विकार करने ठीक जाते हो
03:36तो शरीर में क्या हो रहा है, क्या चल रहा है, क्या नहीं चल रहा है
03:43इसका मंदिर जाने न जाने से क्या संबंध भाई
03:47एकदम एक प्रतिशत भी कोई संबंध नहीं
03:53एकदम मुर्खता पूर्ण रूड़ी है यह
03:56कि चार दें पांच देन कहीं नहीं जाना है मंदिर नहीं जाना है रषोई नहीं जाना है क्या पता इसलिए मंती आई
04:12कि पांच देन तक खाना बनाने न उन्हीं मिलते है слож बढ़िया है meni
04:18पुरुशों ने बात तो बहुत मुर्खता पूर्ण करी है, लेकिन इसी बहाने पांच दिन तक खाना बनाने से निजात मेली, छोड़ो मान लिया बिलकुल सही बात है, पांच दिन तक हम गंदे हो जाते हैं, खाना नहीं बनाएंगे, तो महीं बनाओ खाना, खेर ये तो मज
04:48दिन तो आपको बड़ा ताज्यों और अफसोस होता है, आपको देखो आज खाल की जो पीडी है वो धर्म को मानती नहीं, तुम धर्म के नाम पर इस तरह की फिजूल बाते करोगे अपनी बेटियों से, उसके बाद ही हमीद करोगे कि तुम्हारी बेटिया धर्म को सम्मान
05:18कि पुरानी जो भी सड़ी गली प्रथाएं चल रही हो उनको कोई भी फालतू का कुतर्क दे करके सही सावित करना और अगर तुम कुतर्क दे रहे हो उसमें दो चार तुम साइंटिफिक किसम की बाते बोल दो तो ऐसा लगता है कि बिल्कुल एक दम सही सावित कर दिया कि हमा
05:48कर दो कुछ है उस से उंचा कुछ हो ही नहीं सकता है अरे जहां से यह परंपराय आ रहे यह वो लोग महा वैग्यानिक थे कि जो तुम्हारे देश क के असली वैघ्यानिक थे उनका तुमको किसी का नाम नहीं हो ड़ सै बात कर रहा हु हॉं कि अ는 तंब से पूछ हो आरिभत
06:18लेकिन प्राचीन भारत के नाम पर तुमको इस तरह है कि मुढताओं का पता है और तुम इनको आज साइंटिफिक सिद्ध करने पर तुले रहते हो और इसको करने के लिए तुमको कुछ सूडो साइंस वाले गुरुजी भी मिल जाते हैं। वो भी लगे हाँ बिल्कुल ठीक
06:48कौन से प्राचीन भारती श्रेष्ठदार्शनिक थे तुम्हें नहीं पता होगा। नाट्य शास्त्र में कौन थे पूछू तुम्हें नहीं पता होगा। साहित्यकार कौन थे तुम्हें कुछ नहीं पता। वैज्ञानिक कौन थे गणतग्य कौन थे तुम्हें कुछ नह
07:18मैं असली विज्ञान की बात कर रहा हूं, मैं उस विज्ञान की बात नहीं कर रहा हूं, जो कहता है कि जो पुराने भारतिये लोग थे, वो छू करके तांबे को सोना बना देते थे, आजकल तो इसी तरह की बात चल रही है भारतिये विज्ञानिक्ता के संबंध में, कि अरे
07:48कि ब front room, और दौक ली कि असषचन है, लोग जती है जिए जो हमेजन की अलेक्सा एक रखी एग कहीं हे
07:58कि अपनी oppositeust
08:01अग्सा फलान गान बजात, थो गाना बजा देती है, खिर को यह को सी कीज बजास भडए तो अवारी पहले से मजूध है
08:11वह तो जिसनी चीज को बोला याता था था कि अथा कामकरों कर लगा लगी ती
08:14यह तो अलेकसा सिरु गाने पजा सकती है, हमारे तेवता लोग तो पत्थर को बोलते थे, चलो उड़के तेखा पत्थर उड़ने लगता तो, तो देखिए यह सब चीजे अमेरिका वगारे को समझने में बहुत वक्त लगेगा, यह सब कुछ नहीं है, यह तो पुराना इं�
08:44यहरा मतलब था, भारतिय गणे तग्यों ने जो उपलबधियां हासिल करी है, आप पढ़ेंगे तो दातो तले उंगली तबालेंगे और मेरी बड़ी यह दुख रहता है मुझको कि आपको पुराने भारतिय गणे तग्यों के बारे में कुछ नहीं पता, आपको नहीं पत
09:14बेसिक लैंगविज में, बिगिनर्स अल परपस सिंबॉलिक इंस्ट्रक्शन कोड, बेसिक एकदम जो कॉंप्पुटर लैंगविज होती है, सुशुरुवात कियाती है, उसमें जो शुरुवाती हमें प्रोग्राम लिखने हो कहा जाता था, उसमें यह भी होता था, जेनर
09:44फाइबोनौकी ने कही हुई है, लेकिन हमें उसका नाम भी नहीं पता, वो सब चीजें बिलकुल काल के गाल में समाई जा रही हैं, हम उनको खोज के निकाल लेगी और उनको सम्मान देने की चेश्टा भी नहीं करते हैं, हम बल्कि इस तरह की बाते करते रहते हैं, वो अ�
10:14था हारत इसे जगमगा नहीं है, तुम पागल होगः तुम पागल होगः ओज तुमारे सही सही बताना विजयान में कितने नंबर आटे दसमी में, तुम पहल हुए थे न ऐसी बाते की महामूड ही कर सकता है।ुम केहे यह तो यह जो चीनी जहालें तुम लगाते हो अपन
10:44और इस्टरहें कोई बात नहीं क bearing भी थो तो नासा को जरूर भीच veins
10:49किसी देन नासा तुम पर मुकदमाना कर दें जो एँ तो देखना यहाँ पर किस किस करेगा यहाँ
10:54हर मुहले में यही ओ रहा है कुछु तुम्हें सिद्ध कर आए ढेका है।
11:00जो तुम्हारा वास्तवी खीरा उसका तुमको कुछ नहीं पता, बहुत के शेतर में भारत कितना आगे तुमको पता और ये बात कोई मैं कल्पना के तौर नहीं कह रहा हूं, अपोक्रिफल, सुनी-सुनाी बात नहीं जो मैं बोल रहा हूं, दस्तावेज हैं, गरंत हैं, मैं
11:30कि ये तो सहाब हमारी, you know, in the in the falani tradition, it is said that, मैं इस भाशा में बात नहीं कर रहा हूं, किताबे मोजूद हैं, उनको पढ़ो, और किताबे कहीं छुपी हुई नहीं हैं कि किसी खास गुरुजी के तैखाने में मिलेंगी, लाइब्रेरी में रख्खी हुई हैं, भारतिय वि�
12:00तुम जो हो हैं उड़ा रहे हो पूरी तरह से अवज्ञानिक हैं, इसमें क्या तुम्हें समझाओं क्या इस पश्टी करण दूं कि पीरियड्स में औरतें अपवित्र हो जाती हैं, क्या बताओं में बोल लेको ये मेरे पास बहुत कुछ नहीं है, एक प्रतिशद भी इस �
12:30तुम किसी भी जगह जाते हो, तो और जगह अगर तुम्हारे लिए मूलेवान है, तो इतना तो करते हो ना, कि शारेरिक साफ सफाई का ध्यान रख लेते हो, वो बात केंदरिये नहीं है, लेकिन करते हो फिर भी, तो उतना अबस कर लिया करो, उस चीज की एक हाईजीनिक �
13:00तुम किसी मिलने भी जाते हो, तुमारे जूतों में कीचर लगा हुआ है, तो तुम जूते बाहर दोर मैट पर उतार देते हो ना, अपने भी घर में आते हो, तो जूते तुम लेकर के रसोई में तो नहीं घुज जाते, तो यह तो बहुत सीधी साधी साफ सफाई की बात ह
13:30तुम्हारे देह की किसी गतिविधे से नहीं है, वो भी ऐसी गतिविधी जो तुमने मांगी नहीं, जो तुमने शुरू नहीं की, जिस पे किसी तरह का तुम्हारा कोई नियंत्रन नहीं होता, जिसमें तुम्हारी चेतना का किसी तरह का कोई अधिकार ही नहीं है, कोई किर्�
14:00तो तुम मंदिर मत जाओ, प्राकृतिक बात है भाई, मुझे क्या पता पचाएगे नहीं पचाएगे।
Comments

Recommended