00:00नमस्कार, आज हम बात करेंगे पंडित जवाहरलाल नहरू की, स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री और जिन्हें आधूलिक भारत का निर्माता भी कहा जाता है।
00:30नहरू जी का जनम 14 नवेंबर 1889 को हुआ था। पिता मोतिलाल नहरू वो तो बहुत मशूर वकील थे। और नहरू जी की अपनी पढ़ाई वो इंग्लेंड में हुई है।
00:46हैरो स्कूल, फिर केमरिज से साइन्स और फिर लंडन से कानून की डिग्री भी ली। लेकिन भारत आकर रास्ता बदल गया।
00:53हाँ और ये दिल्चस्ट बात है जैसा स्रोध बताता है कि इतनी अच्छी कानूनी तालीम के बावजूद भारत की उस वक्त की जो समाजिक राजनितिक हालत थी और उस पर गांधी जी का प्रभाव उसने उन्हें वकालत से खीच कर सीधे स्वतंतरता संग्राम में लाखड
01:23जब वो अध्यक्ष थे और पून स्वराज का नारा दिया वो तो एक तरह से आजादी की लड़ाई का टर्निंग पॉइंट बन गया था साम
01:30जी हा और यहाँ पे नहरू की जो विचारधारा है उसका वो खास मिश्रन समझना जरूरी है जिसका जिक्र किताब में भी है देखे आधुनिक्ता, समाजवाद और राष्ट्रवाद इन तीनों का मेल था वो वेग्यानिक सोच, धर्म निर्पेक्षिता और लोकतंत्रिक म�
02:00अपने निधन तक इस पत पर रहे ये वो दौर था जब नए भारत की नीव रखी जा रही थी किताब के मुताबिक उनके कारेकाल में ही बड़े पैमाने पर अध्योगी करण शुरू हुआ पंच वर्षे योजनाय बनी हाँ और बड़े-बड़े सरकारी कारखाने जिने हम
02:30विश्य के लिए एक पूरा धाचा तयार कर रहे थे बिलकुल और अगर विदेश निती की बात करें तो गुट निरपेक्ष आंदोलन यानि नैम की नीव रखना ये उनका एक बहुत बड़ा और सहसिक कदम था उस समय दुनिया दो पावर ब्लोक्स में बटी थी अमेरिका
03:00दिन 14 नवेंबर बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है।
03:30कि भारत के जो शुरुवाती लोकतांत्रिक संस्थान हैं, उनके निर्माण में नहरू का योगदान बहुत बड़ा है। उन्हें उनका शिल्पकार कहा जा सकता है।
04:00कि भारत के शुरुवाती दशकों को एक खास एक विशिष्ट दिशा दी। ये चर्चा हमें एक सोचने वाले सवाल पर छोड़ जाती है।
04:18सोचिए, अगर नहरू के ये आधुनित, धर्म निर्पेक्ष और समाजवादी विचारों का खास मिश्रण भारत के शुरुवाती सालों को आकार नव देता, तो आज हमारे देश की राह कितनी अलग हो सकती थी।
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