00:00Today we are looking at a kind of a journey that doesn't seem less than a filmy story, in truth.
00:06We are talking about a small village of Uttar Pradesh, and we are talking about the story of a small village in the world.
00:14Absolutely.
00:15Or there was no filmy connection, and not that typical hero's face.
00:19We are talking about Nawa Zuddhin Siddhiqi.
00:22His journey, journey, and the purpose of the future of his life.
00:28Absolutely.
00:28And our knowledge is that many of our lives in the world.
00:32Oh.
00:33Like a farmer's life, and a farmer's work, and a farmer's work, and a farmer's work, and a farmer's work.
00:38And then those people have been recognized by the family.
00:41This is not a career graph.
00:44My meaning is Bollywood's face and face-to-face.
00:48Let's see this journey of the future.
00:53Yes, of course.
00:54Of course.
00:55Of course.
00:56Oh.
00:57अपनागर जिले में 1974 में एक किसान परिवार में और फिर हरिदवार से केमिस्ट्री में ग्रैजुएशन ये थोड़ा चौकाता है न मतलब विज्ञान से अभिनय तक का रास्ता ये कैसे बना हाँ ये वांकी दिल्चस्प है बी एसी के बाद उन्होंने कुछ वक्त जैसा आ�
01:27जानकारी यही बताती है कि उन्होंने थेटर ग्रूप जॉइन किया लेकिन गुजारा चलाने के लिए मतलब पेट पालने के लिए चौकी दारी तक करनी पड़ी चौकी दारी वाकई
01:37सोचे जरा दिन में नाटक और रात में पहरेदारी ये जुनून नहीं तो और क्या है
01:42सही बात है
01:43और इसी जजबे ने उन्हें National School of Drama यानी NSD तक पहुचाया जहां से उन्होंने 1996 में ग्राजुएशन किया
01:50NSD से निकलना यकीनन एक बड़ी उपलबधी रही होगी लेकिन मुंबई
01:54मुंबई की डगर तो और भी मुश्किल रही होगी
01:57सुना है शुरुवाती साल बहुत कठीन थे
02:00बहुत ज़ादा
02:01मतलब 1999 में मुंबई आने के बाद सालों तक उन्हें बस चोटे मोटे लगबख नजरंदास किये जाने वाले किरदार ही मिले
02:10जैसे की
02:11जैसे सरफरोश हो गई, शूल, जंगल, यहां तक की मुन्ना भाई MBBS में भी बस एक जहलक जैसे
02:17हाँ हाँ, याद है
02:18वो दौर ऐसा था जब काम मिलना बहुत मुश्किल था
02:21और हैने के दिक्कत हैं, कई बार तो चार-पाच लोग एक छोटे से कमरे में गुजारा करते थे
02:25वो दौर मतलब किसी का भी होसला तोड़ सकता था
02:28लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी, तो वो कौन सा मोड था जब लगा के हाँ, अब गारी शायद पट्री पर आ रही है
02:36पहला संकेत शायद अनुरा कश्चप की ब्लैक फ्राइडे से मिला, जो 2007 में आई, उसमें उनके काम को थोड़ी पहचान मिली
02:42अच्छा, ब्लैक फ्राइडे
02:43हाँ, लेकिन असली उडान वो मिली 2010 के बाद, पीपली लाइव आई, फिर न्यॉयोर्च जैसे फिल्मों से थोड़ा और नोटिस हुए
02:50और फिर आया 2012, वो साल जिसने सब कुछ बदल दिया
02:552012?
02:56हाँ, पहले कहानी में वो इंटेलिजन्स आफिसर का किरदार, गंभीर सा
03:00हाँ, बहुत दमदार था वो
03:02और फिर, गैंग्स ओफ वासेपूर, फैजल खान
03:06फैजल खान, बस नाम ही काफी है
03:09इस एक किरदार ने जैसे हिंदी सिनमा में एक नए तरह के नायक की परिभाशा ही लिग दी
03:15वाकई? वो किरदार तो मतलब सब की जबान पर चड़ गया था
03:19क्या खास था उस परफॉर्मेंस में जिसने दर्शकों को इतना इतना कनेक्ट किया
03:24सिर्फ डायलॉग या कुछ और भी था
03:26मेरे खाल से ये सिर्फ डायलॉग नहीं थे
03:29वो उस किरदार का कच्चापन था
03:31उसकी अंदरूनी कश्मकश और नवाजुत दीन की वो जो बिलकुल सहेज जमीनी अदाकारी थी न
03:37हाँ, एकदम नैचरल
03:38हाँ, वो पारंपुरिक हीरो की तरह बनावटी नहीं लगे
03:41उनका गुस्सा, उनकी बेबसी, उनका वो अंदाज, सब कुछ बहुत असली लगा
03:46सही
03:47और इसने उन्हें रातो रात स्टार बना दिया
03:49वो भी बिना किसी स्टार वाले ताम जाम के
03:52ये दिखाता है कि दर्शक अच्छी कहाने और दमदार एक्टिंग के लिए कितने तयार थे
03:56गैंग्स ऑफ वासेपूर के बाद तो जैसे दर्वाजे ही खुल गए उनके ही है
04:00हाँ, बिलकुल
04:01तलाश, दे लंच बॉक्स, बदलापुर, रमन रागव 2.0
04:05और खास तोर पर मांजी दे माउंटेन मैन
04:08हर फिल्म में एक अलग ही नवाज नजर आए
04:11और सिर्फ बॉलिवूड ही क्यों, दे लंच बॉक्स को देखिए
04:13उसे एक कान फिल्म फेस्टिवल में जबरदस सराना मिली
04:16हाँ, कान में तो काफी चर्चा हुई थी
04:18कान में पहचान मिलना किसी भी भालती एक्टर या फिल्म के लिए एक बड़ी
04:22मतलब ग्लोबल पहचान होती है
04:23इसने अंतराश्टिय दरवाजे खोले
04:25अच्छा
04:26फिर नेट्फिक्स की सेक्रिट गेम्स आई, गनेश गायतुंडे का किरदार
04:29उसने तो उने ग्लोबल ओडियंस तक पहचा दिया
04:31हाँ, गायतुंडे तो आइकॉनिक बन गया
04:33बिल्कुल
04:33फिर लायन, मैग माफिया, सीरियस मेन जैसी अंतराश्टिय पर योजनाओं ने
04:38उनकी रेंज और उनकी जो एक्सेप्टन्स है उसको और बढ़ाया
04:41पुरसकारों की भी कमी नहीं रही
04:43तलाश, लंच बॉक्स, बदलापुर के लिए फिल्म फेर अवर्ड्स मिले
04:47हाँ, और मान जी के लिए राश्ट्रिय पुरसकार में स्पेशल मेंचन मी मिला
04:50पीपली लाइफ की टीम के साथ स्पेशल जूरी अवर्ड भी था
04:53यह सब उनकी प्रतिभा का प्रमाण है
04:54इस सिनिमा में हीरो के जो सेट पैटन्स थे उनको चुनौती दी
04:59सहीगा
04:59बिना किसी गॉड़फादर के, बिना वो सिक्स पैक अब्स या पारम पर एक लुक्स के
05:04सिर्फ अपने अभिने के दम पर उन्होंने एक ऐसी जगा बनाई
05:08जहां वो आज हर तरह के किरदार निबाते हैं
05:11चाहे वो विलेन हो, हीरो हो, कुमीडियन हो
05:14या एक आम आदमी
05:15पूरी सहजता से
05:16उन्होंने इसाबित किया कि टैलेंट किसी खाचे में बना नहीं होता
05:19जियां, वो किसी भी दाइरे से परे हैं
05:21जी जीवन में जरूर कुछ उतार चड़ाव की खबरें आती रहीं
05:24जैसा कि अकसर शोहरत के साथ होता भी है
05:26हाँ, मीडिया में चीज़ें आती रहती है
05:27लेकिन उनका फोकस हमेशा अभिनेय पर ही रहा ऐसा लगता है
05:30हाँ, वो हमेशा कहते भी है कि उनका पहला पेयर एक्टिंग ही है
05:34और ये समर्पन उनके काम में साफ जह लगता भी है
05:36तो नवाजुदीन सिद्धीकी की कहानी ये सिर्फ एक अभिनेता के संघर्ष और सफलता की कहानी नहीं है
05:42ये इस बात का भी सुबूत है कि अगर हुनर और लगन हो तो रास्ते बन ही जाते हैं
05:48चाहे शुरुवात कितनी भी मुश्किल क्यों न हो
05:51बिल्कुल
05:52एक चौकिदार से लेकर अंतराष्ट्री स्तर के सबसे वर्सटाइल अभिनेताओं में से एक बनना
05:58ये सफर यकीनन प्रेना देता है
06:00हाँ इसमें गोई शक नहीं
06:02और यहां एक सोचने वाले बात ये भी है
06:04कि नवाजुदीन जैसे एक्टर्स की सफलता और उनकी स्वीकरिती
06:08खासकर OTT प्लैटफॉर्म्स के आने के बाद
06:10क्या ये इशारा करती है कि भारतिये दर्शक अब स्टार्डम से ज़्यादा कहानी और परफॉर्मेंस को महत्वत देने लगे है
06:16इस सवाल पर विचार किया जा सकता है
06:19सही का सोचने वाली बात है
06:20अगर आप और महान लोगों की जीवनी सुनना चाहते हैं
06:32तो चैनल को सब्सक्राइब जरूर करें
06:34बेल आइकॉन दबाएं ताकि नए एपिसोड की नोटिफिकेशन मिले
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