00:00एक दफा का जिकर है एक छूटी सी प्री थी जिसका नाम चांदनी था। चांदनी हर रात अंधेरे से डरती थी। जब आस्मान पर तारे चमकने लगते वो अपनी मां से लिपट कर कहती। उमी मुझे अंधेरे से डर लगता है। क्या रात कभी खत नहीं होगी। एक रात ज
00:30।
01:00और यूम एक छूटी प्री ने अंधेरे को मात दे दी, उमीद और हिम्मत के साथ.
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