00:00एक दिन अली बाजार से एक रंग बरनगा तोता खरीद कर लाया। तोता बोलना जानता था मगर वो सिर्फ वही अलफास दोहराता था जो सुन लेता।
00:09शुरू में अली और इसके दोस्क बहुत फुश हुए मगर जल्द ही तोता कुछ बद्तमीज बातीं दोहराने लगा जो उसने इर्दगिर्द से सुनी थी।
00:17अली को शर्मिंदगी होने लगी। उसने तोते से प्यार से कहा तुम खुबसूरत हो अगर अच्छी बातीं सेखूगे तो सब तुम ही पसंद करेंगे।
00:25फिर अली ने हर रोज तोते को खुरान की आयत, दौएं और नेक बातीं सिखाना शुरू की।
00:31कुछ दिनों बाद तोता कहने लगा, अल्ला सबसे बड़ा है, सच बोलो, नमाज पर लो, अब जब भी महमान आते, तोता नेकी की बातीं करता और सब हैरान हो जाते।
00:41सबक, हमारी जबान से निकलने वाले अलफाज हमारे इफलाख का आईना होते ही।
00:46जैसे तोता सुनकर बोलता है, वैसे ही हम भी अपने माहौल से सीखते ही, इसलिए हमेशा नेक बातीं सुनो और बोलो.
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