00:00गंगापुर की गलियों में एक गरीब लड़के का अपमान हुआ
00:03एक अमीर आदमी का घमंड आसमान छू रहा था
00:06उसने सब के सामने किशन को गंदा कहा
00:09उसका मजाक उड़ाया
00:11लेकिन समय का पहिया घूमा और सब बदल गया
00:14क्या एक नन्हा लड़का उस घमंड को तोड़ पाएगा
00:17क्या होगा जब सच्चाई का परदा उठेगा
00:20वो राज क्या है जो गाउं की गलियों में छुपा है
00:24एक ऐसी कहानी जो आपके रोंग्टे खड़े कर देगी
00:27और दिल को छू लेगी
00:28तयार रहिए समय की सैर के लिए
00:31गंगापूर एक छोटा सा गाव था
00:35यहां खेतों में सुबह की धूप चमकती थी
00:38और हवा में फूलों की खुश्बू रहती थी
00:41इस गाव में रहता था किशन
00:43बाराए साल का एक गरीब लड़का
00:45उसकी मा सावित्री
00:47गाव वालों के घरों में बरतन माजती थी
00:49किशन के पिता नहीं थे
00:51इसलिए वो और उसकी माँ ही
00:53एक दूसरे का सहरा थे
00:55किशन हर सुबह गाव के बाजार में
00:57अखबार बेचता था
00:59उसके कपड़े पुराने और फटे हुए थे
01:01जूते नहीं थे
01:02लेकिन उसकी आँखों में बड़े सपने थे
01:05वो चाहता था कि एक दिन वो अपनी मा को
01:08बहतर जिंदगी देगा
01:09गंगापुर में एक बड़ा हवेली थी
01:12जहां रहते थे रमेश ठाकुर
01:14गाव के सबसे अमीर आत्मी
01:15उनके पास बड़े खेत
01:17चमचमाती गाड़ियां और कई नौकर थे
01:19लेकिन वो बहुत घमंडी थे
01:21उन्हें गरीबों से बात करना पसंद नहीं था
01:24एक दिन किशन बाजार में अखबार बेच रहा था
01:27उसने ठाकुर साब की गाड़ी देखी
01:29और उनके पास गया
01:30उसने कहा
01:31ताब अखबार लीजिये ताजा खबर है
01:34रमेश ठाकुर ने घुस्से में कहा
01:37हाट गंदे कपड़े वाले
01:38मेरी गाड़ी को हाथ मत लगा
01:40तुझ जैसे गरीबों से मैं अखबार नहीं लेता
01:42टिशन का दिल तूट गया
01:44बाजार में खड़े लोग हांसने लगे
01:47वो चुप चाप अपनी साइकल उठा कर घर चला गया
01:50घर पर उसकी माँ सावित्री ने उसे उदास देखा और पूछा
01:54वेटा क्या हुआ
01:56तू आज इतना चुप क्यों है
01:58किशन ने जवाब दिया
02:00माँ
02:01ठाकूर साब ने सब के सामने मेरा मजाक उड़ाया
02:03क्या मैं सच में इतना चोटा हूँ
02:05सावित्री ने उसे गले लगाया और कहा
02:08बेटा
02:09लोग दूसरों को चोटा समझते हैं
02:12क्योंकि उनके दिल चोटे हैं
02:14तू मेहनत कर समय तुझे जवाब देगा
02:16सावित्री की बातें किशन के दिल में उतर गई
02:18उसने ठान लिया
02:20कि वो अपनी मां का नाम रोशन करेगा
02:22वो हर सुबह स्कूल जाता
02:24और रात को मां के साथ बैठकर पढ़ाई करता
02:27उसकी मेहनत देखकर
02:29स्कूल का मास्टर भी हैरान था
02:31किशन हर कक्षा में अववल आता
02:33लेकिन ठाकर साब का घमंड कम नहीं हुआ
02:36एक बार गाव के मेले में किशन ने फिर से उनसे अखबार बेचने की कोशिश की
02:41उसने का
02:42साब अखबार लीजिए
02:44बहुत अच्छी खबर है
02:46ठाकर साब ने फिर उसे ठाटा
02:48अरे तुप फिर आ गया
02:50तुझ जैसे गंदे लड़के से मैं अखबार लू
02:52जा कहीं और बेच
02:54किशन की आखें नम हो गई
02:56लेकिन उसने अपने आंसु छुपाए
02:58उसने मन में ठाना
03:00कि वो एक दिन ऐसा मुकाम हासल करेगा
03:02कि ठाकर साब को उसका लूहा मानना पड़े
03:03वक्त बीथता गया
03:07किशन ने दिन रात मेहनत की
03:10स्कूल में वो हर साल टॉप करता
03:12मास्टर जी की मदद से
03:14उसे शेहर के एक अच्छे कॉलेज में स्कॉलर्शिप मिली
03:16उसने इंजिनियरिंग की पढ़ाई शुरू की
03:19रात को वो पार्ट टाइम काम करता
03:21ताकि अपनी मा को कुछ मदद भेज सकी
03:24उसकी महनत रंग लाई
03:25उसने बारहवी में जिले में पहला स्थान हासल किया
03:28फिर एक बड़े इंजिनियरिंग कॉलेज में दाखिल आ लिया
03:31इधर रमेश ठाकूर का समय बदल रहा था
03:35उनके गलत कारोबारी फैसलों और घमंड ने उनकी दौलत चीन ली
03:39उनके खेत बिग गए
03:41हवेली पर कर्ज चड़ गया
03:42उनके नौकर चाकर भी उन्हें छोड़ कर चले गए
03:45ठाकूर साहब अब अकेले रहते थे
03:47गाव में एक छोटी सी चाय की दुकान चलाते थे
03:50कई साल बाद किशन एक सफल इंजिनियर बन गया
03:53उसने शहर में एक स्टार्ट आप शुरू किया
03:56जो गावों में सस्ती बिजली पहुँचाने का काम करता था
04:00उसने अपनी मा को गाव से शहर बुला लिया
04:03सावित्री अब एक सुंदर घर में रहती थी
04:06जहां उन्हें कोई कमी नहीं थी
04:08किशन ने एक अच्छी नौकरी पाई
04:10पर अपने परिवार को हर सुख दिया
04:12एक दिन किशन गंगापुर लोटा
04:15गामवाले उसे देखकर हैरान थे
04:17वो अब साधारन कपड़ों में नहीं
04:20बलकि आत्मविश्वास से भरा हुआ था
04:22तब ही उसकी नजर ठाकुर साहब पर पड़ी
04:24वो अब बूढ़े और ठके हुए लग रहे थे
04:27अपनी छोटी सी चाय की दुकान पर बैठे थे
04:29किशन उनके पास गया और बोला
04:31ठाकुर साहब नमस्ते एक चाय दीजिए
04:35ठाकुर साहब ने किशन को देखा
04:37लेकिन उसे पहचान नहीं पाए
04:39उन्होंने कहा
04:41कौन हो तुम?
04:42कोई बड़े आदमी लगते हूँ?
04:44किशन ने जवाब दिया
04:45साहब मैं वहीं किशन हूँ
04:47जिसे आपने बाजार में सब के सामने बेजजित किया था
04:50वो अकबार वाला लड़का
04:52जिसे आपने गंदा कहा था
04:54ठाकुर साहब का चेहरा शर्म से लाल हो गया
04:57उनकी आँखें जुग गई
04:59उन्होंने कहा
05:00मुझे माफ कर दे बिटा
05:02मैंने तुझे बहुत दुख पहुचाया
05:04किशन ने शांत स्वर में जवाब दिया
05:06ठाकुर साहब
05:08मैंने आपकी बातों को दिल से नहीं लिया
05:10आपकी वेजज़ती ने मुझे मेहनत करने की ताकत दी
05:13आज मैं जो हूँ
05:14उसमें आपका भी हिस्सा है
05:16किशन ने ठाकुर साहब की मदद करने का फैसला किया
05:20उसने उनके कर्ज चुकाने में सहायता की
05:23और उनकी चाय की दुकान को फिर से शुरू करवाया
05:26ठाकुर साहब की आँखों में आशू थे
05:29लेकिन इस बार शर्मिंदगी की नहीं
05:32बलकि किशन की उदारता के लिए
05:33किशन की कहानी गंगापुर में मिसाल बन गई
05:37उसने न सिर्फ अपनी मा का सपना पूरा किया
05:40बलकि गाव के हर बच्चे को सिखाया कि
05:43महनत और हिम्मत से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है
05:47हर रात जब किशन अपनी मा के साथ खाने की मेज पर बैठता
05:52वो उस दिन को याद करता जब ठाकुर साहब ने उसका मजाक उड़ाया था
05:56लेकिन अब वो उस दर्द को मुस्कान में बदल चुका था
06:00सावित्री ने एक दिन कहा
06:02बेटा तूने सावित कर दिया कि समय का पहिया सब के लिए घूमता है
06:07किशन ने मुस्कुरा कर जवाब दिया
06:10मा ये सब तुम्हारे प्यार और आशीर बात की वजह से हुआ
06:14किशन की कहानी हमें सिखाती है कि समय सब का आता है
06:17आज जो उपर है वो कल नीचे हो सकता है
06:21और जो आज नीचे है वो कल आस्मान छू सकता है
06:25इसलिए कभी किसी का मजाक न उड़ाए
06:27क्योंकि समय का पहिया हमेशा घूमता रहता है
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