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शीर्षक: समय का खेल | एक गरीब लड़के की प्रेरणादायक कहानी | Hindi Motivational Story
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"समय का खेल - एक गरीब लड़के की कहानी, जिसने अपमान को हिम्मत में बदला और घमंडी अमीर को सबक सिखाया। यह भावनात्मक और प्रेरणादायक कहानी आपको समय के बदलाव और मेहनत की ताकत का एहसास कराएगी। 🕰️✨ देखिए, कैसे किशन ने अपने सपनों को हकीकत बनाया!
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00:00गंगापुर की गलियों में एक गरीब लड़के का अपमान हुआ
00:03एक अमीर आदमी का घमंड आसमान छू रहा था
00:06उसने सब के सामने किशन को गंदा कहा
00:09उसका मजाक उड़ाया
00:11लेकिन समय का पहिया घूमा और सब बदल गया
00:14क्या एक नन्हा लड़का उस घमंड को तोड़ पाएगा
00:17क्या होगा जब सच्चाई का परदा उठेगा
00:20वो राज क्या है जो गाउं की गलियों में छुपा है
00:24एक ऐसी कहानी जो आपके रोंग्टे खड़े कर देगी
00:27और दिल को छू लेगी
00:28तयार रहिए समय की सैर के लिए
00:31गंगापूर एक छोटा सा गाव था
00:35यहां खेतों में सुबह की धूप चमकती थी
00:38और हवा में फूलों की खुश्बू रहती थी
00:41इस गाव में रहता था किशन
00:43बाराए साल का एक गरीब लड़का
00:45उसकी मा सावित्री
00:47गाव वालों के घरों में बरतन माजती थी
00:49किशन के पिता नहीं थे
00:51इसलिए वो और उसकी माँ ही
00:53एक दूसरे का सहरा थे
00:55किशन हर सुबह गाव के बाजार में
00:57अखबार बेचता था
00:59उसके कपड़े पुराने और फटे हुए थे
01:01जूते नहीं थे
01:02लेकिन उसकी आँखों में बड़े सपने थे
01:05वो चाहता था कि एक दिन वो अपनी मा को
01:08बहतर जिंदगी देगा
01:09गंगापुर में एक बड़ा हवेली थी
01:12जहां रहते थे रमेश ठाकुर
01:14गाव के सबसे अमीर आत्मी
01:15उनके पास बड़े खेत
01:17चमचमाती गाड़ियां और कई नौकर थे
01:19लेकिन वो बहुत घमंडी थे
01:21उन्हें गरीबों से बात करना पसंद नहीं था
01:24एक दिन किशन बाजार में अखबार बेच रहा था
01:27उसने ठाकुर साब की गाड़ी देखी
01:29और उनके पास गया
01:30उसने कहा
01:31ताब अखबार लीजिये ताजा खबर है
01:34रमेश ठाकुर ने घुस्से में कहा
01:37हाट गंदे कपड़े वाले
01:38मेरी गाड़ी को हाथ मत लगा
01:40तुझ जैसे गरीबों से मैं अखबार नहीं लेता
01:42टिशन का दिल तूट गया
01:44बाजार में खड़े लोग हांसने लगे
01:47वो चुप चाप अपनी साइकल उठा कर घर चला गया
01:50घर पर उसकी माँ सावित्री ने उसे उदास देखा और पूछा
01:54वेटा क्या हुआ
01:56तू आज इतना चुप क्यों है
01:58किशन ने जवाब दिया
02:00माँ
02:01ठाकूर साब ने सब के सामने मेरा मजाक उड़ाया
02:03क्या मैं सच में इतना चोटा हूँ
02:05सावित्री ने उसे गले लगाया और कहा
02:08बेटा
02:09लोग दूसरों को चोटा समझते हैं
02:12क्योंकि उनके दिल चोटे हैं
02:14तू मेहनत कर समय तुझे जवाब देगा
02:16सावित्री की बातें किशन के दिल में उतर गई
02:18उसने ठान लिया
02:20कि वो अपनी मां का नाम रोशन करेगा
02:22वो हर सुबह स्कूल जाता
02:24और रात को मां के साथ बैठकर पढ़ाई करता
02:27उसकी मेहनत देखकर
02:29स्कूल का मास्टर भी हैरान था
02:31किशन हर कक्षा में अववल आता
02:33लेकिन ठाकर साब का घमंड कम नहीं हुआ
02:36एक बार गाव के मेले में किशन ने फिर से उनसे अखबार बेचने की कोशिश की
02:41उसने का
02:42साब अखबार लीजिए
02:44बहुत अच्छी खबर है
02:46ठाकर साब ने फिर उसे ठाटा
02:48अरे तुप फिर आ गया
02:50तुझ जैसे गंदे लड़के से मैं अखबार लू
02:52जा कहीं और बेच
02:54किशन की आखें नम हो गई
02:56लेकिन उसने अपने आंसु छुपाए
02:58उसने मन में ठाना
03:00कि वो एक दिन ऐसा मुकाम हासल करेगा
03:02कि ठाकर साब को उसका लूहा मानना पड़े
03:03वक्त बीथता गया
03:07किशन ने दिन रात मेहनत की
03:10स्कूल में वो हर साल टॉप करता
03:12मास्टर जी की मदद से
03:14उसे शेहर के एक अच्छे कॉलेज में स्कॉलर्शिप मिली
03:16उसने इंजिनियरिंग की पढ़ाई शुरू की
03:19रात को वो पार्ट टाइम काम करता
03:21ताकि अपनी मा को कुछ मदद भेज सकी
03:24उसकी महनत रंग लाई
03:25उसने बारहवी में जिले में पहला स्थान हासल किया
03:28फिर एक बड़े इंजिनियरिंग कॉलेज में दाखिल आ लिया
03:31इधर रमेश ठाकूर का समय बदल रहा था
03:35उनके गलत कारोबारी फैसलों और घमंड ने उनकी दौलत चीन ली
03:39उनके खेत बिग गए
03:41हवेली पर कर्ज चड़ गया
03:42उनके नौकर चाकर भी उन्हें छोड़ कर चले गए
03:45ठाकूर साहब अब अकेले रहते थे
03:47गाव में एक छोटी सी चाय की दुकान चलाते थे
03:50कई साल बाद किशन एक सफल इंजिनियर बन गया
03:53उसने शहर में एक स्टार्ट आप शुरू किया
03:56जो गावों में सस्ती बिजली पहुँचाने का काम करता था
04:00उसने अपनी मा को गाव से शहर बुला लिया
04:03सावित्री अब एक सुंदर घर में रहती थी
04:06जहां उन्हें कोई कमी नहीं थी
04:08किशन ने एक अच्छी नौकरी पाई
04:10पर अपने परिवार को हर सुख दिया
04:12एक दिन किशन गंगापुर लोटा
04:15गामवाले उसे देखकर हैरान थे
04:17वो अब साधारन कपड़ों में नहीं
04:20बलकि आत्मविश्वास से भरा हुआ था
04:22तब ही उसकी नजर ठाकुर साहब पर पड़ी
04:24वो अब बूढ़े और ठके हुए लग रहे थे
04:27अपनी छोटी सी चाय की दुकान पर बैठे थे
04:29किशन उनके पास गया और बोला
04:31ठाकुर साहब नमस्ते एक चाय दीजिए
04:35ठाकुर साहब ने किशन को देखा
04:37लेकिन उसे पहचान नहीं पाए
04:39उन्होंने कहा
04:41कौन हो तुम?
04:42कोई बड़े आदमी लगते हूँ?
04:44किशन ने जवाब दिया
04:45साहब मैं वहीं किशन हूँ
04:47जिसे आपने बाजार में सब के सामने बेजजित किया था
04:50वो अकबार वाला लड़का
04:52जिसे आपने गंदा कहा था
04:54ठाकुर साहब का चेहरा शर्म से लाल हो गया
04:57उनकी आँखें जुग गई
04:59उन्होंने कहा
05:00मुझे माफ कर दे बिटा
05:02मैंने तुझे बहुत दुख पहुचाया
05:04किशन ने शांत स्वर में जवाब दिया
05:06ठाकुर साहब
05:08मैंने आपकी बातों को दिल से नहीं लिया
05:10आपकी वेजज़ती ने मुझे मेहनत करने की ताकत दी
05:13आज मैं जो हूँ
05:14उसमें आपका भी हिस्सा है
05:16किशन ने ठाकुर साहब की मदद करने का फैसला किया
05:20उसने उनके कर्ज चुकाने में सहायता की
05:23और उनकी चाय की दुकान को फिर से शुरू करवाया
05:26ठाकुर साहब की आँखों में आशू थे
05:29लेकिन इस बार शर्मिंदगी की नहीं
05:32बलकि किशन की उदारता के लिए
05:33किशन की कहानी गंगापुर में मिसाल बन गई
05:37उसने न सिर्फ अपनी मा का सपना पूरा किया
05:40बलकि गाव के हर बच्चे को सिखाया कि
05:43महनत और हिम्मत से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है
05:47हर रात जब किशन अपनी मा के साथ खाने की मेज पर बैठता
05:52वो उस दिन को याद करता जब ठाकुर साहब ने उसका मजाक उड़ाया था
05:56लेकिन अब वो उस दर्द को मुस्कान में बदल चुका था
06:00सावित्री ने एक दिन कहा
06:02बेटा तूने सावित कर दिया कि समय का पहिया सब के लिए घूमता है
06:07किशन ने मुस्कुरा कर जवाब दिया
06:10मा ये सब तुम्हारे प्यार और आशीर बात की वजह से हुआ
06:14किशन की कहानी हमें सिखाती है कि समय सब का आता है
06:17आज जो उपर है वो कल नीचे हो सकता है
06:21और जो आज नीचे है वो कल आस्मान छू सकता है
06:25इसलिए कभी किसी का मजाक न उड़ाए
06:27क्योंकि समय का पहिया हमेशा घूमता रहता है
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