00:00विमल बहुत परेशान था, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वो इस परिस्थिती से कैसे निपटे, वो अपनी मां को बहुत चाहता था, किन्तु उसकी पत्नी और बच्चे उसकी मां से बहुत दूर भागते थे, क्योंकि उसकी मां की एक आंक नहीं थी, साथ ही उसकी कमर भी
00:30विमल के बेटे अखिल ने बढ़े, बेरुखी से का, पर बेटा, मैं तो यहां बहुत दूर बैठी हूँ, विमल की मां ने बहुत प्यार से का, नहीं, आप उनके सामने मत रहो, वो मुझे चड़ाते हैं, अखिल ने जोर से डाटते हुए का, क्या हुआ अखिल क्यों चिल
01:00मा जी, आप उपर चली जाओ, क्यों हम लोगों को लजवाती हो? कामनी ने बेटे का पक्ष लेते हुए का, बेचारी सरस्वती चुप चाप उठकर जीने के सहारे उपर जाने लगी, कमर जुकी होने के कारण उने उपर चड़ने में बहुत परिशानी हो रही थी, किन्तु
01:30किन्तु वो असहाय था, अगर वो कुछ कहता है तो पत्नी और बच्चे उसका विरोध करने लगते हैं, दूसरे उनके तरक भी सही लगते हैं, चूंकि वो एक प्रशासने कधिकारी था, उसका सामाजिक स्तर बहुत उंचा था, उसकी ससुराल भी एक उच्च घराने में थ
02:00माजी अपनी देशी धुनधारा में उनसे मिली, मुझे बहुत शर्मा रही थी बताते हुए, कि ये मेरी सास है, मैंने कह दिया कि दूर की रिष्टेदार है, इलाज कराने आई है, विमल को रोना आ गया, किन्तु फिर भी वह चुप रहा, उसे समझ में नहीं आ रहा था, क
02:30बहुत उदास रहने लगा, एक तरफ परिवार और सामाजिक स्तर पर जीने की प्रतिवधता थी, तो दूसरी ओर माँ, आखिर माँ से अपने बेटे की ये हालत नहीं देखी गई, एक दिन उसने अपने बेटे से कहा, विमल, बहुत दिन हो गए है, मैं अपने गाम जाना �
03:00सब गाम वाले तो हैं, और वो तुम्हारे मामा जी तो उसी गाम में रहते हैं, और फिर हम सारी विवस्थाएं कराएंगे न, कामनी को तो जैसे मन की मुराद मिल गई हो, विमल की मा बोली, हाँ बेटा, बहु सही कह रही है, सरस्वती ने लंबी सांस लेते हुए कहा, विम
03:30पर आते वक्त उसे रोना आ रहा था, तथा अपनी बेबसी पर घुसा भी आ रहा था, किंतु परिवार, पत्नी और समाज ने उसके इन मनोभावों को दबा दिया, और वो सुकून सा महसूस करने लगा, कुछ दिनों के बाद उसके चाचा, जो अमेरिका में रहते थे, आन
04:00से विमल के डौन चाचा आ रहे थे, डॉक्टर रमेश ने जैसे ही घर में कदम रखा, सबने मिलकर बहुत उत्साह से उनका स्वागत किया, क्यों विमल भावी नहीं दिख रही, कहा है, डॉक्टर रमेश ने उत्सुकता पूर्वक पुछा, जी वो गाव में रहती है, यह
04:30लोग गाव के घर में पहुंचे, देखा कि सरस्वती को बहुत तेज बुखार है, और वो पलंग पर असहाय पड़्दी है, डॉक्टर रमेश तौर्दकर सरस्वती के पास गए, उनके पैर छुकर रोने लगे, सरस्वती की यह हालत उनकी कल्पना से परे थी, वह बेटा �
05:00अपने बेटे का बचाव किया, मुझे सब पता चल गया भावी, आप चुप रहो, क्यों बहु, तुम्हें अपनी सास की कुरूपता पसंद नहीं है, समाज में तुम्हें नीचा देखना पड़र्शता है, है ना, डॉक्टर रमेश ने कामनी की और व्यंगे से देखा, का
05:30तब चट से नीचे गिरने के कारण, तुमारी एक आँख फूट गई थी, और तुमारी रीड की हड़ी में भी समस्या थी, तब तुमारी इस कुरूप मा ने अपनी एक आँख और अपना बोन मेरो तुम्हें देखकर इतना सुन्दर स्वरूप दिया था, कामनी बेटा, �
06:00अब भावी, आप मेरे साथ अमेरिका जाएंगी, यहाँ इन स्वार्थी लोगों के बीच नहीं रहेंगी, रमेश ने सरस्वती से कहा, विमल को तो काटो तो खून नहीं था, रमेश जो उसके चाचा थे, उन्होंने जो राज बताया, उसके बाद तो विमल को यही लग र
06:30अब सिर्फ आप ही उस घर में मेरे साथ रहेंगी, और कोई नहीं, विमल ने आगनेय द्रिश्टि से अपनी पत्नी और बच्चों को देखा, कामनी को भी बहुत पश्चाताप हो रहा था, किन्तु उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी कि वो सरस्वती से आँख मिलाए, सरस्वत
07:00पढ़िशते हुए अपने व्यवहार पर माफी मांगी, और मा के हिर्दय ने सब को माफ कर दिया, तो दोस्तों, ऐसी होती है ना, इसलिए हमें कभी अपनी मा का अपमान नहीं करना चाहिए, हमेशा उसको समझना चाहिए, और जब उसकी बुढ़ापा है, तो उसका सम्मान
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