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Farhat Ishtiaq is a renowned Pakistani writer, author, and screenwriter known for her captivating storytelling and thought-provoking themes. Her writing style is characterized by:

1. Emotional Depth: She skillfully explores complex emotions, creating relatable characters that resonate with readers.
2. Social Commentary: Her stories often address societal issues, sparking meaningful conversations.
3. Strong Female Protagonists: Empowered women are central to her narratives, challenging traditional gender roles.
4. Intricate Plotting: Engaging storylines with unexpected twists keep audiences engaged.
5. Realistic Dialogue: Authentic conversations add authenticity to her stories.
6. Cultural Sensitivity: Her work reflects Pakistan's cultural nuances, making her stories uniquely local and globally relevant.

Farhat Ishtiaq's writing has captivated audiences in novels, TV dramas, and audio series like "Jo Bache Hain Sang Samait Lo." What's your favorite work by Farhat Ishtiaq?

Awaz Kahani Series:
Drama: Meem Se Mohabbat
Episode: 8

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Jo Bache hain Sang Samait Lo Novel | Season 1
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Taqreeb Kuch to Behr e Mulaqat Chahiye
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Mosam-E-Gul | Audio Series
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Transcript
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01:59. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . .
02:29करวाने का बोल दिया है
02:31वो बहुत तकलीफ में थी
02:32तो आप जाएं ना, इतना काम तो
02:34मैं भी कर सकती हूँ
02:35रोशी दोस्ताना लहजे में बोली थी
02:38लेकिन मिसायत
02:39नवीन रोशी पर काम छोड़ कर जाने से
02:41हिचकेचा रही थी
02:42अरे ये तो कोई मुश्किल काम ही नहीं है
02:45सिर्फ मिटिंग ही तो अरेंज करवानी है
02:46फोन कॉल्स ही तो करनी होंगी
02:48बस आप मुझे डिटेल्स बता दें
02:50बाकिस सब मैं हैंडल कर लूँगी
02:52रोशी भरपूर कान्फिडंस के साथ बोली थी
02:55नवीन को क्योंके पेन बहुत था
02:56इसलिए इसने रोशी की ओफर कुबूल कर ली थी
02:59तलाब ने आफिस डेस्क पर बैठा
03:01मसरूफ सा कुछ जरूरी काम कर रहा था
03:03जब गद्रे परिशान सा मैनेजर
03:05फरहान दर्वाजे पर दस्तक दे कर
03:07अंदर आया था
03:08सर इसके अंदाज में बॉकला हट थी
03:11बिलगरामी साहब के साथ मेरी मीटिंग थी
03:13क्या वो आ गए है
03:14अपने काम पर तवज्जा मर्कूज रखते
03:17इसने सरसरी से अंदाज में पूछा था
03:19सर बिलगरामी साहब तो आ गए है
03:21मगर शानवास साहब भी आ चुके हैं
03:23वो हिचकिचाते हुए बोला
03:25वाट?
03:26इनके साथ तो मैंने कल मिटिंग शेडूल करवाने को कहा था
03:29सर मुझे लगता है कोई मिस अंडस्टैंडिंग हो गई है
03:32मिटिंग शेडूल करवाने में
03:33क्योंकि अभी वो दोनों मिटिंग के लिए आए बैठे हैं
03:36मैनेजर फरहान बॉस की नराज़गी से डर कर
03:39हिचकिचा कर बोल रहा था
03:41वाट रबिश
03:41मैंने मिस नवीन को क्लियर लफ़ों में बताया था
03:44मिटिंग कब रखवानी है
03:45तला शदीर गुसे में आ गया था
03:47सर मैं भी इस चीज़ को लेकर परिशान हूँ
03:50वो दोनों तो बिजनस ट्राइवल्स हैं
03:52ये तो बहुत गरबर हो गई है
03:54तला गुसे में गहरा सांस लेता हुआ कुरसी से उठा था
03:57जो भी मिस हैप हुआ था
03:59और जिसने भी किया था वो इससे बाद में निम्टेगा
04:02अभी इन दो बिल्डर्स से मिले
04:03जो एक दूसरे के सख दुश्मन थे
04:05मैनेजर फरहान भी परिशान सा खड़ा था
04:08कि बहुत इस सूरते हाल को सभालेंगे कैसे
04:10तला कॉन्फरंस रूम में संजीदा अंदाज में दाकिल हुआ था
04:14इसके साथ साथ मैनेजर फरहान भी था
04:16दोनों बिल्डर्स हसरात कॉन्फरंस रूम की
04:19बड़ी सी मेस पर आमने सामने बैठे थे
04:21और एक दूसरे को शदीद नागवारी से देख रहे थे
04:24तुम यहां क्या कर रहे हो शानवास नफरस से बोला
04:27मैं एहमद एसोसियेट के साथ हमेशा से काम कर रहा हूँ
04:31मेरी बिजनस डील खराब करवाने के लिए तुम यहां भी आ गए हो ना
04:34बिल्गरामी से अपनी एहमियत जता कर हकारस से देख रहा था
04:38खुद नहीं आया हूँ तल्हा साब ने मुझे खुद अपरोच करके मीटिंग के लिए बुलाया है
04:42शानवास तल्क लेजे में बोला था
04:45इस बात पर बिल्गरामी के चेहरे पर सक नास, नराजगी और नागवारी फैल गई थी
04:50तल्हा ने अंदर आते हुए ये गुफटगू सुन ली थी
04:53तल्हा अपने कांफरंस रूम को किसी अखाड़े में बदलता देखने से बचाने के लिए खुद आगे बढ़ा था
04:59मैनेजर फरहान भी सूरते हाल को परिशान होके देख रहा था
05:03कभी बॉस को कभी दो कारोबारी दुश्मनों को
05:06चेहरे पर मस्नूई मस्कुरार टलाता
05:08इसे पता था इस सूरते हाल मुकमल तोर पर खराब हो चुकी थी
05:12इसने दोनों से हाथ मिलाया था
05:14और कांफरंस हैड़ वाली कुर्सी पर बैड़ गया था
05:16बिल्गरामी और शानवास दोनों दल्हा को नागवारी से देख रहे थे
05:20असलाम अलेकम बिल्गरामी साहब
05:22कैसे हैं शानवास साब
05:24वालेकम असलाम दल्हा साब
05:26मुझे अन्दाजा नहीं था कि आज आज आपने
05:28meeting के लिए मेरे साथ साथ मेरे
05:29competitor को भी बुला रखा है
05:31बिलगरामी साथ तलहा से नारास थे
05:34मुझे लगता है कोई misunderstanding
05:36हो गई है, meeting schedule कराते
05:38वक्त, I apologize for the
05:40mishap, तलहा गला
05:42खंकारते हुए बोला
05:43आपको मैं बड़ा उसूलों वाला
05:45इनसान समझता था तलहा साथ
05:47इसका मतलब है आप गेम बना रहे थे
05:49मेरे और मेरी competitor company
05:52दोनों के साथ राप्ते में थे
05:53जहां से धील अच्छी बनती प्रोजेक्ट
05:55इससे दे देते, बिलगरामी
05:57साफ गो लहजे में तलहा से
05:59नारासगी का इसहार कर रहा था
06:01ऐसी बात नहीं है बिलगरामी साथ
06:03कोई गलत फहमी
06:04तलहा की सिच्चुएशन बहुत आक्वर्ड हो गई थी
06:07कोई गलत फहमी नहीं हुई
06:08सब सामने है आप इस बेमान आदमी
06:11शानवास के साथ प्रोजेक्ट करना चाहते है
06:13मुझे साइड आप्शन के तरपे
06:15मिटिंग के लिए बिलगरामी ने तलहा की बात काटी
06:18तुमने बेमान किसे कहा है
06:20वो दोनों आपस में शुरू हो गए थे
06:22एक दूसरे को नफरस से घूर रहे थे
06:24तलहा अपना सर पकड़े बैठा हुआ था
06:27मैनेजर फरहान दोनों को ठंडा करने की कोशिश कर रहा था
06:30प्लीज आप दोनों बात तो सुने
06:32लेकिन वो दोनों पार्टियां बात सुनने के मूड में नहीं थी
06:35रोशी तलहा के रूम में इसकी मेस के सामने खड़ी थी
06:38तलहा घुसे में भरा हुआ अपनी आफिस टेबल पर बैठा था
06:42मैनेजर फरहान तलहा के सामने वाली कुर्सी पर बैठा था
06:45इसे संजीदा अंदाज में रोशी से पूछा था
06:48रोशी को पता था वो क्या करवर कर चुकी थी
06:50इसलिए बहुत मासूम शकल बना के खड़ी हुई थी
06:53मिसायत आपसे मिंटिंग शेडूल कराने का किस ने कहा था
06:56मैनेजर फरहान बोला
06:58सर आइ थिंग मुझसे छोटी सी भूल हो गई थी
07:01मैंने शानवास साहब को भी आज ही का बोल दिया था
07:04छोटी सी भूल?
07:06मिसायत ये आपके खाला का घर नहीं है
07:08ना कोई पिकनिक स्पोर्ट है जहां आप हला गुला करने आ जाती है
07:11ये एक इंजिनरिंग कंसल्टनसी है
07:13और यहां सीरियस बिसनस होता है
07:15तलह से मजीद अपना गुसा बरदाश नहीं हो रहा था
07:19रोशी थोड़ी खिस्यानी सी हुई थी
07:21इसको तलह का डांटना बुरा तो लग रहा था
07:23लेकिन ये भी पता था कि गल्ती उसकी थी
07:26इसलिए खामोश खड़ी थी
07:27आपकी इस गल्ती की वज़ज़ से आपको पता है
07:29हमारे दोनों बिल्डर्स के साथ
07:31तालुकात खराब हो गए है
07:32फरहान रोशी को इसकी गल्ती की संगीनी का एहसास दिला रहे थे
07:36रोशी इससे ज़्यादा खामोश रहके डांट डपट नहीं सुन सकती थी
07:40गल्ती हो गई तो हो गई अब क्या जान लेंगे
07:42सर मारिड ना कीजिएगा
07:44लेकिन ये कोई एथिक्स तो नहीं
07:46आप लोगों ने दो दो कमपनियों को प्रजेक्ट देने के लिए आसरे पे रखा हुआ था
07:50एक तो आप गल्ती करती है
07:52दूसरा मानती भी नहीं है
07:53मैं बहुत बरदाश कर चुका हूँ
07:55अब आपका ये नॉन सीरियस और इर्रिस्पॉनसिबल बहेवियर मुझे से मजीद बिलकुल बरदाश नहीं होगा
08:01अगर आपने पने तोड़ तरीके नहीं बदले
08:04तो मैं तालुकात का लिहास ना करते हुए आपको यहां से निकाल दूँगा
08:08और ये मेरी लास्ट वार्निंग है
08:10इसके जवाब पर तलहा का दमाग फक से ओड़ गया था
08:14इसकी आवास थोड़ी सी बुलंद हुई थी
08:16ये लड़की इसके जब्त का इम्तिहान थी
08:18रोशी बुरी बुरी शकले बनाती डांट खाके वहां से निकली थी
08:22रोशी तलहा के रूम से डांट खाके तेज़ जिस खदमों से अपने वर्क स्टेशन पर आकर खुस्से से कुर्सी खेच कर बैठी थी
08:29वो अपने कम्प्यूटर की तरफ मतवज़ थी
08:31इसके बराबर में बैटने वाली कुलीग ने से बगवर देखा था
08:35आस-पास बैठे तमाम गुलीग्स को पता था रोशी बॉस से डांट खाकर आ रही थी
08:39क्या कर रही हो मिसायत?
08:42रिजाइन
08:42अपना रिजिकनेशन टाइप कर रही हूँ
08:45रोशी फैसला कुन अंदाज में बोली थी
08:47रोशी टाइप करते हुए बहुत जस्बाती से अंदाज में बोली थी
08:51जैसे आज के बाद वो इस आफिस में कभी फटकेगी भी नहीं
08:54वो घुस्से से भर पूर अंदाज में तेज तेज की बोर्ट पर उंगलियां चलाती कुछ टाइप कर रही थी
08:59इसकी कुलीग ने जुक कर उसकी कंप्यूटर स्क्रीन की तरफ देखा जिस पर टाइप की अलफास चमक रहे थे
09:05डियर सर गो टू हैल आई रिजाइन गुडबाई
09:08रोशी का इतना सुहाना और शानदार इस्टिफ़ा पढ़कर कुलेग का बेक तियार कहा निकला
09:13वाँ वाँ क्या रिजिगनेशन लेटर तयार किया है आपने
09:17रोशी ने कुलीग को एक नज़र देखा
09:19इस दौरान इसके कीबोर्ड पर जमी उंगलियों से कोई की प्रेस हो गई
09:23मगर चुके अभी वो गुस्से वाली जजबाती कैफियत में थी
09:26लहाजा उसने दवज्जा ना दी कि उससे कोई की प्रेस हुई थी
09:30किसी ब्राइडल कपडों की शौप पर उमर के साथ सलीका बैटी हुई थी
09:34दुकानदार इन्हें शादी बिया के फैंसी खुबसूरत जोड़े दिखा रहा था
09:38उमर भी खुश-खुश मा के साथ बैठा हुआ था
09:40उन्होंने किसी शोक कलर के सूट की तरफ इशारा किया था
09:44वो शौकिंग पिंक वाला दिखाएं
09:46अमी इतने ब्राइट कलर माही को पसंद नहीं
09:48कोई लाइट कलर देखे
09:50उमर ने फॉरान मा को टोका था
09:52पहनना रोशी को है तो कलर भी इसी की पसंद कलूंगी ना
09:56सलिखा सूट का डुपटा हाथ में पकड़ कर इतमिनान से बोली थी
09:59वो काम की कॉलिटी चेक कर रही थी
10:02आप मेरी मंगनी का सूट लेने आई हैं गालेबन
10:04फिर ये रोशी बीच में कहां से आ गई
10:06उमर हैरान परिशान सा हुआ था
10:09मंगनी का ड्रेस दुलहनी पहनेगी ना या इसकी बहन
10:12सलिखा बदस्तूर कपड़े की कॉलिटी चेक कर रही थी
10:16वो इतमिनान से बोली
10:18क्या मतलब है? क्या मेरी मंगनी माही से नहीं हो रही?
10:21उमर के सर पर एक बम फटा था
10:23रोशी से हो रही है तुम नहीं तो कहा था?
10:26सलिखा कुछ परिशान सी होके
10:28उमर की तरफ देख रही थी
10:29इन्हें उमर के सवाल जवाब अजीब लगे थे
10:32दुकानदार इन मा बेटे को
10:34इन नजरों से देख रहा था
10:35जैसे सोच रहा हो पहले आप दोनों आपस
10:38में दुलहने तै कर ले
10:39फिर कपड़े पसंद कर लीचेगा
10:41दुलहा बेचारे का ये हाल था
10:43कि उसे मंगनी का ड्रेस पसंद करते करते
10:45इनकिशाफ हुआ था
10:46कि इसकी होने वाली मंगेतर कोई और थी
10:48सलिखा और उमर बजार से वापस आ गए थे
10:51उमर बहुत परिशानी और खवगी से मासे बोला था
10:54इसका मतलब है आप मेरा रिष्टा रोशी से तै करके आई है
10:57फ्राइडे को मेरी इंगेजमेंट रोशी के साथ है
11:00उमर बहुत सदमे से ये अलफाज दोरा रहा था
11:03इसकी समझ में नहीं आ रहा था कि वो अपना सर कहा जाके पीटे
11:06हाँ सलिखा कुछ खिस्यानी हुई थी
11:09माई गॉड अम्मी आप इतनी बड़े गलती कैसे कर सकती है
11:12तब ही मैं कहूं माही मुझसे इतनी उखडी उखडी क्यों थी
11:15उमर जस्बाती सा होके गवगी भरे लाजे में बोला था
11:19उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो अप इस गलत फहमी को कैसे दूर कर पाएगा
11:24सलिखा बिलकुल रोशी ही जैसी थी
11:26अपने गलती मानना तो उन्होंने सीखा ही नहीं था
11:29फॉरण बोली थी
11:30तुम नहीं तो कहा था तुम्हें सदफ मामी के घर रिश्टा करना है
11:33हाँ मामी के घर कहा था मगर रोशी के लिए हर्गिस नहीं
11:37वो तो मेरे लिए छोटी बेहनों जैसी है
11:39इसके बारे में तो मैं ऐसा सोच भी नहीं सकता
11:41वो नाराज की से बोला था
11:43अमर गलती तो तुम्हारी भी है
11:45अगर ऐसी बात थी तो तुम्हें साफ साफ माही का नाम लेके हमें बताना चाहिए था ना
11:50जलाल संजीदगी से बेटे को इस गलती का एसास दिला रहे थे
11:54हाँ यही बहुत बड़ी भूल हो गई मुझसे
11:56मैं समझ रहा था माही बड़ी है
11:58और यह आववियस है के रिष्टा आप माही के लिए ही लेके जाएंगी
12:01मुझे क्या पता था आप अपनी फेवरिट रोशी को मेरे लिए चुनेंगी
12:05अमर चिर कर बोला था
12:07बरकुरदार और करो मा की तारीफ है
12:09उन्होंने तुम्हारे लिए लड़की भी अपनी ही जैसी चुनली
12:12जलाल ने इसके कान के खरीब आकर सरगोशी की थी
12:15बाबा प्लीज तिस इस नौट फनी
12:18अमर जुनचुलाया हुआ था
12:20किशमिश आप देख रहे हैं इसे
12:22कितनी अजीब बाते कर रहा है ये
12:24इसी के कहने पे भाई मिया के हाँ रिष्टा तै किया है
12:27अब इसकी बाते सुने
12:28सलीका जलाल से बोली
12:30अमी मैं रोशी से किसी खीमत में मंगनी नहीं करूँगा
12:33मुझे माही पसंद है
12:34और मैं इसी से शादी करूँगा
12:36उमर रूठे लहजे में बोला था
12:38लेकिन अमर मंगनी तै हो चुकी है
12:40तैयारियां हो रही है
12:41दो दिन मन फंक्शन है
12:43अब ये बात करना तो बिल्कुल मुनासिब नहीं होगा
12:45जलाल परेशानी भरे लहजे में बोले
12:48आप लोगों के गलत फहमी और गलती
12:50ने मुझे इस मुसीबत में डाला है
12:51अब आप लोगी इस मुसीबत से निकाले मुझे
12:54अमर जुनचुला कल बोलता हुआ
12:56सोफे पर से उट गया था
12:58मैं तो अब ये बात हर्गिस नहीं कर सकती
13:00इस लड़के का दिमाग खराब हो गया है
13:02ये मैके में मेरी बात खराब कराएगा
13:04भाबी बेगम तो वैसे ही मुझे से खार खाती रहती है
13:07इस बात पर तो वो तुफान उठा देंगी
13:09सलिखा परिशानी भरे लहजे में उच्छी आवाज में भोली दी
13:13रोहेल अपने कमरे में अगम्जदा से अंदाज में लेटा हुआ था
13:17नाहीत कमरे में आई थी
13:19कमर पर हाथ रखके बेटे को जरा नराजगी से घूरती हुई बोली
13:22क्या नाकाम आशिकों की तरह पड़े हो
13:25काम पे नहीं जाना क्या
13:26मेरा इस दुनिया से दिल उट गया अमा
13:29यहां सच्चे प्यार के गदर ही नहीं
13:31रोहेल ऐसे बोला
13:33जैसे उसकी महबुबान उससे बेवफाई की हो
13:35मेरे प्यार में कौन सी कमी रह गई थी अमा
13:38जो रोशी मुझे छोड़के जा रही है
13:40दो दिन के प्यार को तुमने बुखार समझ लिया
13:43नाही चिड़ कर बोली थी
13:45अमा तुम मेरे प्यार को जूटा समझ रही हो
13:47मैं जेब में पैट्रॉल लेकर फिर रहा हूँ
13:50इदर रोशी उमर के नाम के इंगूठी पहनेगी
13:52उधर मैं इसके घर के सामने जाकर खुद को आग लगा लूँगा
13:55सारे टीवी वाले जमा हो जाएंगे
13:57रोहेल जस्बाती होके बोल रहा था
13:59पैट्रॉल तुमारी जेब में कैसे आ गया
14:01अमा तुम किती जालिम हो
14:04बेटा जान देने जा रहा है और तुम मुझे रोकने के बज़ाए
14:08पूछ रही हो मैं पैट्रॉल जेब में कैसे रखूँगा
14:10जाहिर बोतल में भरके रखूँगा
14:12नाहीद का रोहेल की खुदकुशी के बज़ाए
14:15पैट्रॉल कैसे जेब में रखा जाए इस पर दिहान था
14:17तो पूरी बात करो ना
14:19मैं यही सोच रही थी पैट्रॉल तो लिक्विड है
14:21वो जेब में कैसे आ सकता है
14:22तुम मज़ाग समझ रही हो ना
14:24मैं सच मुझ खुदको आग लगा लूँगा
14:26रुहेल फिल्मी हीरो बना हुआ था
14:29अच्छा गाड़ी से दूर हटके
14:30खुदको आग लगाना नई गाड़ी है
14:32नाहीद अभी भी इसकी बात तो सीरियस
14:34नहीं ले रही थी
14:35इन्हें बताता जान देने वाला जिग्रा
14:37इनके बेटे के पास नहीं है
14:39बेटा मौत को गले लगाने जा रहा है
14:42और तुम्हें अपनी गाड़ी की पड़ी है
14:43रुहेल शिकाईती नजरों से मा को देख रहा था
14:46तुम्हारी तरह जजबाती और पागल नहीं हूँ
14:48कि सीरी मैदाने हशर तक पहुँच जाऊ
14:51जब ये मंगनी होगी ही नहीं
14:52तो बला आग लगानी की जरूरती क्यूं पड़ेगी
14:54नाही तब बेटे को समझा रही थी
14:57हाँ बड़ी जादू की छड़ी है न तुम्हारे पास
15:00गुमाओगी और रोशी की मंगनी मेरे साथ हो जाएगी
15:02रहेल जलकर बोला था
15:04तुम्हारे साथ हो ना हो
15:05उमर के साथ तो हर्गिस नहीं होगी
15:07मैं आज तुम्हारी खाला के साथ
15:09पत्थर वाले बाबा के पास जा रही हूँ
15:11इनके तावीजों में बड़ा असर सुना है
15:13रुहेल जो नाउमीद सा लेटा था
15:15इसने मा की बात को बेजारी से सुना था
15:18मगर नाहीत की आँखे चलाकी से चमक रही थी
15:21कि वो ऐसे जादू टोने कराएंगी
15:23जिससे रोशी की मंगनी उमर से होगी नहीं
15:25माही टेरिस पर अकेली गुमसुम अफसुर्दा सी खड़ी थी
15:29उमर और रोशी की अनकरीब होने वाली मंगनी के लिए
15:32वो खुद को जहनी तोर पर तयार करने की कोशिश कर रही थी
15:35उमर टेरिस पर आया
15:37وہ ماہی کو ہی ڈھون رہا تھا
15:39تم یہاں ہو
15:40چمن بوا کہہ رہی تھی
15:41تم سٹیڈی میں پڑھ رہی ہو
15:42تم یہاں کیسے
15:44دو دن بعد منگنی ہے
15:45جا کے تیاریوں میں
15:46پپو کی ہیلپ کراؤ
15:47ماہی نے چوپ کر
15:49عمر کو دیکھا تھا
15:50یہ کہتے ہوئے
15:51وہ عمر کو وہیں چھوڑ کر
15:53ٹیلیس سے جانے لگی تھی
15:54عمر نے بے اختیار
15:56ماہی کا ہاتھ پکڑ کے
15:57اسے جانے سے روکا تھا
15:58ماہی نے شدید ناغواری سے
16:00عمر کی طرف دیکھا تھا
16:01یہ کیا حرکت ہے عمر
16:02میرا ہاتھ چھوڑو
16:03کہتے ہوئے
16:05اس نے کھیچ کر
16:06اپنا ہاتھ عمر سے چھڑایا
16:07عمر چونکہ اب
16:08ماہی کی ناراضگی کی وجہ
16:10اچھی طرح جانتا تھا
16:11وہ بے اختیار
16:12جذباتی لہجے میں
16:13ماہی سے بولا تھا
16:14ماہی مجھے نہیں پتا
16:15یہ ساری غلط فہمی
16:16کیسے ہو گئی
16:17میں روشی سے نہیں
16:18تم سے منگنی کرنا چاہتا تھا
16:20میں اسے نہیں
16:21تمہیں چاہتا ہوں
16:22عمر ماہی کی آنکھوں میں
16:23دیکھ رہا تھا
16:24ماہی نے بھی
16:25اس کی آنکھوں میں دیکھا
16:26کتنے جھوٹے انسان ہو تمہیں
16:28عمر
16:28روشی کے لئے رشتہ بجوا کر
16:30مجھ سے محبت محبت
16:31کھیلنے آ گئے
16:32میں اور روشی
16:33تمہارا کھلونا نہیں
16:34کہ تم پہلے
16:35ایک کو پسند کرو
16:36بعد میں دوسری کو
16:37ماہی ناراضگی سے بولی تھی
16:39تم میری بات سنوگی
16:40یا اپنی ہی بولے چلی جاؤگی
16:42میں نے ہمیشہ صرف
16:43تمہیں چاہا ہے
16:44روشی صرف ایک کزن
16:46چھوٹی بہن ہے میرے لئے
16:47امی نے پتہ نہیں
16:49کس غلط فہمی میں آ کر
16:50اس کا رشتہ مانگ لیا
16:51میں نے تو انہیں
16:52تمہارے لئے بھیجا تھا
16:53عمر ماہی کی آنکھوں میں دیکھ کر
16:55اس سے پہلی بار
16:56اقرار محبت کر رہا تھا
16:58روشی اپنی دھن میں چلتی
17:00ہاتھ میں کافی کا مگ
17:01لیے جا رہی تھی
17:02تیرس کے پاس سے گزری
17:03تو عمر و ماہی کی بات
17:04سن کر ایک دم رک گئی
17:06عمر ماہی کی شانے پہ
17:07ہاتھ رکھ کر
17:08اسے اپنی محبت کا
17:09یقین دلا رہا تھا
17:10روشی چھپ کے
17:12ان دونوں کی باتیں
17:13سننے لگی تھی
17:14وہ دروازے کی
17:15اوٹ میں ہو گئی تھی
17:16صرف اس کا
17:16مو باہر نکلا ہوا تھا
17:18عمر و ماہی کی پوش
17:19روشی کی طرف تھی
17:20میں نے سوچ
17:21روشی کو کبھی
17:22اس نظر سے دیکھا ہی نہیں
17:24میں اس کے بارے میں
17:25ایسا سوچ ہی نہیں سکتا
17:26میری پسند
17:27میری محبت
17:28تم ہو ماہی
17:29کیا تمہیں کبھی
17:29میرے پیار کا
17:30احساس نہیں ہوا
17:31ہوتا تھا
17:33مگر پھر ایک دن
17:34پتا چلا میری
17:35فیلنگز یک طرفہ تھی
17:36تمہاری فیلنگز
17:39یک طرفہ نہیں تھی
17:40اور میں تمہیں
17:41بتا رہا ہوں
17:42تمہارے علاوہ
17:42میری زندگی میں
17:43کوئی دوسری لڑکی
17:44نہیں آ سکتی
17:45جیسے جیسے
17:46وہ ان دونوں کی باتیں
17:47سن رہی تھی
17:49اسے سارا معاملہ
17:50سمجھ میں آ رہا تھا
17:51وہ چلاکی سے
17:51آنکھیں گھما رہی تھی
17:52اب ان سب کے لئے
17:54بہت دیر ہو چکی ہے عمر
17:56روشی اس رشتے پر
17:57بہت خوش ہے
17:58اور میں اپنی بہن
17:59کو ہرٹ کرنے کا
18:00کبھی مر کر بھی
18:00نہیں سوچ سکتی
18:01اب تمہیں
18:02یہ رشتہ قبول کرنا ہوگا
18:03ماہی نے عمر کا
18:04ہاتھ اپنے شانے سے
18:05ہٹاتے ہوئے بولا
18:06اوہو
18:08تو یہ معاملہ ہے
18:09ان رومیو جولیوٹ کی
18:10اس دکھ پھری
18:10لیو سٹوری کا
18:11تو مجھے پتہ ہی نہیں تھا
18:13روشی پر جوش
18:14انداز میں
18:14آنکھیں گھماتی
18:15وہاں سے خاموشی
18:16سے جانے کے لئے
18:17مڑ گئی تھی
18:18دادا سٹیڈی میں
18:19کچھ پڑھ رہے تھے
18:20روشی بھاگتی
18:21دوڑتی ان کے پاس آئی
18:22دادا جان
18:23آپ بس بیٹھ کر
18:24یہ بکس پڑھتے رہیے گا
18:25کچھ قبر بھی ہے
18:26آپ کو
18:26کتنا سیریس
18:27مسئلہ ہو گیا ہے گھر میں
18:28روشی جذباتی ہو
18:30کے بولی تھی
18:30کیا ہوا ہے روشی
18:31دادا نے کتاب سے
18:33نظرے ہٹا کر
18:34روشی کو دیکھا
18:34عمر مجھ سے نہیں
18:36ماہی سے منگنی کرنا چاہتا ہے
18:37روشی نے دادا کو
18:39چوکا دیا تھا
18:40میں نے تو
18:40آفس میں صرف دو لوگوں کی
18:42میٹنگ غلط رینج کرائی تھی
18:43یہاں تو
18:44سلیخہ پپو
18:44رشتہ یہ غلط لڑکی کو دے گئی
18:46دادا جان
18:47کچھ کر لیں
18:48ورنہ یہ رومیو جولیٹ
18:49محبت کی قربانی دینے پر
18:51تلے بیٹھے ہیں
18:52تم ذرا بیٹھ کے
18:53سکون سے مجھے بتاؤ کی
18:54ہوا کیا ہے
18:56آنڈی دفان کی طرح
18:57آتے ہی
18:57زلزلے والے شوق دینے
18:59شروع کر دی ہیں
19:00دادا نے حیرت
19:01اور ناسمجھی سے
19:02روشی سے بولا تھا
19:03روشی ان کے برابر میں
19:04رازداری بھرے انداز میں
19:06بیٹھی تھی
19:06وہ ان کے کان میں
19:07گھسر پھسر کر رہی تھی
19:09اور جو کچھ وہ سن کر آئی تھی
19:10وہ سب انہیں بتا رہی تھی
19:12دادا کی آنکھوں میں حیرت تھی
19:14وہ یہ سب سن کر
19:15تھوڑے پریشان بھی ہوئے تھے
19:16کہ اب جب معاملہ
19:17اتنا آگے جا چکا تھا
19:19منگنی ہونے والی تھی
19:21اب کیا کیا جا سکتا تھا
19:22یہ دونوں نالائق
19:23پہلے صحیح بات نہیں
19:24بتا سکتے تھے سب کو
19:25دادا پریشان ہوئے تھے
19:27دادا جان
19:28اب جو کچھ کرنا ہے
19:29آپ نہیں کرنا ہے
19:30روشی سنجید کی سے بولی تھی
19:32روشی سب اتنا آسان بھی نہیں ہے
19:34تمہیں پتہ ہے نا
19:35سلیقہ اور صدف کی
19:36آپس میں بالکل نہیں بنتی
19:37اور صدف کو میں نے
19:39تمہارے لئے اتنی
19:39مشکلوں سے راضی کیا تھا
19:41اب لڑکی بدلنے والی بات پر
19:42تو صدف ہتے سے اکھڑ جائے گی
19:44اور سلیقہ کا تو
19:45تم رہنے ہی دو
19:46دادا اپنے ماتھا رگڑتے ہوئے
19:48پریشانی سے بولیتے
19:49تو آپ دادا ہیں
19:51گھر کے بڑے ہیں
19:52حکم دیں گے
19:53یہ میرا حکم ہے
19:53روشی جذباتی ہو کے بولی تھی
19:55آپ کو یہ کرنا ہی ہوگا
19:57دادا جان
19:57تم اچھا مجھے
19:59بھسوانے کا انتظام کرو گی
20:00آپ نہیں بھسیں گے
20:02میرے ذہن میں ایک پلان ہے
20:03کان خریب لائیں
20:04روشی شرارت سے آنکھیں گھوماتی
20:06ان سے کہہ رہی تھی
20:07دادا اس کی بات سن کر
20:09مسکرا رہے تھے
20:09اور سر ہلاتے جا رہے تھے
20:11تو جناب روشی اور دادا جان کے
20:14درمیان رازداری میں
20:15معاملہ ٹیپ آ گیا تھا
20:17روشی کا شرارتی منصوبہ
20:18دادا جان کے بھی دل کو لگا تھا
20:21ہونا اب یہ تھا
20:21کہ منگنی والے دن تک
20:22عمر اور ماہی کو یہ نہیں پتایا
20:24جانا تھا
20:25کہ آج درحققت
20:26ان دونوں کی منگنی ہونی ہے
20:28دادا جان نے
20:29اپنی ذمہ داری سمحال لی تھی
20:30سب سے پہلے انہوں نے
20:32دادی جان کو سارا ماجرہ سنایا
20:34وہ بیچاری حقہ بقہ سن رہی تھی
20:36کہ سب کیا ہونے والا ہے
20:37دادی جان کے بعد
20:39دادا جان نے
20:40اپنے کمرے میں
20:40صدف اور سلمان کو بلوایا
20:42دادی ابھی بھی شوق
20:43کسی کیفیت میں خاموشی سے بیٹھی تھی
20:45جبکہ دادا جان
20:47بڑے مزید سے
20:47صدف اور سلمان کو یہ بتا رہے تھے
20:49کہ چونکہ عمر اور ماہی
20:51ایک دوسرے کو پسند کرتے ہیں
20:52لہذا اب عمر کے ساتھ
20:53روشی کی نہیں
20:54ماہی کی منگنی ہوگی
20:55سلمان تو ساری بات سن کر
20:58خاموش کھڑے تھے
20:59مگر صدف کو یہ بات
21:00بلکل اچھی نہیں لگی تھی
21:01انہوں نے اعتراض کرنے کی کوشش کی
21:03تو دادا جان فوراں
21:04روبدار گھر کے سربراہ بن گئے
21:06روشی کے مشورے پر عمل جو کر رہے تھے
21:09انہوں نے دو ٹوک انداز میں
21:10صدف کو سمجھایا
21:12کہ غلط فہمی کی وجہ سے
21:13رشتہ روشی کے لئے آ گیا تھا
21:15جبکہ عمر تو ہمیشہ سے
21:16ماہی کو ہی پسند کرتا تھا
21:18دادا جان کے سمجھانے پر
21:20صدف بھی خاموش ہوئی
21:21چونکہ وقت کم تھا
21:22لہذا صدف اور سلمان کو
21:24اعتماد میں لینے کے بعد
21:25دادا جان دادی جان کو لے کر
21:28اسی شام سلیقہ کے گھر جا پہنچے
21:30سلیقہ اور جلال کو تو پہلے ہی
21:33عمر کی ماہی کے لئے پسندیدگی کا پتہ تھا
21:36وہ دونوں تو صدف اور
21:37سلمان کی نرازگی کے خیال سے
21:38چپ رہے تھے
21:39ورنہ بیٹے کی ماہی کے لئے
21:41چاہت ان پر واضح تھی
21:42لہذا دادا جان کو
21:44وہاں کوئی محنت نہیں کرنی پڑی
21:45ہاں اتنا ضرور سمجھانا پڑا
21:47کہ ابھی عمر کو بتانا کچھ بھی نہیں ہے
21:49انجینئر ہاؤس میں منگنی کا دن آ چکا تھا
21:53گھر کو خوب سجایا جا رہا تھا
21:55ہر کوئی خوش تھا
21:56سوائے عمر اور ماہی کے
21:58وہ دو اداس لیلہ مجنو
22:00مو لٹکائے اپنے اپنے گھروں میں گھوم رہے تھے
22:03ماہی کمرے میں بیٹھی تھی
22:05اسے پتا تھا اب روشی کو دلہن بننے پالر جانا ہے
22:08وہ جبران مسکر آ رہی تھی
22:09اپنی بہن کے لئے خوش ہونے کی کوشش کر رہی تھی
22:12روشی کوشی کوشی اپنا منگنی کا جوڑا
22:15جوتے جولری بیگ میں رکھ رہی تھی
22:17چلو جاؤ روشی پالر جانے کا ٹائم ہو گیا ہے
22:20صدف چمن بوہ اور روشی نے کنکھیوں سے
22:23ایک دوسرے کی طرف دیکھا تھا
22:24انہیں اچھی طرح پتا تھا
22:26کہ ماہی اس وقت اندر سے کتنی اپسیٹ ہے
22:28اور اپر اپر سے مسکر آ رہی ہے
22:30وہ تینوں ماہی کی حالت کا مزہ لے رہی تھی
22:33ماہی تم بھی چلو میرے ساتھ
22:35روشی کوشی سے بھرپور لہجے میں
22:37ماہی سے بولی تھی
22:38اس کا بیک چمن بوہ نے اٹھا رکھا تھا
22:41ماہی بہن کا دل رکھنے کی خاطر
22:43جبرن مسکرا کے بولی
22:44ہاں چلو
22:45وہ روشی کی خوہش پر
22:47اس کے ساتھ سیلون جانے کے لئے تیار تھی
22:49روشی اور ماہی سیلون جا رہی تھی
22:52روشی نے وہاں سے جاتے جاتے
22:53دادی اور صدف کو آنکھ ماری تھی
22:55وہ خوب بہن کے ساتھ ڈراما کر رہی تھی
22:57ماہی سمجھ رہی تھی
22:59کہ منگنی کی دلہن روشی نے بننا ہے
23:01اسے پتہ ہی نہیں تھا
23:02کہ دلہن بنانے
23:03روشی اسے لے کے سلون جا رہی تھی
23:05روشی اور ماہی پالر میں کھڑے تھے
23:08وہاں ایک دو اور برائٹس بھی تیار ہو رہی تھی
23:10میک اپ آرٹس وہاں آئی تھی
23:12وہ ان دونوں کی طرف دیکھتے ہوئے پوچھ رہی تھی
23:15آپ میں سے انگیجمنٹ برائٹ کون ہے
23:17یہ میری بہن
23:18روشی مسکرا کے بولی
23:20ماہی نے حقہ بکہ ہو کے
23:27بعد میں ابھی تم تیار ہو جاؤ پہلے
23:29پھر سب پتہ چل جائے گا تم کو
23:31روشی نے ہاتھ پکڑ کے
23:33ماہی کو میک اپ آرٹس کے سامنے چیئر پر بٹھا دیا تھا
23:36ماہی کو سمجھ میں نہیں آ رہا تھا
23:38کہ سب کیا ہو رہا تھا
23:39میک اپ آرٹس نے ماہی کو دلہن بنانا شروع کر دیا تھا
23:43منگنی کی خوب پر رونک سی تقریب تھی
23:46دونوں گھروں کی پہلی شادی تھی
23:48اس لیے خوب احتمام دونوں ہی طرف کیا گیا تھا
23:51انجینئر ہاؤس کے گارڈن میں تقریب
23:53ارینج کی گئی تھی
23:54خوبصورت سٹیج بنا تھا
23:56پھولوں اور لائٹوں سے بہت اچھی سجاوٹ کی گئی تھی
23:59مہمان آ چکے تھے
24:01سٹیج پر عمر مو لٹکائے
24:03افسردہ سا بیٹھا تھا
24:05اس نے اچھے سے ڈیزائنر کا شلوار
24:07قمیس اور ویس کورٹ پہن رکھی تھی
24:09ہینڈسم لگ رہا تھا
24:11مگر خوش بالکل بھی نہیں تھا
24:13سلیقہ صدف دادی سب بہت اچھی
24:15تیار تھی
24:16دادہ دادی صدف مہمانوں سے مل رہے تھے
24:19روشی اندر سے دلہن بنی ماہی
24:21کو بہت پیار سے تھام کر باہر لا رہی تھی
24:24ماہی بہت پیاری لگ رہی تھی
24:26روشی نے بھی پیارا سا
24:27کام بنا لہنگا پہن رکھا تھا
24:29تمام لوگ دلہن کی طرف متوجہ
24:32ہوئے تھے
24:32روشی بہن کو سٹیج کی طرف لا رہی تھی
24:35افسردہ شکل بنائے سٹیج پر
24:38بیٹھے عمر نے بے دلی سے سامنے دیکھا تھا
24:40دلہن بنی ماہی کو دیکھ کر
24:42اسے اپنی آنکھوں پر یقین نہیں آ رہا تھا
24:44اسے لگا جیسے وہ کوئی خوب دیکھ رہا ہو
24:46اس نے آنکھیں بن کر کے
24:48دوبارہ کھولی تھی
24:49جیسے اپنی آنکھوں کا دھوکہ لگا ہو اسے
24:52تب بھی ماہی سامنے چل کر آتی ہوئی
24:54اسے نظر آئی
24:55عمر کے چہرے پر بے اکدیار خوشی پھیلی تھی
24:58اور وہ اپنی دلہن کا استغبال کرنے کے لیے
25:01اٹھ کھڑا ہوا تھا
25:02عمر ہاتھ آگے بڑھا کر
25:04ماہی کو اسٹیج پر چھڑنے کے لیے تھام رہا تھا
25:07ماہی اسٹیج پر آ گئی تھی
25:09ناہی دروشی کی منگنی میں جانے کے لیے
25:12تیار ہو رہی تھی
25:13کام سے بھرا جوڑا
25:14دھیر و سونا بالوں کا جوڑا
25:17بھر پور تیاری تھی ان کی
25:18کانوں میں جھمکے پہن رکھے تھے
25:20اور جھمکوں کے ساتھ کے سہارے
25:22جھوڑے میں لگا رہی تھی
25:24جب روحیل بہت نراز اور غمزدہ کمرے میں آیا تھا
25:27قمیز کا گریبان کھلا ہوا تھا
25:29بال بکھرے اور شیف بڑی ہوئی تھی
25:31ایک ناکام عاشق والا پورا ہلیا تھا اس کا اس وقت
25:34ماہ کی تیاری دیکھ کر اس کے دل پر چوٹ لگی تھی
25:38میرے زخموں پر نمک چھڑکنے
25:40روشی کی منگنی میں جا رہی ہے امہ
25:42روحیل ماں سے شکایتی لہجے میں بولا تھا
25:45ہاں تو اگر نہیں گئی تو وہ لوگ سمجھیں گے
25:47ہم جل گئے ہیں
25:47نہ ہی برا سا مو بنا کے بولی
25:49مجھے تمہاری باتوں میں آنا ہی نہیں چاہیے تھا
25:52جب انہوں نے میرے رشتے کو منع کیا تھا
25:55اسی وقت سمجھ جانا چاہیے تھا
25:57کہ روشی میرے نصیب میں نہیں
25:58جھوٹے مکار لوگ میری باری میں بچی پڑھ رہی تھی
26:01اب اس عمر کا رشتہ آیا تو کیسے ہاں کر دی
26:04روحیل جل کے بولا تھا
26:07تم نہ بیٹھے جلتے کھلستے رہنا
26:08میں جا رہی ہوں
26:09پتھر والے بابا کا تعویز لے کے
26:11کسی بھی بہانے سے شربت میں ڈال کے روشی کو پلا دوں گی
26:14وہ منگنی سے اسی وقت
26:15صاف انکار کر کے میری عاشق ہو جائے گی
26:18پھر تو جو میں کہوں گی وہ مانے گی روشی
26:20ناہید نے ہاتھ میں پکڑی
26:22ایک پڑیاں روحیل کو دکھائی تھی
26:24اور اسے بڑے یقین سے پرس میں رکھا تھا
26:27امام میں اور
26:28اپنا مزاق نہیں بنوا سکتا
26:30روشی دودھ تھی تو میں کھٹا لیموں
26:33پھٹ کے میری زندگی کا پنیر بن گیا
26:35اب بھی تم مجھے جھوٹے خواب دکھا رہی ہو
26:37روحیل نرازگی سے ماں سے بولا تھا
26:39تم لفافہ بھی دیکھے آوگی
26:42روحیل تڑپ کے بولا
26:43دیکھوں گی کھانے میں کیا کیا ہے
26:45اگر اچھا کھانا ہوا تو لفافہ دے دوں گی
26:47ورنہ رش میں کس سے پتا چلنا ہے
26:49ناہید اچھے پن سے باس نہیں آ رہی تھی
26:52انہوں نے اپنا چمکیلا ستاروں والا پرس اٹھایا
26:55اور باہر نکل آئیں
26:56روحیل غمزتہ سا وہیں کھڑا رہ گیا
26:58منگنی کی تقریب زور و شور سے جاری تھی
27:01دادا دادی
27:02ان دونوں کے برابر میں بیٹھے ہوئے تھے
27:05صدف سلیمان سلیقہ اور جلال
27:07بھی صوفو پر پاس ہی بیٹھے ہوئے تھے
27:09روشی اور دگر چند کزن
27:11صوفو کے پیچھے گروپ فوٹو بنوانے کے لئے
27:13کھڑے تھے
27:13دادی نے ہاتھ میں پکڑی ڈبیا کھول کر ماہی کو دی تھی
27:17کہ وہ عمر کو پہنا دے
27:18سب کے چھیروں پر خوشی تھی
27:20ماہی خوشی بھری شرماہت کے ساتھ
27:23عمر کو رنگ پہنا رہی تھی
27:25روشی نے دونوں کے کندوں پر ہاتھ جمع کے
27:27شرارتی انداز میں کہا تھا
27:29دعائیں دو تم دونوں مجھے
27:31ورنہ ابھی یہاں پر ایک سیٹ فلمی سیچویشن چل رہی ہوتی
27:34عمر اور ماہی
27:35جھیب کر مسکرا دیئے تھے
27:37جبکہ سب بڑے ہنس رہے تھے
27:39ویسے آپ لوگوں نے ہمیں کو بھلو بنایا
27:41عمر خسیا کر بولا تھا
27:43سب روشی کا آئیڈیا تھا
27:45دادا نے روشی کو پیار سے دیکھا تھا
27:47اتنا ڈراما تم لوگ کر رہے تھے
27:49تو تھوڑا ڈراما کرنا تو ہمارا بھی بنتا تھا نا
27:51روشی پرجوش انداز میں بولی تھی
27:54سلیخہ نے روشی کی طرف پیار سے مسکرا کے دیکھا
27:57انہیں اپنی فیورٹ بھتیجی کی نرازگی کی فکر تھی
28:00کہ کہیں بیٹے کی خوشی پورے کرنے کے چکر میں
28:03انہوں نے اسے نراز تو نہیں کر دیا
28:05وہ منگنی کی تقریب کے درمیان میں سے
28:07روشی کو بات کرنے کے لیے
28:09اس کا ہاتھ پکڑ کر اندر لے کے آئی تھی
28:10کیا ہوا ہے پھپو
28:12روشی حیرت سے پھپو کو دیکھ رہی تھی
28:14تم مجھ سے نراز تو نہیں ہونا روشی
28:16ماہی کو میں بہت چاہتی ہوں
28:18مگر تمہاری جگہ کوئی نہیں لے سکتا
28:20سلیخہ کا انداز جذباتی تھا
28:23کیا ہو گیا پھپو
28:24یہ دھولن تو چینج ہی میں نے کروائی ہے
28:26ورنہ وہ رومیو جولیٹ تو
28:27اپنی لیو سٹوری کی بینڈ بجا چکے تھے
28:29ان کا پھیلایا رائتہ میں نے سمیٹا ہے
28:31روشی نے اپنا سر پیٹا تھا
28:34ابھی امی ہوتی نا سامنے
28:35تو اس زبان اور بیان پر
28:36ایک لمبی کلاس ہو جانی تھی تمہاری
28:38سلیخہ ہس کے بولی تھی
28:40سلیخہ کو وہ اتمنان ہو گیا تھا
28:42کہ روشی ان سے قفا نہیں
28:43اور وہ اس پاس سے خوش اور پڑھ سکون ہوئی تھی
28:46وہ دونہ ہستے ہوئے
28:47واپس فنکشن میں چلے گئے تھے
28:49ناہید منگنی کی تقریب میں
28:50شرکت کے لئے گارڈن میں داخل ہوئیں
28:52ان کے ہاتھ میں تعویز کی پڑیا تھی
28:54وہ بقاعدہ مشن پر تھی
28:56کہ یہ تعویز روشی کو پلا سکیں
28:58مہمانوں سے ملنے میں
28:59مصروف محضبانوں کو
29:01ابھی ناہید کے آنے کا پتہ ہی نہیں چلا تھا
29:03سامنے سے ایک ویٹر
29:05ٹرے میں کولڈ رینگ جوس اور شربت کے
29:07گلاس مہمانوں کو سرف کرنے کے لئے لے جا رہا تھا
29:10اس میں سے لار شربت کا گلاس
29:12ناہید نے جلدی سے بڑھ کر اٹھایا تھا
29:14اور ادھر ادھر چوکنی نظرو
29:16ڈال کر فوراں وہ تعویز
29:18گلاس میں ڈال دیا
29:19وہ ڈائرہ کسی بھی بہانے سے جا کر
29:22یہ شربت روشی کو پلانا چاہتی تھی
29:24اسی وقت سامنے سے آتے جلال سے
29:26ان کی ٹکر ہوتے ہوتے بچی تھی
29:28جلال نے بہت غور سے ناہید کو دیکھا تھا
29:30ناہید جلدی میں تھی
29:32انہیں اگنور کر کے آگے بڑھنا چاہتی تھی
29:34مگر ان کے دوبتے پر لٹکے
29:36گھنگرووں میں سے ایک گھنگرو
29:37جلال کی کوٹ کی آستین کے بٹن میں
29:40پھز کیا تھا
29:40جلال کا تھرکیپن فوراں باہر نکلا تھا
29:44انہوں نے کوٹ کی آستین میں سے
29:45ناہید کا گھنگرو نکالتے نکالتے
29:47بڑے فلمی انداز میں شیر پڑھا تھا
29:50کس نے دستک دی یہ دل پر کون ہے
29:52آپ تو اندر ہیں باہر کون ہے
29:54جلال نے دل پر ہاتھ رکھ کے
29:56رومینٹک انداز میں شیر پڑھا تھا
29:58ناہید نے ان کے شیر پڑھنے پر
30:00حیرت سے پوچھا آپ کون
30:01اس ناچیز کو جلال کہتے ہیں
30:04مگر آپ جس نام سے چاہیں پکاریں
30:06جلال ان کی آنکھوں میں دیکھتے ہوئے
30:08بولے تھے
30:09ویسے تو گلاب کو کسی بھی نام سے پکاریں
30:11گلاب ہی رہتا ہے مگر ناغوار نہ گزرے
30:14تو آپ اپنا نام بتائیں گی
30:16ناہید
30:17صدف باجی کی نیبور ہیں
30:19جلال چکے سلیقہ کے ہاتھوں
30:21کاسے زج رہتے تھے
30:23اس لیے انہیں جہاں موقع ملے
30:24وہ قواتین سے فری ہو جاتے تھے
30:26آپ کو آنے میں کوئی پریشانی تو نہیں ہوئی
30:28جلال دل پھیک انداز میں بولے تھے
30:31بلکل نہیں
30:32میں کونسا بورڈر کروس کر کے آئی ہوں
30:34ناہید چڑھ کر بولی
30:35ان کو روشی کو شربت پلانے کی جلدی تھی
30:38کتنی دلچسپ باتیں کرتی ہیں آپ
30:40آپ کے شہر تو بہت پوش ہوتے ہوں گے
30:42میرے حبی تو بیچارے
30:44پاس آوے ہو گئے
30:45ناہید افسردہ مو بنا کر بولی تھی
30:47اوہ سوری
30:48اسی وقت سلیخہ جو اندر روشی سے بات کر کے باہر آئی تھی
30:52جلال کو ناہید کے پاس کھڑا دیکھ کر
30:54غصے میں آکا سیدھی وہاں آئیں
30:56جلال کو بیوی کو دیکھ کر
30:58پھندہ لگا تھا
30:59انہوں نے گھبراہٹ میں ناہید کے ہاتھ سے
31:01شربت کا گلاس پکڑا اور غٹا غٹ پی گئے
31:04ناہید حقا پکا انہیں دیکھتی کی دیکھتی رہ گئی
31:07ان کے پتھر والے بابا کا تعویز ملا شربت
31:09جلال پی گئے تھے
31:10ناہید نے دل ہی دل میں خود کو بھرا بھلا کہا تھا
31:14کہ ایک کام بھی ان سے ٹھیک سے نہیں ہوتا
31:16کیا کر رہے ہیں کشمش
31:17ان کا انداز نرم مگر آنکھوں میں غیظ و غزب بھرا تھا
31:21سلیخہ کے کشمش کہنے پر ناہید کو اسی لمحے سمجھ آ گیا
31:24کہ جلال سلیخہ کے شہر ہیں
31:26کچھ نہیں جان بس وہ
31:28جلال حکلا کر بولے
31:30اچھا یہ آپ کے حبی ہیں
31:31بڑے یہ مذاقیاں ہیں
31:33بڑے اچھے شیر سناتے ہیں
31:35ناہید جان بوچ کا سلیخہ کا دل جلانے کے لئے بولی تھی
31:38ناہید وہاں سے آگے بڑھ گئی تھی
31:40جلال کی حالت تکلی تھی
31:42وہ کسیانی سی شکل بنا کے سلیخہ کو دیکھ رہے تھے
31:45جو انہیں گھور رہی تھی
31:46بیچاری بیوہ کاتون ہے
31:48خاصی دکھی نظر آ رہی تھی
31:49بس اسی لئے
31:50بیچاری تو جلال کا ہر دوسری عورت کے لئے تکیا کلام تھا
31:54اسی لئے آپ نے بھی بس اسکوٹر کے خالی سیٹ دیکھی
31:57تو سوار ہونے کی تیاریاں شروع کر دی
31:59سلیخہ نے تنزیہ نگاہوں سے شہر کو دیکھا تھا
32:02نہیں نہیں جان تم غلط سوچ رہی ہو
32:04جلال الدین صاحب ہم اس موضوع پر گھر جا کر بات کریں گے
32:08ابھی بیٹے کی منگنی پر رنگ میں بھنگ نہیں کرنا چاہ رہی
32:11سلیخہ کا انداز دھمکی دینے والا تھا
32:14اور جلال متوقع آنے والی شامت کا سوچ کر بڑھ پریشان تھے
32:18ابھی صاحب منگنی میں شرکت کے لئے روشی کے گھر آئے تھے
32:21گاڑی انجینئر ہاؤس کے گیٹ پر رکھی
32:24باہر سے یہ خوب گہمہ گہمی گانوں کی آوازیں اور روشنیاں نظر آ رہی تھی
32:28ابھی صاحب گاڑی سے اترے تھے
32:30گاڑی ڈرائیور چلا رہا تھا
32:33ان کے ہاتھ میں تحفہ تھا
32:34وہ ہمیشہ کی طرح پر وقار نظر آ رہے تھے
32:37روشی جو اپنی کزنز کے ساتھ ہسی مزاق کرنے میں مصروف تھی
32:41اس نے آبی صاحب کو آتا دیکھا
32:43وہ اپنا لہنگا سمالتین کے پاس آ گئی تھی
32:45آبی صاحب اسے دیکھ کے مسکراتے ہوئے فوراں بولے
32:48ارے بھئی یہ دلہن نے خود کھڑے ہو کر
32:50مہمانوں کا استقبال کرنا کب سے شروع کر دیا
32:53وہ حیرس سے بولے تھے
32:55انکل لاس منٹ پر پروگرام چینج کرنا پڑ گیا
32:58اب دلہن میں نہیں میری بہن ہے
33:00ماہی
33:01روشی شرارت بھرے انداز میں مسکرائی
33:03آبی صاحب تھوڑے حیران ہوئے
33:06پھر برد باری سے پوچھا
33:07مجھ سے بہت بغور دیکھ رہے تھے
33:10کیا تم خوش ہو
33:11بہت زیادہ
33:12روشی مسکرائی کے بولی
33:14اگر تم خوش ہو تو پھر ٹھیک ہے
33:16آبی صاحب مطمئن ہوئے
33:17میں بہت خوش ہوں انکل
33:19روشی اپنے فیوریٹ انکل کے آنے پر بہت خوش تھی
33:22that's great بیٹا
33:23thanks انکل
33:24آپ میرے انوائٹ کرنے پر آگئے
33:26مجھے آپ کے آنے کی بہت خوشی ہے
33:27کیسے نہ آتا تم نے بلایا ہے
33:29اسی وقت سلمان نے
33:32آبیس صاحب کی طرف دیکھا تھا
33:34وہ انہیں استقبال کرنے کے لئے
33:35گرم جوشی سے ان کے پاس آئے تھے
33:37اسلام علیکم آبیس صاحب
33:39برسو سے ہماری ملاقات نہیں ہو پائی تھی
33:42مگر آج روشی کی وجہ سے
33:43تجدید دوستی ہو گئی ہے
33:45آبیس صاحب مسکرا کے سلمان سے گلے ملے
33:48چلیں پھر میری غیر ذمہ دار
33:50لا پروہ بیٹی نے کوئی کام تو
33:52ڈھنکا کیا ہے
33:52سلمان کچھ شرارت سے
33:54روشی کو دیکھتے ہوئے بولے تھے
33:56ایسے نہ کہیں
33:57آپ کی بیٹی ماشاءاللہ
33:58بہت محبت کرنے والی
34:00خوش اقلاق بچی ہے
34:01میری یہاں موجودگی سے ہی
34:03انزازہ لگائیں
34:04آج بہت عرصے بعد
34:05میں نے کسی تقریب میں
34:07صرف اس کے بلانے پر شرکت کی ہے
34:09آبیس صاحب کھلے دل سے
34:11روشی کی تعریف کر رہے تھے
34:12روشی اپنی تعریف پر
34:14مسکرا دی تھی
34:14سلمان بھی بیٹی کی تعریف پر
34:17خوش ہوئے تھے
34:17روشی سلمان اور
34:19آبیس صاحب کی دوستی کو
34:20قریبی تعلق میں
34:21بدلنے کا باعث بنی تھی
34:23روشی اپنے ورک اسٹیشن پر
34:25کرسی پر بیٹھی ہوئی تھی
34:26اس کے برابر میں
34:27بیٹھنے والی اس کی کلیگ
34:28جو ابھی ابھی آفیس آئی تھی
34:30وہ روشی کو وہاں
34:31بیٹھا دیکھ کے حیران ہوئی تھی
34:32ہائے آیت تم کیسے
34:34لمبی کہانی انچوٹ
34:36میری منگنی نہیں ہوئی
34:37روشی خوشگوار
34:38موڑ میں بتا رہی تھی
34:39مجھے افسوس کرنا چاہیے
34:41کلیگ کو روشی کا
34:42اچھا موڑ دیکھ کے
34:43سمجھ نہیں آ رہا تھا
34:44کہ خوش ہو یا افسوس کرے
34:46بلکل بھی نہیں
34:47میں بہت خوش ہوں
34:48مگر میرا کوشن
34:50ابھی وہی ہے
34:51تم آ کے سے گئیں
34:52تم نے رزائن نہیں دے دیا تھا
34:54یہ اور بات ہے
34:55کہ ابھی سرطلہ نے
34:56تمہیں اپوائنٹ ہی نہیں کیا تھا
34:58کلیگ شرارت دھرے انداز میں
34:59روشی کا مزاق اڑا رہی تھی
35:01روشی ابھی اس کی بات کا
35:02کوئی مزیدار سا جواب
35:03دینا ہی چاہتی تھی
35:04کہ اسی وقت
35:05تلہ آفس میں داقل ہوا تھا
35:07اس کے ساتھ ساتھ
35:07منینجر فرہان بھی
35:08چلتا ہوا آ رہا تھا
35:10انہیں دیکھ کر
35:11روشی نے سرگوشی میں
35:12نردہ سے کہا
35:12یہ باس کی بڑی
35:14چمچہ گیری کرتے ہیں
35:15ہر وقت ساتھ ساتھ چپ کے رہتے ہیں
35:17شھ
35:17چپ
35:18کلیگ بولی
35:19روشی کا خیال تھا
35:21تلہ آمیشہ کی طرح
35:22اسے اگنور کرتا
35:23اپنے آفس میں چلا جائے گا
35:24مگر وہ اسے وہاں بیٹھا دیکھ کے
35:26اس کے پاس آ گیا تھا
35:27کلیگ کے شارعہ کرنے پر
35:29روشی کو مینرز یاد آئے تھی
35:30اور وہ کرسی پر سے اٹھی تھی
35:32اسلام علیکم سر
35:33والیکم اسلام مسائیت
35:35آپ ریزائن نہیں کر گئی تھی
35:36تلہ نے روشی کی طرف دیکھ کر
35:38تنزیہ پوچھا تھا
35:40تلہ کی آنکھوں میں
35:42یہ تنزیہ سا تاثر تھا
35:43کہ آپ کو ابھی ملازمت دی نہیں تھی
35:45اور آپ ریزائن پہلے کر گئی تھی
35:47روشی حیران پریشان سی تھی
35:49کہ اس کے اس دن کے فنی انداز میں
35:52ریزگنیشن ٹائپ کرنے والی حرکت
35:54کا تلہ کو کیسے پتا چل گیا
35:55نو سر ایسی تو کوئی بات نہیں ہے
35:57روشی پر اعتماد انداز میں
35:59جھوٹ بول رہی تھی
36:00اوکے پھر شاید آپ کے پاس سے
36:02ایمیلز خود بخود سینڈ ہونا شروع ہو گئی تھی
36:05تلہ جتاتے ہوئے انداز میں
36:07اندر آفس میں چلا گیا تھا
36:09مینجر فرحان بھی اس کے پیچھے پیچھے اندر گیا تھا
36:12روشی ایک پل کے لیے ہوننق سی کھڑی تھی
36:14تم نے کہیں وہ ایمیل سر کو سینڈ تو نہیں کر دی تھی
36:18نیدہ نے روشی سے پوچھا
36:20نہیں نہیں وہ تو میرے ڈرافٹ میں پڑی ہے
36:22روشی نفی میں سر ہلاتی
36:24خود کو یقین دلا رہی تھی
36:25بولتے بولتے کرسی پر بیٹھی تھی
36:28جلدی سے اپنی ایمیل آئی ڈی
36:29لاغن کر رہی تھی
36:30نیدہ بھی اپنے سارے کام چھوڑ کر
36:33کرسی روشی کے قریب لے آئی تھی
36:35وہ بھی روشی کے کمپیوٹر سکرین کو دیکھ رہی تھی
36:37روشی ٹھک ٹھک کی بورڈ پر انگلیاں چلاتی ہوئی
36:40اپنی سینڈ کی ہوئی ایمیل دیکھ رہی تھی
36:42جس میں سب سے اوپر
36:44تلہا کو سینڈ کی ہوئی ایمیل تھی
36:46جس پر اس نے بول لیٹر میں
36:48دیئر سر کو ٹو ہیل گوڈ بائی لکھا ہوا تھا
36:51روشی حواظ باگتا تھی
36:52نیدہ بھی پریشان سی روشی کی طرف دیکھ رہی تھی
36:55یہ تم نے کیا کیا آئیت
36:57سر کو ایمیل سینڈ کر دی
36:58نہیں یار میں نے تو نہیں کی تھی
37:00روشی بھوکھلا کے بولی
37:02شاید یہ ایمیل مجھ سے غلطی سے سینڈ ہو گئی
37:05روشی انگلی موں میں دبا کر
37:07ذرا شرمندہ ہوئی تھی
37:08ویلڈن آئیت بڑا شاندار کام کیا ہے تم نے
37:11نیدہ اسے گھور رہی تھی
37:13اب میں کیا کروں
37:14کیا سر سے جا کے بات کروں
37:15اگر انہوں نے مجھے انٹرشپ سے نکال دیا
37:18تو ممی نے تو مجھے چھوڑنا نہیں ہے
37:19روشی خود ہی اٹھ کے
37:21کچھ گھبراہت بھرے انداز میں
37:23طلح کے آفیس کی طرف جا رہی تھی
37:24طلح اپنے آفیس ڈیسک پر بیٹھا
37:26کچھ کام کر رہا تھا
37:28روشی نے آفیس ڈور نوک کر کے
37:29تھوڑا سا کھولا تھا
37:31اور دروازے پر رکھ کر ہی پوچھ رہی تھی
37:33سر میں آ جاؤں
37:34وہ اپنی نیچر کے برقلاف
37:36بہت تمیزدار بن رہی تھی
37:38طلح نے ایک نظر اسے دیکھا
37:40پھر سر کو آہستہ سے ہلایا تھا
37:42روشی اندر آ گئی تھی
37:43وہ بے دڑک جیسے کرسی پر بیٹھنے لگی
37:46مگر اسے طلح کی تنبیہ آدھ آ گئی
37:48وہ مودب انداز میں طلح کے سامنے کھڑی تھی
37:50جی مسائیت
37:52سر آئیم سو سوری
37:53مجھ سے غلطی ہو گئی تھی
37:54شاید اس دن میرا بی پی لو ہو رہا تھا
37:57آپ مجھے ایک چانس اور دے دیں
37:58روشی کو چونکہ پتا تھا
38:00وہ جھوٹ بول کر غلطی کو کور نہیں کر سکتی
38:03اس لئے اپنے انداز میں معافی مانگ کر
38:05معاملہ رفع دفع کرنا چاہتی تھی
38:07اوکے مسائیت
38:08لیکن آئندہ جب کہیں اپوائنٹ ہو جائیں
38:11تو اپنے باس کو جہنم میں نہیں بھیجئے گا
38:13پروپر ریزگنیشن لیٹر بنانا سیکھ لیں
38:15تلہ کی آنکھوں میں یہ تاثر تھا
38:18کہ دوسروں کے بی پی شوٹ کرا کے
38:20وہ اپنے بی پی کی بات کر رہی تھی
38:21شور سر
38:23روشی کسیانی سی کھڑی تھی
38:24ویسے آپ کے اس اوور کانفیڈنس کو
38:27میں سلیوٹ کرتا ہوں
38:28اپوائنمنٹ لیٹر ملنے سے پہلے ہی
38:30آپ ریزگنیشن لیٹر بھیج دیتی ہیں
38:32روشی کو پتا تھا
38:34تلہ اسے محذب انداز میں
38:36زلیل کر رہا تھا
38:37وہ کسیانی سی مسکراہت
38:38چھیرے پر لاکر وہاں سے جا رہی تھی
38:40تلہ اسے جاتا دیکھ کر
38:42کوف بھر انداز میں سر جھٹک کے
38:44اپنے سامنے کھلے کمپیوٹر کو دیکھنے لگا
38:46روشی فوٹو کاپیر کے سامنے
38:49کھڑی کچھ ڈاکیومنٹس کی فوٹو کاپی نکال رہی تھی
38:51اس کے بیک گراؤنڈ میں
38:53ہال میں بیٹھے اور آتے جاتے
38:55دیگر ایمپلائز بھی نظر آ رہے تھے
38:57ہاتھ میں ڈاکیومنٹس پکڑے
38:59وہاں شارق آیا تھا
39:00شارق روشی کی ایج گروپ کا تھا
39:02اس سے دو تین سال بڑا ہوگا
39:04اس نے ابھی فریش انجینرنگ انیورسٹی سے
39:06پاس آؤٹ کیا تھا
39:08اور یہاں ایک ٹرینی انجینئر کے طور پر
39:10اپائنٹ ہوا تھا
39:11وہ اچھی کھاتی پیتی فیملی سے
39:13تعلق رکھتا نظر آ رہا تھا
39:15اچھا سا فارمل پین شیٹ پہنا ہوا تھا
39:17گوڈ لکنگ لڑکا تھا
39:19ایسا کہ لڑکیاں اسے پسند کریں
39:21زندہ دل ہسنے بولنے والا
39:22شارق روشی کے نزدیک آیا تھا
39:25روشی نے فوٹو کاپیس نکالتے نکالتے
39:27ذرا چونک کر اس نئے لڑکے کو دیکھا تھا
39:30ہائی آئیم شارق عرسلان
39:31نیو ٹرینی انجینئر
39:33وہ دوستانہ لہجے میں بولا تھا
39:35آئیم روشی
39:36وہ جواباً ہلکا سا مسکرائی
39:38آئیمین میں آیت سلیمان ہوں
39:41روشی یقیناً آپ کا نکنیم ہوگا
39:49کر دیتی ہوں
39:50روشی نے سر میں سے پاؤں تا غور سے
39:53شارق کی شخصیت کا جائزہ لیا تھا
39:55اس کا شادی کا شوق
39:56ختم تو ابھی بھی نہیں ہوا تھا
39:58وہ شارق کو اسی نظروں سے جج کر رہی تھی
40:01سنائے آپ جس کی مدد کرتی ہے
40:03اس کا بھٹا بٹا دیتی ہے
40:05وہ بولا تو سنجیدگی سے تھا
40:07مگر اس کی آنکھوں میں شرارت تھی
40:09روشی ایک لمحے کے لیے سے
40:11گھور کے غصے سے دیکھ رہی تھی
40:12مگر پھر شارق کی آنکھوں میں شرارت
40:15دیکھ کر کھل کھلا کے ہس پڑی تھی
40:16میں چار دن آفیس کیا نہیں آئی
40:19بس سب کو میری برائیاں کرنے کا
40:21موقع مل گیا
40:22روشی دوستانہ لہجے میں بولی
40:24برائیاں نہیں آپ کے ایڈونچرز کی آفیس میں
40:27ہر جگہ دھوم ہے
40:28شارق سنجیدگی سے بولتا روشی کی خوبیاں گنوا رہا تھا
40:31مگر آنکھوں میں شرارت صاف ظاہر تھی
40:34ایکسپلوڈنگ کیٹل
40:36میٹنگ شیڈیول
40:37مسحب
40:38Oh وہ سب بس ایکسیڈنٹس تھے
40:43روشی ایک پل کے لیے اپنے بلنڈرز پر
40:45تھوڑی شرمندہ ہوئی تھی
40:46ایکسیڈنٹس اور نوٹ
40:48بٹائے مس سے
40:49آپ نے آفیس کو خاصا ایڈونچرز سا بنا رکھا ہے
40:51روشی نے شارق کو پسندیدگی بھری نظروں سے دیکھا تھا
40:56لڑکا گوڈ لوکنگ اور چارمنگ ہونے کے ساتھ
40:58ساتھ زندہ دل اور سمارٹ بھی تھا
41:00روشی نے پہلی ملاقات میں سے پاس کیا تھا
41:03لائک کومنٹس شیئر کریں اور تازہ ترین اپ ڈیٹس کے لیے سبسکرائب کریں
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