00:00सनातन धर्म में वजसावित्री पूर्णीमा का वरत बड़ा ही महत्व रखता है। इस दन सुहागिन महिलाएं अत्यंत भक्ति भाव के साथ कठिन नर्जुला वरत का पालन करती है। जो हर साल जेश्ट मास की पूर्णीमा को आता है। कहते हैं सची भक्ति से उस उपवास को
00:30वरत तूट सकता है। वट्सावित्री पूर्णीमा वरत के दिन मौसमी फल जैसे आम, केला, सेब, अंगूर, संत्रा, अनार, दूद और दूद से बनी चीज़े, सुखे मेवे, कुट्टूय, सिंहाडे का अटा, शकरकंद, आलू, नारियल, पानी और साबुदाने आदिक
01:00अब चाहें, तो इस वरत का पारण, वर्ट वरिक्ष की पूजा करने के परशाद भी कर सकते हैं। वहीं वर्ट पूनिमा का वरत जिला रखा जाता है, तो ऐसे में वरत के दोरान, आप चाय, कौफी, पानी, आदी चीजों का सेवन नहीं कर सकते हैं, लेकिन बर्गत के वर
01:30चावल, बेसन, दाले, प्याज, लहसुन, साधार नमक, मांस, मशली, अंडे, शराब, तमाको, तलेवे और मसालेदार भोजन का सेवन इस दिन नहीं करना है। वहीं वर्ट पूनिमा का वरत शाम को पूजा के बाद खोल सकते हैं, वरत खोलने से पहले वरत वरिक्ष की प�
02:00सब्सक्राइब करना ना भूलें।
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