क्या Subconscious Mind सच में हमारी ज़िंदगी को कंट्रोल करता है? | Does the Subconscious Mind Really Control Our Life? | Full Science Explained in Hindi
**Namaskar Doston!** क्या आपको लगता है कि आप अपने फैसले खुद लेते हैं? या फिर कोई छुपी हुई ताक़त — आपका **Subconscious Mind** — आपकी ज़िंदगी को चुपचाप कंट्रोल कर रहा है?
इस वीडियो में जानिए:
* Subconscious Mind क्या होता है? * ये हमारी लाइफ को कैसे चलाता है? * बचपन की programming कैसे पूरी ज़िंदगी पर असर डालती है? * और कैसे हम अपने subconscious mind को बदल सकते हैं?
🌟 पूरी वीडियो देखें, और कमेंट में बताएं — क्या आपने कभी अपने Subconscious की Power को महसूस किया है?
00:00कभी ये खयाल आया है कि दिन भर के हमारे छोटे बड़े फैसले
00:05क्या वो वाकई पूरे तरह हमारे अपने होते हैं
00:09या कहीं ऐसा तो नहीं कि दिमाग का कोई अंदेखा हिस्सा
00:13जिसे सबकॉंशिस माइंड या अवचेतन मन कहते हैं
00:16वो परदे के पीछे से मतलब हमारी जिन्दगी चला रहा है
00:19बिल्कुल और आज हम मन के इसी गहरे हिस्से की परताल कर रहे हैं
00:24हमारे पास जो जानकारी है उसमें कुछ मनोवे ज्यानिक शोध हैं
00:28कुछ विचारकों के लेख भी हैं
00:30जो बताते हैं कि ये अवचेतन मन असल में है क्या
00:33ये हमारी सोच और वेवार को कैसे बनाता है
00:37और क्या हम इसके असर को बदल सकते हैं
00:39तो चलिए समझते हैं
00:41आम तोर पे माना जाता है कि हमारा दिमाग मोटे तोर पे
00:45तीन लेवल पे काम करता है
00:46जी हां तीन स्तर, conscious यानि जागरिद मन जिससे हम सोच विचार करते हैं तरक वगेरा
00:52हां जिससे हम अभी बात कर रहे हैं
00:53बिल्कुल, फिर हैं subconscious यानि अवचेतन मन और तीसरा है unconscious यानि अचेतन मन
01:00और दिल्चस्प बात ये है मैंने पढ़ा था कि conscious mind जिसे हम मैं समझते हैं वो हमारे दिमाग की कुल ताकत का मतलब सिर्फ 5% ही इस्तिमाल करता है
01:10हाँ बिल्कुल सिर्फ 5% और बाकी का जो 95-95% बड़ा हिस्सा है वो subconscious mind के दाएरे में आता है
01:18बापरे 95%
01:20यही पर हमारी आदतें, हमारी भावनाएं, हमारे गहरे विश्वास और हाँ हमारी यादें सब स्टोर होती हैं
01:28सबसे जरूरी बात ये है कि ये हिस्सा जादतर autopilot पर चलता है
01:32autopilot मतलब
01:33मतलब हमारे रोजमर्रा के विवहारों और फैसलों को बिना हमारी सचेज जानकारी के अपने आप प्रभावित करता रहता है
01:40लेकिन ये ये प्रोग्रामिंग होती कैसे है मतलब इतना शक्तिशाली सिस्टम बनता कैसे आखिर
01:45इसका बेस इसकी नीव वो बचपन में ही पड़ जाती है खास कर जीरो से साथ साल की उमर के बीच
01:50अच्छा शुरू के सालों में हाँ उस दौरान बच्चों का दिमाग जो है वो मुख्य रूप से एक खास अवस्था में होता है
01:56थीटा ब्रेन वेव स्टेट कहते हैं उसे थीटा स्टेट जी वो क्या है इस अवस्था में दिमाग ना जानकारी को बिना किसी फिल्टर या रोक्टो के सीधे सोख लेता है जैसे एक स्पंज की तरह
02:08ओ अच्छा कोई फिल्टर नहीं कोई फिल्टर नहीं आसपास का माहौल माबाप की बातें जो भी अनुभव देखा वो सब सीधे अवचेतन में दर्ज हो जाता है
02:18उधारन के लिए
02:19जैसे मान लीजे कोई बच्चा बार-बार सुने या महसूस करे के गलतिया करना बुरा है तो ये विश्वास उसके अवचेतन का हिस्सा बन सकता है
02:27बले ही बड़े होकर वो सचेत रूप से सोचे के नहीं गलतियों से सीखते हैं पर अंदर वो डर बैठा रह सकता है
02:34और फिर यही बच्चपन की प्रोग्रामिंग हमारी पूरी जिन्दगी को अंजाने में गाइड करती है
02:39जैसे सुबह उड़ते ही फोन चेक करना या किसी खास सिचुएशन में एकदम से खुसा आ जाना
02:46बिलकुल सिर्फ आदतें और रियाक्शन ही नहीं बलकि हमारे गहरे विश्वास भी बहुत गहरे
02:52जैसे
02:53जैसे किसी का ये मानना कि मैं पबलिक में बोलने में अच्छा नहीं हूँ
02:56या पैसा कमाना तो भी बहुत मुश्किल काम है
02:59ये अकसर बचपन के अनुभवों या सीखी हुई बातों का ही नतीजा होते हैं
03:04जो अब सबकॉंश्यस से हमारे फैसलों और विवार को कंट्रोल कर रहे हैं
03:08ये वैसा ही है जैसे कभी-कभी गाड़ी चलाते हुए हम अपनी मंजिल तक पहुँच आते हैं
03:12और फिर सोचते हैं कि अरे रास्ते का ज्यादातार हिस्सा तो ध्यान दिये भी नहीं कर गया
03:16वो अपचेतन का आटो पाइलेट था
03:18हाँ होता है ऐसा और विज्ञानिक नजर्ये से भी तो यही बात सामने आती है है न
03:23मैंने पढ़ा था कोई डॉक्टर ब्रूस लिप्टन है हाँ डॉक्टर ब्रूस लिप्टन वो बायोलेजिस्ट है उनका मानना है कि हमारी लगभग 95% जिंदिगी इसी सबकॉंशियस प्रोग्राइमिंग से चलती है
03:3495% और कालियों ने भी कुछ कहा था ना
03:37जी हाँ कालियों का एक बहुत मशूर कथन है कि जब तक आप अपने अचेतन को चेतन नहीं बनाते यानि जब तक आप ये नहीं समझते कि अंदर क्या चल रहा है
03:45तब तक तब तक वो आपकी जिंदिगी को चलाता रहेगा और आप उसे किस्मत या भागय का नाम देते रहेंगे
03:51ओहौ ये तो काफी गहरी बात है तो यहाँ सबसे बड़ा सवाल क्या इस गहरी प्रोग्रैमिंग को बदला जा सकता है
03:59क्या हम इस आटो पायलिट को री प्रोग्राम कर सकते हैं
04:02हाँ देखे सुरोध तो यही बताते हैं कि यह संभव है, लेकिन यह आसान नहीं है, बिलकुल आसान नहीं है
04:07क्यों? मुश्किल क्यों है?
04:08क्योंकि आप सालों से चल रहे एक automatic system को बदलने की कोशिश कर रहे होते हैं
04:13यह आपकी आदद बन चुकी है
04:14पर हाँ कुछ तक्नीकें हैं जो मदद कर सकती है
04:17जैसे की?
04:18जैसे meditation यो mindfulness
04:20ये तक्नीकें दिमाग को शांत अवस्था में लाने में मदद करती है
04:24वो alpha या theta state जिसकी हमने बात की थी
04:27उस अवस्था में अवचेतन मन सुझावों के प्रती जादा खुला होता है
04:31जादा grand shield होता है
04:33और वो affirmations का भी जिक्र होता है
04:35मतलब रोजाना खुद से अच्छी positive बाते कहना
04:39जिससे मैं confident हूँ या मैं ये कर सकती हूँ
04:43जी सकारात्मक पुष्टी या affirmations
04:46इसके पीछे का idea ये है कि लगातार दोहराओ से बार बार बोलने से
04:52अवचेतन में नए neural pathways बनते हैं
04:56नए रास्ते बनते हैं
04:57जो पुराने negative विश्वासों को धीरे धीरे कमजोर कर सकते हैं
05:03इसे आप अपने subconscious mind को नए instructions देने जैसा समझ सकते हैं
05:08मतलब उसे नही आदत डालना
05:10बिलकुल
05:10इसी तरह सोने से ठीक पहले जब आब सोने ही वाले होते हैं
05:14उस वक्त positive message चुनना या visualization करना भी एक तरीका माना जाता है
05:19क्योंकि उस समय conscious mind का पहरा वो जो तर्क करने वाला हिस्सा है वो कमजोर होता है
05:25तो ये subconscious mind एक तरह से किसी शक्तिशाली जिन जैसा हुआ
05:30अलादीन के चिराग जैसा
05:32एक तरह से कह सकते हैं
05:36अगर इसे सही दिशा दी जाए पॉजिटिव विश्वास दीए जाएं
05:39तो ये हमें अपने लक्ष पाने में मदद कर सकता है
05:42हाँ काफी हद तक placebo effect के बारे में सुना होगा
05:46हाँ सुना है जिसमें सिर्फ यकीन से ही फर्क पड़ जाता है
05:49वही वो इसका एक classic उधारन है
05:51जहां सिर्फ विश्वास की ताकत से शारिरिक या मानसिक स्थिती में बदलाव आ जाता है
05:57लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है
05:59दूसरा पहलू?
06:01मतलब?
06:01मतलब?
06:02अगर अवचेतन में negative programming है
06:04जैसे मैं किसी लायक नहीं हूँ
06:07या मेरे साथ हमेशा बुराई होता है
06:10तो यही शक्ती, यही जिन हमारे खिलाफ काम करने लगता है
06:14इसे self-sabotage कहते हैं
06:17मतलब हम अंजाने में ही अपनी सफलता के रास्ते में रोडे अटकाने लगते हैं
06:21ये तो सोचने वाली बात है
06:23जैसे दो लोगों को एक जैसा मौका मिले
06:26पर एक काम्याब हो जाता है और दूसरा नहीं
06:29इसमें उनके अवचेतन विश्वास का रोल हो सकता है
06:33बहुत बड़ा रोल हो सकता है
06:34एक का subconscious कह रहा है तुम कर सकते हो
06:36दूसरे का कह रहा है ये तुमारे बसका नहीं है
06:39नतीजा सामने है
06:40जो बाते हम लगातार खुद से कहते हैं जिन विचारों पर सबसे ज़ादा ध्यान देते हैं
06:46अवचेतन मन धीरे धीरे उन्हें ही सच्चाई मानने लगता है
06:49इसलिए ये जानना बहुत जरूरी है कि हमारे अंदर की बाच्चीत कैसी चल रही है
06:53क्या सोच रहे हैं हम अपने बारे में
06:55अपने विचारों के प्रती जागरुकता ये पहला कदम है
06:58तो कुल मिला का ये अवचेतन मान कोई रहस्यमई कहानी नहीं
07:04बलकि हमारे मन का एक शक्तिशाली वैज्ञानिक आधार वाला हिस्सा है
07:09इसे समझना और इसके साथ काम करना सीख कर
07:13हम अपनी जिन्दगी की दिशा बदल सकते हैं
07:15अतीत की प्रोग्रामिंग जैसी भी रही हो
07:18आज वर्तमान में जागरुकता और सही कोशिशों से भविश्य को बदला जा सकता है
07:24सही कहा
07:36इस चर्चा के बाद एक सवाल दोस्तों सोचने लायक है
07:39आपकी जिन्दगी के कौन से पैटर्न्स या नतीजे आपको लगते हैं
07:44कि आपकी सचेत इच्छा के बजाए कहीं न कहीं अवचेतन प्रोग्रामिंग से आ रहे हैं
07:49इस पर विचार जरूर कीजिएगा अगली बार फिर मिलेंगे एक और दिल्चस्प विश्य के साथ नमस्कार
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