Skip to playerSkip to main content
क्या आपने कभी ऐसा त्योहार देखा है जहाँ हजारों लोग एक-दूसरे पर लाठियाँ बरसाते हैं, खून बहता है और मौत तक हो जाती है – और फिर भी लोग इसे आस्था का उत्सव मानते हैं?

देवरगट्टू बन्नी महोत्सव, आंध्र प्रदेश का एक ऐसा अनोखा और खतरनाक त्योहार है जिसे देखने हर साल हजारों लोग आते हैं। इस वीडियो में जानिए:
- बन्नी महोत्सव का इतिहास और पौराणिक कथा
- कैसे होती है लाठियों की खतरनाक लड़ाई
- सुप्रीम कोर्ट का बैन और प्रशासन की कोशिशें
- और 2023 की भयानक घटना जिसमें 3 लोगों की जान चली गई

क्या यह परंपरा है या अंधविश्वास?
वीडियो को पूरा देखें और अपनी राय कमेंट करें!

📌 Like | Share | Follow
📢 और बेल आइकन दबाएं ऐसे और अनोखे वीडियो के लिए!

🔔 **DISCLAIMER:**
इस वीडियो का उद्देश्य केवल ऐतिहासिक तथ्यों, लोककथाओं और सांस्कृतिक परंपराओं को प्रस्तुत करना है। हमारा इरादा किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं है। हम किसी भी प्रकार की हिंसा, अंधविश्वास या खतरनाक गतिविधियों को बढ़ावा नहीं देते। वीडियो को ज्ञानवर्धक और सूचना के रूप में लें।
वीडियो में दिखाई गई घटनाएं और चित्र कुछ दर्शकों को असहज कर सकते हैं। कृपया अपने विवेक से देखें।

#BanniFestival #Devaragattu #DangerousFestival #IndianTradition #RealStory #HorrorFestival #IndianCulture #ReligiousRituals #AndhraPradesh #BanniMahotsav

Category

😹
Fun
Transcript
00:00नमस्कार दोस्तो नमस्कार आज हम आपको एक ऐसी जगा ले चल रहे हैं आंदरप्रदेश में कुर्नूल जिला देवर घटू गां जे जहां हर साल दशेरा की रात एक ऐसा उत्सव होता है जिसे सुनकर शायद आप थोड़ा चौंक जाएं हाँ बन्नी महुत्सव बन्नी मह�
00:30मतलब ही लाठी है बापरे मतलब आस्था के नाम पर जी आस्था परमपरा और खत्रा सब एक साथ जहां हर साल दरजनों लोग घायल होते हैं हड्डियां तूटती हैं और कभी-कभी तो हाँ दुखत रूप से जाने भी गई हैं तो यह सब शुरू कैसे हुआ मतलब इसकी �
01:00मड़ी और मल्लासुर और वो लोग मतलब वहां जो रिशी मुनी रहते थे ना उनको बहुत परेशान करते थे अच्छा तो फिर देवताओं का हस्तक्षिप हुआ होगा जैसे अकसर होता है कथाओं में बिलकुल रिशियों ने तपस्या की और फिर भगवान शिव और दे�
01:30कैसा वर्दान उन्होंने मांगा कि हर साल इस दिन उनकी याद में नर्वली दी जाए आरे नर्वली ये तो और भी भयानक बात है हाँ पर भगवान ने उन्हें समझाया नर्वली की जगा एक तरह का प्रतिकात्मक बलीदान प्रतिकात्मक मतलब
01:47मतलब की भक्त थोड़ा खून बहा कर ही उस परंपरा को निभाएं तो माना जाता है कि ये जो लाठियों की लडाई है ना जिसमें खून बहता है वो एक तरह से उन्हीं राक्षसों को शांत करने के लिए है
01:59श्ला तो ये सिर्फ एक रात की लडाई नहीं है किसी बड़े उत्सव का हिस्सा है
02:04सही कहा ये असल में तो श्री मलेश्वर स्वामी मंदिर का ग्यारा दिन का उत्सव है
02:11ग्यारा दिन हाँ इसमें वो पूजा वगरे जैसे गणपती पूजा, कंकन धारन
02:17हाँ हाँ वो पारंपरिक रस्म है
02:19ध्वजा रोहण वगेरा
02:20जी
02:20वो सब होता है
02:22असली जो माहोल बनता है वो विज्या दश्मी की रात को
02:25जब वो मूर्तिया नीचे लाते हैं
02:27बिल्कुल
02:27भगवान मल्लम्मा और मलेश्वर स्वामी की मूर्तियां
02:31भग तुन्हें मशालों की रोश्णी में लाठियां लेकर पहाई से नीचे लाते हैं
02:35और बस वहीं से शुरू हो जाती है वो खतरनाक लड़ाई
02:39ठीक वहीं से
02:40देवगट्टू और आसपास के गाउं हैं करीब पांच गाउं
02:44वो दो गुठों में बढ़ जाते हैं
02:46जैसे एक तरफ कुथा पेटा, निराने की ठांडा, निरानी की
02:51और दूसरी तरफ
02:52दूसरी तरफ यलार्थी, सुल्लिवन, अलूरू, नित्रावती, ये गाउं
02:57और इनका मकसद क्या होता है इस लड़ाई में? मतलब क्यों लड़ते हैं?
03:00मकसद होता है मूर्तियों पर कबजा करना
03:02हर गोट चाहता है कि मूर्तियों को वो अपने कबजे में लेकर अपने गाउं की तरफ ले जाए
03:07ऐसा करना शुब मानते हैं
03:09और इसी के लिए लाठियों से?
03:10हाँ, लंबी बांस की लाठियां
03:13उनसे भयंकर लड़ाई होती है
03:15कुछ लोग तो ये भी कहते हैं
03:17कि कभी-कभी लाठियों के सिरों पर वो धातू की खीले जैसी भी लगी होती है
03:22तब तो ये और भी ज़्यादा खतरनाक हो जाता होगा
03:25जी हाँ
03:26और आंकडे तो डराने वाले हैं
03:28अगर हम पिछले कुछ साल ही देखें
03:292024 में 70 से ज्यादा घायल
03:32हाँ
03:332023 में तो हद हो गई
03:35तीन मौतें और 100 से ज्यादा घायल
03:38जी वो साल बहुत दुखत था
03:40और 2022 में 50 से ज्यादा
03:422021 में 60 से ज्यादा घायल
03:44मतलब सिर्फ भटना, हाथ-पैर तूटना
03:46ये तो जैसे आम बात हो गई है वहाँ
03:48हाँ, ये मानवियक शती का पहलू
03:50बहुत ही गंभीर है
03:51और देखिए ऐसा नहीं कि कोशिश है नहीं हुई
03:54सुप्रीम कोट ने भी जहां तक मुझे याद है
03:572008 में
03:58हाँ, मैंने भी पढ़ा था 2008 ने बैन लगाया था
04:01जी, इस हिंसा की वज़ा से
04:02तो फिर ये रुका क्यों नहीं, मतलब बैन का कोई असर ही नहीं हुआ
04:05देखिए ये बड़ा मुश्किल सवाल है
04:07प्रशासन हर साल कोशिश करता है
04:09धारा 144 लगाते है
04:12पुलिस बल तैनात होता है
04:13जागरुकता अभ्यान
04:15हथ्यारों पर रोक सब करते है
04:17लेकिन लोगों की आस्था इतनी गहरी है
04:20और ये उनकी पहचान से परंपरा से जुड़ाया ना
04:23कि वो मानते हैं कि इस से भगवान का अशिरवाद मिलेगा
04:27तो ये सब बाते प्रशासन की कोशिशों पर भारी पड़ जाती है
04:31मतलब 2023 वाली घटना तो ये दिखाती है कि इतने इंतजामों के बाद भी
04:35बिल्कुल तीन जाने चली गई
04:37ये दिखाता है कि जड़े कितनी गहरी है
04:40वाके हैरत होती है कि लोग जान का इतना बड़ा जोखिम उठागर भी इसे जारी रख्यों है
04:43आस्था के लाबा और क्या वज़ा हो सकती है
04:45आस्था तो सबसे बड़ी वज़ा है
04:47लोग मानते हैं कि इसमें भाग लेने से देवता खुश होते हैं
04:51गाउं पर कोई मुसीबत नहीं आती
04:53फसल अच्छी होती है
04:54अच्छा फसल से भी जुड़ा है ये
04:56हाँ और गाउं के गौरव से भी
04:58मतलब किस घुटने मूर्तियां जीती
05:00ये उनके लिए प्रतिष्ठा का सवाल होता है
05:03इसमें कुछ और अनोखी रस्में भी होती हैं शायद
05:06मैंने कुछ भविश्यवानी के बारे में सुना था
05:08हाँ वो लड़ाई की अगली सुबह होती है
05:10एक रस्म है पादलक्टा रस्म
05:13पादलक्टा ये क्या है
05:15इसमें मंदिर के जो मुख्य पुजारी होते हैं
05:18वो प्रतिकात्मक रूप से अपनी जांक पर एक हलका सा चीरा लगा कर
05:23कुछ बूने खून भगवान को अर्पित करते हैं
05:26ओ उसी पुराने वर्दान की याद में
05:29जी और उसके ठीक बाद पुजारी भविश्यवानी करते हैं
05:32भविश्यवानी? इस बारे में?
05:34आने वाले साल के बारे में गाउं कैसा रहेगा, मौसम, फसल, इन सब चीजों पर
05:40और लोग इस पर बहुत विश्वास करते हैं
05:43अच्छा, तो ये भी एक बड़ा कारान है लोगों के जुड़े रहने का?
05:46हाँ, बिल्कुल, और फिर अंत में मूर्तियों को वापस मंदिर के पास सिंहासन कट्टा नाम की जगा पर ले जाते हैं
05:53तो ये सिर्फ दे और घट्टों के ही लोग नहीं होते होंगे, बहार से भी लोग आते होंगे?
05:56बहुत लोग आते हैं, आंद्र के अलावा कर्णाटक, तमिलनाडू, तिलंगाना, इन राज्यों से भी हजारों भक्त और दर्शक पहुँचते हैं
06:05दर्शक भी?
06:06हाँ, अब तो कुछ विदेशी परिये तक भी आने लगे हैं, इस अनोखे और हाँ, खतरनाक स्पेक्टिकल को देखने
06:13जाहर है फिर तो मीडिया का भी ध्यान जाता होगा, डॉक्यमेंटरीज बगरा बनती होंगी, बहस भी होती होगी
06:18हाँ, निश्चित रूप से नैशनल, इंटरनाशनल मीडिया कवर करता है, और बहस तो हमेशा रहती है, कि ये संस्कृती है या अंधविश्वास, परमपरा है या खतरा, क्या इसे बचाना चाहिए या इस पर रोक लगनी चाहिए, ये आस्था और सुरक्षा की बीच का व
06:48हैं, लोगों का गहरा विश्वास है, तो दूसरी तरफ हर साल होने वाली ये चोटें, ये हिंसा, ये वाकी चिंता जनक है, और ये सवाल छोड़ जाता है कि ऐसी परमपराओं का भविश्य क्या हो, जी, क्या इने ऐसे ही चलते रहना चाहिए, या फिर इनसान की सुरक्षा
07:18झाल, झाल, झाल, झाल, झाल, झाल, झाल, झाल, झाल, झाल, झाल, झाल, झाल, झाल, झाल, झाल, झाल, झाल, झाल, झाल, झाल, झाल, झाल, झाल, झाल, झाल, झाल, झाल, झाल, झाल, झाल, झाल, झाल, झाल, झाल, झाल, झाल, झाल, झाल, झाल, झाल, झाल, झाल, झाल, �
Be the first to comment
Add your comment

Recommended