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क्या आप जानते हैं कि पेरू के रेगिस्तान में 2000 साल पुरानी ऐसी रहस्यमयी लकीरें हैं जिन्हें सिर्फ आसमान से देखा जा सकता है? ये हैं Nazca Lines — विशाल चित्र जो ज़मीन पर कुछ नहीं लगते लेकिन ऊपर से देखने पर हैरान कर देते हैं।

इस वीडियो में जानिए:
🔍 Nazca Lines का इतिहास
👽 एलियन कनेक्शन की थ्योरी
📏 इतनी सटीक आकृतियाँ कैसे बनीं?
🧭 धार्मिक और खगोलीय पहलू
📸 नई खोजें (2019-2023)

क्या ये संकेत हैं अंतरिक्ष यात्रियों के लिए?
या फिर ये प्राचीन कला का अद्भुत नमूना?

👇 अपनी राय कमेंट में ज़रूर बताएं!

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Transcript
00:00नमस्कार, आज हम एक ऐसी जगा चल रहे हैं जहां जमीन पर खीची लकी रहें आसमान से ही समझाती हैं, पेरू की नासका लाइन्स
00:08नमस्कार हाँ, नासका लाइन्स वाकई हैरान करने वाली पहेलिया हैं
00:13हमारे एक श्रोता ने भी इस पर कुछ मटीरियल भेजा था जिसमें हाल की खोजों से लेकर वो एलियन वाले सिध्धान तक सब कुछ है
00:19बिलकुल, ये करीब 2000 साल पुरानी विशाल आकरतियां, किसने बनाई और क्यों, ये सवाल आज भी बना हुआ है
00:28तो चलिए, आज इस रहसे को थोड़ा कुरेतते हैं, समझने की कोशिश करते हैं कि ये क्या हो सकता है
00:33कोई धर्मिक अनुष्ठान, खगोलिये कैलेंडर या फिर कुछ और?
00:38आ, इनकी खोज भी तो अचानकी हुई थी है ना, मतलब 1920 के दशक में जब प्लेन उड़ने लगे
00:45हाँ, और फिर 1939 में, वो अमेरिकी पुराप्तत्व विद पॉल कॉसोग, उन्होंने इसे दुनिया का सबसे बड़ा खगोलिये कैलेंडर के दिया
00:53सही, और तभी से ये सवाल और गहरा गया, कि भई, जिन नासका यूगों के पास उड़ने का कोई साधन नहीं था, उन्होंने इतनी सटीक, इतनी विशाल आकृतियां कैसे बना डाली
01:04कमाल है, मतलब कुछ रेखा हैं तो 10 किलो मीटर तक सीधी हैं, और वो डिजाइन्स, 300 से ज्यादा जामितिये शेप्स और करीब 70 जानवरों पक्षियों की आकृतियां
01:14हाँ, जैसे वो हम्मिंग बर्ड, बंदर, मकडी और एक वो जिसे लोग एलियन जैसे आदमी कहते हैं
01:22और साइज, कुछ तो 400 मीटर तक चौड़े हैं, जैसे कोई बड़ा स्टेडियम हो
01:26हाँ, अविस वसनिय है, बनाने के तरीके पर अब थोड़ी सहमती बनी है
01:31माना जाता है कि नाज का सभ्यता, जो लगभग 500 इसा पूर्व से 500 इस्वी तक थी
01:38उन्होंने कैसे किया होगा?
01:39अम, लगता है कि उन्होंने पहले छोटे स्केल पर डिजाइन बनाया होगा, धागों और लकडियों की मदद से
01:45फिर उसी को बड़े पैमाने पर जमीन पर उतारा, शायद ग्रिड मेथोड से पॉइंट्स मार्क करके
01:52अच्छा, मतब स्टेप बाई स्टेप
01:54हाँ, और तकनीक ये थी कि ओपर की जो गहरे रंग की पत्रीली मिट्टी है, उसे हटा दिया
02:00नीचे के हलके रंग की मिट्टी दिखने लगी, और वो चमकदार रेखाएं बन गई
02:05और रेगिस्तान का सूखा मौसम?
02:07उसने इने बचा लिया
02:08बिलकुल, हजारों साल तक, ठीक है, बनाने का तरीका समझाता है
02:12पर क्यूं? मकसद क्या था? एक आइडिया तो धार्मे का नुश्ठान का है
02:17है, है ना? हाँ
02:18हाँ, ये एक मजबूत थ्योरी है
02:20देखिए, नासका लोग रेगिस्तान में रहते थे
02:23पानी उनके लिए सब कुछ था
02:24सही
02:25तो कई रेखाएं और आकृतियां पहारों में जो पानी के स्रोत है
02:29उनकी तरफ इशारा करती है
02:31तो हो सकता है कि ये पानी और खेती के देवताओं को खुश करने के लिए बनाएगे पूजा स्थल हो
02:37शायद लोग इन रेखाओं पर चलते हों किसी रस्म के तहत
02:41और वो कैलेंडर वाली बात पॉल को सुक की
02:44हाँ वो भी है
02:45कुछ रेखाएं जरूर सूरज या चांद के उगने डूबने की खास दिशाओं से मैच करती है
02:50जैसे संक्रान्ती के समय
02:52तो ये खेती या धारमेक कामों के लिए एक तरह का कैलेंडर हो सकता था
02:56लेकिन सारी रेखाएं नहीं करती मैच
02:58नहीं सारी नहीं
02:59तो ये पूरी कहानी नहीं बताता
03:01तो फिर आता है वो वाला एंगल जिसने इसे दुनिया भर में फेमस कर दिया
03:05Aliens, वो Erich Von Daniken वाली बात
03:08हां हां
03:09Erich Von Daniken ने अपनी किताब Chariots of the Gods में ये आईडिया दिया
03:14कि ये aliens के spaceship के लिए Landing Strip थी
03:18Landing Strip, रेकिस्तान में
03:20हां, और वो जो बड़ी-बड़ी आकरतियां है
03:22वो आसमान से दिखने वाले signal थे उनके लिए
03:25देखी ये थियोरी साइंटिफिक कम्यूनिटी में मानी नहीं जाती, कोई ठोस सबूत नहीं है
03:31पर पॉपुलर बहुत है
03:32बहुत ज्यादा, इसने लोगों की कलपना को जैसे पंख लगा दिये
03:36लेकिन ये एक तरह से नासका लोगों की अबमी काबिलियत को कम आखने जैसा भी है
03:40सही का, अच्छा क्या कुछ नया भी पता चला है हाल में
03:44मैटीरियल में ड्रोन स्टडी का जिक्र था
03:46हाँ, बिल्कुल, 2019 में ड्रोन्स की मदद से 50 से ज्यादा नई पहले अंदे की आकरतिया मिली
03:54कुछ तो इंसानी चेहरों जैसी थी, थोड़ी डरावनी सी
03:57अरे वाद, और 2023 में भी कुछ मिला
04:00हाँ, 2023 में एक और नई आकरती मिली, एक बिल्ली जैसी
04:04तो मतलब खोज अभी जारी है
04:06इसका मतलब है कि अभी भी बहुत कुछ है जो हम नहीं जानते
04:09बिल्कुल, टेकनोलोजी बहतर हो रही है, तो नई चीजें सामने आ रही है
04:14पर वो बुनियादी सवाल, इतनी सटीकता कैसे, असली मकसद क्या था
04:20या शायद एक मकसद नहीं था, अलग-अलग समय पर अलग-अलग मकसद रहे हों, ये सब अनसुलजे ही है
04:27तो कुल मिलाकर नास का लाइन्स आज भी एक बड़ा रहसे हैं, प्राचीन लोगों की उननत सूच, उनकी इंजीनियरिंग, उनकी आस्था, या फिर कुछ और ही
04:37हाँ, और ये अब युनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट है, इनकी देखभाल करना भी एक बड़ी चुनौती है, क्लाइमिट चेंज से, लोगों की आवाजाही से इनको खत्रा है
04:47ये रेखाएं हमें याद दिलाती हैं कि प्राचीन सब भेताएं कितनी अद्भूत और जटिल थी
04:53जो मटीरियल हमें मिला, उसे देखने के बाद एक बात और सोचने लगाऊं
04:57कहीं ऐसा तो नहीं कि हम आज की टेकनालोजी और सोच से प्राचीन लोगों के मकसद को समझने की कोशिश में कुछ ज़ादा ही कॉम्प्लिकेट कर रहे हो
05:05शायद जवाब हमारी सोच से ज़ादा सीधा हो, या आप शायद और भी सादा पेचीदा
05:10ये भी एक पहलू है सोचने का
05:12चलिए, आज की इस घहरी चर्चा के लिए बहुत शुक्रिया
05:15अगर आपको ये रहसे में सफर पसंद आया हो, तो इसे लाइक और शेर ज़रूर करें
05:20और हाँ, चानल को सब्सक्राइब करना ना भूलें
05:22अगली बार फिर मिलेंगे एक और अनसुलजे रहसे के साथ
05:26तब तक के लिए अलविदा
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