Biwi Kiraye Par Dene Wala Shohar || Ajeeb Shohar Ki Anokhi Kahani
Karobari sohar Jab paison ki jarurat padi to apni biwi ko kirae per de Diya budhe shakhs ko FIR use budhe shakhs ne iske sath Jo kam Kiya vah har ek insan ko sochne per aur hairan karne per yakinan majbur Kar dega apni biwi ko lekar dusre shahar karobar karne ke liye Jab ja raha tha raste mein kuchh daku inke paise aur kapde loot Lete Hain Jab kuchh pass Nahin bachta to ek karbhari shakhs ke pass jakar apni biwi ko ek man ke liye kirae per de deta hai FIR Uske bad vah maldar shakhs ki biwi ke sath aisa kam karta hai to yakin hai heron kar dene wala tha Hindi Urdu story
00:00नदीम नाम का एक नौजवान, गरीबत के हाथों मजबूर होकर, अपनी बीवी को एक महीने के लिए बेचने पर मजबूर हो गया, एक मुआहिदा किया गया, और बदले में कुछ रकम ले ली गई, जिस शक्स के हाथ वह औरत गिर्वी रखी गई, उसके मुह में दात भी न
00:30लेकिन आगे क्या हुआ, क्या वह औरत अपने शोहर के पास लौट आई, या वह सारी जिंदगी उस बूढ़े दरिंदे की कायद में रह गई, एक मुसाफिर नदीम अपनी बीवी रूबीना के साथ अपने गाम से दूसरे शहर मजदूरी की तलाश में निकला, दिन भर का
01:00गए, यहां तक कि उनके पहनने के कपड़े और रास्ते का जरूरी जादे रहा भी छीन लिया, दोनों मिया बीवी को खाली हाथ तनह छोड़ कर डाकू फरार हो गए, सब कुछ लुटने के बाद नदीम और रूबीना पर जैसे कयामत तूट पड़ी, एक अंजान शहर में
01:30कि जीना कितना मुश्किल है, नदीम रूबीना का हाथ थामे खमोशी से शहर की तरफ चल पड़ा, दिल ही दिल में सवाल उठ रहे थे कि अब क्या होगा, हमजदूरी का कोई मौका है, ना खाने के लिए एक लुकमा मैस्सर, हर कدم के साथ उसकी मायूसी बढ़ती जा, रही �
02:00क्यों न अपनी हालत इनके सामने रख दूँ, यह सोचकर वहरूबीना को साथ लेकर फकीर बाबा के करीब जा पहुंचा, नदीम ने बड़े अदब के अंदाज में सारी कहानी सुनाई और कहा, बाबा साई, हम दोनों लुट गए हैं, ना खाने को कुछ है, ना पीने को, म
02:30मेरे अपने हाथ भी खाली है, लेकिन मैं एक ऐसे नेक दिल सेट को जानता हूँ जो जरूरत मंदों की मदद करता है, तुम लोग उसके पास जाओ और अपनी तकलीफे उसे सुनाओ, शायद अल्लह तुमारे लिए कोई रास्ता निकाल दे, फकीर बाबा ने नदीम को मश�
03:00दे, नदीम ने फकीर बाबा का शुक्रिया अदा किया और रूबीना का हाथ थामे सेट अकबाल के घर की तरफ रवाना हो गया, रूबीना बेहत हसीन और दिलकश थी, उसकी मासूमियत और खुबसूरती ऐसी थी कि जो देखता पल भर को देखता रह जाता, नदीम अपनी
03:30मगर नदीम को इस बात का कोई अंदाजा ना था, वह तो सीधे दिल से सेट के सामने जुक कर आजिजी से बोला, सेट साहब महरबानी फर्मा कर मुझे थोड़े से पैसे उधार दे दीजिए, सेट इकबाल का अपना एक उसूल था, वह बिना जमानत कि किसी को एक रुपया
04:00उसके पास ना जेवर था ना कोई कैमती सामान, कुछ लम्हें सोचने के बाद वह बोला, सेट साहब मेरे पास कुछ भी नहीं है, बस आजिजी से हाथ जोड़कर दरखवास्त करता हूं कि मेरी मदद कीजिए, सेट, इकबाल ने संजीदा लहजे में कहा, कवायत के बगएर
04:30मेरी बीबी रूबीना को अमानत के तोर पर अपने पास रख लीजिए, और बदले में मुझे कुछ रकम दे दीजिए, मैं जल्दी ही कारोबार करके आपका सारा कर्ज मैसूद वापिस कर दूँगा, सेट इकबाल यह सुनकर खुश हो गया, उसे तो वैसे ही रूबीना प
05:00वह खौफजदा होकर चीख पड़ी, अल्लाह का वासिता है सेट साहब, मेरे कमरे से चले जाएए, मगर सेट अपनी हवस में अंधा हो चुका था, नरम लहजे में कहने लगा, रूबीना तुम जैसी हसी हसीन औरत के लिए तो दुनिया कॉर्बान की जा सकती है, नदीम को �
05:30मुझे कुछ दिनों की महलत दीजिये, मैं खुद सोच लूँगी की मेरा क्या बनेगा, सेट को लगा कि रूबीना मानने लगी है, इसलिए उसने उसे कुछ दिन की महलत दे दी, उधर नदीम कर्ज की रकम लेकर अपनी बीवी रूबीना को सेट के पास गिरवी छोड़कर
06:00वह किसानों से कम दामों में प्याज लेता और तूसरे शहरों में जाकर अच्छे मुनाफे पर बेच देता, चंद हफ्तों में ही उसके हाथों में पैसा आने लगा, अल्ला ने उसकी महनत में खूब बरकट डाल दी, नदीम के दिन फिरने लगे, और वह खुशी खुशी �
06:30आरा हिसाब चुकाने आया हूँ, अब महरबानी फर्मा कर मेरी बीवी रूबिना को वापिस दे दीजिए, लेकिन सेठ अकबाल ने सरदाह भरी और मसनुई अफसोस के साथ बोला, भाई नदीम, तुम्हें एक तलक हकिकत सुनानी है, करीब दो महीने पहले रूबिना सخت ब
07:00जैसे किसी ने मुठी में जकर लिया हूँ, खामोश आखों से सेठ का चहरा देखता रहा, और फिर बोजिल कदमों से वहां से निकल आया, नदीम सीधा उस मुखाम पर जा पहुँचा, जहां पहली बार उसकी मुलाकात फकीर बाबा साइं से हुई थी, खामोशी से जाकर �
07:30नदीम ने नम आखों के साथ आ भरी और बोला, बाबा साइं, रूबीना अब इस दुनिया में नहीं रही, सेठ ने कहा कि वह बीमारी के 22 मर गई है, मैं अपनी कस्मत का लिखा समझ कर खामोशी से वापिस आ गया हूँ, पकीर बाबा ने नदीम की बात सुनी तो हलके से म�
08:00अगर अपनी बीवी को पाना चाहते हो तो फौरण सुल्तान शमसुद्दीन के दर्बार में जाकर इंसाफ की फर्याद करो, हमारा सुल्तान बड़ा इंसाफ पसंद है, वह तुम्हें हक जरूर, दिलाएगा, नदीम को अब सारी बात समझ में आ गई, दिल में उम्मीद की
08:30अपनी बीवी रूबीना को अमानत के तौर पर सेट के पास छोड़ा था, वादा था कि जल्दी करज वापिस कर दूँगा, आज मैं सारा करज लेकर आया हूँ, मगर सेट कहता है कि मेरी बीवी फौत हो गई, कोई निशान ना कोई गवाही, मैं इंसाफ की भीक मांगता ह�
09:00अबाद सेट अकबाल दरबार में हाजर कर लिया गया, सुल्तान ने उससे सخت लहजे में सवाल किया, क्या यह सच है कि बंजार नदीम ने अपनी बीवी को तुम्हारे पास गिरवी रखा था, सेट अकबाल ने जूट छुपाते हुए हिचकिचाते हुए जवाब दिया, ज
09:30अकबाल ने थोड़ा जिजखते हुए कहा, जी हाँ, हुजूर, वाला, सुल्तान ने मजीद पूछा, तो फिर अब यह अपनी बीवी को क्यों नहीं ले सकता, सेट अकबाल ने मसनुई, अफसोस से भरे लहजे में जवाब दिया, जहां अपना, ये गरीब आदमी बहुत �
10:00कि मर्जी के आगे किसका बस चलता है, मैं खुद दिल से अफसुर्दा हूँ, अब भला मैं खुदा के पास जाकर उसे कैसे वापिस ला सकता हूँ, सुल्तान शमसुदीन ने गहरी नजरों से उसे देखा, और सखती से पूछा, क्या तुम्हारे पास कोई गवाह है जो ये
10:30और चार आदमी ऐसे हैं जिन्होंने रूबिना का जनाजा ले जाकर कबरिस्तान में दफनाया था, सुल्तान ने फौरण हुक्म दिया कि हकीम और वह चारों आदमी दरबार में हाजिर किये जाएं, सेथ इकबाल इतने यकीन और नर्मी से बात कर रहा था कि दरबार में मौ
11:00दिलाते, लेकिन अब हम भी कौदरत के फैसले के सामने बेबस हैं, यह सुनकर नदीम का दिल जैसे बोज दले दब गया, आँखों में नमी लिये, ठके कदमों से दरबार से बाहर निकलाया, नदीम सीधा फकीर बाबासाई के पास पहुँचा और दरबार में पेश आने व
11:30कि उसने बिना तहकी किये सेट की, बातों पर भरोसा कर लिया, लेकिन अब भी वकख्त है, मेरी बात गौर से सुनो, फकीर ने नदीम को करीब बुला, कर कहा, जाओ सुल्तान के दरबार में और अरज करो बादशाह सलामत, अगर आप चाहें तो तीन घंटे के लिए अपनी
12:00बार में जाकर नदीम ने पूरे अदब से सुल्तान के सामने अरज किया, जहां अपना अगर तीन घंटे के लिए फकीर बाबा साइं को अपना तक्त सौब दें, तो शायद मैं इंसाफ हासिल कर सकूँ, सुल्तान शमसुद्दीन ने थोड़ी हैरानी से नदीम को देखा, �
12:30माँषे लिए फकीर बाबा साइं को अपने तक्त पर बिठाया, फकीर ने दर्बार संभालते ही बुलंद आवाज में हुक्म दिया, सेट इकबाल को पेश किया जाए, चंद लम्हों बाद सेट इकबाल हाथ जोड़ते हुए दर्बार में लाया गया, फकीर ने गहरी आव
13:00बुलंद आवाज में हुक्म दिया
13:01इन गवाहों को अभी पेश करो
13:04सेट के बुलाए गए सब गवाह
13:06एक-एक करके दर्बार में पेश होने लगे
13:09कीर बाबा ने सबसे पहले हकीम को बुला कर सवाल किया
13:13बताओ हकीम सहब क्या तुम वाकई इस बात
13:16की गवाही दे सकते हो की रूबीना का इंतकाल हुआ था
13:19पकीर ने हकीम से पूछा
13:21तुम ये कैसे कह सकते हो की बंजारें की बीवी का इंतकाल हुआ था
13:25कीम ने जवाब दिया
13:27मुझे सेट रफिकर ही दवाई लेने आता था
13:30वह कहता था की एक औरत बीमार है
13:33मगर मैंने खुद कभी मरीज को नहीं देखा
13:35फकीर ने हैरानी से पूछा
13:38यानि तुम यकाइन से यह नहीं कह सकते कि दवाई बंजारें की बीवी के लिए ही ली जाती थी
13:43हकीम ने नदामत से कहा
13:45जी मैं यकीन से नहीं कह सकता
13:49लेकिन हाँ, सेठ जी मुझसे दवाई जरूर ले जाया, करते थे
13:53फकीर ने सक्त लहजे में कहा
13:56तो इसका मतलब ये हुआ कि तुम मरीज को देखे बगैर ही दवाई दे, देते थे
14:01ये तो बहुत ही अजीब बात है
14:03अगर तुम दवाई के बजाए जहर देते तो
14:05हो सकता है तुम्हारे जर्ये
14:08तेगे जहर से ही बंजारें की बीवी की मौत हुई हो
14:11फकीर की बातें सुनकर हकीम का चेहरा खौफ से पीला
14:15पढ़ गया, उसने गला साफ करते हुए कहा
14:18नहीं हुजूर, ऐसा हर्गिस नहीं हो सकता
14:20मैं किसी मरीज को जान, पूज कर जहर क्यों दूँगा
14:24इस तरह तो मेरी सारी इज़त खाक में मिल जाएगी
14:27फकीर ने कहा
14:28अब तुम कुछ भी कहो
14:31लेकिन तुमने लापरवाही जरूर की है
14:33तुम्हें अपने फर्ज में कोता ही और एक बेगुनाह की
14:37जिन्दगी से खेलने के जुर्म में
14:39पचास खोड़े लगाने की सजा दी जाती है
14:41साथ ही तुम्हारा मुह काला कर
14:43के शहर में घुमाया जाएगा
14:45अब फैसला तुम करो
14:47सच बोलोगे या सिपाहियों को हुक्म दो
14:49या सुनकर हकीम का जिस्म कापने लगा
14:51वह फकीर के कदमों में
14:53गिर पड़ा और गिड़ गिड़ाते हुए बोला
14:55हुजूर मुझे माफ कर दीजिए
14:57मैं सब सच कवबूल करता हूँ
15:00मैंने सेठ रफिकट के किसी मरीज का
15:03इलाज नहीं किया
15:04सेठ ने मुझे हजारों रुपे दिये थे
15:07और कहां था कि अगर गवाही की जरूरत पड़ी
15:10तो मैं उसके हक में जूठी गवाही दे दूँ
15:13मैंने लालच में आकर उसकी बात मान ली
15:16यही मेरा गुनाह है
15:18फकीर ने गंभीर आवाज में कहा
15:21गुनाह तो तुमने किया है
15:24इसलिए तुम्हें जूटी गवाही देने के जुर्म में पचास कोड़े लगाने की सजा दी जाती है
15:30फकीर के हुक्म पर फौरण अमल हुआ
15:33सिपाहियों ने हकीम को पकड़ा और भरे दर्बार में उस पर कोड़े बरसाना शुरू किये
15:38पहले ही कोड़े के साथ हकीम जोर से चीखा
15:41सुल्तान मुझ पर रहम कीजिए मैं मर जाओंगा
15:45हर कोड़े के साथ उसकी दर्द भरी चीखें गूंजने लगी
15:48यह मंजर देखकर सेट के बाकी चारों कवाहों के चेहरे भी जर्द हो गए
15:53यह वही लोग थे जिन्होंने दावा किया था कि उन्होंने बंजारें की बीवी के जनाजे को ले जाकर कबरिस्तान में दफनाया
15:59फकीर ने उन चारों से कहा
16:02तो तुम लोगों का कहना है कि तुमने इस ओरत को कबरिस्तान में दफनाया था
16:06अच्छा यह बताओ
16:08दफनाने से पहले मुर्दे को गुसल दिया जाता है फिर उसे कफन पहनाया जाता है
16:13तुम ये सब कैसे कर सकते थे अगर औरत मरी ही नहीं थी
16:17फाकीर बाबा साइं ने दर्बार में मौझूद चारों गवाहों को सखत निगाहों से घूरते हुए पूछा
16:23बताओ तुम में से किसी ने अपनी आखों से रूबीना का चेहरा या जिस्म देखा था जब जनाजा तयार हो रहा था
16:31चारों खौफस्दा होकर पसीने पसीने हो गए थर थर आते हुए एक नहिम्मत करके का
16:36नई हुजूर, हमने तो उसका चेहरा या जिस्म देखा ही नहीं था।
16:40सेठ एकबाल ने खुद जनाजा तैयार करके
16:43हमें बस कबरिस्तान ले जाने का हुक्म दिया था।
16:47हमने तो आँख बंद करके वह चारपाई उठाई और दफना दिया।
16:50फ़कीर बाबा ने गहरी, सांस ली और ठहरे हुए अंदाज में कहा
16:54तो मतलब ये कि तुमने बगएर देखे मान लिया कि वह मर चुकी थी?
16:58ना सांस चेक की, ना जिस्म की हालत देखी।
17:02क्या तुम्हें ये खयाल नहीं आया कि कोई बेहोशी की हालत में भी हो सकता है?
17:07या शायद सेथ ने किसी और चीज में लपेट कर धोखा दिया हो।
17:11फ़कीर बाबा की आवाज में अब सखती, बढ़ने लगी।
17:14उसने तेजी से कहा, ये तो सीधी सीधी साज़िश लगती है।
17:18तुम लोगों ने लाश देखे बगएर एक जीती जागती इनसान को मुर्दा मान कर दफना दिया।
17:23ये ना सिर्फ लापरवाही है, बलकि एक संगीन जुर्म है।
17:26ये अलफाज सुनकर चारों गवाहत दंब खुद रह गए।
17:30उनके मातों पर पसी ने के कतरे मोतियों की तरह चमकने लगे।
17:35हकीम के दरबार में कोड़े खाते हुए चीखें तो वह पहले ही सुन चुके।
17:40थे अब फ़कीर बाबा की जबान से मौत की सजा।
17:42जैसे अलफाज सुनकर उनके हाथ पांव और ज्यादा ठंडे पढ़ गए।
17:47उनकी टांगें कांपने लगी और चेहरों का रंग एकदम सफिद पढ़ गया।
17:51फ़कीर बाबा साई ने फिर सेथ इकबाल की तरफ तेज नजर डाली।
17:55अब सेथ का चेहरा भी जर्द पढ़ चुका था और वहां नजरें चुरा रहा था।
18:00फ़कीर बाबा ने बुलंद आवाज में कहा सेथ इकबाल तुम्हारे जूटे गवाह पहले ही खौफ से कांप रहे हैं।
18:07अब तुम खुद बताओ, किसी मासूम औरत को जबरदस्ती, अपने घर में कायद रखने और शोहर को धोखा देने के जुर्म में तुम्हे कौन सी सजा दी जानी चाहिए।
18:17सेथ एक बाल के होंट कांपने लगे, वह कुछ बोलने की कोशिश कर रहा था, लेकिन अलफाज जैसे गुम हो गए थे, सिर्फ हकला हकला कर रहे गया।
18:28फकीर बाबा साई ने सक्त लहजे में कहा, मेरे पास तो तुम्हें दस साल की सक्त, कायद की सजा सुनाने का पूरा हक है, लेकिन अगर तुम फौरण अभी इसी वक्त रूबीना को दर्बार में हाजिर करवा दो, तो शायद तुम्हारी सजा में कुछ नर्मी की गुंजा�
18:58कुछी देर में रूबीना को दर्बार में हाजिर कर दिया गया, जैसे ही रूबीना दर्बार में आई, नदीम की आँखों में खुशी के आंसु छलकने लगे, फकीर बाबा साई ने नर्मी से रूबीना का हाथ नदीम के हाथ में थमा दिया और कहा, अपनी अमानत को संभ
19:28सौ सौ कोड़े लगाने की सजा दी गई ताकि सब के लिए इबरत का निशान बने ये मनजर देखकर सुल्तान शमसुद्दीन हैरान रह गया वह दिल से फकीर बाबा साइं की दानाई और इंसाफ पसंदी को सलाम करते हुए हाथ जोड़कर बोला बाबा साइं आपने जो अद
19:58याद रखना एक बादशाह का सबसे बड़ा फर्ज सिर्फ हुकूमत चलाना नहीं बलकि इनसाफ करना होता है और एक शोहर का सबसे बड़ा फर्ज अपनी बीवी की इज़त और हिफाज़त करना होता है ये कहकर फकीर बाबा साइं ने तीन सुनहरी नसीहतें सुल्तान को �
20:28महबत और तवज्जो से ही रिष्टे मजबूत होते हैं दूसरी नसीहत अगर कोई तुम्हारी बीवी पर जुटा इलजाम लगाए तो दुनिया की परवाह किये बगैर उसके साथ डट कर खड़े रहो एक मर्द की सच्चाई का पैमाना यही है कि वह मुश्किल वकष्ट म
20:58के साथ अकेला ना छोड़ो चाहे वह कोई दोस्त हो या रिष्टेदार जमाने के हलात बदलते रहते हैं अकलमंदी इसी में है कि अपनी इज़त और रिष्टों की हिफाजत होश्यारी से की जाए फकीर बाबा साइं की ये बातें सुनकर सुल्तान शमसुद्दीन ने आज
21:28में मौजूद हर शख्स ने फकीर बाबा साइं के लिए दिल से दुआ की और यू नदीम और रूबीना खुशी खुशी अपने नए सफर की तरफ रवाना हो गए