00:00गाव के किनारे एक तूटा फूटा सा घर था जहाँ दो भाई बहन कबीर और जोया अकेले रहते थे
00:07उनके माबाफ सालों पहले एक हाथसे में गुजर चुके थे
00:10उनके पास न कोई रिष्टेदार था और न कोई सहारा
00:14तीन लोग थे कबीर जोया और उनकी छोटी बहन नेहा
00:17लेकिन एक दिन नेहा किसी अजनबी के साथ भाग गई
00:21इसने कबीर और जोया को अंदर से तोड़ दिया
00:24अब वे दोनों ही एक दूसरे का एक मात्र सहारा थे
00:27कबीर जंगल से लकडियाओं काट कर लाता और बाजार में बेचता
00:31जिससे जैसे तैसे गुजारा चलता
00:33जोया घर संभालती लेकिन गरीबी ने उनके सपनों को चखना चूर कर दिया था
00:39एक अंकहा एहसास समय बीटता गया
00:42अकेला पन गहराने लगा
00:44दोनों जवान हो चुके थे
00:46खूबसूरत भी थे
00:48मगर किस्मत ने उन्हें बस एक दूसरे तक सीमित कर दिया था
00:51कई बार जब कबीर ठका हारा घर लोटता
00:54जोया उसे बड़े पयार से पानी देती
00:56उसके बालों में हलके से हाथ फेरती
00:59यह स्पर्श एक बहन का था
01:01मगर कई बार कबीर के दिल में एक अजीब सा ख्याल जाग उठता
01:05रात के अंधेरे में
01:07जब दोनों अपने अपने बिस्तरों पर होती
01:09तब एक बेचैनी उन्हें घेर लीती
01:11कभी कबीर को लगता कि वह जोया को खोना नहीं चाहता
01:15और जोया को भी यही डर सताने लगा
01:18कि कबीर अगर किसी और की जिंदगी में चला गया
01:21तो वह फिर अकेली रह जाएगी
01:22यह ख्याल गलत था
01:24लेकिन वह इसे रोक नहीं पा रहे थे
01:27खुद से जंग एक राद जोया ने हलकी आवाज में कहा
01:30कबीर अगर हम हमेशा ऐसे ही रहे तो
01:34कबीर चौका
01:35मगर उसने खुद को संभाला
01:37उसने हलकी हंसी में बात को टाल दिया
01:40मगर उसका दिल तेजी से धड़क रहा था
01:42जोया भी जानती थी कि यह गलत था
01:45मगर कही न कही गरीबी और अकेले पन ने
01:47उनके दिमाग में अजीब से खयाल भर दिये थे
01:50अगली सुबह कबीर जल्दी उठ गया और जंगल की और निकल गया
01:54उसने फैसला कर लिया था
01:56उसे इस रिष्टे को बचाना था
01:58उसे और जोया कुछ सही रास्ते पर लाना था
02:01नई राह की तलाश कबीर रोज की तरह लकडियाओं लेकर बाजार गया
02:06लेकिन इस बार उसका सामना एक बड़े व्यापारी से हुआ
02:10उस आदमी ने कबीर से कहा
02:12अगर तुम शहर आ जाओ तो मैं तुम्हें अच्छे पैसे दूँगा
02:16मेहनत करने वालों की हमें जरूरत है
02:18कबीर समझ गया कि यही उसका मौका था
02:21उसने हां कर दी
02:23शाम को जब वह घर लोटा और जोया को यह खबर दी
02:26तो जोया की आँखों में आंसु आ गए
02:28तुम मुझे छोड़कर चले जाओगे
02:31कबीर ने उसे प्यार से समझाया
02:33जोया यह हमारे लिए जरूरी है
02:36हमें अलग होना ही होगा
02:38वरना यह अकेलापन हमें गलत रास्ते पर ले जाएगा
02:41अंतिम फैसला कबीर शहर चला गया
02:44वहां उसने कड़ी महनत की
02:46पैसे कमाये और जब समय आया
02:48कभीर जब दो साल बाद शहर से लोटा
02:50तो उसकी जिंदगी बहुत बदल चुकी थी
02:53अब वह गरीब लकणारे नहीं
02:56बलकि एक अच्छा खासा पैसा कमाने वाला आदमी बन चुका था
02:59उसने घर के लिए नए कपड़े, गहने
03:02और धेर सारे सामान खरीदे थे
03:04लेकिन जब वह गाम के पुराने रास्तों पर चला
03:08तो उसके दिल में फिर वही पुरानी बेचैनी लोट आई
03:11उसे अब भी जोया की आद सताती थी
03:13उसने खुद को कई बार समझाया था कि वह भाई बहन है
03:17लेकिन फिर भी उसके अंदर कहीं न कहीं एक अलग सा खयाल पल रहा था
03:22घर पहुचा तो जोया उसे देख कर बहुत खुश हुई
03:26वह दोड़ कर आई और उसके हाथ से थैला ले लिया
03:29कब आये तुम? मुझे बताया भी नहीं
03:33उसने प्यार से पूछा
03:34कबीर हलके से मुस्कुराया
03:36लेकिन अंदर ही अंदर घवराया हुआ था
03:38दिल की उलज़न रात को जब दोनों खाना खाकर
03:42अपने अपने कमरे में गए
03:44तो उनके दिलों में एक ही सवाल घूम रहा था
03:47क्या हम एक दूसरे से शादी कर सकते हैं?
03:50कबीर करवटे बदलता रहा
03:52वह सोचने लगा कि अगर वह जोया से पूछे और वह मान जाए
03:56तो क्या वे हमेशा साथ रह सकते हैं?
03:59लेकिन फिर गाम वालों का डर सताने लगा
04:01अगर किसी को पता चल गया तो
04:03लोग क्या कहेंगे?
04:06दूसरी और जोया भी यही सोच रही थी
04:08उसे भी अब शादी का डर लगने लगा था
04:11अगर कबीर किसी और से शादी कर लेगा
04:14तो वह कैसे जी पाएगी?
04:16फैसला और त्याग सुबह कबीर ने जोया को देखा
04:19वह रोज की तरह घर के काम में लगी होई थी
04:22लेकिन उसके चेहरे पर उदासी थी
04:24कबीर समझ गया कि अगर वह यहां और रहा
04:27तो वह अपने जजबातों पर काबू नहीं रख पाएगा
04:30उसने तैय किया कि उसे फिर से शहर जाना होगा
04:33मैं कुछ और पैसे कमाने के लिए फिर से शहर जा रहा हूँ
04:38जोया ने सिर जुका लिया
04:40मगर कुछ नहीं कहा
04:42शादी का फैसला इस बार कबीर ने शहर में एक बहुत बड़ा फैसला लिया
04:46उसने तैय कर लिया कि वह जोया की शादी जल्द से जल्द करवा देगा
04:51ताकि उसके मन से यह उल्जन हमेशा के लिए खत्म हो जाए
04:55जब वह गाव लोटा
04:57तो उसने सबसे पहले एक अच्छा रिष्टा ढूंढा
05:00और कुछ ही हफतों में जोया की शादी तैय कर दी
05:02लेकिन उसने यह भी तैय कर लिया
05:05कि वह भी उसी दिन शादी करेगा
05:07शादी के दिन जब जोया की डोली उठी
05:10तो कबीर की आँखें नम हो गई
05:12लेकिन उसे खुशी थी
05:14कि उसने खुद को एक गलत रास्ते पर जाने से रोक लिया
05:17उसने अपने जजबातों को कुर्बान कर दिया
05:20ताकि वह और जोया दोनों समाज में इजज़त से जी सके
05:23अब दोनों अपनी अपनी जिन्दगी में खुश थे
05:26कबीर और जोया ने भले ही एक परीक्षा दी थी
05:29लेकिन उन्होंने सही रास्ता चुना
05:31अंतिम संदेश
05:34रिष्टों की एहमियत
05:35एक मिनट की सीख रिष्टे मूम की तरह होते हैं
05:39अगर सही ताप मान पर रखे
05:40तो मजबूत रहते हैं
05:42लेकिन अगर हद से ज्यादा गर्मी दी जाए
05:45तो पिघल जाते हैं
05:46हमें हर रिष्टे की मर्यादा को समझना चाहिए
05:49और अपने जज़बातों को
05:51सही दिशा में रखना चाहिए
05:52भाई बहन का रिष्टा
05:54दुनिया के सबसे पाक रिष्टों में से एक है
05:56यह प्यार, इज़ट और भरूसे पर टिका होता है
05:59अगर कभी मन में गलत खयाल आए
06:02तो खुद को रोकना सीखे
06:04क्योंकि सच्ची महबबत वही होती है
06:06जो सही रास्ते पर चले
06:08रिष्टों की पवित्रता बनाए रखे
06:10क्योंकि एक बार जो इज़ट तूट जाती है
06:13उसे दोबारा जोड़ना मुश्किल होता है
06:15अगर आपको यह सीख पसंद आई
06:17तो इस चैनल को लाइक, सब्सक्राइब और शेर करे
06:20आपके एक शेर से किसी की जिन्दगी बदल सकती है
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