00:00दोस्तों, यह कहानी एक साधू और एक कुवारी लड़की की है, जो एक डरावने जंगल की दास्तान है, जहां एक बूढ़ा साधू अपनी जोपड़ी में अकेले रहता था।
00:30अचानक छोपड़ी के दर्वाजे पर जोड़दार दस्तक हुई, साधू चौक गया, उसने सोचा कि इतनी रात को इस सुनसान जंगल में कौना सकता है, थोड़ी देर तक इंतजार करने के बाद उसने हिम्मत जुटा कर दर्वाजा खोला, सामने जो देखा, उससे वह अचम
01:00साफ छलक रही थी, वह अपनी जवानी के चरम पर थी, साधू ने आश्चर्य से पूछा, ए लड़की, तुम कौन हो, और इस सुनसान जंगल में इतनी रात गए, और इस भयानक बारिश में यहां क्या कर रही, हो? लड़की ने डरी हुई आवाज में कहा, बाबा जी, मैं
01:30वे मुझे मारना चाहते हैं, कृपया मुझे बचा, लीजे, साधू ने उसे तुरंत अंदर बुलाया और धंडस बंधाया, फिर उसने लड़की से पूछा, मुझे सच-सच बताओ, आखिर तुम कौन हो और यहां कैसे आई? लड़की ने कापते हुए जवाब दिया, मैं
02:00पवित्र करना चाहते हैं, मैंने किसी तरह अपनी इज़त बचाए और भाग कर आपके पास आ गई, बूढ़ा साधू लड़की की बातें बड़े ध्यान से सुन रहा था, उसके मन में कई सवाल उठ रहे थे, क्या ये लड़की कोई और रहस्य चुपा रही है, क्या इसके
02:30हर जगह घना अंधेरा था, पूढ़ा साधू वर्षों से अकेला रह रहा था, लेकिन आज उसकी जोपड़ी में एक अनोखी सुन दर्ता मौजूद थी, वह साधू लड़की के भीगे हुए कपड़ों को देख रहा था, और भीतर ही भीतर एक अजीब सी खुशी महसूस क
03:00देंगे? बुड़ा साधू जो पहले से यही चाहता था तुरंत प्रसन्न होकर बोला, हाँ, आज की रात तुम मेरी जोपड़ी में ठहर सकती हो। रात गहरी हो चुकी थी, बारिश रुकने का नाम नहीं ले रही थी, लड़की चटाई पर लेट गई और सोने की कोशिश क
03:30प्रेम का एहसास हो रहा था, उसकी जवानी उसे उकसा रही थी, अचानक बाहर से किसी की भयावह आवाज आई, साधू तुरंत उठा और जोपड़ी के बाहर गया, उसने देखा कि एक पेड़ की शाखा पर एक काला साया बैठा हुआ है, साधू ने जोर से पूछा, तु
04:00आखों में अजीब सी चमक थी, उसने कुछ नहीं कहा, बस साधू को देखती रही, साया फिर हसा और बोला, तुम मेरे जाल में फंस चुके हो, अब तुम बच नहीं सकते, साधू ने जोर से कहा, तुम्हारी चाले मुझ पर असर नहीं करेंगी, मैं अपने संकल्प से कभी
04:30रखा और अपनी आत्मा को टटोला, उसने गहरी सांस ली और आत्म विश्वास से कहा, हाँ मैं इस परीक्षा से लड़ने के लिए तैयार हूँ, तब ही वह साया तडपने लगा, और देखते ही देखते हवा में गायब हो गया, लड़की फूट फूट कर रो पड़ी, वह
05:00अपनी जिन्दगी को, समवारो, लड़की ने सिर जुकाया, आखों में आसू लिये, और चुपचाप जंगल से बाहर निकल गई, हमेशा के लिए आजाद
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