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Dhumavati Jayanti Puja Vidhi 2025: देवी धूमावती 10 महाविद्याओं में से एक है. माता धूमावती 7वीं महाविद्या हैं जिनकी उत्पत्ति हिंदू कैलेंडर के अनुसार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर हुई थी. ऐसे में हर साल ज्येष्ठ शुक्ल अष्टमी तिथि पर धूमावती जयंती मनाने का विधान है. धूमावती जयंती पर इस बार रवि योग बन रहा है और नक्षत्र पूर्वाफाल्गुनी है. वि योग निशिता मुहूर्त में बन रहा है. मां धूमावती की पूजा कर व्रत का संकल्प करने से दरिद्रता मिटती है और धन और वैभव की प्राप्ति होती है.

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~PR.111~ED.120~

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00:00दुमावती देवी की पूजा के रहसिमय और उग्र सातना है जो विशेश नियमों के साथ ही की जाती है
00:09एस साल दुमावती देवी की जैनती तीर जुन को मनाई जा रही है
00:13आईए से विड़े में आपको बता दें कि धुमावती जैनती की पूजा के दोरार किन चीजों की ज़ुरत होगी और पूजा विधी क्या है
00:20नवर्शका और मैं हूँ सूप्रती रोई चाटर जी और बोल्स काई में आप सभी का स्वगत है
00:25दुमावती देवी पूजा सामगरी में उनकी प्रतिमा या चित्र काले रंग के कपड़े
00:30सरसो का तेल या तेल का दीपक, काले तेल, काले चने, सूखी नीम की पत्या या नीम की सूखी लकडी
00:37राक, खासकर के शमशान की भोग, बिना नमक का भोजन या काले चने की खिचडी, धूप और अगरबती, काला धागा और मॉली, नीम्बू, कटा हुआ या पूरा नीम्बू, नारियल, जल पात्र और पंचामरत, गुलाव्य चमेली का फूल, चांदिय तामबे की प्लेट
01:07पूजा शुरू करने से पहले अपने इश्ट या गुरु को स्मरण कर संकल पले, धूमावती देवी के चत्रिया मूर्ती के सामने दीब जलाएं, उन्हें नीम, काले तिल, काले चने आधी अर्पित करें, काले कपडे पर भूग लगाएं
01:18आप चाहें तो धूमावती जयनती पर हवन भी कर सकते हैं, इस दोरान ओम धूम धूम धूम धूम धूम धूम धूम धूम धूम धूम धूम धूम धूम धूम धूम धूम धूम धूम धूम धूम धूम धूम धूम धूम धूम धूम मंत्र का जाब करते वे देवी के ओर
01:48से से रख दे दियान रहे यह साधना उग्र है बिना दिक्षा या गुरु मार्ग दर्शन के ना करें पूजा के बाद कुछ साधकों को अलौकिक अनुभव हो सकते हैं भाय भीत नहों सयम रखें इस पूजा को देश सिद्धी रक्षय मोक्ष मार्ग होता है सांसारिक सुखे
02:18झाल
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