00:00बहुती आनंद की अनुभूती है, सकून है, एक मा गंगा के प्रती जो हमारे मनों में निष्ठा है, आज मैं उनकी चरंदुली ले पाई, आज गंगा जी में शनान करके, इस पवित्र शनान के माध्यम से अपने अंदर की नई उर्जा को मैंने संचारित किया है, फिर से अ�
00:30गंगा है, जैसे गंगा जी में हजारों लोग शनान कर पा रहे हैं, उसका आज मन करते हैं, वो जल ले करके घर जाते हैं, यमना जी को भी हम इतना पवित्र कर पाएं, कि उसके अंदर लोग शनान कर पाएं, आज मन कर पाएं, उसका जल जो है वो घर लेके जा पाएं, ऐस
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