Skip to playerSkip to main content
  • 1 year ago
self made movies
Transcript
00:00अनसुलजी दास्तान, एक रूहानी मुहबत और खौफ की अधूरी कहानी नई नई शादी हुई थी फुर्खान की।
00:07उम्र रही होगी कोई पच्चीस साल। वह अपनी नव विवाहिता पत्नी के साथ एक नई जिन्दगी की शुरुआत करने जा रहा था।
00:16प्यार और उम्मीद से भरी उस जोड़ी ने बड़े घर की तलाश शुरू की थी क्योंकि फुर्खान का छोटा भाई भी जल्द ही शादी के बंधन में बंधने वाला था।
00:24एक दिन एक एजेंट ने उन्हें एक पुराना मगर भव्य घर दिखाया। लाल इंटों से बना उंची छटों वाला और पीछे एक खुला आंगन मानो कोई पुरानी हवेली हो।
00:37एजेंट ने कहा बहुत अच्छा घर है जनाब लेकिन कुछ लोग इसे देखकर भी छोड़ देते हैं।
00:43फुर्खान ने उसकी बातों पर ध्यान नहीं दिया और जल्द बाजी में एडवांस देकर उस घर में शिफ्ट हो गया।
00:50घर में आते ही उसकी पत्नी ने सफाई शुरू कर दी।
00:53वही घूंगट में लिप्टी सादगी, वही नर्म एहसास।
00:57तभी उसके सामने से एक औरत गुजर गई।
00:59लंबे बाल, सूती साड़ी, धीमी चाल।
01:03पत्नी को लगा शायद अम्मी होंगी, मगर तभी उसका मोबाइल बजा।
01:07कॉल करने वाली खुद अम्मी थी।
01:09पत्नी हैरान रह गई।
01:11सोचने लगी, अगर अम्मी छट पर थी, तो कॉल क्यों।
01:15वो बिना कॉल उठाए ही छट की और भागी।
01:18लेकिन छट बिलकुल खाली थी, ना कोई परचाई, ना कोई आहट।
01:22नीचे आकर उसने अम्मी को कॉल किया, तो अम्मी ने बताया कि वह तो सुबह से ही बाजार गई हुई थी।
01:28उसके हाथ का अपने लगे, चहरा पीला पड़ गया।
01:32वो समझ गई कि जो उसने देखा, वो इनसान नहीं था।
01:36शाम को जब फुर्खान घर लोटा, पत्नी ने सब कुछ उसे बताया।
01:40फुर्खान ने बात को टालते हुए कहा, शायद थकावट के कारण भ्रहम हुआ होगा, कोई बात नहीं।
01:47लेकिन अंदर ही अंदर उसका दिल भी किसी अंजानी आशंका से काप गया था।
01:52अगले दिन अम्मी रसोई में मचली साफ कर रही थी, तब ही अचानक किसी ने उनके बाल खींचे, वो चौक कर पीछे मुड़ी।
01:59लेकिन वहां कोई नहीं था।
02:02इस बार अम्मी ने डर को निगल लिया और कुछ नहीं कहा।
02:06लेकिन उनके चहरे की रंगत बता रही थी कि वो कुछ अंदेखा देख चुकी थी।
02:11तीसरे दिन फुर्खान की पत्नी को माय के जाना पड़ा क्योंकि ससुर की तबियत बिगड़ गई थी।
02:17फुर्खान उसे स्टेशन छोड़ कर वापस घर लोटा। उस रात घर में वो अकेला था।
02:22चारों और सन्नाटा था और अंदर कोई बेचैनी सी भर रही थी। जब वह बिस्तर पर लेटा तो उसकी आँखें बंध ही नहीं हो रही थी।
02:32थोड़ी देर बाद उसने उठने की कोशिश की। मगर उसका शरीर जैसे जड़ हो गया हो।
02:37वह हिल नहीं पा रहा था। एक ठंडी हवा उसके चहरे को छू रही थी। किसी के हाथ उसके सीने पर थे। आंखें खोलने की हिम्मत जुटाई।
02:47तो देखा एक औरत उसके उपर जुकी हुई थी। उसका चहरा धुंदला था। बाल बिखरे हुए और होटों पर एक अजीब सी मुसकान। वह उसके कान के पास आई और फुस फुसाई। तुम आ ही गए। मैंने बहुत इंतजार किया है तुमारा।
03:02फुर्खान चीखना चाहता था मगर गले से आवाज ही नहीं निकली। अगले दिन फुर्खान ने उस एजिंट को बुलाया और सच्चाई पूछी। एजिंट पहले टालता रहा लेकिन जब फुर्खान ने जोर दिया तो वो तूटी आवाज में बोला।
03:17सालों पहले एक नव विवाहित जोड़ा इस घर में रहा करता था। पत्नी बहुत हसीन थी मगर पती बहुत शकी। एक रात उसने उसे किसी गैर मर्द से बात करते पकड़ लिया और क्रोध में आकर उसी बेडरूम में जिन्दा जला दिया। लोग कहते हैं उस लड़की क
03:47कोई है फिर वो आई वही औरत जो धुंदली दिखती थी आज उसके सामने थी साफ चहरा लाल साड़ी चूड़ियों की खंखना हट और एक अंकही गहराती हुई वासना उसकी आँखों में वो धीरे धीरे पास आई उसकी उंगलियां फुर्खान के सीने पर फिसलने लगी
04:17एक जलती हुई गंध चारों और फैल गई फुर्खान को महसूस हुआ जैसे वो उसकी आत्मा खींच रही है उसने खुद को पूरी ताकत से छुड़ाया और घर से बाहर भाग गया उसके होंट जले हुए थे और आँखों में आँसु मगर उस आँखों में वो एक अधू
04:47तो उस लाल साड़ी वाली औरत की परचाई उसके पीछे खड़ी दिखती है कभी मुस्कुराती है कभी आँखों से लहू बहता है और कभी सिर्फ फुस फुसाती है मैंने तुमसे सिर्फ महब्बत की थी तुमने मुझे आग दी ये कोई साधारन डरावनी कहानी नहीं थी
05:17उस रात के बाद फुर्खान ने कभी पीछे मुड़कर उस घर की और नहीं देखा मगर जो एक बार रूहानी मुहब्बत की आग में चल जाए उसे आसानी से राहत नहीं मिलती वो औरत वो परचाई अब सिर्फ उस घर में नहीं थी अब वो उसके साथ साथ चलने लगी थ
05:47एक रात उसकी पतनी ने देखा कि फुर्खान नींद में किसी का नाम बढ़बढा रहा था रूही मत छोड़ो मुझे रूही कौन है उसने जखचोर कर पूछा फुर्खान की आँखें खुली चहरा पसीने से भीगा हुआ था वो वो मुझे छोड़कर नहीं गई वो साथ
06:17और चहरा देखा जलती हुई आँखें और खामोश दर्द से भरा चहरा कुछ दिनों बाद फुर्खान की पतनी की तबीयत बिगड़ने लगी डॉक्टर को दिखाया गया मगर रिपोर्ट्स बिलकुल नॉर्मल थी फिर भी उसके पेट में दर्द आँखों के नीचे काले
06:47और अब वो किसी और के शरीर में खुद को पूरा करना चाहती है मौलवी की बात सुनकर सब कांप उठे अब सिर्फ एक रास्ता बचा था उस घर में वापस जाकर उस आत्मा का सामना करना फुर्खान अपनी पतनी को लेकर फिर उसी घर में लोटा पूरा घर अंधेरे में
07:17रूही उसका चहरा अब जलने के बात का नहीं था बलकि किसी दुलहन सा सजा हुआ था उसने धीरे से कहा तुम से सिर्फ मोहबत की थी फुर्खान मगर तुमने मुझे अधूरा छोड़ दिया अब मैं पूरी होंगी तुम्हारी पतनी के जरिये फुर्खान चीखा नहीं म
07:47एक उसकी और दूसरी रूही की रूही की आत्मा अब उसकी पतनी में समा चुकी थी मौलवी ने आखिरी उपाय बताया या तो रूही को प्यार से मुक्त किया जाए या फिर उस शरीर को नश्ट कर दिया जाए जिसमें वो समा गई है फुर्खान के सामने दो रास्ते थे �
08:17रूही को गले लगा लिया तू मेरी नहीं थी मगर अब तू मेरी बीवी के शरीर में है अब मैं तुझसे भी उतनी ही मौहबत करूंगा जितनी उससे करता हूं अगर यही तुझे चाहिए तो ले ले मेरी वफा रूही कुछ पल के लिए शान्त हो गई और फिर एक चिलच
08:47साथ सोय फुर्खान ने महसूस किया उसकी पतनी के हाथ अब भी ठंडे थे और होटों पर वो ही मुस्कान थी जो कभी रूही की थी तो दोस्तों क्या आप सोचते हैं कि फुर्खान ने सही किया क्या रूहानी महबत कभी सच में खत्म होती है कमेंट करके बताएं अगर आ�
09:17और मेरे चैनल को जरूर सबस्क्राइब करें क्योंकि ऐसी और डरावनी रूहानी और रूमान चक कहानिया मैं लाता रहूंगा अब बताएए क्या एक रूह कभी सच में महबत कर सकती है या वो सिर्फ वासना और बदले की आग होती है अगली कहानी में मिलते हैं लेकिन त�

Recommended