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In #KashmirReports 1.3 watch #KashmirLife's #UmaimaReshi talk about how Crop insurance reached Kashmir five seasons after Jammu, covering 2.45 lakh farmers and collecting Rs 98 crore premium in 2023–24, but paid only Rs 31.66 crore in claims. Watch the #report to know more

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Transcript
00:00It is difficult for people to get into account.
00:04Every person has a average of 30,000 dollars.
00:07There is no transparency when the loss can get into account.
00:11There is no support for people to get into account.
00:25This is a report.
00:27If you don't know the price,
00:33I don't know the price.
00:35This is an investment.
00:39The future is the market.
00:42But the future is the price.
00:45The market is not the price.
00:47The market is not the price.
00:49The market is the price.
00:52फसल बीमा की दिमांड रोज बढ रही है
00:54लेकिन जमूर कुश्मीय में फसल बीमा सिर्फ एक जरूरत नहीं
00:58बलकि एक ऐसी कहानी है जहां सिस्टम में कमी और दोनों इलाकों के दर्मियान फर्क है
01:03आसमान तो एक जैसे हैं लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल मुक्तलिक
01:07आजकल कश्मीर क्लाइमिट चेंज का मरकज बन गया है
01:11बदलते हुए मौसम और किसानों के लिए नए दुश्मन बर गये है
01:15नवेंबर में जल्दी बरफ गिपती है और कभी घर्मी के मौसम में इस तक थीट वेवा जाता है
01:20जब भी फसल फेल होती है लोगों की डिमांड होती है कि फसल इंशॉरंस मिले
01:25अब ये फसल इंशॉरंस है क्या
01:27फसल इंशॉरंस एक ऐसी इंशॉरंस होती है जो किसानों को कुद्रती आफ़तू, काम पैदावार और दूसरी अचानक आने वाली मुश्किलात से बचाती है
01:35यह सिर्फ तब मदद नहीं करती जब तूफान या बारश से फसल तबाह हो
01:39बलकि जब पैदावार कम हो या फसल बिलकुल खतम हो जाए तो भी किसान को नुकसान से बचाती है
01:45यह कानी 2016 से शुरू होती है जब पूरे बारत में प्रधान मंतरी फसल भीमा योजना पी-म-फपी वाई लाउंच हुई
01:53इसका मकसद यह था कि किसान अगर किसी अचानक कुज़ती मुसीबत की वज़स से फसल गवा बैठे तो उन्हें फाइनाशल मदद मिल सकती है
02:02ताकि उनकी इंकम स्टेबल रहे और वो की खेती छोड़ने ना लगे
02:05यह स्कीम यील्ड यानि पैदावार के हिसाब से काम करती है
02:10हर सीजन में एक दफा इंशुरेंस एजेंट्स आगरिकल्चर और रेविन्यू ओफिसर्स मिलके
02:15क्रॉप कर्टिंग एक्सपेरिमेंट करते हैं
02:17ताकि अंदाजा लगाया जा सके कि पैदावार कितनी हो सकती है
02:20जुमिन कश्मीर ने भी यह स्कीम जॉइन की
02:23लेकिन पहले सिर्फ जुमो के 10 दिलियों तक ही यह स्कीम लिमिटेड थी
02:26जुमो ने इसे तुरंट अपनाया और फाइदा उठाया
02:29पर कश्मीर अभी तक कंफ्यूजन और कंपनीज की लाग ओफ इंटरस्ट का शिकार है
02:33PMVY की जो स्कीम है इसका प्रीमिम सिस्टम काफी सबसेडाइज़ है
02:38यानि सरकार इसमें ज्यादा हिसा देती है
02:41किसान को सिर्फ 2% देना पड़ता है अगर वो खरीग क्रॉप्स उगा रहे हैं
02:45और सिर्फ 1.5% अगर राभी क्रॉप्स है
02:48अगर किसी किसान ने कमर्शल योहाटी कर्टर क्रॉप्स जैसे सेब, आम वगेरा उगाए हैं
02:54तो उसको 5% तक देना पड़ता है
02:57जो बाकी पैसा होता है वो सेंट्रल गावर्मेंट और स्टेट गावर्मेंट मिलकर बराबर अदा करती है
03:02इस तरह से देखर जाए तो ये इंशॉरंस किसानों के लिए काफी सिस्ती है
03:06लेकिन असल में मसला ये होता है कि कई दफ़ा सरकार का सबसिडी का पैसा ताइम पे इंशॉरंस कमपनीज को नहीं मिलता
03:14इस पज़े से क्लेम प्रोसेस डिले हो जाता है
03:16और कई किसानों को अपना मुआपजा यानि कमपनसेशन मिलने में काफी दे लगती है
03:212017, 2018 और 2018 से 2019 में जमों के लगबग देड़ लाख किसानों ने हिसा लिया
03:27118 करोर से ज़्यादा प्रेमियम दिया गया लेकिन सिर्फ 37 करोर का मुआपजा दिया गया
03:332021 से 22 में अनिकना कश्मीर को भी पहली बार स्कीम में शामिल किया गया
03:39ये छोटा मगर इंपॉर्टन्ट स्टेप था
03:4190,000 से ज़्यादा किसानों ने हिसा लिया और 56 करोर का क्लेम मिला
03:45अगले साल भी वैसा ही था लेकिन क्लेम सिर्फ 6 करोर का मिला
03:50रीजन ये था कि डेटा सही नहीं था और किसानों को इंफॉर्मिशन नहीं मिल पाई
03:552023 से 24 में स्कीम को जमूर कुश्मीर के तमाम 20 दिलों तक पढ़ाया गया
04:012,45,000 से ज़्यादा किसानों ने हिसा लिया
04:0598 करोर का प्रीमियम तो लिया गया लेकिन क्लेम सिर्फ 31 करोर का मिला
04:10और 2024 से 25 में भी ऐसा ही ट्रेंड रहा
04:13अब बात उन कंपनीज की करे जो ये स्कीम चला रही है
04:16इसमें पाँच बड़ी इंशॉरंस कंपनीज ने अब तक काम किया है
04:20अग्रिकल्टर इंशॉरंस कंपनी, ICICI लंबार्ड, इपको टोकियो, रिलाइंस जेनरल और बज़ाज अलाइंस
04:27ये सब कंपनीज, सरकारी इदालों और फाइनाशल इंस्टूशन के साथ अक्रीमेंट साइन करती है
04:33जुमुन कश्मीर बैंक स्कीम के लिए नोडल बैंक है
04:36यानि सब कुछ इसी बैंक के जरिये कॉडिनेट होता है
04:39इस वक्त लगबग 18 इंस्टूरंस कंपनीज हैं जो अर्रकूर्चर इंस्टूरंस का काम करती है
04:44और इस साल जुमुन कश्मीर आडमिनिस्ट्रिशन की बिरिंग प्रसेस में सबने हिसा लिया है
04:49लेकिन असली मसला है कश्मीर के सेव यानि आपल के बागों का
04:54जो फेमस भी हैं और एकोनॉमी का इंपोर्टन्ट हिसा भी
04:57लेकिन ये कभी प्रॉपरली बीमा के अंडर नहीं आई
04:59क्यों? क्योंकि यहां अनबर सिस्टम चलता है
05:03अंदाजे आँखों से लगाया जाते है
05:05Officials का कहना है कि उन्होंने सरकार को ये सजेस्ट किया था
05:09कि जुमूर कश्मीर में जो फ्रॉट्स उगाये या रहे हैं
05:12उन्हें PMFBI के जरिये कवर करना मुश्किल है
05:15क्यों? क्योंकि यहां पर
05:17फसल का अंदाजा लगाने के लिए
05:19ट्रेडिशनल तरीके यूज होते हैं
05:21जो साइन्टिफिक नहीं होते
05:22और इंशॉरंस कंपनीज इन मेथर्ट को
05:24एक्सेप नहीं करती
05:25लेकिन ये भी कहा गया है कि इन
05:28fruits को R-WBCIS यानि
05:30Restructured Weather-Based Crop Insurance
05:32कीम के अंडरकावर किया जा सकता है
05:34ये स्कीम थोड़ी अलग करी
05:36किसे काम करती है
05:37इसमें देखा जाता है कि
05:39मौसं कुछ fixed indicators
05:41यानि humidity, temperature और बारिश
05:44अगर ज़्यादा बदल जाएं
05:46तो किसान को claim मिलता है
05:47क्योंकि ऐसे बदलते मौसं का सीधा असर
05:50पैदावार पर पड़ता है
05:51कवरिश की बात करे तो
05:53ज़्यादा कवरिश वीट को मिल रहा है
05:54ज़्यादा इंशॉरंस जुमों के
05:56प्लेइंस में होती है
05:57जहां वीट की खेपी ज़्यादा होती है
05:59एक officer ने हमसे बात करते हैं कहा कि
06:02अभी तक सिर्फ 16 फीसद
06:04जमीन स्कीम के अंडर कावर हो रही है
06:06हम चाहते हैं कि कम से कम
06:0825 फीसद जमीन कावर हो
06:10पारलेमेट में दे गए गए नंबर्स की मताबक
06:132022 से 23 में
06:1444,000 हेक्टर्स
06:17और 91,500 किसान
06:202023 से 24 में
06:221,25,000 हेक्टर्स
06:24और 2,00,000 से ज़्यादा किसान
06:26स्कीम में शामिल हुए
06:27अब लोन की बात करें तो लोन का बोर्ज भी कम नहीं
06:31मार्च 24 तक
06:3217,800 करोर से ज़्यादा का
06:35अगरिकल्चर लोन है जमोई किश्मीर में
06:37हर किसान पर आवरिज
06:3930,000 का कर्स है
06:40ऐसे में बीमा एक सेफटी नेट होना चाहिए
06:43लेकिन अभी भी ज्यादातर किसान
06:45इसे एक और स्थरकारी जहंजट समझते हैं
06:48इसी वज़ा से
06:49ओफिशिल्स चाहते हैं कि
06:51केसी सी होल्डर्स के लिए
06:52इंशॉरंस मेंडेटरी हो
06:54एक इंसाइडर ने हम से बात करते हुए
06:57बताया कि 2020 से 21
06:58और 2023 से 24
07:01तक 96 करोर के क्लेम्स आए
07:03जिसमें से 94 करोर रुपे
07:05जैनवरी 2025 तक दे दिये गए हैं
07:08लोकसाबा को भी बताया गया
07:10कि 2019 से 20
07:11और 2023 से 24 तक
07:13124 करोर के क्लेम्स आए
07:15और 117 करोर
07:17से ज़्यादा औरड़ी पे किये गए हैं
07:19अड़निस्ट्रेशन ता माना है
07:21कि ये स्खीम आगर कल्चर की
07:23मजबूती के लिए ज़रूरी है
07:25खास को जुमन किश्मीर जिसे फरजाय जगा में
07:28ओफिशर्स कहते हैं कि
07:29डिजिटाइजेशन, लान्ड रिकॉर्ड्स का
07:32इंटिक्रेशन, मॉबाइल से
07:33क्लेम फाइल करने का आप्शन, इन सब
07:35चीजों से सिस्टम बहतर बनेगा
07:37एक आफिसर में इस चीज के
07:39मतलब बात करते हुए हमें बताया कि
07:41प्रीमियम तीन लोग मिलके देते हैं
07:44किसान, स्टेट,
07:46सरकार और सेंट्रल सरकार
07:47ज़्यादा बड़न दोनों
07:49गावर्मेंट्स उताती हैं लेकिन
07:51जब तक तीनों का हिस्सा कंप्लीट
07:53नहीं होता, क्लीम प्रोसेस नहीं होता
07:55अब सेंट्रल गावर्मेंट अपना शेर
07:57पहले दे देती है, लेकिन
07:58स्टेट का भी आदा शेर आना चाहिए
08:00वरना प्रोसेस रुख जाता है
08:02लेकिन ग्राउंट रिपोर्ट्स पे बात की जाए
08:05तो कहानी कुछ और ही है
08:07किसान अक्सर कंप्लीन करते हैं
08:09कि ट्रांस्पेरिंसी नहीं होती
08:11जब लॉस का अंदाजा लगाया जाता है
08:13ट्रॉप काटिंग का काम
08:14उनकी मर्जी या जानकारी के बगैर होता है
08:17remote sensing technology का use हो रहा है
08:20लेकिन कई जगों पर
08:21ये actual ground conditions से match नहीं करती
08:24इस वज़े से disputes होते हैं
08:26हर district में एक grievance redressal committee होनी जाही
08:30जिसमें officials, insurance reps और किसान body होती है
08:34लेकिन कई जगों पर ये committee काम नहीं करती
08:37जिनके claims reject होते हैं
08:39वो अक्सर state neural officer या ministry तक complaint नहीं पहुँचा पाते
08:43especially गाओं के लोग
08:45लेकिन असलिए अमतिहान क्या है
08:47सिर्फ ये कि अगर कुलगाम या कठवा का कोई छोटा किसान
08:51जब ओला बाजी से फसल गवा दे
08:54तो क्या उससे मावज़ा मिलेगा
08:56नाज़िए ये स्कीम तभी successful मानी जाएगी
08:59जब किसान को वक्त पर मौवज़ा मिले
09:01सिर्फ प्रीमियम कलेक्ट करना या जरिश्ट्रेशन का नंबर बढ़ाने से नहीं
09:06ये स्कीम health insurance की तरह काम करनी चाहिए
09:09जहां मदद तब मिले जब सबसे ज़्यादा जरूरत हो
09:13आज की इस कश्मीर रिपोर्ट में इतना ही
09:15बाकी मालूमात के लिए बने रहे कश्मीर लाइक के साथ
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