00:00It is difficult for people to get into account.
00:04Every person has a average of 30,000 dollars.
00:07There is no transparency when the loss can get into account.
00:11There is no support for people to get into account.
00:25This is a report.
00:27If you don't know the price,
00:33I don't know the price.
00:35This is an investment.
00:39The future is the market.
00:42But the future is the price.
00:45The market is not the price.
00:47The market is not the price.
00:49The market is the price.
00:52फसल बीमा की दिमांड रोज बढ रही है
00:54लेकिन जमूर कुश्मीय में फसल बीमा सिर्फ एक जरूरत नहीं
00:58बलकि एक ऐसी कहानी है जहां सिस्टम में कमी और दोनों इलाकों के दर्मियान फर्क है
01:03आसमान तो एक जैसे हैं लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल मुक्तलिक
01:07आजकल कश्मीर क्लाइमिट चेंज का मरकज बन गया है
01:11बदलते हुए मौसम और किसानों के लिए नए दुश्मन बर गये है
01:15नवेंबर में जल्दी बरफ गिपती है और कभी घर्मी के मौसम में इस तक थीट वेवा जाता है
01:20जब भी फसल फेल होती है लोगों की डिमांड होती है कि फसल इंशॉरंस मिले
01:25अब ये फसल इंशॉरंस है क्या
01:27फसल इंशॉरंस एक ऐसी इंशॉरंस होती है जो किसानों को कुद्रती आफ़तू, काम पैदावार और दूसरी अचानक आने वाली मुश्किलात से बचाती है
01:35यह सिर्फ तब मदद नहीं करती जब तूफान या बारश से फसल तबाह हो
01:39बलकि जब पैदावार कम हो या फसल बिलकुल खतम हो जाए तो भी किसान को नुकसान से बचाती है
01:45यह कानी 2016 से शुरू होती है जब पूरे बारत में प्रधान मंतरी फसल भीमा योजना पी-म-फपी वाई लाउंच हुई
01:53इसका मकसद यह था कि किसान अगर किसी अचानक कुज़ती मुसीबत की वज़स से फसल गवा बैठे तो उन्हें फाइनाशल मदद मिल सकती है
02:02ताकि उनकी इंकम स्टेबल रहे और वो की खेती छोड़ने ना लगे
02:05यह स्कीम यील्ड यानि पैदावार के हिसाब से काम करती है
02:10हर सीजन में एक दफा इंशुरेंस एजेंट्स आगरिकल्चर और रेविन्यू ओफिसर्स मिलके
02:15क्रॉप कर्टिंग एक्सपेरिमेंट करते हैं
02:17ताकि अंदाजा लगाया जा सके कि पैदावार कितनी हो सकती है
02:20जुमिन कश्मीर ने भी यह स्कीम जॉइन की
02:23लेकिन पहले सिर्फ जुमो के 10 दिलियों तक ही यह स्कीम लिमिटेड थी
02:26जुमो ने इसे तुरंट अपनाया और फाइदा उठाया
02:29पर कश्मीर अभी तक कंफ्यूजन और कंपनीज की लाग ओफ इंटरस्ट का शिकार है
02:33PMVY की जो स्कीम है इसका प्रीमिम सिस्टम काफी सबसेडाइज़ है
02:38यानि सरकार इसमें ज्यादा हिसा देती है
02:41किसान को सिर्फ 2% देना पड़ता है अगर वो खरीग क्रॉप्स उगा रहे हैं
02:45और सिर्फ 1.5% अगर राभी क्रॉप्स है
02:48अगर किसी किसान ने कमर्शल योहाटी कर्टर क्रॉप्स जैसे सेब, आम वगेरा उगाए हैं
02:54तो उसको 5% तक देना पड़ता है
02:57जो बाकी पैसा होता है वो सेंट्रल गावर्मेंट और स्टेट गावर्मेंट मिलकर बराबर अदा करती है
03:02इस तरह से देखर जाए तो ये इंशॉरंस किसानों के लिए काफी सिस्ती है
03:06लेकिन असल में मसला ये होता है कि कई दफ़ा सरकार का सबसिडी का पैसा ताइम पे इंशॉरंस कमपनीज को नहीं मिलता
03:14इस पज़े से क्लेम प्रोसेस डिले हो जाता है
03:16और कई किसानों को अपना मुआपजा यानि कमपनसेशन मिलने में काफी दे लगती है
03:212017, 2018 और 2018 से 2019 में जमों के लगबग देड़ लाख किसानों ने हिसा लिया
03:27118 करोर से ज़्यादा प्रेमियम दिया गया लेकिन सिर्फ 37 करोर का मुआपजा दिया गया
03:332021 से 22 में अनिकना कश्मीर को भी पहली बार स्कीम में शामिल किया गया
03:39ये छोटा मगर इंपॉर्टन्ट स्टेप था
03:4190,000 से ज़्यादा किसानों ने हिसा लिया और 56 करोर का क्लेम मिला
03:45अगले साल भी वैसा ही था लेकिन क्लेम सिर्फ 6 करोर का मिला
03:50रीजन ये था कि डेटा सही नहीं था और किसानों को इंफॉर्मिशन नहीं मिल पाई
03:552023 से 24 में स्कीम को जमूर कुश्मीर के तमाम 20 दिलों तक पढ़ाया गया
04:012,45,000 से ज़्यादा किसानों ने हिसा लिया
04:0598 करोर का प्रीमियम तो लिया गया लेकिन क्लेम सिर्फ 31 करोर का मिला
04:10और 2024 से 25 में भी ऐसा ही ट्रेंड रहा
04:13अब बात उन कंपनीज की करे जो ये स्कीम चला रही है
04:16इसमें पाँच बड़ी इंशॉरंस कंपनीज ने अब तक काम किया है
04:20अग्रिकल्टर इंशॉरंस कंपनी, ICICI लंबार्ड, इपको टोकियो, रिलाइंस जेनरल और बज़ाज अलाइंस
04:27ये सब कंपनीज, सरकारी इदालों और फाइनाशल इंस्टूशन के साथ अक्रीमेंट साइन करती है
04:33जुमुन कश्मीर बैंक स्कीम के लिए नोडल बैंक है
04:36यानि सब कुछ इसी बैंक के जरिये कॉडिनेट होता है
04:39इस वक्त लगबग 18 इंस्टूरंस कंपनीज हैं जो अर्रकूर्चर इंस्टूरंस का काम करती है
04:44और इस साल जुमुन कश्मीर आडमिनिस्ट्रिशन की बिरिंग प्रसेस में सबने हिसा लिया है
04:49लेकिन असली मसला है कश्मीर के सेव यानि आपल के बागों का
04:54जो फेमस भी हैं और एकोनॉमी का इंपोर्टन्ट हिसा भी
04:57लेकिन ये कभी प्रॉपरली बीमा के अंडर नहीं आई
04:59क्यों? क्योंकि यहां अनबर सिस्टम चलता है
05:03अंदाजे आँखों से लगाया जाते है
05:05Officials का कहना है कि उन्होंने सरकार को ये सजेस्ट किया था
05:09कि जुमूर कश्मीर में जो फ्रॉट्स उगाये या रहे हैं
05:12उन्हें PMFBI के जरिये कवर करना मुश्किल है
05:15क्यों? क्योंकि यहां पर
05:17फसल का अंदाजा लगाने के लिए
05:19ट्रेडिशनल तरीके यूज होते हैं
05:21जो साइन्टिफिक नहीं होते
05:22और इंशॉरंस कंपनीज इन मेथर्ट को
05:24एक्सेप नहीं करती
05:25लेकिन ये भी कहा गया है कि इन
05:28fruits को R-WBCIS यानि
05:30Restructured Weather-Based Crop Insurance
05:32कीम के अंडरकावर किया जा सकता है
05:34ये स्कीम थोड़ी अलग करी
05:36किसे काम करती है
05:37इसमें देखा जाता है कि
05:39मौसं कुछ fixed indicators
05:41यानि humidity, temperature और बारिश
05:44अगर ज़्यादा बदल जाएं
05:46तो किसान को claim मिलता है
05:47क्योंकि ऐसे बदलते मौसं का सीधा असर
05:50पैदावार पर पड़ता है
05:51कवरिश की बात करे तो
05:53ज़्यादा कवरिश वीट को मिल रहा है
05:54ज़्यादा इंशॉरंस जुमों के
05:56प्लेइंस में होती है
05:57जहां वीट की खेपी ज़्यादा होती है
05:59एक officer ने हमसे बात करते हैं कहा कि
06:02अभी तक सिर्फ 16 फीसद
06:04जमीन स्कीम के अंडर कावर हो रही है
06:06हम चाहते हैं कि कम से कम
06:0825 फीसद जमीन कावर हो
06:10पारलेमेट में दे गए गए नंबर्स की मताबक
06:132022 से 23 में
06:1444,000 हेक्टर्स
06:17और 91,500 किसान
06:202023 से 24 में
06:221,25,000 हेक्टर्स
06:24और 2,00,000 से ज़्यादा किसान
06:26स्कीम में शामिल हुए
06:27अब लोन की बात करें तो लोन का बोर्ज भी कम नहीं
06:31मार्च 24 तक
06:3217,800 करोर से ज़्यादा का
06:35अगरिकल्चर लोन है जमोई किश्मीर में
06:37हर किसान पर आवरिज
06:3930,000 का कर्स है
06:40ऐसे में बीमा एक सेफटी नेट होना चाहिए
06:43लेकिन अभी भी ज्यादातर किसान
06:45इसे एक और स्थरकारी जहंजट समझते हैं
06:48इसी वज़ा से
06:49ओफिशिल्स चाहते हैं कि
06:51केसी सी होल्डर्स के लिए
06:52इंशॉरंस मेंडेटरी हो
06:54एक इंसाइडर ने हम से बात करते हुए
06:57बताया कि 2020 से 21
06:58और 2023 से 24
07:01तक 96 करोर के क्लेम्स आए
07:03जिसमें से 94 करोर रुपे
07:05जैनवरी 2025 तक दे दिये गए हैं
07:08लोकसाबा को भी बताया गया
07:10कि 2019 से 20
07:11और 2023 से 24 तक
07:13124 करोर के क्लेम्स आए
07:15और 117 करोर
07:17से ज़्यादा औरड़ी पे किये गए हैं
07:19अड़निस्ट्रेशन ता माना है
07:21कि ये स्खीम आगर कल्चर की
07:23मजबूती के लिए ज़रूरी है
07:25खास को जुमन किश्मीर जिसे फरजाय जगा में
07:28ओफिशर्स कहते हैं कि
07:29डिजिटाइजेशन, लान्ड रिकॉर्ड्स का
07:32इंटिक्रेशन, मॉबाइल से
07:33क्लेम फाइल करने का आप्शन, इन सब
07:35चीजों से सिस्टम बहतर बनेगा
07:37एक आफिसर में इस चीज के
07:39मतलब बात करते हुए हमें बताया कि
07:41प्रीमियम तीन लोग मिलके देते हैं
07:44किसान, स्टेट,
07:46सरकार और सेंट्रल सरकार
07:47ज़्यादा बड़न दोनों
07:49गावर्मेंट्स उताती हैं लेकिन
07:51जब तक तीनों का हिस्सा कंप्लीट
07:53नहीं होता, क्लीम प्रोसेस नहीं होता
07:55अब सेंट्रल गावर्मेंट अपना शेर
07:57पहले दे देती है, लेकिन
07:58स्टेट का भी आदा शेर आना चाहिए
08:00वरना प्रोसेस रुख जाता है
08:02लेकिन ग्राउंट रिपोर्ट्स पे बात की जाए
08:05तो कहानी कुछ और ही है
08:07किसान अक्सर कंप्लीन करते हैं
08:09कि ट्रांस्पेरिंसी नहीं होती
08:11जब लॉस का अंदाजा लगाया जाता है
08:13ट्रॉप काटिंग का काम
08:14उनकी मर्जी या जानकारी के बगैर होता है
08:17remote sensing technology का use हो रहा है
08:20लेकिन कई जगों पर
08:21ये actual ground conditions से match नहीं करती
08:24इस वज़े से disputes होते हैं
08:26हर district में एक grievance redressal committee होनी जाही
08:30जिसमें officials, insurance reps और किसान body होती है
08:34लेकिन कई जगों पर ये committee काम नहीं करती
08:37जिनके claims reject होते हैं
08:39वो अक्सर state neural officer या ministry तक complaint नहीं पहुँचा पाते
08:43especially गाओं के लोग
08:45लेकिन असलिए अमतिहान क्या है
08:47सिर्फ ये कि अगर कुलगाम या कठवा का कोई छोटा किसान
08:51जब ओला बाजी से फसल गवा दे
08:54तो क्या उससे मावज़ा मिलेगा
08:56नाज़िए ये स्कीम तभी successful मानी जाएगी
08:59जब किसान को वक्त पर मौवज़ा मिले
09:01सिर्फ प्रीमियम कलेक्ट करना या जरिश्ट्रेशन का नंबर बढ़ाने से नहीं
09:06ये स्कीम health insurance की तरह काम करनी चाहिए
09:09जहां मदद तब मिले जब सबसे ज़्यादा जरूरत हो
09:13आज की इस कश्मीर रिपोर्ट में इतना ही
09:15बाकी मालूमात के लिए बने रहे कश्मीर लाइक के साथ
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