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  • 1 year ago
Grandpa_s Palace _ Dad ka muhal _دادا کا محل_ Stories in Urdu
Transcript
00:00एक दूर द्रास गाओं में एक छोटा बचा अली अपने दादा के साथ रहता था
00:04अली के वालदेन शहर में काम करते थे
00:07इसलिए वो अक्सर गाओं आकर दादा के महल जैसे गर में रहता था
00:11ये गर हकीकत में एक महल ही था
00:14बड़े बड़े सतोनों, उन्ची च्छतें, लकड़ी की सीड़ियां और दरजनों कमरे
00:18अगरचा अब ये महल पराना हो चुका था
00:20मगर इसमें एक खास बात थी दादा की महबत और उनकी कहानियां
00:24हर राद दादा जान अली को सोने से पहले कहानिया सुनाते
00:28कभी जानरों की, कभी बादशाहों की और कभी खुद अपने बच्पन की
00:32अली की पसंदिदा जगा महल का वो कमरा था
00:35जहां दादा एक बारी कताब दिखाते जिसमें खजाने की तस्वीरें थी
00:40एक दिन अली ने पूछा, दादा जान क्या ये वाकी खजाने का महल है
00:44दादा जान मुस्कराए और कहा, हाँ बेटा, लेकिन खजाना सोना चांदी नहीं होता
00:49बलके यादें, कहानियां और महबत होती है
00:52इस पर अली हंच पड़ा और बोला, फिर तो ये महल सबसे अमीर है
00:56एक दिन गाउं में खबर फैल गई, कि शहर की एक कमपनी ये पुराना महल खरीदना चाहती है
01:01ताकि इसे होटल में बदला जा सके
01:03गाउं के लोग बहुत खुश हुए, क्योंकि एक कमपनी ने वादा किया था
01:07कि वो इस गाउं के लोगों को नुकरियां देगी
01:09लेकिन अली का दिल तूट गया, वो महल बेचना नहीं चाहता था
01:12अली ने दादा जान से कहा, हम ये महल क्यों बेच रहे हैं, ये तो हमारा गर है
01:17दादा जान ने गहरी सांस बरी और कहा, बेटा अब वक्त बदल गया है
01:22लोग अब कहानिया नहीं सुनते, सिर्फ पैसे गिनते हैं
01:25अली खमोश हो गया, इस रात वो चुप चाप महल के मुखलिफ कमरों में गया
01:29इनके दिवारों को चुआ, इन्हों ने दादा की कहानिया सुनी थी
01:33इसे एहसास हुआ, ये सिर्फ एक अमारत नहीं, बलके इसकी बच्चपन की दुनिया है
01:37अगली सुबह अली ने अपनी जमाद के बच्चों को महल बलवाया
01:41इसने खुद दादा की परानी कहानिया सनाई, बच्चे हसे, तालिया बचाने लगे
01:45और दादा चान भी दर्वादे पर खड़े मुस्करा रहे थे
01:48इनों में देखते ही देखते, ये ममूल बन गया
01:51महल कहानियों का मरकज बन गया
01:53गाओं के लोग भी यहां आने लगे
01:54और जल्द ही ये एक लाइबरेरी बन गई
01:56और यहां बच्चों के लिए कहानियों की क्लासित शुरू हो गई
01:59महल जिन्दा हो गया
02:01अब ये सिरफ एक प्रानी अमारत नहीं बलके इलम और महबद की पनागा बन चुका था
02:05दादा चान ने एक दिन अली को गले लगा लिया
02:08तुमने महल को असल ख़दाना वापस दे दिया
02:10लोग कहानिया खुशिया और महबदें
02:13Asal dolet is not a piece of money, but a gift, a love for us.
02:17Which things we have to do, they are the best of the quality of the house.
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