00:00एक जंगल जो गना, सरसबस और खूबसूरत था
00:03इसमें बड़े बड़े द्रखत, रंग बरंगे फूर और तरह तरह के जानवर बस्ते थी
00:08इस जंगल में एक चलाक बंदर रहता था
00:10जिसका नाम बाली था
00:12वो बहुत फरतीला और शोखा था
00:14हर वक्त इदर उदर चलांगे मारता रहता
00:17इस जंगल के एक कोने में एक छोटा सा चुहा भी रहता था
00:21चुहा नहायद सादा, मेहिंती
00:23मगर थोड़ा डर पोक था
00:24बंदर बाली अक्सर इसका मजाक उड़ाया करता
00:27इसे कहता
00:28अए छोटे कानों वाले, तुम तो इतने कमजोर हो
00:31के हवा से ही उड़ जाओ
00:33चुहा शर्मा कर चुप चाता
00:34तेकिन दिल ही दिल में कहता
00:36कभी वक्त आएका, जब बंदर को मेरी कदर होगी
00:39एक दिन जंगल में अजीब सा शोर उठा
00:41सब जानवर गपरा गए
00:43एक शकारी जंगल में आ चुका था
00:45इसके साथ जाल, बंदूग और कुटे भी थे
00:48जानवर इदर उदर चुपने लगे
00:50बंदर बाली दरखत पर चड़ गया
00:52और कहने लगा
00:53मैं तो महफूज हूँ
00:54शकारी मुझे नहीं पकड़ सकता
00:56लेकिन वो ये नहीं जानता था
00:58कि शकारी ने दरखतों पर भी जाल बचा रखा था
01:00बाली एक शाक से दूसरी शाक पर चलांग मार रहा था
01:04कि अचानक एक जाल में फस गया
01:06इसके हाथ और पैर जाल के अंदर उलच गए
01:08वो जितना निकलने के कोशश करता था
01:11उतना ही जाल सकत हो जाता
01:12फिर कहता बचाओ बचाओ
01:14वो जोर जोर से चलाने लगा
01:16लेकिन जंगल में सब जानवर खोफ सदा थे
01:19कोई मदद को ना आया
01:20तब ही चुहा जो करीबी चारी में चुपा हुआ था
01:23बाली की अवाद सुनकर दोड़ता हुआ आया
01:25बंदर शर्मिंदा होकर बोला
01:27चुहे बईया प्लीज मुझे इस जाल से नकालो
01:30मैंने तुम्हारे साथ बहुत बुरा किया है
01:32लेकिन अब मैं वाकी फस गया हूँ
01:34चुहा मुस्कराया और बोला
01:36दोस्ती का वक्त कभी खतम नहीं होता
01:38बाली बाई
01:38और फोरण अपने नकीले दाटों से जाल को काटने लगा
01:42कुछ ही देर में जाल कट गया
01:44और बंदर अजाद हो गया
01:45बंदर ने चुहे को गले लगा लिया
01:47और आंखों में आंसु आ गए
01:49और कहने लगा कि मुझे माफ कर दो
01:51तुमने मेरी जिन्दगी बचाई है
01:53आज के बाद मैं किसी का मधाग नहीं रहाँगा
01:55और तुमें अपना सबसे अच्छा दोस्त मानता हूँ
01:58चुहा खुश होकर बोला
02:00असल दोसी मुश्किल वक्त में पहचानी जाती है बाली
02:03उस दन के बाद जंगल में बाली और चुहा हर वक्त साथ रहते
02:07बंदर अब ना सिर्फ उशार बलके समझदार भी हो गया था
02:10वो सब चानरों की इज़त करता और चुहे की बहादरी की कहानिया सुनाता
02:14चुहा भी अब मजीद खुद अतमाद हो चुका था
02:17आते हैं के जब भी जंगल में किसी को मुश्किल पेश आती बाली और चुहा
02:20सबसे पहले उसकी मदद के लिए पहुंचाते
02:23इनकी दोस्ती पूरे जंगल के लिए मसाल बन गई थी
02:26हर कोई इनकी दोस्ती की मसाले देता था
02:28और हकिकत में दोस्ती होने भी ऐसी चाहिए
02:31जब एक बंदा मुश्किल में हो
02:32दूसरा उसकी मदद के लिए फुरन पहुंचाए
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