00:00प्रदाम अचार जी, मेरा अवलोकन है, फिर उसमें एक क्वेस्चन में है, अवलोकन ये है कि जिसे कोई घटना चल रही है, चलते चलते में इसको बिल्कुल पकड़ लिया, चलते चलते ही वो पकड़ में आ गई मेरे, और फिर मैंने ये प्रेश्न किया कि क्या था ये, तो म
00:30कभी-कभी ये से कुछ बहुत परिशान कर रहा है, और मैंने सोचा चलो बैटके इसको सोचते ही है, चलो देखते हैं कहां तक जाएंगे, तो मुश्किल से कुछ सेकेंड्स ही होते हैं, कि वो बुद्दा खतम ही हो जाता है, नहीं जा ही नहीं पाते हैं, कि सोचके बैटते
01:00कि अंत्राल जैसे कोई घटना घटी और मैं आगे बढ़ गई फिर जब जैसे आपने बोला ना कि पूछो दो मिनट में कि क्या हुआ तो मैंने पूछा कि क्या हुआ और पाया कि मैं गलत थी और मैं कुछ गलत करके निकल गई तो फिर उसमें एक मतलब गिल्ट सा होता है अं�
01:30तो उची दिवाल सी होती जाती है फिर जब ज़्यादा टाइम हो जाता है या कभी एक दो शेशन गैप हो गया तो फिर वो गिल्ट ऐसा होता है कि मैं फिर पीछे ही चली जाती हूँ फिर मुझे आने में शायद एक हपता भी लग जाए तो ये गिल्ट वाली प्रॉब्लम
02:00असर ये होता है कि जो मैं आगे बढ़ी थी जैसे मैं जिम जाना शुरू करी पढ़ाई शुरू करी अच्छे से कर रही थी जिम आपने छोड़ा मान लीजिए वो एक हपते में दो दिन तीन गैप हो गया फिर फिर गिल्ट आपको पीछे कैसे ले गई वो वही गैप जो हो
02:30गिल्ट इतनी आई कि आप फिर आप दो हफते को नहीं गई हाँ मैं क्या बूलू ये गिल्ट है कि मजे ले रहे हो गिल्ट मने अपराध भाव अपराध बोध को कहते हैं गिल्ट हाँ मैं अपराधी हूं येस आइ स्टेंड गिल्टी
02:57जो अपराधी होगा वो अपराध और पांच बार करेगा जो मान लेगा जिसको अपराध बोध हो रहा है कि हाँ मैं अपराधी हूं उसको ये बोध हुआ है कि मैं अपराधी हूं तो चोलो भी इसी के पांच बार और मजे लेते हैं वो ये करेगा तो ये गिल्ट थोड़े
03:27क्रोध ऐसा ही आता है कि चलो होई गया है तो थोड़ा मज़ा ही लेक के आते हैं और फिर जब लॉट के सत्रों में आते हैं तो फिर अंदर से वेदान्तिक वाला क्रोध उठता है कि गलत कर लिए
03:43मज़े लेने हैं कुछ भी करके सही काम से बचना है वो ना मैंने पंदरा दिन तक अवलोकन नहीं लिखा कम्यूनिटी पे तो फिर मैंने तीन महीनी तक नहीं लिखा
03:54इसका क्या जवाब दूँ यह वो बिंदो है जहां पर आके तरक समाप्त हो जाता है इसका कोई उत्तर हो सकता है क्या
04:07नहीं जी मैं तो हर बार दो तारीक को रिजिस्टेशन करा लेती हूं इस बार दो की जगह पांच हो गया तो फिर मैंने पूरे महीने नहीं कराया
04:17वो मैं डाइट पर चल रही थी मैंने महीने भर तक बिलकुल एक दम संभाल कर खाया था फिर एक दिन पाइटी में खा लिया तो फिर मैंने दस दिन तक और तलाब होना खाया इसका क्या जवाब दिया जाए
04:37इसका मजब कुछ समझ है नहीं रहे हो सिर्फ जिस चीज़
04:47में घुस रहे हो उसमें बलात घुसे हो जिस चीज़ को दबा रहे हो उसको बलात दबाया है जिम भी करने जा रहे थे जबरदस्ती करने जा रहे थे इसलिए जरा सा मौका मिला नहीं उड़ गए
05:01खान पान को रोका था तो जबरदस्ती रोका था तो जरा सा मौका मिला नहीं कि ठूस लिया
05:10और ठूसने के बाद क्या कहा
05:13हाई अब मैं तो कितनी
05:15अपराधी नहीं हूँ
05:16वेभिचारे नहीं हूँ
05:17पापी नहीं हूँ राक्षसी हूँ
05:19मैंने अब इतना बड़ा पाप करी दिया है
05:23तो चलो पाँच पाप और सही
05:25वो फिक फिल्म थी
05:28उसमें वो एक को मारता है
05:29दूसरे की ओर मुड़ता है तो वो
05:33पुलिस वाले खड़ा हुए हैं बोलते हैं
05:35देखो कानून को अपने हाथे मत लो
05:38बोलते तुवारे कानून में
05:43एक हत्या और दस हत्या
05:45दोनों की एक बराबर सजा है
05:48जब एक को मारी दिया है
05:50दस और उडा देते है एक बर्गर साफी कर दिया तो दस और उडा देते है इसका कोई उत्तर हो सकता है तो इमांदारी की कमी है बस और क्या है
06:09और इमांदारी आपकी अपनी चीज है मैं कहां से आपको दे दूँगा मैं अधिक से दिख आपको प्रेरणा दे सकता हूँ
06:22साहस की कुछ बाते बोल सकता हूँ
06:24पर उचा वर्धन करना
06:30सोड़ा होसला अफजाई कर देना ये एक बात है आखरी चीज तो आपको सोच नहीं है
06:39दूसरा आदमी होता है जो कहता है कि एक दिन जिम छूटा है
06:43तो अगले दिन दो बार करेंगे
06:45एक आदमी ऐसा भी तो हो सकता है ना एक आदमी होता है आज छूटा है तो
06:49थोड़ी देंग एक आदमी हो सकता है कि
06:52आज इस बार परीक्षा नहीं दी है
06:54तो अब कमर कसली है कि
06:56दो महीने तक एक भी परीक्षा छूटे नहीं
06:59एक सत्र में सो गए
07:02तो अगली बार
07:04साथे नौ बजे से आसन मार के बैठ जाएंगे
07:07किसी हालत में सो न जाए
07:08एक रिस्पॉंस ये भी तो हो सकता है
07:13और एक हो सकता है
07:14जब एक सत्र अब छूटी गया है
07:16तो आगे कभी कुछ समझ में नहीं आएगा
07:19तो क्यों कुछ सुनना है
07:22अब ऐसा करेंगे कि हम सारी पिछली पूरी रिकॉर्डिंग सुन लेंगे
07:25पूरा जितने तीन साल में अचारे जी ने बोला है
07:28थोड़ा बहुत पांसाथ घंटे बोला होगा
07:30वो पूरा सुन लेते हैं
07:32उसके बाद अगला लाइव सुनेंगे
07:33मूरख मैंने जितना बोला है उतना सुनने के लिए
07:36आठ जनम भी कम पड़ेंगे
07:37तुम्ही क्या शर्त रख रहे हो अपने उपर
07:40बहुतों का आता है नए नए आते हैं यहाँ पर
07:41और कहते है लाइफ तो तब सुनेंगे न जब बैकलॉग क्लियर कर लेंगे
07:46गणित के पुजारी पूडी तो उसमें तु संख्या जोड के देख ले कि
07:54वो कितने घंटे का बैकलॉग है जिसको तु क्लियर करने की सोच रहा है
07:57वो कभी भी हो सकता है
08:00जो बोला है वो अभी बहुत बड़ी समस्या आ रही है
08:13हमारे पुब्लिशर हैं पेंग्विन वगेरा ये कह रहे हैं कि और तो सब ठीक है पर
08:18अपनी गीता तो दे दीजिए
08:21इतनी गीताएं हैं बुक स्टोल में मार्केट में तो उसमें साथ सोच लोग हैं तो शलोग ये वो उस पर थोड़ी अपना ठीका टिपड़ी ऐसे करके बोलते हैं लोग ले आते हैं गीता हैं
08:33हम कैसे दे दें हैं हमारे एक अध्याय की घीता इतनी मोटी होती है अठारा अध्याय की तो किताब नहीं लाइबरेरी बनेगी और ये कह रहे हैं पूरा बैकलॉग क्लियर कर लेंगे उसके बाद हम लाइव सुनेंगे
08:54ये इमानदारी की कमी के लावा और क्या है बुलिए
09:00और जब बैकलॉग क्लियर करना ही है तो थोड़ा और बढ़वी गया बैकलॉग तो क्या होता है
09:16हमाले के उपर ले जाकर कि एक पत्थर और रख दो तो हमाले का वजन थोड़ी बढ़ जाता है
09:21बैकलॉग वैसे ही अनन्त था
09:23दो-चार सेशन और छोड़ दो
09:25तो बैकलॉग भढ़ थोड़ी जाएगा
09:27तो अब जितने सेशन छोड़ने हैं छोड़ो
09:29परिक्षा में पीछे का एक सत्र इसलिए ले लेते हैं
09:38क्योंकि पता है पूरा तो पीछे का नहीं देख सकता कोई भी
09:41तो धीरे-धीरे करके पीछे का एक-एक लेते रहते हैं
09:44कि इतना ही पढ़लो परियाप्त है
09:46पूरा तुम जिन्दगी में नहीं सुन पाओगे
09:49तुमसे थोड़ा सा मैं कड़ाई से इसलिए बोल रहा हूँ
09:55क्योंकि जो भोल रही हो न ये बहुत व्यापक समस्या है
09:59हर आदमी ऐसा ही करता है
10:01कि अब तो एक बार गलती होई गई
10:07तो अब छूट मिल गई है दस बार गलती करने की
10:13ये मत कर ले न
10:15जितना भी थोड़ा बहुत भी बचता हो उसको बचाओ
10:21ये मत कहो कि अब जब छूटी गया है तो छोड़ी दिया
10:25नहीं उसको बचाओ
10:26जितना भी बचा सकते हो बचाओ
10:28वही जोड़-जोड़ के बहुत सारा हो जाएगा
10:30अंग्रेजी में चलता है जिसको हिंदी में ऐसे कहेंगे
10:37कि श्रेश्ठतम को श्रेश्ठ का दुश्मन नहीं बना लेना चाहिए
10:43श्रेश्ठतम बात तो ये होगी कि जिम जा रहे हो तीस दिन तो तीस में तीस दिन चले गए
10:48पर यह नहीं कर लेना चाहिए कि अगर 30 दिन नहीं जा पा रही हूं तो 1 दिन नहीं जाओंगी
10:5430 दिन चले जाते यह क्या हो जाता
10:59शिश्टतम बात हो जाती 30 दिन नहीं जा पा रहे तो 25 दिन जाओ 20 दिन जाओ 15 दिन जाओ
11:06लेकिन ये मत कह दो कि या तो 30 दिन
11:09अब नहीं गई तो फिर देखेंगे
11:12अब इस महीने कौन सोचे
11:13अब अगले महीने देखेंगे
11:14यह होता है कि नहीं होता है
11:17अब अगले महीने देखेंगे
11:19अब एक तारीक से बिलकुल
11:20मैं नई ताजी शुरुआत करूँगी
11:23उत्साहित, कुछ नहीं हो न, एक तारीक आजाएगी, आप तो वैसे के वैसे ही रहोगे न, आपका क्या बदला है, फिर वही करोगे
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