00:00देश भर में बेसाकी का पर्व खूब धूमधाम से मनाया जाता है। सुबा से ही देश के सभी गुरुद्वारों में श्रधालों का ताता लगता है।
00:07बतादें कि सिखधर में बेसाकी पर्व को सिख नववर्ष और सिख पंथ की स्थापना के रूप में मनाया जाता है।
00:13बेसाकी शब्द के असली मतलब के बारे में बात करें तो बेसाकी शब्द आता है बेसाक यानि बेसाक महीने से जो हिंदू कैलेंडर का दूसरा महीना होता है
00:24इस महीने की पहली या तेरवी तारिख को बेसाकी पर्व मनाया जाता है
00:29किसान अपनी फसल काड़ता है गुरुद्वारों में सेवा और भक्ती होती है और हर कोई एक नई उम्मीद के साथ जीवन को सेलिबरेट करता है
00:37सिख धर्म के लिए बेसाकी बहुत खास है
00:401699 में इसी दिन गुरु गोबिंद सिंग जी ने खाल सा पंध की स्थापना की थी
00:45यानि ये दिन धर्मिक जागरिती और एक तका भी प्रतीक है
00:49तो चलिए बताते हैं कि आखिर क्यों मनाया जाता है बेसाकी का पर्व
00:53बेसाकी पर्व सिख धर्मे धर्मिक महत्व रखता है
00:57इसे सिख नव वर्ष की शुरुवात का प्रतीक माना जाता है
01:00इसलिए इस पर्व को पारंपरिक रीती रिवाजों के साथ दूम धाम से मनाया जाता है
01:06ये परवधार्मिक के साथ-साथ एतिहासिक महत्व भी रखता है
01:10सिक धर्मिकी मानिताओं के मताबिक माना जाता है कि बेसाखी के दिन
01:14सन 1699 में सिखों के गुरू श्री गोविंद सिंग ने सिख पंत की स्थापना की थी
01:20के बाद से ही हर साल बेसाखी का तेवहार मनाया जाता है
01:24इस महीने भी रभी की फसल पकने के बाद कटाई भी शुरू हो जाती है
01:29इसलिए इस दिन को सिख धर्म की स्थापना, सिख नववर्ज यानि सिखों का नया साल और फसल पकने के रूप में मनाया जाता है
01:37फिलाल इस वीडियो में तो नहीं उमीद है आपको ये जानकारी पसंद आई होगी
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