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  • 2 years ago
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**"छल "** is a captivating Hindi cartoon story that will delight and inspire young viewers. Join us on a magical adventure as we explore the power of fate and the importance of perseverance. Through vibrant animation and a heartwarming narrative, this moral story teaches valuable lessons about overcoming challenges and believing in oneself. Don't miss this enchanting tale that will leave you with a smile and a sense of wonder.

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छल (exact title)
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Indian cartoon
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Transcript
00:00हमारे लिए ये कितनी खुशी की बात है कि आज हमें पुत्र प्राप्त हुआ है और पुत्र प्राप्ती के अवसर पर आज मैं बहुत ही ज़्यादा खुश हूँ
00:16महाराणी तुमने आज हमें बहुत ही ज़्यादा प्रसनता दी है क्योंकि आज पुत्र का जन्म होते ही मुझे मुझे एक नई आशा की किरन दिखाई दी रही है
00:29महाराणी तुमने आज हमें बहुत ही ज़्यादा प्रसनता दी है क्योंकि आज पुत्र का जन्म होते ही मुझे मुझे एक नई आशा की किरन दिखाई दी रही है
00:43आप बिल्कुल सही कह रहे हैं महाराणी खुशी तो मुझे भी बहुत हो रही है इस राज़ी के लिए एक उत्तर अधिकारी का चम देना मेरा कर्तव्य था वो मुझे पूरा कर दिया आपकी बड़ी राणी से भने ही आपको कोई पुत्र प्राप ना हुआ हो लेकिन मुझ
01:14बहुत अच्छा बिचार है महाराज आप इस सिसू के भांक्या के बारे में गुरुजी से जरूर पूछे कि ये किस तरहा का राज करेगा इसका बविश्य कैसा होगा हा महाराणी मैं कल ही जाओंगा
01:31राजा की पड़ी राणी को आप तक पुत्र प्राप नहीं हुआ था इसलिए उसके मन में इरशा थी
01:43बताओ छोटी राणी ने तो पुत्रों को जन दे दिया अब वो ही इस राज्ये का उद्धर अधिकारी बनेगा
01:53लेकिन मैं तो किसी संदान को जन नहीं दे पाई और ना ही अब दे पाऊंगी क्योंकि मेरा आयो इतनी जादा हो गई है
02:01गुरुजी प्रणाम काफी समय हो गए आपके दर्शन किये हुए
02:19काफी खुशी हुई तुम्हें यहां देखकर कहो कैसे आना हुआ
02:27गुरुजी कल मुझे एक पुत्र की प्राप्ति हुई है वो एक लड़का है और मैं चाहता हूँ कि आप उसका नामकरण करे और साथ में यह भी बताए कि उसका भाग्य कैसा होगा
02:42राजन आपको पुत्र प्राप्त हुआ यह तो बहुत ज्यादा सोभाकी की बात है एक राजा को उत्राधिकारी और एक पिता को अपना पुत्र प्राप्त हो गया है तुम्हारे पुत्र का तीच सूर्य की समान होगा और उसका पूरे विश्व में गुनगान होगा इसल
03:12कहते हैं मैं ऐसा ही करूँगा सूर्य कान्त नाम बहुती ज़्यादा उत्तम है मैं इस पुत्र का नाम सूर्य कान्त ही रखूँगा
03:22इसके बाद राजा अपने महल आ जाते है और छोटी राणी से कहते है
03:37महरानी, हम गुरु जी से मिल कर आ गये है और गुरु जी ने बताया है क्या हमारे पुतर का नाम सूर्य कान्त होगा
03:47अरे यह तो बहुती अच्छा नाम है इसका नाम सुर्य कानट ही रखते है
03:52कुछ बर्स बीच जाते हूँँ, पर सूर्יהकिंड आप बड़ा हो चुका था।
04:04पेटाज्जी
04:06आप तू तीर कमान चलाना भी जानते हैं।
04:09और मुझे भी तीर कमान चलाने काभय बहुत मन है.
04:13मैं भी तीर कमान चलाना चाहता हूँ,
04:15पर मुझे तू तील कमान चलाना आता भी नहीं।
04:24समय के साथ सुर्यकान आस्तर सस्तर सब कुछ सीखता है
04:29और कुछ बर्स बाद वो राजखमार योबा अवस्ता में आ जाता है।
04:34बताओ मेरा एक भी संतान नहीं है।
04:38चोटी राणी को संतान हुई और वो लड़कर देखो आप तो योबा को आ गया है।
04:44आप तो ये जरूर ही राजा का राज अधिकारी बन जाएगा और उत्तर अधिकारी प्राप्त करनेगा।
04:51उत्तर अधिकारी पत पाकर राजा तो मुझे भूल भी जाएंगे।
04:55मैं तो एक राशी की तरहाँ ही रहूँगी पर इस राजकुमार का क्या करना है ये मुझे समझ नहीं आता है।
05:14कुछ दिन बाद राजा के मंतरी राजा के पास आते हैं।
05:18महराज, आपका पुत्र तो अब युवा वस्था को आ गया है। इसलिए आपको इसके लिए एक सुन्दर कन्या से विवाह भी करना चाहिए।
05:32क्योंकि सुन्दर कन्या से विवाह होगा, तब ही इस राज के लिए गौरव की बात होगी।
05:37जैसे आपने अपने उत्राधिकारी पद को इसे दिया है, उसी प्रकार से ये राजकुमार भी आपके वंश को आगे बढ़ाने के लिए उत्राधिकारी हैं। इसके लिए इन्हे विवाह करना पड़ेगा और जब ये विवाह करेंगे, तब ही इस राज्य का वैभव बढ
06:08महाराज, मैं ऐसे बहुत से लोगों को जानता हूँ जो अच्छे कुलके हैं और जिनकी बेटियां सुन्दर, सुशीर और संस्कारी हैं।
06:19मेरी नजर में राजकुमार के लिए एक बहुत अच्छा रिष्टा है। आप कहें तो बताओ।
06:26हाँ जरूर, बताये कौन सा रिष्टा है आपकी नजर में जिससे मैं अपनी पुत्र का विबाह कर सकूं।
06:33तो महाराज, मेरी नजर में एक ही सेठ है जिसकी पुत्री बहुती जादा सुन्दर है और संस्कारी भी है।
06:42ठीक है तो फिर बात आगे बढ़ाये विचार करते हैं ठीक है
06:48ठीक है महाराज
06:53इसके बाद मंत्री सेट के घर जाते है और सेट से कहते है
06:59सेट जी, महाराज ने आपकी पुत्री का हाथ मांगा है क्या आप इसके लिए तयार है
07:06क्या
07:10मैं तो महाराज के लिए अपनी पुत्री देने को तयार हूँ लेकिन
07:15क्या महाराज तयार है
07:19हाँ महाराज को इस रिष्टे में रुची है
07:36कुछ दिन बाद सुर्यकांट का विवा उस सेट की बीटी से तई हो जाती है
07:44जब ये बाद बड़ी राणी को पता चला कि सुर्यकांट का विवा होने वाला है उसका मन जल उठा
07:52अरे आप तो इसका विवा भी होने जा रहा है अब मैं क्या करूँ
07:59पहले राणी ने पुत्र को जन्म दिया और आप उसकी साधी होने वाली है
08:05अब एक और राणी आएगी और वो भी मेरा इच्छत नहीं करेगी
08:09मुझे वो सोतेली साथ से ज़्यादा कुछ नहीं समझेगी
08:12मुझे इस साधी में बिगन डानने के लिए कुछ तो करना ही पड़ेगा
08:19बड़ी राणी ऐसा सोचती है और वो अपने दासों को बुलाती है
08:26तुम लोग मेरी बात ध्यान से सुनो जैसे मैं कहती हूं वैसे ही करना
08:32और फिर बड़ी राणी उन सब दासों के कान में कुछ कहती है
08:43ठीक है बड़ी राणी अम समझ गए क्या करना है
08:48भाग्य दिखा लो शेट जी अपना भाग्य दिखा लो यह हमारे गुरु जी है और इनका कहा हुआ कभी नहीं मिरता है
09:09भाग्य दिखा लो अपना भाग्य दिखा लो
09:15सेट बहुती ज़्यादा प्रसन होकर अपना भाग्या दिखाने के लिए आता है
09:23अरे भाईयों कौन भविश्य देखनेता है तो बताओ मेरा भविश्य क्या होगा
09:30तुम्हें देखकर तो ये लगता है कि तुम्हारे संग कुछ छल हो रहा है
09:46अरे मेरे संग छल हो रहा है पर कैसे
09:52क्या तुम्हारी कोई पुत्री है और उस पुत्री का विवाह होने वाला है
09:59हाँ मेरी एक पुत्री है और उसका विवाह भी होने वाला है
10:05तो जिससे विवाह होने वाला है वो लड़का तो एक पागल है
10:11मैं तो बस इतना ही जानता हूँ कि तुम्हारे भाग्य को देखकर लगता है कि तुम्हारे संग धूका हो रहा है
10:18अरे नहीं ऐसा नहीं हो सकता तुम दोनों जरूर छोट बोल रहे हो अरे मुझे मूर्क मत बनाओ निकल जाओ यहां से अब निकलो
10:32ये कहते हुए वो छूट मूट के वविष्य देखने वाले वहां से चले आते है
10:44और फिर राजा के पास जाते है
10:49भाग्य दिखा लो अपना भाग्य दिखा लो
10:54अरे भाग्य बताओ तो मेरा भागय क्या होगा
10:59महराज, आَपके भाग्यको दीकऱ दो लगता है कि आपके यहाँ पर एक बफु आनेवाली है और वो लड़की एक चरित रेहन लड़की है
11:10क्या आपके लड़के का कुछ दीनों में वौढ होने वाला है ।
11:16हाकूं०
11:17हा वीवह तो होने वाला है।
11:20लगिन आप ये कयों कहरेहं की चरितर हीन लड़की आने
11:25वाली है?
11:26चरितर हीन बहू कैसे आ सक्ती है ।
11:28अरे लेकिन आपके भाग्य में तो यही निखा है।
11:34मैं यह नहीं मानता हूँ, तुम दोनों जरूर जूट बोल रहे हो।
11:39अब जितनी जल्दी हो सके निकल जाओ मेरे सामने से, नहीं तो तुम दोनों को पगड़कर काराग्रे में डलवा दूँगा।
11:46जब राजा के कान में यह खबर पड़ी, तो वो बहुत जादा चिंता में पड़ जाते हैं और फिर सोचने लगते हैं।
12:02अगर इन दोनों की बात सच निकली और सच में कोई चरितरहीन लड़की इस राज की बहु बन के आ गई, फिर तो अनर्थ हो जाएगा।
12:15महरानी, जैसा जैसा आपको कहा था, वैसा हमने कर दिया।
12:29मुझे यह सुनकर बहुत खुसी हुई, तुमने अपना कारिय कर दिया, अब आगे जो करना है, वो मुझे करना है, अब तुम लोग जा सकते हो।
12:46आखिर कर वो दिन आ ही जाता है जब युबराज का विवा होने वाला होता है, विवा के आपसर पर सबी लोग आये हुए थे, और राजा इंदुमती को देख कर सोचने लगे,
13:02देखने में तो लड़की बहुत ही सुन्दर लगती है, लेकिन इसको चरित्र कैसा है, ये मैं कैसे पता लगाओं।
13:12राजा यही सब सोच रहा था कि इधर से सेट भी कहते है,
13:17मैं अपनी पुत्री का इस लड़के से विवाह नहीं कर सकता, मुझे ऐसा लग रहा है कि ये लड़का सही नहीं है।
13:26अरे समदी जी आप ये कैसी बाते हैं, बतलब आज आपके पुत्री की मेरे बेटे से शादी होने वाली है और आप कह रहे हैं कि मेरा बेटा ठीक नहीं है, ये क्या बात है।
13:38अरे महराज माफ करिये माफ करिये, मुझे थोड़ा वहम हो गया है, मुझे भस थोड़ा सा अजीब सा लग रहा है।
13:49वहम निकाल दीजे सेट जी, मेरे लड़के में कोई भी दोश नहीं है, मेरा बेटा आपकी बेटी के लिए बिल्कुल सही है।
13:58पिताची, आप सरसे भी चिंता ना कीचिये, मैं तो इन्हें अपने मनमंदिर में बसा चुकी हूँ, अब यही मेरे पती है।
14:11अब पास में खड़ी हुई बड़ी राणी सोचने लगी।
14:17अरे मेरा काम तो होते होते रहे किया, अब मैं क्या करूँ, अभी मेरे पस बहुत काम समय बच्चा है, मुझे जल से जल्द कुछ भी करकी ये सब रोपना होगा।
14:31सबी लोग रुप जाओ, बहुत रात हो गई है, सब लोग ठक गए होंगे, है न, बहुत रात हो गई है, हम सब अभी थोड़ा विश्राम करेंगे और सुबह अपने सफर पर आगे बढ़ेंगे।
14:56राजा की बात सुनके, सबी उस बन में ठहर जाते हैं, सुर्यकांत और इन्दुमति भी उसी बन में रुप जाते हैं।
15:05इन्दुमति सोचने लगती है, अरे ये कैसे बोलो गई मुझसे, मैं तो अपने पती के लिए वार लोनो बोल ही गई।
15:22ये सोचते सोचते इन्दुमति सो जाती है और फिर रात को उसे एक सपना आता है, इन्दुमति मेरी बात ध्यान से सुनो, तुम अभी उठो और एक विक्ति जो तुम्हारा रहा देख रहा है उसके पास जाओ और वो जो बस्तु तुम्हे दे उसे ने लेना।
15:42ये सुनकर इन्दुमति उठती है और रास्ते की और जाने लगती है। उसके पीछे पीछे बड़ी राणी भी जाने लगती है। आखिर इतनी रात को ये कहा जा रही है, अरे ये तो किसी पुरुष से मिलने जा रही है, ये ही मोका है इस लड़की को टिकाने लगाने का।
16:13और फिर बड़ी राणी राजा के पास जाती है।
16:17महराज चारा यहाँ आईए, मुझे आपको कुछ दिखाना है।
16:24राजा बड़ी राणी के साथ वहाँ जाता है।
16:29महराज वो देखिए, आपकी बहु किसी पुरुष के साथ बात कर रही है।
16:35मैंने पहने ही कहा था, यह चरिक्टरा हीन है।
16:40अरे, यह लड़की इस पुरुष से क्यों बात कर रही है।
16:45असल मैं, इंदुमती उस व्यक्ति से पुस्प ले रही थी, ताकि अपने पती को भेट कर सके।
16:53भाईया, आपने बहुत अच्छे किया, कि मुझे ये पुन दे दिये, अब मैं ये पुहार के रूप में अपने पती को दे सकुंगी।
17:13बारात, राजमहल पहुँच जाता है, और राजकुमार सुर्यकान्त, अपनी पत्नी इंदुमती से कहता है।
17:22इंदुमती, अब हमारी शादी हो चुकी है, तो मेरे लिए कोई उपहार नहीं लाई।
17:29जी, मैं आपके लिए ये सुन्दर फून ले कर आई हो।
17:37अरे वा, ये तो बहुत ही जादा सुन्दर है।
17:39सुर्यकान्त और उसकी नए नवेली दुलहन का प्यार धीरे धीरे और गेहरा होते जा रहा था, लेकिन बड़े राणी एक के बाद एक चाले चलने में लगी हुई थी।
17:55उसका एक ही मकसद था, कि इस नए नवेली दुलहन को राजा के सामने बुरा सावित करना।
18:03राजा के मन में जो आग मेंने डाली है, अब उसमें खी डाली का समय आ गया है।
18:12बड़ी राणी राजा के पास जाती है।
18:18महराज, आपने देखा ही था कि आपके बोभो उस दिन एक पराये पुरुष के साथ बात कर रही थी।
18:25अब आपने आखिर क्या सोचा है इसके बारे में।
18:31लेकिन महराणी, ये हमारा वहम भी थो सकता है।
18:34हो सकता है कि वो किसी और काम से उस पुरुष के पास गई हो, जैसा आप सोच नहीं है, वैसा ही हो, ये जरूरी तो नहीं है डा।
18:46ये राजा तो मेरा कोई बात समझने के लिए तैयार ही नहीं है।
18:50लगता है मुझे फिर से कोई सर्यंत्रा रचना होगा।
18:55और फिर बड़ी राणी इंदुमती के पास जाती है।
19:00इंदुमती, तुम्हें एक छोटा सा काम करना है।
19:06हाँ मा, बताईए क्या करना है।
19:10बेटा तुम जरा हमारे बगीचे में जाओ और कुछ फूल तोड़ कर लाओ।
19:16ठीक है मा, मैं नहीं आती हूँ फूल तोड़ कर।
19:21इंदुमती उस बगीचे में जाती है।
19:24वहाँ और दो वेक्ती बेटे हुए थे।
19:27इंदुमती उन लोगों से कुछ बात करने लगती है।
19:31तबी राजा उसे देख लेता है।
19:33अरे ये तो मेरी बहु इंदुमती है।
19:37अब भाला ये किस से बात कर रही है।
19:41राजा एकले बेट के ये सोच रहा होता है
19:44कि वो किसे अपने बहु बना के घर में ले आया है।
19:48और वो लड़की उनकी कुल का सत्यानास कर देगी।
19:51राजा इंदुमती को बुलाता है।
19:55इंदुमती मैं अभी इसी वक्त तुम्हे अपने राज से निकालता हूँ।
20:01तुमने नाक में दम कर रखा है।
20:04तुम शरित्र हीन हो।
20:07मेरे कुल का नाम मिट्टी में बिला दोगी।
20:10किया क्या कर रहे हैं महराज।
20:12मेरे कुल का नाम मिट्टी में बिला दोगी।
20:16किया क्या कर रहे हैं महराज।
20:19मेंने क्या किया है।
20:21तुम्हारे लक्षार ठीक नहीं है इंदुमती।
20:24तुम पराय पुरुशों से बात करती हो।
20:28पर महराज मैं तो वहां से फून लेने के लिए गई थी।
20:33मैं कुछ नहीं जानता।
20:36तुम अभी इसी वक्त ये राज्य छोण कर चली जाओ।
20:41बात खत्म।
20:47इंदुमती उस राज्य से निकल जाती है।
20:52हे भगबान ये अनट मेरे साथ क्यों हो रहा है।
20:57मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा।
20:58मैंने कुछ किया भी नहीं फिर भी मैं अपने पती से बिछड गई।
21:06सूर्यकन्त अपनी पत्नी को यहां वहां खोशता है।
21:18पिता जी, इंदुमती कहां गई?
21:21उसको मैंने निकल दिया।
21:24अरे पर क्यों?
21:25तुम्हारी पत्नी चरितरहीन थी, बराय पुर्शों से यह बात किया करती थी।
21:32अरे पिता जी, यह आपनी क्या कर दिया? आप एक बहुती बड़े भ्रम के शिकार हो गए हैं।
21:38तब ही वहां बड़ी रानी पहुँच जाती है।
21:41तुम्हारे पिता बिल्कुल सही कह रहे है सुरियकांत, वो नड़की इंदुमती, एक बहुती चरितरहीन नड़की थी।
21:50आप चूब रहे हैं, मुझे सब पता है, यह सब आपका ही शरीयंतर है, आपकी ही वज़े से आज मेरी पत्नी मुझसे बिछड गई है।
21:59सुरियकांत उस दासों को बुलाता है, जो सादु का वेश बनाकर सेट के पास गई थी।
22:05यही वो लोग हैं, जिन्होंने इस वहम की नीव डाली। पहले इन्होंने सेट के पास जाकर बोला कि लड़का पागल है, और फिर आपके पास आकर बोला कि लड़की चरितरहीन है।
22:17पिता जी, और भी न जाने कितने लोगों का उप्यो करते इन्होंने आपको मन में ये बात डल वाई, कि इंदुमती आपके पास जाकर बोला कि लड़का पागल है, और फिर आपके पास आकर बोला कि लड़की चरितरहीन है।
22:31ये तो बहुत बड़ा अनर्थ हो गया। महराणी, आपको जड़ा से भी शरम नहीं आई। ये ये प्रश्वाद नहीं है। ये प्रश्वाद नहीं है। ये प्रश्वाद नहीं है। ये प्रश्वाद नहीं है। ये प्रश्वाद नहीं है। ये प्रश्वाद नहीं है�
23:01ये ये सब करते हुए, अपने ही परिवार की सुख, शांती छीन लिया आपने।
23:06या कहूँ मैं।
23:08इसके बाद राजा इंदूमती को वापस बुला लाता है
23:14और ऐसे साजी सरचने के लिए बड़ी राणी को महल से बाहर निकलने की सजा दे देते हैं।

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