00:00रामू तुमने सुना हरे जमीदार ने अब हमारे खेतों पर भी अपना कब्ज़ जमा लिया है
00:19हाँ क्या ये क्या कह रहे हो ये तो ये तो बहुत बुरा हुआ
00:26अरे हाँ भाई हाँ हम मेहनत करकर के यहां तक पहुँचे थे और ये अब तो सब चला गया
00:45हाँ ये कैसे हो गया सुखिया भाई हमें इस जमीदार का खिलाब कुछ करना होगा
00:52मेरे हिसाब से हमें हमें मुखिया जी के पास जाकर बात करनी चाहिए
00:59शायद वही हमारी मदद कर सकें
01:01क्या बात है सुखिया तुम सब यहां कैसे चले आए
01:15अरे मुखिया जी क्या बताएं हम
01:19हरे जमीदार ने हमारे खेतों पर कब्जा कर लिया है
01:23उसने हमारी सारी जमीन अपने नाम कर ली है
01:27अरे ये तो ये तो बहुत बड़ी समस्या है
01:33हम्म्म हमें कुछ न कुछ उपाएं करना ही होगा
01:37हमारी पास अब दूसरा कौनों रास्ता नहीं बचा मुखिया जी
01:44अगर हम खेती नहीं कर पाएंगे
01:47तो क्या खाएंगे आप ही बताएए
01:49हम्म्म ठीक है ठीक है
01:54आप सब लोग मेरी बात ध्यान से सनिए
01:56हम सब मिलकर जमीदार के पास जाएंगे और
02:00उससे बात करेंगे देखते हैं क्या होता है ठीक है चलिए
02:05और जमीदार साहब हम आपसे एक विनिती करने आए हैं
02:20प्रपया हमारी जमीने हमें वापस कर दें विनिती हैं आपसे
02:25अरे भाईया मेरे प्यारे भोले भाले गाउबासियों ये बताओ
02:36तुम लोगों ने मुझसे करज लिया था जो उसकी भरपाई कौन करेगा भाई
02:43हैं हाँ तो अब जमीने किसकी हुई मेरी हुई ना फिर
02:51जमीदार साहब वो बात ठीक है कि हमने आपसे कर लिया था
02:58लेकिर हम सब गरीब लोग हैं मेहनत मजदूरी करके ही गुजारा करते हैं
03:03करपया करपया हमारी जमीने लोटा दीजिए
03:06जमीने लोटा दीजिए ज्यादा बाते मत करो मुझसे
03:11तुम लोगों के पास अगर पैसे हैं तो कर्ज चुकाओ वरना यहां से निकल जाओ
03:19सीधी बात भाईया तमझे नेगलो यहां से
03:24हाँ विमला जमीदार ने तो हमारी एक ना सुनी अब हम क्या करेंगे
03:47यह तो बहुत बुरा हुआ हमारे पास तो बस खेती बाड़ी का सहारा था
03:53अब बिना जमीन के हम कैसे जिएंगे
03:56हाँ यही सोच सोच कर तो मेरा बुरा हाल हो जा रहा है विमला
04:02एक तो वेसे भी हमारे पास बहुत ही कम खेती थी
04:08मगर जैसे भी थी उससे हमारा किसी भी तरहा से गुसारा चल जाता था
04:13अब वो जमीन भी हम से छीन गए इससे तो हमारा जीबन मुसीबत से भर जाएगा
04:19हम तुम सही कहती हो विमला और हम इस मुसीबत भरे जीबन को कब तक बरदाश्ट कर पाएंगे
04:28विमला मुशे लगता है कि हमें हमें राजा विक्रम से मदद लेनी चाहिए वो न्याये प्रिये हैं शायद हमारी बात सुनने क्या कहती हो
04:48तुम सही कह रहे हो सुखिया एक पर कोसिस करने में कोई हर्ज नहीं है
04:55महराज की जै हो महराज की जै हो
05:22मेरा नाम सुखिया है महराज
05:24मैं एक छोटे से गाओं का गरीब किसान हूँ
05:28समीदार ने हमारी सारी जमीने छीन ली है महराज
05:32मैं मैं आपके पास न्याय की उमीद लेकर आया हूँ महराज
05:37बिनती स्विकार कीजिए दया कीजिए
05:40देखो ये गरीब किसान हमारे सामने क्या मांगने आया है
05:46हम तो तुम लोग गरीब हो
05:52सुख्या मेरे पास तुम्हारी समस्या का कोई समधान नहीं है
05:59महराज महराज हम आपकी प्रजा है
06:04हमारे पास कुछ भी नहीं बचा
06:07क्या क्या आप हमें इस तरह अकेला छोड़ देंगे महराज
06:11बक्वास मत करो और मेरे दर्वार में मुझसे बहस भी मत करो
06:16मार निकलो यहां से
06:17सैनिको ले जाओ इसे
06:20तुम्हारी जैसी परिशानियों में उलचने का मेरे पास समय नहीं है
06:31अरे अपने भाग एको कोसो और भागो यहां से
06:35अरे भाग इने जितना दिया है उससे ज़्यादा भला मैं क्या कर सकता
06:39महराज मेरे मेरे परिवार में खाने को कुछ नहीं है
06:46आपके राजकुमार आदित फलो को खाने के साथ साथ बरबाद कर रहे है
06:52और महराज हम लोग भूखे है
06:55ये महल है गरीमों का जोपड़ा नहीं
07:01जहां तुम्हारे जैसे लोग अपने शिकायते लेकर आए
07:04साने को इस आदमे को धक्के मार कर बाहर निकालो
07:08लेज़ आओ इहां से
07:09सुक्या अब समिनलार की गुलामी में जीबन बिता रहा था
07:33बग युजरता है और इसी तरह बीस साल बीच जाते है
07:38सुक्या का बेटा अशोक अब बीस साल का नोजवान हो चुका था
07:43और यूद कला में निपून था
07:45पेता जी आप तो एक किसान है फिर भी आपने मुझे युद्ध कोशल क्यों सिखाया
08:00हाँ अशोक
08:02बेटा ये दुनिया गरीबों के लिए आसान नहीं है
08:07हमें अपनी रक्षा के लिए ताकतवर बनना होगा
08:12पेता जी आप मुझे हमेशा युद्ध सिखाते हैं
08:17क्या मुझे इन चीजों के कभी जरूरत पड़ेगी
08:19हाँ समय आने पर तुम सब समझ जाओगे मेरे बेटे
08:27हमें न्याय के लिए लड़ाई लड़नी ही होगी
08:30अशोग जब तक तुम खुद को मजबूत नहीं बनाओगे
08:52ये दुनिया तुम पर अत्याचार करती रहेगी
08:56हमें अपना हक पाने के लिए खुद को तयार करना होगा
09:01पिता जी मेरा सवाल फिर से वही है
09:06ये ये तलवार बाजी क्यों पिता जी क्यों
09:10हम तो किसान है ना हमें तो हल चलाना है
09:14मुझे इन सब की जरूरत क्यों पड़ेगी
09:16बला किसानी में तलवार बाजी की क्या आविश्च रकता
09:20बिटा, एक सच्चा किसान वो है
09:25जो सबसे पहले अपनी मिट्टी की हिफाज़त कर सके
09:28मैं फिर कहता हूँ
09:43सुनो, सुनो, सुनो
09:45राजा विक्रम, एक विशेश प्रतियोगिता आयोजन कर रहे है
09:52जो भी योद्धा राजकुमार आदित्य को हरा देगा
09:56उसे सोने की थाली भेट की जाएगी
10:01सुनो, सुनो, सुनो
10:04अरे, ये तो बड़ी बात है
10:08क्या हमारे गाओं का कोई इस प्रतियोगिता में भाग लेगा
10:12पर हम में से कोई इतनी कुशलता रखता है क्या
10:17आखिरकार, राजकुमार तो महराज के पुत्र है
10:22कोई साधारण योद्धा तो है नहीं
10:25हम्म, ये हमारे लिए एक मौका है
10:31मैं अशोक से बात करूँगा
10:46अशोक, बेटा अशोक
10:48तुम्हें प्रतियोगिता की घोशना पता चली?
10:50अहां पताजी, पर उससे हमें क्या?
10:54हम तो एक आम किसान है
10:56और भला राजकुमार से लड़ना
10:59इतना आसान नहीं होगा पताजी
11:02बेटा, ये सिर्फ प्रतियोगिता नहीं है
11:07ये हमारे लिए न्याय पाने का अवसर है
11:11अगर तुम इस प्रतियोगिता को जीतते हो
11:14तो राजा को हमें सुनना ही होगा
11:18अच्छा, तो आप चाहते हैं
11:23कि मैं इस प्रतियोगिता में हिस्सा लूँ
11:25और राजकुमार को हराऊं?
11:27हाँ, अशोग, बिल्कुल
11:31पर हमें कोई धन दौलत नहीं चाहिए
11:33अगर तुम जीत गए
11:35तो राजा से बस एक विनती करना है
11:38विनती? का से विनती?
11:43राजा से कहना
11:44कि वो और उनका परिवार
11:47हमारे गाउं में आकर कुछ समय विताएं
11:49तभी उन्हें हमारी कटनाईयों का
11:51अंदाजा होगा
11:52हम, पिता जे मैं आप की बात
11:57समझ गया
11:58और अब मैं इस चुनौती को
12:01स्विकार करता हूँ
12:19कौन है वो बहादूर
12:23जो मुझसे टकर लेने आया है
12:25आप बुलाओ उसको
12:26राजकुमार, नमस्ते
12:45मैं आपके साथ इस प्रत्योगिता में हिस्सा लेने आया हूँ
12:49मैं केशव नगर का एक किसान हूँ
12:52एक किसान का बेटा वला मुझसे क्या मुकाबला करेगा
12:57है
12:58लगता है किसी ने तुमें मेरी ताकत का अंदाजा नहीं करवाया
13:04क्यों है
13:05राजकुमार, ताकत के परिभाशा कुशलता और समर्पड में होती है
13:12चलिए, देखते हैं
13:22अशोक, अशोक, अशोक
13:47तुमने ना केवल अपनी मैनत से, बलकि अपनी बहादरी से हमें प्रभावित किया है
13:52बहुत बढ़िया, बहुत बढ़िया
13:54बताओ
13:55तुमें इनाम क्या चाहिए
13:58बोलो
13:59महराज, महराज
14:02आपकी प्रशंसा के लिए धन्यवा
14:05लेकिन मुझे आपके दौलत की जरूरत नहीं है
14:09बस आपसे एक विनती है
14:12अच्छा, कहो अशोक, तुमारी क्या विनती है
14:17महराज, मैं चाहता हो के आप और आपका परिवा
14:22हमारे गाओं में एक महीने के लिए रहे
14:25जैसे हम रहते हैं, वैसी ही सादगी में रहे
14:29केवल तभी आप हमारे दुख दर्द को समझ सकेंगे
14:33यही विनती है महराज
14:36क्या? हम एक गाओं में ये कैसी मांगे?
14:42महराज, ये एक साहसिक कदम होगा
14:47प्रतियोगिता का नियम है
14:50जो जीतने वाला इच्छा करेगा
14:53राजा को तो वो इच्छा माननी ही होगी
14:56क्योंकि राजा भी राज्य के कानून के अधीन आते हैं
15:02सोच लीजिए
15:03हम, ये सच है
15:09अगर मुझे अपनी प्रजा का दुख समझना है
15:13तो उनके साथ उनका जीवन जीना होगा
15:16पिदा जी पर हम, हम वहां रह कैसे सकते हैं
15:26वहां की सुक्स विदाई हमारे महल जैसे नहीं है
15:28ये कैसे हो सकता है
15:31बिटा अधित्य, हमें इसकी बात माननी ही होगी
15:37नहीं तो दूसरे राजे के राजा ये कहकर हमारा मजाग उड़ाएंगे
15:42कि राजा विक्रम एक साधारन पुरुष की इक्षा भी पूरी नहीं कर सका
15:47ठीक है
15:52अशोक, मैं तुम्हारी ये विनती स्विकार करता हूँ
15:57हम तुम्हारे गाउं में आकर कुछ समय बिताएंगे
16:01ठीक है
16:17महराज, हमारे गाउं में आपका स्वागत है
16:37आए महराज, आए, आए, आए
16:39यहां का जीवन उतना आसान नहीं है जितना महल में होता है
16:45हम, अब हमें यही देखना है सुखिया
16:49हमने अब तक अपनी प्रजा के दुख को दूर से भी नहीं देखा
16:54अब हम करीब से देखेंगे
17:15यहां तो साप पारी के लिए भी मीलो पैदल जलना पड़ता है
17:23यह लोग इतनी कठी नाई में कैसे जीते हैं
17:27युक्मने शायद ये इनका दैनिक जीवन है
17:32इनके पास ना तो हमारी तरह सुविधाएं हैं ना ही आराम
17:38यही इनका संघर्ष है
17:41पिता जी यहां के बच्चों के पास तो खेल खेलने के भी साधर नहीं है
17:49वो देखी ना मिट्टी में खेलते हैं
17:52कपड़े गंदे हो जाते हैं
17:55और उनके पास पुराने कपड़े हैं
17:57जी जी जी जी कितने गंदे हैं ये लोग
18:01महराज, हमारे पास कुछ भी नहीं है
18:10जमीदार ने हमारी सारी जमीन छीन ली है
18:13और अब हम मजदूरी करके किसी तरह गुजारा कर रहे हैं
18:20महराज, हमने कज लिया था
18:22पर उस जमीदार ने इतना सूद लगा दिया
18:25कि हम चुका ही नहीं सके
18:27अब हमारे पास कुछ ना बचा महराज, कुछ ना बचा
18:33ये ये तो सरासर अन्याय हुआ
18:37हाँ, मुझे समझ नहीं आया
18:41कि हमारी प्रजा ऐसी कटनाई में भला जी कैसे रही है
18:45सुखिया, मैं समझता हूँ कि यहां कि लोग कैसे कठिन परिस्थितियों में जीते हैं
19:00मैंने अपनी आखों से देखा
19:03कि तुम्हें छोटी छोटी चीजों के लिए भी संगहश करना पड़ता है
19:08मैंने देखा है, सब कुछ देखा
19:10महराज, अब हम आपसे क्या छुपाएं, यही हमारा जीवन है
19:18अब तो बस रहते रहते आदत सी हो गई है
19:24लेकिन आपकी उपस्थिती से हमें आस है कि हमारे जीवन में कुछ सुधार हो सकता है
19:31बस और कुछ नहीं कहेंगे
19:34पहराज, मैंने यहां के लोगों की सेहन सिलता देखी है
19:39इतना कठी जीवन जीते वे भी उनके चेरे पर संतोस है
19:45सायद हमें इनके लिए कुछ करना ही होगा
19:48पिता जी, मैंने अपने जीवन में कभी ऐसा नहीं देखा था
19:54ये लोग कितनी मेहनद करते हैं
19:56और फिर भी उन्हें न्याय नहीं मिलता
19:59मुझे लगता है कि ये स्थिती बदलनी चाहिए
20:02क्या कहते हैं आप
20:03गाओ वालो, मैंने तुम्हारे जीवन को करीब से देखा है
20:15ये अनुभो मेरे लिए आखी खोलने वाला रहा है
20:19मैंने तै किया है कि अब से तुम्हें
20:23जमीदार के अत्याचार से मुक्ती मिलेगी
20:26महराज, क्या सच में आप हमारे लिए कुछ करेंगे?
20:36हमने तो मेरी छोड़ दी थी
20:38हाँ, मैं तुमसे वादा करता हूँ
20:44कि तुम्हारी जमीनों पर जो कर्ज है
20:46वो मैं खुद माफ करूँगा
20:49अब से कोई भी जमीदार या साहुकार
20:53तुम पर अत्याचार नहीं कर सकेगा
20:56महराज, आपने हमारे लिए जो किया है
21:03उसका हम जीवन भर आभार मानेंगे
21:06आप ही हमारे सच्चे रक्षक है
21:09पिता जी, मैं भी इन लोगों के संगर्ष में इनके साथ हूँ
21:14मैं चाहता हूँ कि हमारी राज्जी में हर जगह इसी तरह का न्याए हो
21:19जमीदार, तुम्हारे अत्याचार के दिन खत्म हुए
21:38अब से तुम इस गाओं के लोगों पर कोई अत्याचार नहीं करोगे
21:43उनकी जमीने और उनकी महनत उनकी अपनी है
21:47तुम्हें इनसे कुछ भी हड़पने का कोई अधिकार नहीं है
21:51महराज, महराज, महराज, महराज
21:56कृपिया मुझे माफ कर दीजे, माफ कर दीजे, माफ कर दीजे
22:02मैं फिर कभी ऐसी गल्टी नहीं करूँगा
22:05माफी, माफी, माफी
22:07मैं तुम्हें एक अवसर दे रहा हूँ
22:11कि तुम अपने कृतियों के लिए प्राइश्चित कर सको
22:15अगर तुम अपनी जमीने इन किसानों को लोटाओगे
22:18तो मैं तुम्हें शमा करने का सोचूंगा
22:22बोलो
22:23ठीक है ठीक है जी महराज
22:27मैं आपकी आग्या का पालन करूँगा
22:30अब से ये किसान अपनी जमीन के स्वयम मालिक होंगे
22:35जैसी आपकी आग्या महराज
22:57पिता जी हमने जो सोचा था वो सच में हो गया
23:06हमें न्याए मिल गया
23:08हाँ बेटा ये सब तुम्हारी मैनत और हमारे संगष का फल है
23:15राजा विक्रम जैसे न्याए प्रिये शासक ने
23:18हमें सही माइनों में अपना हग दिलाया है
23:21तुम लोगों की साथगी और मेनत से मैंने बहुत कुछ सीखा है
23:27हम अपने मेहल में तुम्हारी कठी नायों को समझ नहीं पाते थे
23:32लेकिन आभा में तुम्हारी संगष की सुच्चाई का एसास हो गया है
23:36ये ये मेरा करतव्य था
23:41एक राजा का धर्म है कि वो अपनी प्रजा की रक्षा करे और उनके अधिकारों की हिफाज़त करे
23:47महराज आपने जो हमारे लिए किया है उसके हम रिनी रहेंगे
23:54आप हमारे सच्चे रक्षक हैं
23:56बहुत बहुत धन्यवाद महराज धन्यवाद
23:59तुम्हारी भलाई में ही मेरी सफलता है
24:05हमेशा इसी तरह एक जुट होकर अपने अधिकारों की रक्षा करना