बडविग प्रोटोकोल कैसे काम करता है…
यह उपचार पूरी तरह वैज्ञानिक और नेचुरल है, क्वांटम साइंस और बायोकैमिसट्री पर आधारित है।
यह उपचार जर्मनी की डॉ. जॉहाना बडविग ने विकसित किया था। चलिए इस उपचार को समझने के लिए निम्न बिंदुओं पर गौर कीजिए।
1. यह कैंसर के मूल कारण पर प्रहार करता है।
2. कैंसर के मुख्य कारण की खोज ओटो वारबर्ग ने कर ली थी। जिसके लिये उन्हें नोबल पुरस्कार से नवाज़ा गया। उन्होंने सिद्ध किया कि यदि कोशिकाओं में ऑक्सीजन की कमी हो जाए तो हमें कैंसर हो जाता है।
3. ऑक्सीजन का काम हमारे लिए ऊर्जा बनाना है। ऑक्सीजन की कमी होने पर कोशिकाएं ग्लूकोज को फर्मेंट करके ऊर्जा बनाने की कौशिश करती हैं और सिर्फ 5% ऊर्जा बनती है। और खराब वाला लीवो-रोटेटिंग लेक्टिक एसिड बनता है, जो शरीर को एसिडिक बनाता है।
4. डॉ. वारबर्ग ने हमें बताया था कि कोशिका में ऑक्सीजन को आकर्षित करने के लिए दो तत्व जरूरी होते हैं, पहला सल्फरयुक्त प्रोटीन जो कि क्रीम जैसे पनीर में पाया जाता है और दूसरा तत्व कुछ फैटी एसिड्स हैं जिन्हें कोई पहचान नहीं पा रहा था। वारबर्ग ने भी प्रयोग किए परंतु वह भी इस रहस्यमय फैट को पहचानने में नाकामयाब रहे। उस दौर के कई शोधकर्ता भी इस विषय पर शोध कर रहे थे, पर कोई भी उस फैट के पहचान नहीं पाया।
5. वक्त गुजरता रहा और फिर 1949 में डॉ. बडविग ने पेपरक्रोमेटोग्राफी तकनीक विकसित की, जिससे वे फैट पहचान लिए गए। वे फैट्स थे अल्फा लिनोलेनिक एसिड और लिनोलिक एसिड, जो अलसी के कोल्ड-प्रेस्ड तेल में भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। ये हमारे शरीर में नहीं बन सकते इसलिए इन्हें असेंशियल फैट्स का दर्जा दिया गया है। इनमें ऊर्जावान इलेक्ट्रोन्स की अपार संपदा होती है। जब ये फैटी एसिड्स सल्फरयुक्त प्रोटीन के साथ हाथ में हाथ मिलाकर कोशिका में पहुँचते हैं और कोशिका तथा माइटोकॉन्ड्रिया की भित्ति में अवस्थित होते हैं, तब ये उर्जावान इलेक्ट्रोन्स ही ऑक्सीजन को कोशिका में आकर्षित करते हैं। जैसे ही ऑक्सीजन कोशिका में पहुँचती है, उर्जा निर्माण के तीनों स्टेप्स सक्रिय हो जाती हैं तथा पूरी उर्जा बनने लगती है, ग्लूकोज़ का फर्मेंटेशन बंद हो जाता है और कैंसर का अस्तित्व खत्म हो जाता है। यह खोज बहुत महान थी और कैंसर के उपचार में विजय की पहली पताका साबित हुई।
6. अब बडविग ने सोचा कि अब मैं कैंसर को ठीक कर सकती हूँ। बस उन्होंने कैंसर के 650 मरीजों पर ट्रायल किया। उन्हें अलसी का तेल और कॉटेज चीज़ मिला कर देना शुरू किया। तीन महीने बाद नतीजे चौंका देने वाले थे। मरीजों का हीमोग्लोबिन बढ़ गया था, वे ऊर्जावान और स्वस्थ दिख रहे थे और उनकी गांठे छोटी हो गई थी। इस तरह बडविग ने अलसी के तेल और पनीर के मिश्रण और स्वस्थ आहार विहार तथा शरीर के टॉक्सिन्स निकालने के उपचार आदि को मिला कर कैंसर के उपचार का तरीका विकसित किया था, जो बुडविग प्रोटोकोल के नाम से विख्यात हुआ।
7. इस उपचार से उन्हें हर तरह के कैंसर में, हर स्टेज के कैंसर में और मरणासन्न रोगियों में भी 90 प्रतिशत प्रामाणिक सफलता मिली और उनका नाम नोबल पुरस्कार के लिए सात बार चयनित हुआ।
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Dr. Om Verma
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