00:00मेरा दोस्त था खर्गोश शम्शेर वो अब रहा नहीं
00:10खर्गोश जैविक रूप से ठोड़ा डड़ा हुआ जीव होता है
00:18क्योंकि वो मासी मास होता है उसके पास कोई बहुत अपनी रक्षा के लिए हथियार होते नहीं है
00:24थोड़ा दाथ होते हैं थोड़े पंजे होते हैं पर उनसे जादा कुछ कर नहीं सकता है मिटी खोद लेता है
00:28बस
00:33शम्शेर को मैं ऐसे अपने सामने उल्टा लिटा देता था और ये खर्गोश आम तोर पर कभी नहीं करते
00:42चारों उसकी टांगे उपर और मैं उसकी गर्दन से हला रहा हूँ और उस सो जाता था और सो ही
00:50जाता था
00:53एक दो मिनट बीच जाए तो फिर मुझे डर लगे कि पता नहीं ऐसे सोना इनके लिए ठीक है भी
00:58कि नहीं कहीं
01:00ब्रेन का ब्लड फ्लो हो गए रहा तो नहीं रुकरा इसका तो फिर मैं उसको ऐसे पलट दो तो वो
01:06जग जाए लेकिन मैंने कई बार देखा है शंशेर को ऐसे पलट के मैं सोला दूँ और वो पल्टा हुआ
01:15है चारों उपर गरके सो गया है इसके लिए बहुत भरोसा चाहि
01:19है क्योंकि एक तो खरगोश, कोमल, नाजुक, कमजोर और वो भी उसने अपने आपको सबसे असुरक्षित, एकदम वल्नरेबल इस्थिति में,
01:35पोस्चर में डाल लिया है जहां कोई भी अब उसको एक जटके में तो उसको रहा होगा इतना भरोसा
01:46लिए मैं देखूँ वो ऐसे सो जाए, तो और जो खरगोश थे वो ऐसे दूर से उसको देख रहे है
01:50और मैं अगर फुड़ा सा भी वो यहां है, मैं ऐसे हो गया, तो इतनी देर में वो आके उसको
01:56नाक्स जैसे
01:59हिलने लगते थे, और फिर जैसे ही कोई और चुए, मैं उसको छू रहा हूँ, सब कर रहा हूँ तो
02:05अपना सो रहा है और जैसे ही कोई दूसरा खरगोश और खरगोश उसको छूए, तो एकदम उचक के पलटके खड़ा
02:11हो जाता था और उनको दोड़ाता था
02:15मैं और खरगोश तो स्वामशेर तो एक ही प्रजाती के थे, तो मेरे साथ उसका भरोसा पक्का था, अपन दोनों
02:26तो एक हैं, पर ये बाकी खरगोश और वो अलग-अलग प्रजाती के थे, उनको वो अपना नहीं मानता था
02:38ये प्रेम की बात है उदो
02:42झाल