00:24SONYA GANTHI
00:30लोग इस बात पर हसेंगे लेकिन मेरा मानना है कि वह आपातकाल के दौरान अपनाई गए रास्तों को लेकर कभी
00:36सहज नहीं थी मुझे लगता है कि ये बात उन्हें भीतर ही भीतर परिशान कर रही थी
00:41SONYA GANTHI के मताबिक आपातकाल लगाने के फैसले को लेकर परिवार में मतभेग थे
00:46उनके पती राजीव गांधी इस फैसले के खिलाफ थे और उन्होंने अपनी मां से अगले चुनाओ तक इंतजार करने को
00:53कहा था
00:53वहीं उनके छोटे बेटे संजय गांधी ने आपातकाल लगाने पर जोर दिया था
00:57SONYA GANTHI के अनुसार इस फैसले से परिवार के भीतर भी तनाव बढ़ गया था
01:02राजीव गांधी ने अपनी मां से इस मुद्दे पर बात करने की कोशिश की
01:05लेकिन उन्होंने उनकी बात सुनने से इंकार कर दिया
01:08दगारजन के अनुसार गांधी ने अपनी पुस्तक में लिखा है
01:11कि अगर संजय गांधी को नियंतरन में रखा गया होता
01:14तो उसके बाद हुए नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता था
01:18सोनिय गांधी से पूछा गया था कि संजय गांधी का नाम आपातकाल का परियाय कैसे बन गया
01:23क्या इंद्रा गांधी ने अपने बड़े बेटे राजीव गांधी और अन्य लोगों की बात सुनी होती
01:27तो उस दोरान हुई जाद्तियों को रोका जा सकता था
01:30इस पर सोनिय ने जवाब दिया कि इसमें केवल संजय की भूमिकान नहीं थी
01:35हाला कि आम लोगों की नजर में उनका नाम अक्सर आपातकाल से जुरा रहा
01:39इंद्रा गांधी पर उनके कुछ वरिष्ट सहयोगियों का भी दवाव था
01:43मुझे लगता है कि उनके आसपास राजीव जैसे बहुत कम लोग थे जो अलग राय रखते थे
01:48ततकालीन प्रधान मंतरी इंद्रा गांधी ने 25 जून 1975 को देश में आपातकाल लागू किया था
01:54राश्टरपती फकरुद्दिन अली एहमद ने इंद्रा गांधी के अनुरोध पर आपातकाल की घोशना की थी
01:59जिसे बाद में केंद्रिय मंतरी मंडल ने मंजूरी दी थी
02:02इंद्रा गांधी ने 18 जन्वरी 1977 को नई चुनाव करानी की घोशना की और सभी राजनीतिक बंदियों को रिहा कर
02:09दिया
02:09इंद्रा गांधी और उनके बेटे संजय गांधी 16 मार्च 1977 को लोगसभा चुनाव हार गये
02:15और उसी साल 21 मार्च को आधिकारिक रूप से आपातकाल समाप्त हो गया
02:19बीजेपी आपातकाल को लेकर कॉंग्रेस की कड़ी आलोचना करती रही है और इसे लोगतंत्र की हत्या पताती रही है