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  • 32 minutes ago
कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने आपातकाल लागू करने को लेकर एक बड़ा बयान दिया है. उन्होंने उस फैसले को एक गलती करार दिया. उन्होंने दावा किया कि उनकी सास और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को भी बाद में ऐसा ही महसूस हुआ था. अपनी किताब 'बिलॉन्गिंग : अ जर्नी ऑफ लव' के विमोचन से पहले ब्रिटिश दैनिक 'द गार्डियन' को दिए एक साक्षात्कार में सोनिया गांधी ने कहा, "मुझे हमेशा लगता है कि इंदिरा गांधी दिल से लोकतांत्रिक थीं. मुझे पता है कि कई लोग इस बात पर हंसेंगे, लेकिन मेरा मानना है कि वह आपातकाल के दौरान अपनाए गए रास्ते को लेकर कभी सहज नहीं थीं. मुझे लगता है कि यह बात उन्हें भीतर ही भीतर परेशान कर रही थी."सोनिया गांधी के मुताबिक, "आपातकाल लगाने के फैसले को लेकर परिवार में मतभेद थे. उनके पति राजीव गांधी इस फैसले के खिलाफ थे और उन्होंने अपनी मां से अगले चुनाव तक इंतजार करने को कहा था. वहीं, उनके छोटे बेटे संजय गांधी ने आपातकाल लगाने पर जोर दिया था."  सोनिया गांधी के अनुसार, इस फैसले से परिवार के भीतर भी तनाव बढ़ गया था. राजीव गांधी ने अपनी मां से इस मुद्दे पर बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने उनकी बात सुनने से इनकार कर दिया. 'द गार्डियन' के अनुसार गांधी ने अपनी पुस्तक में लिखा है, अगर संजय गांधी को नियंत्रण में रखा गया होता तो उसके बाद हुए नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता था. 

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00:24SONYA GANTHI
00:30लोग इस बात पर हसेंगे लेकिन मेरा मानना है कि वह आपातकाल के दौरान अपनाई गए रास्तों को लेकर कभी
00:36सहज नहीं थी मुझे लगता है कि ये बात उन्हें भीतर ही भीतर परिशान कर रही थी
00:41SONYA GANTHI के मताबिक आपातकाल लगाने के फैसले को लेकर परिवार में मतभेग थे
00:46उनके पती राजीव गांधी इस फैसले के खिलाफ थे और उन्होंने अपनी मां से अगले चुनाओ तक इंतजार करने को
00:53कहा था
00:53वहीं उनके छोटे बेटे संजय गांधी ने आपातकाल लगाने पर जोर दिया था
00:57SONYA GANTHI के अनुसार इस फैसले से परिवार के भीतर भी तनाव बढ़ गया था
01:02राजीव गांधी ने अपनी मां से इस मुद्दे पर बात करने की कोशिश की
01:05लेकिन उन्होंने उनकी बात सुनने से इंकार कर दिया
01:08दगारजन के अनुसार गांधी ने अपनी पुस्तक में लिखा है
01:11कि अगर संजय गांधी को नियंतरन में रखा गया होता
01:14तो उसके बाद हुए नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता था
01:18सोनिय गांधी से पूछा गया था कि संजय गांधी का नाम आपातकाल का परियाय कैसे बन गया
01:23क्या इंद्रा गांधी ने अपने बड़े बेटे राजीव गांधी और अन्य लोगों की बात सुनी होती
01:27तो उस दोरान हुई जाद्तियों को रोका जा सकता था
01:30इस पर सोनिय ने जवाब दिया कि इसमें केवल संजय की भूमिकान नहीं थी
01:35हाला कि आम लोगों की नजर में उनका नाम अक्सर आपातकाल से जुरा रहा
01:39इंद्रा गांधी पर उनके कुछ वरिष्ट सहयोगियों का भी दवाव था
01:43मुझे लगता है कि उनके आसपास राजीव जैसे बहुत कम लोग थे जो अलग राय रखते थे
01:48ततकालीन प्रधान मंतरी इंद्रा गांधी ने 25 जून 1975 को देश में आपातकाल लागू किया था
01:54राश्टरपती फकरुद्दिन अली एहमद ने इंद्रा गांधी के अनुरोध पर आपातकाल की घोशना की थी
01:59जिसे बाद में केंद्रिय मंतरी मंडल ने मंजूरी दी थी
02:02इंद्रा गांधी ने 18 जन्वरी 1977 को नई चुनाव करानी की घोशना की और सभी राजनीतिक बंदियों को रिहा कर
02:09दिया
02:09इंद्रा गांधी और उनके बेटे संजय गांधी 16 मार्च 1977 को लोगसभा चुनाव हार गये
02:15और उसी साल 21 मार्च को आधिकारिक रूप से आपातकाल समाप्त हो गया
02:19बीजेपी आपातकाल को लेकर कॉंग्रेस की कड़ी आलोचना करती रही है और इसे लोगतंत्र की हत्या पताती रही है

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