00:03करवा चोद का वृत अखंड सौभागे पती की लंबे आयू और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए रखते हैं
00:09सुबह सर्गी से लेकर रात में चंद्रमा को अर्ग देने तक ये वरत बेहद नियम और श्रद्धा से पूरा किया
00:16जाता है
00:17आये जानते हैं सुबह से रात तक की करवा चोद पूजा की पूरी सटी विधी क्या है
00:23सुर्योदे से लगभग दो घंटे पहले यानि की साड़े तीन बजे से लेकर पांच बजे तक
00:30अब उठकर स्नान कर ले और स्वच्छ वस्त्र पहन कर सास द्वारा दी गई सर्गी की थाली से पल, मिठाई,
00:37पेनिया और मेवे खाले
00:39सर्गी खाने के बाद हाथ में जल और चावल लेकर भगवान शव, माता पार्वती, गनेशी और करवा माता का ध्यान
00:47करते हुए नर्जला वरत का संकल्प ले
00:50अब शाम की मुख्य पूजा के दोरान उत्तर पूर्व दिशा में एक लकडी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा
00:56बिछा ले
00:56चौकी पर करवा माता की तस्वीर और साथी शव पार्वती और भगवान गनेश की मूर्ती या चित्र स्थापित करें
01:04मिट्टी के दो करवे ले एक करवे में जल भरे और दूसरे करवे में गेहूं चावल या चीनी भरे करवे
01:11के उपर ढखन रखे और उस पर शक्कर या बताशे रख दे करवे पर रोली से स्वास्तिक बनाए और गले
01:18में कलावा या मौली बांध दे
01:20इसके साथ ही साथ सीके भी करवे की टोटी में खोस दे
01:24सबसे पहले अब गणेजी को दूर्वा, रोली, चावल या मिठाई अर्पित करें
01:30माता पारवती को रोली, अक्षत, फूल और सुहाग की सामगरी चड़ाएं
01:34भगवान शिव को बेल पत्र, चंदन और जल अर्पित करें
01:37अब करवा माता को रोली, चंदन, अक्षत, धूल दीप और मठाई चड़ाएं
01:42दीप जलाकर करवा चोट की वरत कथा पढ़े या सुने
01:46कथा सुनने के दोरान या बाद में करवा फेरने की परंपरा निभाएं
01:51अपने साज, जिठानी या किसे अन्य सुहागिन महिला के साथ मिलकर करवे की अदला बदली करें
01:57करवे को साथ बार एक दूसरे के हाथों में घुमाते हुए बदला जाता है
02:01करवा बदलते समय ये पारम परिक फंक्तियां दोहराई जाती हैं
02:06करवा लेले करवा दे दे
02:08सत्वंती का करवा लेले करवे में सुहाग बसे
02:12सुहाग बसे परिवार बसे
02:14इसके बाद सास या घर की बुजुर्ग महिला के पैर चुकर आशरवाद ले
02:19और उन्हें बाय नाम हेट करें
02:21चंद्रोदे होने के बाद थाली में जल का कलश, दीपक, रोली, अक्षत, मिठाई और छलनी रखें
02:27दीपक जलाएं और चंद्रमा को रोली, अक्षत और फूल चड़ाएं
02:31करवे या कलश के जल से चंद्रमा को अर्ग दें
02:34छलनी में दीपक रखकर पहले चंद्रमा के दर्शन करें और फिर उसी छलनी से अपने पती का चहरा देखें
02:40चंद्रमा की आरती उतारें और अखंड सौभागे की प्रात्ना करें
02:44पती के माथे पर तिलक लगाएं, अक्षत लगाएं और उनकी आरती उतारें
02:49पती के पैर चुकर आशरवाद लें
02:51पती अपने हाथों से पत्नी को जल पिलाते हैं
02:54और मठाई या फल खिलाकर उनका वरत फुलवाते हैं
02:57असके बाद सुहागिन महला सात्विक भोजन ग्रहर करके
03:00अपने वरत को पून करें
03:01फिलहाल इस वीडियो में इतना ही
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