00:01ुदिश्थिर का रत जमीन को छूता तक नहीं था।
00:04कुरुक्षेत्र के भीशन युद्ध में धर्मराज का रत कभी भी धर्ती पर नहीं टिका।
00:08इसके पीछे छुपा था एक ऐसा सच जो इनसानों की सोच से परे था।
00:13युदिश्थिर को सत्य और धर्म की मूर्ती कहा जाता था, जो कभी जूठ नहीं बोलते थे।
00:19उनके इसी अटूठ सत्य के प्रभाव से उनका रत हमेशा जमीन से उपर तैरता रहता था।
00:24लेकिन कुरुक्षेत्र के युद्ध के दौरान एक ऐसा क्षण आया जब सब कुछ बदल गया।
00:30जब गुरु द्रोन के वध के लिए पांडवों को एक छलका सहारा लेना पड़ा।
00:34युधिष्ठिर ने भगवान श्री कृष्ण के कहने पर दौनाचार्य के सामने एक आधा सच बोला।
00:40अश्वत्थामा मारा गया।
00:42नर्या हस्ती यह शब्दों का एक ऐसा जाल था।
00:46उस एक पल के जूट और धर्म संकट ने युधिष्ठिर के रत का भाग्य बदल दिया।
00:51धरमराज का रत जमीन पर आगिरा क्योंकि सत्य का वह दिव्य कवच तूट चुका था।
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