00:00You know that you know that you can't be able to get rid of the body of the body of
00:12the body.
00:12And you know that the body of the body of the body was able to get rid of the body
00:21of the body.
00:29अपने द्वार पर आये किसी भी याचक को कभी खाली हाथ नहीं लोटने की प्रतिग्या से बंधे थे।
00:36वृद्ध ब्राहमन रूपी इंद्र ने कर्ण से गुरुदक्षिना या दान में उनके शरीर के वही प्रानरक्षक कवच और कुंडल मांग
00:43लिये।
00:43सूर्यदेव ने पहले ही कर्ण को इस धोखे से आगाह कर दिया था, लेकिन दानवीर पीछे हटने वाले नहीं थे।
00:50बिना एक पल जिजक के कर्ण ने अपनी ही तलवार उठाई और अपने शरीर से कवच को काटना शुरू कर
00:57दिया।
00:58मास और स्वर्ण के अलग होने की इस भयानक पीडा में भी कर्ण के चहरे पर एक दिव्य मुस्कान थी।
01:04अपने कानों से वे चमकते हुए कुंडल खीच कर खून से लथपत हाथों से उस ब्राहमन को सौंप दिये।
01:10संतुष्ठ होकर इंद्र ने अपना असली दिव्य रूप दिखाया और कर्ण को संसार का सबसे महान दानवीर घोशत किया।
01:17ऐसे ही अनसुने रहसियों के लिए सनातन धर्म के इस पेज को तुरंत लाइक और फॉलो करें।