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जानिए महाभारत के महान योद्धा दानवीर कर्ण के दिव्य स्वर्ण कवच और कुंडल निकाले जाने का रहस्य। कैसे देवराज इंद्र ने ब्राह्मण वेष में आकर कर्ण से सब कुछ मांग लिया था। देखिए पूरी महाभारत कथा। #Mahabharat #Karna #SanatanDharm #HinduMythology #Shorts
Transcript
00:00You know that you know that you can't be able to get rid of the body of the body of
00:12the body.
00:12And you know that the body of the body of the body was able to get rid of the body
00:21of the body.
00:29अपने द्वार पर आये किसी भी याचक को कभी खाली हाथ नहीं लोटने की प्रतिग्या से बंधे थे।
00:36वृद्ध ब्राहमन रूपी इंद्र ने कर्ण से गुरुदक्षिना या दान में उनके शरीर के वही प्रानरक्षक कवच और कुंडल मांग
00:43लिये।
00:43सूर्यदेव ने पहले ही कर्ण को इस धोखे से आगाह कर दिया था, लेकिन दानवीर पीछे हटने वाले नहीं थे।
00:50बिना एक पल जिजक के कर्ण ने अपनी ही तलवार उठाई और अपने शरीर से कवच को काटना शुरू कर
00:57दिया।
00:58मास और स्वर्ण के अलग होने की इस भयानक पीडा में भी कर्ण के चहरे पर एक दिव्य मुस्कान थी।
01:04अपने कानों से वे चमकते हुए कुंडल खीच कर खून से लथपत हाथों से उस ब्राहमन को सौंप दिये।
01:10संतुष्ठ होकर इंद्र ने अपना असली दिव्य रूप दिखाया और कर्ण को संसार का सबसे महान दानवीर घोशत किया।
01:17ऐसे ही अनसुने रहसियों के लिए सनातन धर्म के इस पेज को तुरंत लाइक और फॉलो करें।

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