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Mohan Bhagwat Dussehra Speech LIVE | RSS Chief Performs Shastra Puja in Nagpur | Dussehra 2026

RSS Chief Mohan Bhagwat performs Shastra Puja (weapon worship) during the Dussehra celebrations in Nagpur. What is Mohan Bhagwat saying on Vijayadashami? What key messages will the RSS chief deliver in his Dussehra address?

Watch this LIVE coverage for Mohan Bhagwat’s speech, the RSS Vijayadashami event, key statements, and the latest political developments from Nagpur.

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Transcript
00:00उस्व के अस्मिता के या इथास के आधार पर भारत को संगटित बलसंपन्द करने के लिए चला है अभी पंचपरिवर्तंगा
00:11उल्लेख हमारे मान जीनिया प्रांत संगचालक जीनिया अपने प्रस्ताव नामी किया उसमें जो एक पहल है वो यही स्वबोध और
00:20स्वदेशी क
00:20आचरण की पहल है क्योंकि यह स्वबोध जिसका प्रत्यंतर हमको स्वविदान की प्रस्तावना में उद्देशी का में आता है जहां
00:35हमने अपने आपको हम भारत के लोग ऐसा कहा है
00:40वो हमारी जो हम भावना है वो जो हमारा स्वव है वो हमारा भावनात्मक बंदन है जिससे इतनी सारी विविज़ताओं
00:52से भरा हुआ देश प्राचीन समय से एक देश एक समाज एक राष्टर के नाते चलते आया है
01:01क्योंकि हमारे पूर्वजों के पास एक अनुभूती थी संपूर्ण अस्तित्व के एक अता की और उस अनुभूती के आधार पर
01:11अपने पन का व्यवहार प्रवर्वर्थित करने वाले अनेक सोपानों से बने हुए उत्कृष्ट तत्वद न्यान के भी हम विरासतदार है
01:23हम इसको भूल गए तब हमारा पतन हुआ हम विवाजित हो गए और दुर्बल हो गए और फिर इतने नीचे
01:37गिरते चले गए कि सेकड़ों वर्षों की गुलामी हमको जहलनी पड़ी
01:43अब उस गुलामी से हम अनेक लोगों के महापुर्शों के भीम प्रयासों के बाद और बलिदानों के बाद
01:52मुक्त होकर अपनी एकता और प्रगती के रहा पर चल पड़े है तो उस हमारे भावनात्मक बन्दन को
02:02जिसको उत्तरों पर पक्का बनाने का निर्देश अपने समिधान में ही मारवगदर्शत तत्व के प्रकरण में लिखा है
02:11उस भावनात्मक बन्दन को फिर से स्मरन करना पड़ेगा स्पष्ट रूप से उसको समझना पड़ेगा वो क्या है
02:20और उसके उनरूप गुणवत्ता का वरण हमको करना पड़ेगा अपने जीवन में हमको उसका विवहार करना पड़ेगा
02:29देश के स्वाधीनता के समय जो वातावरण था
02:35मुख्यातिती जी ने कहा कि संग अलग वातावरण था उस वातावरण में हमको स्वतंड्र करने के लिए प्रयास करने वाले
02:48महापुरुष्के और उस समय के समाज को
02:53जितनी तपस्या और समर्पन के द्वारा ये सब करना पड़ा उससे कई गुना अधिक की आवश्यक्ता आज की परिस्थिती में
03:02ये सब करने के लिए हमको पड़ेगी ये परिस्थिती को हम देखतो तो ज्यान में आता है
03:09वो भाव कौन सा है वो तत्व कौन सा है अपना भारत विविद्धता का देश है अनेक प्रकार की प्राकुरुतिक
03:22विविद्धता है
03:25अनेक प्रकार की पंथों की प्रांतों की जातियों की भाषा खानपान रीती रिवाज सब प्रकार की विविद्धता है
03:34एक होके इस देश को चलना है जो चलता आया है और आगे भी चलना है तो आधार भूत तत्वा
03:43ऐसा चाहिए जो इन सब को स्विकार करेगा
03:46इन सब को सम्वान लेगा इन सब की प्रचिष्ठा और सुरक्षा की चिंता करेगा ऐसा अधार हमारे पास कौन सा
03:54है
03:57इतरत्र दुनिया के उपलब्ध विचारों में ऐसा कोई नहीं है सौभाग्य से ऐसा विचार परंपरा से हमारी पास है
04:07हमारी सनातन काल से चलती आई जो परंपरा है और उकेवल परंपरा के नाते में चल रही उसका जो सत्य
04:17है
04:17उसकी अनुभूती करने वाले महापुरुष सतत हमको उपलब्धर रहे है आज भी मिलते है वो कागज लेखी नहीं है
04:27केवल मन की सोची नहीं है आखन देखी है ऐसी अपनी जो परंपरा है वो हमको बताती है कि सुरुष्टी
04:37में विविधता है बिलकुल स्वाभाविक है
04:39जितनी स्वाभाविक परिवर्तंशील भी है वो जितनी स्वाभाविक और परिवर्तंशील है उतनी ही संपूर्ण अस्थित्व की एकता का सत्य अचल
04:52है अटल है और शाश्वत है

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