00:00देश के सन्माननीय यशास्वी और जयास्वी प्रधान मंत्री जी आधर्णिय नरेंदर जी मोधी
00:19हमारे उत्तर प्रदेश के सन्माननीय मुख्य मंत्री जी शिमान योगी जी
00:25राज्यपाल महुदेया मंचस्थ सभी मान्यवर उपस्थित सज्जन माता भगिनी
00:41आज हम सब के लिए एक सार्थकता का दिवस है
00:49इतने लोगों ने सपना देखा इतने लोगों ने प्रयास किये इतने लोगों ने अपने प्राण अरपन किये
00:58आज उनकी स्वर्गस्था आत्मा तुरुप्त हुई होगी
01:05आज वास्तव में अशोग जी को वहां शांती मिली होगी
01:15महंत राम चंडर जी राम चंडर दाज जी महराज श्रीमान डालमिया जी कितने संत कितने गुरहस्त कितने विद्ध्यार थी
01:30उन्होंने अपना प्राणार पन किया अपना पसिना बाया जो पीछे रहे वो भी रोज ये इच्छा मन्ने व्यक्त करते रहे
01:46कि मंदिर बनेगा बनेगा बन गया और आज उस मंदिर निर्मान की शास्त्रिय प्रकरिया पुर्ण हो गए
01:56ध्वजार ओहन हो गया
02:01रामराज्य का ध्वज जो कभी अयोध्या में फैराता था और संपूर्ण विश्व में अपने आलोक से सुखशान्ति प्रदान करता था
02:17वो ध्वज आज फिर से नीचे से उपर चड़ता हुआ और अपने शिखर पर विराजमान होता हुआ हमने अपनी आखों से देखा है इसी देह में देखा है
02:31ध्वज प्रतीक होता है इतना उचा द्वज चड़ा ना कितना समय लगा आप जानते हैं मंदिर बनने में भी समय लगा
02:47500 साल छोड़े तो भी 30 साल तो लगे ही उस मंदिर के रूप में हमने कुछ तत्वाओं को उपर पहुचाया है
03:04सारा विश्व जिससे ठीक चलेगा अपने व्यक्तिकट जीवन पारिवारिक जीवन से लेकर तो सुरुष्टी जीवन तक सबका जीवन जिससे ठीक चलेगा
03:22वो धर्म उस धर्म का प्रतीक भगवा रंग वह इस ध्वच का रंग यह धर्मद्वच है
03:38इस धर्मद्वच पर रगुकुल का प्रतीक कोविदार व्रिक्ष है
03:45वैसे रूप देखा जाए तो कचनार जैसे लगता है
03:53और जो खोजी लोग है वो खोच कर कह रहे है की मंदार और पारिजात
04:02आए दो व्रुक्षों का एक तरह से संकर है दोनों व्रुक्षों के गुन यह दो령 व्रुक्ष सदेव व्रुक्ष्ष कह लाते हैं
04:10दो देववृक्षों के गुणों का समुच्च है यह वृक्षा है और यह वृक्षा उस रघुकुल की सत्ता का प्रतीक है वो सत्ता वृक्ष से व्यक्त होती है जिसके बारे में कहा गया चायाम अन्यस्य कुर्वंती तिश्ठंती स्वयमातपे
04:33सब के लिए चाया देते हैं स्वयम धूप में खड़े रहकर फलान्य पिपरार थाया फल स्वयम उगाते हैं दूसरों के लिए बाट देते हैं वृक्षा हा सत्पुरुशा आई हुआ है वृक्षा सत्पुरुश होते हैं
04:54और कचनार के गुण अवसदी भी है कचनार के वृक्षा का अन्न में भी उप्योग है
05:04सब प्रकार से उप्योग इस वृक्षा का प्रतिक हमने लगाया है धर्म जीवन ऐसा जीवन होता है
05:13और यह जीवन जीना है उस जीवन की प्रतिष्ठा करनी है इस जीवन का जंडा शिखर तक पहुचाना है
05:22चाहे जितनी प्रतिकूलता हो चाहे जितनी कठिनाईया हो साधन ही नता हो सारी दुनिया स्वार्था में बैती होगी
05:33लेकिन हमारा संकल्प है सूर्य भगवान उस स्टेज के उस संकल्प के प्रतिक है उनके रध का एक ही चक्र है
05:44चार चाक वाली गाड़ी अभी एक्सिडन करती है तो एक चक्र चलाना है और रास्ता खराब भी नहीं रास्ता है यहीं नहीं
05:55अधान्तर में चलो रधस्यकम चक्रम रध चलाने के लिए साथ साथ घोड़े उनको नियंत्रन करने के लिए सापों के लगाम है और रस्ता नहीं है और सार्थी जो है उसके पैर नहीं है
06:12ऐशी काड़ी चल सकती है क्या कॉंप्यूटर में डाटा डालेंगे कहेंगे नहीं चलेगी लेकिन बिना थके रोज पूरब से पष्टिम पूरब से पष्टिम जाना आना सुरजभगवान कर रहे हैं
06:29क्योंकि कार्यकी सिध्धी स्वत्व के भरोसे होती है हिंदू समाज ने लगातार 500 साल और बात के दिर्गा अंदोलन में अपने इस स्वत्व को सिध्ध किया और रामलला गया है मंदिर बन गया
06:50यही बात सत्य पर आधारिद्धर्म सत्य जो प्रतिनी जित होता है उंकार से वो सारी दुनिया को देने वाला भारत हमको खड़ा करना है
07:08हमारे इस संकल्प का प्रती यह राम मंदिर उसकी प्रक्रिया आजमने पूरी कर लिए गये
07:18यह धर्म यह ज्ञान यह छाया यह सुफल संपूर्ण दुनिया में बातने वाला भारत वर्ष खड़ा करने का काम
07:32अपना शुरू हो गया है उसको इस प्रतीक को देखकर हिम्मत रखकर उसी प्रकार सतत प्रयास करते हुए
07:41सब प्रकार की विपरिशताओं में भी हम सब को मिलके करना पड़ेगा
07:48आज यह हमारे कुर्तार्थता का दिवस है और आज हमारे संकल्प की पुनरावृत्ती का यह दिवस है
07:59वो संकल्प हमको अमारे पुर्वजों ने दिया है एतत देश प्रसूतस्या सकाशाद अगर जन्मनात इस देश की जन्में हुए अगर जन्मना है सबसे प्राचीन है
08:12इसलिए बड़े भाई है वो ऐसा जीवन जीए कि स्वम स्वम चरित्रम शिक्षेरन पृत्वियाम सर्वमानवा पृत्वी के सर्वमानव अपने अपने चरित्र की शिक्षा जीवन की विद्या भारतवासियों से सीखे
08:29ऐसे भारतवासियों का प्रमवैभो संपन्न सर्वशक्ति संपन्न और सब के लिए खुशी बाटने वाला शांती बाटने वाला सब को विकास के सुफल देने वाला भारतवर्श खड़ा करना है ये विश्व की अपेक्षा है हमारा कर्तव्य है मंदिर में श्री रामलला व
08:59ऐसा सपना देखा था उन लोगों ने रामदा स्वामी ने कहा था स्वपनी जे देखी ले रात्री ते तैसे ची होता से ऐसा सपना उन्होंने देखा था बिलकुल वैसा और मैं कहूं कि उन्होंने जो सपना देखा था उससे भी अधिक भव्य और अधिक सुन्दर ये मंदिर
09:29और मेरी सब्दों को विराम देता.
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