00:00सद्यों तक आद्मियों ने हमें दबाया अब लड़की अपनी ब्यूटी से एलिमनी से हिसाब बराबर करे तो गलत क्या है
00:07पुरुष चालाकी करकर के और कलाईयां उमेठ उमेठ के दहेज वसूलते रहे हैं आप भी किसी की कलाई मरोड के
00:18अलिमनी वसूलें तो आप आधुनिक नहीं हो गई
00:20बात समझ में आ रही है ये टिट फॉर टैट वाला मामला आपको आधुनिक नहीं बना देगा
00:26पहले इस तरी के शरीर की कमजोरी का इस्तिमाल करके पुरुष कहता था कि तुम ये छोटे मोटे काम करो
00:32बड़े काम खेत के हैं वो मैं करता हो
00:34तुम घर के से फाई-फाई करो, खाना ना बनाओ, ये छूटी एनरजी के काम है, बड़ी एनरजी का काम
00:39है, फल चलाना वो मैं करूँगा
00:42तो इस्तरी के शरीर का इस्तेमाल करके, पुरुष उसको दबा लेता था, उस पर छाज आता था
00:50अब आधुनिक्ता के नाम पर आप अपने शरीर को फथियार की तरह इस्तेमाल करो, वेपनाईज करो, क्योंकि वासना के तल
01:00पर पुरुषों को ज़्यादा आसानी से उत्यजित किया जा सकता है, इस्तरीयों की तुलना में, तो कहो जिस शरीर की
01:06कमजोरी का तुने फाईदा �
01:08मैं उसी शरीर का इस्तिमाल करके सेक्शूल तरीके से तुझ को दबा दूँगी, तो यह आधुनिक्ता नहीं हो गई, और
01:18यह आधुनिक्ता के नाम पर खूब चल रहा है, सेक्शूलिटी का वेपनाईजेशन, शरीर को हतियार की तरह इस्तिमाल करो, जुकेगा,
01:28बंदा ज
01:30सेक्शी बॉड़ी दिखाऊंगी, जुकेगा, और फिर मैं जो चाहूंगी, करेगा, मुझे पैसे चाहिए होंगे, पैसे भी देगा, इज़त भी देगा,
01:39ताकत भी देगा, सब देगा, यह शरीर नहीं है, यह हतियार है, और यही पहले मेरी कमजोरी थी, लायबिलिटी थ
01:48अब यही मेरा वेपन है, यह आधोनिकता नहीं है, आप गीता पढ़ती हो, आप खुद भी मुक्त जीओ और दूसरे
02:01को भी मुक्ते दो, यह आधोनिकता है, ना किसी से डरेंगे, ना किसी को डराएंगे, ना किसी से दबते हैं,
02:09ना किसी को दबाएंगे, यह आधोनिकता है
02:13हाँ प्रेम है अगर और सच्चाई है अगर तो जरूरत पड़ी तो जान भी दे देंगे
02:21लेकिन डर के नहीं दब के नहीं