00:00हमने लेकिन अपने गहरे से गहरे और उचे से उचे परवों का मजाक बना कर रख दिया है ना
00:06लोग नाच रहे हैं उचल रहे हैं फिल्मी गीतों पर ढूंके मार रहे हैं और सडकों पर लोट रहे हैं
00:16माता प्रसंद होंगी इससे या और प्रकोप मिलेगा
00:22जिन लोगों को ना धर्म से सरोकार, ना अध्यात्म से मतलब, ना देवी से कोई ले ना देना, वो भी
00:28पहुँच जा रहे हैं
00:30इरादा ही गलत है, उदेश्य ही दूशित है, व्यभिचार हो गया एक तरह का
00:34देवी के नाम पर उत्सव करने से पहले थोड़ी योग्यता, थोड़ी पातरता अरजित करो
00:41साल भर जीवन ऐसा जीओ, कि नवदुरगा में देवी के सामने मुह दिखाने लायक रहो
00:46त्योहार इसलिए हैं, ताकि तुम साल भर जैसे रहते हो, उससे कुछ अलग होने की जलक पापा हो
00:51मा कहती है, तुम मुझसे जो मांगोगे मिलेगा, तुम्हें मुक्ते चाहिए, मैं मुक्ते दे दूँगी
00:56और तुमको उपद्रव और मनुरंजन और भोग यही चाहिए, तो मैं तुम्हें यह दे दूँगी