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पूरा वीडियो यूट्यूब : माँ का मर्म समझें — पर्व को तमाशा न बनाएँ || आचार्य प्रशांत, नवरात्रि पर (2025)
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वीडियो जानकारी: 21.09.2025, ग्रेटर नोएडा

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Transcript
00:00हमने लेकिन अपने गहरे से गहरे और उचे से उचे परवों का मजाक बना कर रख दिया है ना
00:06लोग नाच रहे हैं उचल रहे हैं फिल्मी गीतों पर ढूंके मार रहे हैं और सडकों पर लोट रहे हैं
00:16माता प्रसंद होंगी इससे या और प्रकोप मिलेगा
00:22जिन लोगों को ना धर्म से सरोकार, ना अध्यात्म से मतलब, ना देवी से कोई ले ना देना, वो भी
00:28पहुँच जा रहे हैं
00:30इरादा ही गलत है, उदेश्य ही दूशित है, व्यभिचार हो गया एक तरह का
00:34देवी के नाम पर उत्सव करने से पहले थोड़ी योग्यता, थोड़ी पातरता अरजित करो
00:41साल भर जीवन ऐसा जीओ, कि नवदुरगा में देवी के सामने मुह दिखाने लायक रहो
00:46त्योहार इसलिए हैं, ताकि तुम साल भर जैसे रहते हो, उससे कुछ अलग होने की जलक पापा हो
00:51मा कहती है, तुम मुझसे जो मांगोगे मिलेगा, तुम्हें मुक्ते चाहिए, मैं मुक्ते दे दूँगी
00:56और तुमको उपद्रव और मनुरंजन और भोग यही चाहिए, तो मैं तुम्हें यह दे दूँगी

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