00:00अचारी जी, महिलाओ के लिए बाहर निकलने को आप बोलते हो, पर उनके लिए तो ये नैचुरल ना कि वो
00:04घर में रहें और लोग की देख भाल करें
00:06ये सब बाते हटा दीजेगा बिलकुल कि, बट नैचुरली द वुमन इस मेंट टो स्टे इंडोर्स
00:13ऐसा लगता है कितनी गहरी बात बोल दी
00:18सर नैचुरली तो हमें कपड़े भी नी पहनने चाहिए
00:23अगर प्रकृति की ही बात कर रहे हो, प्रकृति में कौन से आपने जानवर को चश्मा पहने देखा है
00:30और इस सुबह सुबह ब्रश क्या करते हो, प्रकृति में कौन ब्रश करता है
00:34और इस फ्लश क्या करते हो
00:37जानवरों को देखो, वो जहां मलते आख करते हैं, वहीं खा भी लेते
00:41घोडों के अस्तबल में चले जाओ, भैसों के तबेले में चले जाओ, वहीं गोबर कर रही होते हैं, वहीं खा
00:45भी रही होते हैं
00:47तो तुम क्या अलग से एक शौचाले बनाते हो फिर वहाँ जाके फ्लश करते हो और साफ वाफ करके आते
00:53हो कि गंदगी दिखनी नहीं चाहिए इस अब क्या है प्रक्रतिक बात क्या कर रहे हो
00:58प्रक्रति से आगे निकल चलो प्रक्रति के बंधनों से मुक्त हो सको इसलिए तो जंगल से बाहर आये थे न
01:03हम
01:04नहीं तो हम जंगल में ही रह रहे होते हैं
01:06गुफा में पेड़ के उपर
01:08अब जंगल से बहार आ गए
01:10लेकिन अपनी बदनियती को
01:12जायस ठहराने के लिए कुतर्क देते हैं
01:13किसका जंगल का प्रक्रती का
01:15बट नेचरली शी जी मेंट तो स्टे इंडोर्स
01:19भाई वो गुफा की दिनों की बात थी
01:21आज भी गुफा में रहते हो क्या
01:23वो तब की बात थी
01:25जब सारा काम शारेरिक्ष्रम से चलता था
01:29जब उर्जा का सबसे बड़ा स्रोत
01:32बाहुबल था
01:34मस्कुलर स्ट्रेंग्थ
01:35आज उर्जा मस्कुलर स्टंक्ट से आती है
01:39सोलर एनरजी से आती है
01:40टाइडल एनरजी से आती है
01:41फॉसिल फ्यूल से आती है
01:44जब सारी उर्जा
01:45हमारे हाथों से
01:47और हमारी जांगों से आती थी
01:49उससे मैं महिला के लिए शायद उचितरा होगा
01:51कि वो कम महनत वाले काम करे
01:54मेंटेनिंस वाले काम करे
01:55प्रोडक्शन वाले काम न करे
01:57क्योंकि प्रोडक्शन के कामों में
01:59यह लग रही थी और वो यहीं से आ सकती थी
02:03अज एनर्जी कहां से आती है
02:07रसोई में खाने कैसे बनता है
02:08एनर्जी लगती है न उसमें
02:09तो कहां से, सिलेंडर से आती है भाई, किसी मर्द की मास पेशियों से थोड़ी आती है, कि ऐसा होता
02:15है, कि रोटियां बेली जा रही है और नीचे कोई मर्द अपनी मस्कुलर स्टेंग्थ दिखा रहा है, उससे एनरजी पैदा
02:21हो रही है, गाड़ी कैसे चलती है, इंजन में �
02:26दो-चार मर्द बठा रखें, गाड़ी इंकार करती है कि ओरत चलाएगी तो नहीं चलूँगी, और कंप्यूटर इंकार करता है
02:35कि ओरत कोडिंग करेगी तो कोड एग्जिक्यूट नहीं होगा, अगर गुफा जैसा ही आचरन करना है, तो ये सारी प्रगति,
02:42ये तरक्की क्
02:43ये सभ्यताय संस्कृति फिर किसलिए है, अगर आचरन वही करना है, जंगल जैसा तो