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Israel Election 2026: इजरायल में बेंजामिन नेतन्याहू की राजनीतिक मुश्किलों को लेकर चर्चा तेज है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थन के बावजूद, चार चुनावी सर्वे में सामने आए आंकड़ों ने नेतन्याहू की चुनावी स्थिति पर सवाल खड़े किए हैं। ईरान के साथ जारी संघर्ष और क्षेत्रीय तनाव का इजरायल की राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है? क्या नेतन्याहू अपनी सत्ता बचाने के लिए नई रणनीति अपनाएंगे? इस रिपोर्ट में जानिए इजरायल के चुनावी समीकरण, नेतन्याहू की चुनौतियां, ट्रंप के समर्थन का महत्व और ईरान युद्ध के संभावित राजनीतिक प्रभाव। देखिए Israel Election 2026 का पूरा विश्लेषण।

Israel Election 2026: Benjamin Netanyahu is facing renewed political scrutiny as four election surveys raise questions about his position in Israel’s political race. Despite US President Donald Trump’s support, Netanyahu’s political future remains a major topic of debate. Could the ongoing conflict with Iran and rising regional tensions influence Israel’s domestic politics? In this report, we examine the latest election survey findings, Netanyahu’s political challenges, his relationship with Trump, and the possible impact of the Iran war on Israel’s leadership. Watch the full analysis for a closer look at Israel’s changing political landscape and the key factors shaping the country’s next election.

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Transcript
00:00अमेरिका के राश्टपती डोनाल्ड टरंप ने इजराइल चुनाव में बेंजमिन नितन्याहू का समर्थन किया है
00:05टरंप ने नितन्याहू को मजबूत, बहादूर और शांदार नेता बताया है
00:10साथ ही चेतावनी भी दी है अगर इजराइल ने किसी दूसरे नेता को चुना
00:15तो इरान के खिलाफ लड़ाई की जिम्मेदारी अमेरिका को खुद उठानी पर सकती है
00:20टरंप ने कहा क्यों वे ऐसा करने के इच्छुक नहीं है
00:24टरंप का ये संदेश ऐसे वक्त में आया है जब इजराइल में नितन्याहू की राजनीतिक इस्ति को लेकर चर्चा तेज
00:32है
00:32चार चुनावी सर्वे में उनकी लिक्विट पार्टी गैडी आईजिन कोट की याशर पार्टी से पीछे दिखाई दी रही है
00:39अमेरिका का समर्थन नितन्याहू के साथ है लेकिन इजराइल के भीतर चुनावी मुकाबला उनके लिए आसान नहीं दिख रहा है
00:47इरान के साथ टकराव, युद्ध का दबाव और सरकार बनाने के लिए जरूरी सीटों का गड़ि तीनों उनकी राजनीती को
00:54प्रभावित कर सकते हैं
00:55इजराइल में 27 अक्तूबर को होने वाले चुनाव से पहले सामने आये इन सर्वे ने नितन्याहू के सामने एक बड़ी
01:02चुनोती रख दी है
01:03हाला कि सर्वे चुनाव के नतीजे नहीं होते और अभी किसी भी गटबंधन को साफ बहुमत मिलता नहीं दिख रहा
01:10है
01:11ऐसे में नतन्याहू के लिए मुकाबला केवल सबसे बड़ी पार्टी बनने तक सीमित नहीं है
01:16असली चुनाव के बाद सरकार बनाने के लिए जरूरी समर्थन जुटाने की भी होगी
01:22टरम्प के इस संदेश का महत इसलिए भी है क्योंकि उन्होंने केवल नतन्याहू की तारीफ नहीं की
01:29बल्कि इजराइल के मद्दाताओं को एरान के मुद्दे पर चेतावनी भी दी है
01:33उनका कहना है कि नतन्याहू के अलावा किसी दूसरे नेता के आने पर अमेरिका को इरान के खिलाफ लड़ाई खुद
01:41लड़नी पर सकती है
01:42इस तरह टरंप ने इजराइल के चुनाओ को सीधे अमेरिका की सुरक्षा नीती और इरान के साथ जारी टकराओ से
01:49जोड़ दिया है
01:50टरंप ने इजराइल के लोगों के नाम जारी अपने संदेश में नेता बताया जिसने बेहत कठिन हालात में भी हार
01:58नहीं मानी
01:59उनके मुताबिक नेतन्याहू को अपने देश के भीतर से विरोध जहलना पड़ा लेकिन वे अपने फैसलों पर डटी रही
02:06टरंप ने ये भी कहा कि ऐसे दवाओं में आम लोग कमजोर पर सकते हैं जबकि नेतन्याहू ने मजबूती दिखाई
02:12है
02:13टरंप की ये तारीफ हितन्याहू के लिए चुनावी परचार में एक बड़ा सहारा बन सकती है
02:18हितन्याहू लंबे वक्त से खुद को इजरायल की सुरक्षा के लिए सबसे मजबूत नेता के रूप में प्यूश करती रहे
02:25हैं
02:25इरान के खिलाफ उनका सक्त रुख भी इसी राजनीती का हिस्सा है
02:30अब टरंप ने भी अपने संदेश में इसी मुद्दे को प्रमुखता दी है
02:34लेकिन इजरायल की राजनीती में केवल अमेरिका का समर्थन ही सब कुछ नहीं होता है
02:39वहां के मद्दाताओं के सामने अपने देश की सुरक्षा के साथ साथ सरकार के कामकाज, युद्ध के असर और भविश्य
02:47की दिशा जैसे मुद्दे भी हैं
02:49टरंप की अपील का कितना असर होगा इसका पता चुनाव के नतीजों के बाद ही चलपाएगा
02:55इरान के मुद्दे पर टरंप ने अपने संदेश में कड़ा रुख अपनाया, उन्होंने इरान पर पिछले 51 साल से इजराइल
03:02और अमेरिका को खत्म करने की धंतियां देने का आरोप लगाया, उन्होंने इरान में लगाये जाने वाले नारों का जिक्र
03:09करते हुए कहा कि इ
03:14टरंप ने डावा किया कि इरान की सैन और आर्थिक ताकत को विवस्थित तरीकों से कमजोर किया गया है, उन्होंने
03:21चेतावनी दी कि अगर इरान ने अपना रवया तेजी से नहीं बदला तो अमेरिका जल्द ही बाकी काम भी पूरा
03:28कर देगा, ये बयान दिखाता है कि टर
03:41कोनों देशों तक सीमित नहीं रहता, पश्रीमेशिया में बढ़ता तनाव इजराईल की सुरक्षा, छित्रिय स्थिर्ता और अंतराश्टिय संबंधों पर भी
03:49असर डालता है, ऐसे में इजराईल के अगले प्रधानमंतरी के सामने इरान से जुड़ी नीती एक बड़ी च
04:10और देश के भविश्य को लेकर जवाब मांग सकते हैं, चुनाव में मद्दाता इन दोनों पक्ष्यों को किस नजर से
04:18देखते हैं ये भी एहम होगा, अब बात उन चार सर्वे की जिनकी वज़ा से नितन्याहू की पार्टी चर्चा में
04:24हैं, इन सर्वे में गैडी आईजन
04:27कोट की याशर पार्टी आगे दिखाई दे रही है, चारो सर्वे के आउसत के मताबिक याशर को 21.5 सीटे
04:34और नितन्याहू की पार्टी को 19 सीटे मिलने का अनुमान है, यानि पार्टी इस तर पर आईजन कोट को बढ़ा
04:40दिखाई दे रही है, मारी और चैनल 13 के सर्वे में
04:44नितन्याहू की पार्टी को 13 सीटे मिलने का अनुमान है, चैनल 13 के सर्वे में याशर को 20 सीटे मिलने
05:01का अनुमान लगाया गया है, इन आकडों से पता चलता है कि चुनावी मुकाबले में नितन्याहू की पार्टी को चिनोटी
05:06मिल रही है, लेकिन किसी पार्टी का सर्वे म
05:09आगे होना और चुनाओ के बाद सरकार बना लेना दोनों अलग-अलग बाते होती हैं।
05:51नहीं दिखाई दे रहा है। यही इस चुनाओ का सबसे एहम पहलू है।
06:09मिलने का अनुमान हैं। इतने सांसदों का समर्थन किसी भी खेमे के लिए सरकार बनाने की कोशिश में महतपूर साबित
06:16हो सकता है।
06:21इसलिए उनके पास सीटे होने भर से ये तै नहीं हो जाता कि वे किस पक्ष को समर्थन देंगी या
06:28सरकार बनाने में शामिल होंगी।
06:33वेजराइल के पूर्व सेन प्रमुक रह चुके हैं और अब नितन्याहू को सीधे चुनावती दे रहे हैं।
06:39कि याशर पार्टी का सर्वे में आगे आजाना इस बात का संकेत है कि चुनावी मुकाबले में नितन्याहू की पार्टी
06:47के सामने एक मजबूत प्रतिदुन्दी मौजूद है लेकिन आजन कोर्ट के लिए भी सबसे बड़ी चुनोती अलग अलग दलों को
06:54साथ लाकर बहु
07:09की नेती इसराइल के हित में हैं दूसरा उन्हें चुनाव के बाद ऐसा गटबंधन बनाने की तैयारी रखनी होगी जो
07:16संसर में बहुमत का आकड़ा पार कर सके ट्रम का समर्थन उनके लिए राजनितिक रूप से एहम जरूर है लेकिन
07:24इससे चुनाव का नतीजा तै नहीं
07:38चुनाव के दिन लोगों का फैसला अलग भी हो सकता है 17 अक्टूबर को होने वाला चुनाव इसलिए केवल दो
07:46नेताओं या पार्टियों के बीच मुकाबला नहीं है इसके नतीजे ये टै करने में मदद करेंगे कि इजराइल की अगली
07:53सरकार किस दिशा में जाएगी इरा
07:56के साथ टकराव को लेकर उसका रुख क्या होगा और देर्श में सत्ता का गडित कैसे बनेगा फिलहाल टरंप खुलकर
08:03नितन्याहों के साथ खड़े हैं लेकिन सरवे उनकी पार्टी के लिए चुनावती दिखा रहे हैं दूसरी और आजनकोट की पार्टी
08:11को बढ़त मिलती
08:12दिख रही है मगर विपक्ष के सामने भी बहुमत जुटाने की मुश्किल है ऐसे में इस्रायल के चुनाव में सबसे
08:19बड़ी लड़ाई सिर्फ वोटों की नहीं बलकि चुनाव के बाद 61 सांसदों का समर्थन हासिल करने की भी होगी
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