00:05क्या दुनिया के सबसे शक्तिश्वाली देश का राष्टपती किसी दूसरे देश की राजनीती और उसकी सत्ता की दिश्रा तै कर
00:12सकता है।
00:30जिसने पूरे मिडलीज की राजनीती में हलचल मचा दी है।
00:34एक तरफ है इस्राइल के सबसे लंबे समय तक प्रधान मंत्री रहे बेंजमिन नेतन्या।
00:39और दूसरी तरफ है वाशिंटन से उन पर अपना दावा करते हुए अमेरिकी राष्टपती डॉनल्ड ट्राम।
01:00पूरी हो चुकी थी। तस्वीरे साफ हो रही थी। लेकिन तस्वीर में इस पश्टटा बिलकुल नहीं थी।
01:59जिने मिली 19 सीटे।
02:00का श्रेख खुद को दे दिया।
02:01ट्रॉम्प ने कहा, मैंने सुना है कि मेरे समर्थन से बीबी को बहुत फायदा हुआ।
02:06यहां ट्रॉम्प ने बीबी शब्द का इस्तमाल नेतन याहू के मशूर उपनाम के तौर पर किया था।
02:11ट्रॉम्प का दावा था कि चुनाव से पहले नितन याहू हार की तरफ बढ़ रहे थे।
02:16लेकिन जैसे ही उन्होंने सारवजनिक रूप से इस्राइली जनता से बीबी को बोर्ट देने की अपील की हवा का रुख
02:22बदल गया।
02:23ट्रॉम्प ने सोशल मीडिया प्लाटफॉर्म तुरुट सोशल पर भी अपनी पीट खपथपाते हुए लिखा की उनके एक समर्थन ने इस
02:30चुनाव की पूरी दिशा पलट दी।
02:32लेकिन सवाल ये उठता है कि क्या वाकई अमेरिका से दिये गए एक बयान ने इस्राइली मद्दाताओ का मन बदला
02:37या ये महस ट्रॉम्प का अपना राजनीतिक प्रभाव दिखाने का एक तरीका है।
02:42मामला सिर्फ समर्थन तक सीमित नहीं रहा जब पत्रकारों ने ट्रॉम्प से पूछा कि इसराइल में फिर से डेडलोग बन
02:48गया है।
03:12ये बात बढ़ता देख अमेरिका के अधिकारिक गल्यारे हरकत में आगे।
03:16इसराइल से बात करते हुए वाइट हाउस के एक वरिष्ट अमेरिके अधिकारी ने सिती को समालने की कोशिश की।
03:22उन्होंने साफ किया कि वाशिंटन ने ऐसा कोई फैसला नहीं लिया।
03:25उन्होंने मीडिया में चल रही उन खबरों को समय से पहले और गलत करार दिया।
03:29जिन में कहा जा रहा था कि अमेरिका किसी खास गड़ बंदन या पार्टे को समर्थन देने का मन बना
03:33चुका है।
03:34लेकिन कहते हैं ना राचनीती में बिना आग के धुआ नहीं उठता।
03:38अब आए इस पूरे कहानी के सबसे पेचीदा और दिल्चस्प मोड पर यानि इसराइल की संसत का गड़ित।
03:43बेंजमिन नितन याहू लंबे समय से इसराइल के पुदार मंत्री रहे।
03:47वो अपने चुनाफ प्रचार में हमेशा डॉनल्ड ट्रम के साथ अपनी गहरी दोस्ती, एरान से सुरक्षा की रणनीती और अमेरीकी
03:54समर्थन को अपने सबसे बड़े हथियार की तरह इस्तमाल करते रहें।
03:57लेकिन इसराइल की राचुनीती की सच्चाई ये है कि वहावेक तिगत दोस्ती से जादा सीटो का गड़ित काम करता है।
04:32इसका सीधा सा मतलब ये है कि इसराइल एक ऐसे मुहाने पर खड़ा है जहां नेतन याहू के पास बढ़त
04:38तो है लेकिन बहुमत का कोई आसान रास्ता नहीं।
04:40विपक्ष के पास आकड़े हैं लेकिन दाल मेल की भारी कमी है और डॉनल्ड ट्रम अपने समर्थन का क्रेडिट लेकर
04:48क्रेडिट कार्ड की तरह राचुनीतिक दबाव बना रहे हैं।
04:50तो अब सबसे बड़ा सवाल यही है क्या बेंजमिन नेतन याहू अपने इस मामूली बढ़त को किसी तरह जोड़ तोड़
04:56कर 61 सीटों के बहुमत में बदल पाएंगे या फिर डॉनल्ड ट्रम की एंट्रीस राचुनीतिक शतरंज के खेल में कोई
05:03नया मोड लाएगी और इ
05:18इसराइल की सरकार बनवाने में भूमिक आने भापाएंगे कॉमेंट करके हमें जरूर बताइएगा फिलहाल बस इतना ही देश और दुनिया
05:24की तमाम बड़ी खबरों के लिए देखते रहिए वन इंडिया हिंदी