00:06नवरात्री के नौदेनों में आपने देखा होगा कि जहां भी मादुर्गा की पूजा होती है वह माता की मूर्ती के
00:12साथ उस परम शक्तिशाली असुर महिशासुर की भी प्रतिमा माता के साथ ही होती है
00:18इस मूर्ती में माता त्रशूल से महिशासुर का वद करती है तस्वीरों में भी माता के साथ महिशासुर को ही
00:25दर्शाय जाता है लेकिन जब मा ने इतने सारे असुरों का वद किया है तो फिर आखिर महिशासुर के साथ
00:33ही उनकी पूजा क्यों की जाती है दरसल इसके पीछे म
00:37आता काक करुणा में हिर्द है जो शत्रों पर भी दया भाव रखता है। देवी भागवत पुराण में कथा है
00:43कि रंभ नामक एक असुर था जिसने अगनी देव की तपस्या से एक पुत्र को प्राप्त किया। जो महीशी यानी
00:50भैस से उत्पन्न हुई इसले वो महीशा सुर
00:53कहलाया। ये असुर वर्दान के कारण जब चाहे मनुष्य और भैस का रूप ले लिता। ब्रह्माजी की तपस्या करके इसने
01:01वर्दान पाया कि कोई भी पुरुष, देवता या फर असुर इसका अंद ना कर सके। ब्रह्माजी के कहने पर कि
01:09तुमने स्त्री का नाम क्यों
01:11में लिया। तो उसने कहा कि इस्त्री इतनी शशक्त है ही नहीं कि वो मेरा अंद कर सके। तो ऐसे
01:17में इनसे भय कैसा। इसके बाद महिशासुर के शासन में देवता और मनुष भैभीत रहने लगे। सभी देवी देवताओं ने
01:25अपने तेज को मिला कर एक तेजो में शक्त
01:27को प्रकट किया, जो स्त्री रूप में अवतरित हुई। यही देवी मा दुर्गा कहलाए। सभी देवी देवताओं ने अपने अश्टर
01:35सच्तर से देवी को सुसज्जचित किया। इस देवी ने महिशासुर को युद्ध के लिए ललकारा। देवी और महिशासुर में �
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01:42दिनों तक महा युद्ध हुआ, महिशा सुर को अपने अंत समय में माता दुर्गा की शक्ति का हैसास हुआ, और
01:49उस असुर ने देवी से प्राठ्णा की, हे माता, आपके हातों मेरा वद हो और मुझे मुझे मुक्ती मिले, मैं
01:56आपके शरणा गत रहू, मेरे उध्धार का आ�
02:09प्राक्त हो जाएगा, और मेरे साथ पुझ्यवान रहोगे, माता की इसी वर्दान के कारण देवी भागवत पुरान में बताया गया,
02:17कि माता के साथ महिशा सुर का वद करते हुए, माता की मूर्ती बना कर, देवी की नौ दिनों तक
02:24अगर आप पूजा करें, तो भक्तों क
02:26भोग और मोक्ष की प्राक्ती जरूर होगे.