00:06क्या आपने कभी सोचा है कि देश के कई हिस्सों में नवरात्री के दोरान लोग प्याज, लहसुन और मांसाहार तक
00:12छोड़ देते हैं लेकिन पश्रिम बंगाल में दुर्गा-पूजा किसमें मचली और मटन की दावत होती है
00:16आखिर मादुर्गा की पूजा में इतना बड़ा अंतर क्यों क्या बंगाल में नौनवेज खाना धार्मिक परंपरा का हिस्सा है और
00:23कैस के पीछे शाक्त संपरदाई की कोई खास मानिता है
00:26आज समझेंगे इस शाक्त संपरदाय क्या होता है इसके धार्विक नियम क्या है और बंगाल में मादुर्गा की पूजा के
00:33साथ मांसहार का संबंध कैसे जुडा है
00:35सबसे पहले समझे कि शाक्त संपरदाय किसी जाती भाषा या शेतर का नाम नहीं है
00:40ये हिंदु धर्म की एक परंपरा है जसमें देवी आदिशक्ति को सर्वोच शक्ति के रूप में उजा जाता है।
00:47शाक्त उपासक मादुर्गा, काली, त्रपूर, सुंदरी और देवी के दूसरे स्वरूपों की आराधना करते हैं।
00:54इस परंपरा में देवी को केवल ममता और करुणा का प्रतीक में, बल्कि श्रष्टी की श्रक्ति और अधर्म का नाश
01:00करने वाली दिव्यूर्जा मानते हैं।
01:02बंगाल में शाक्त परंपरा का विशेश सांस्कृतिक और धार्मिक प्रभाव रहा है।
01:08मादुर्गा और माकाली की उपासना यहां की धार्मिक पहचान का अभिन अंग है।
01:13अब सवाल उठता है कि बंगाल की दुर्गा पूजा में नौन विच क्यों खाय जाता है।
01:17इसका पहला कारण शाक्त परंपरा की विविदिता है।
01:20यतिहास पे शाक्त उपासना की कुछ परंपराओं में परशुबली और मान से जुड़े अनुष्ठान भी रही है।
01:26कुछ विशेश पूजा पद्दतियों में मानसाहारी भोग का उलेख है।
01:30हलकि हर शाक्त पूजा में ऐसा नहीं होता और ना ही हर बंगाली परिवार इस परंपरा का पालन करता है।
01:37दूसरा कारण है बंगाल की खाद्य संस्वती।
01:39मचली बंगाली भूजन का पारंपर एक हिस्सा रही है।
01:43दुर्गा पूजा कुम बंगाली परिवार मा के माय के आने के उत्सव की तोर पर देखते हैं।
01:48ऐसे में परिवार रिष्टदारों के साथ विशेश भूजन करना भी उत्सव का ही खास अंग है।
01:54कई सार्वजनिक दुर्गा पूजा एजनों में मा को शाकाहारी भोग चड़ाय जाता है जबकि लोग घरो या आउटलेट्स में मचली
02:00और मटन खाते हैं।
02:01दूसरी और कुछ पारंपरिक परिवारों और विशेश शाक्त अनुष्ठानों में अलग प्रकार की भोग और परंपरायं भी मिलती है।
02:08लेकिन क्या शाक्त संप्रदाय में नौन विच खाना जरूरी है।
02:12बिलकुल नहीं। कई शाक्त भोग तो पूरी तरह शाकाहरी होते हैं और मादुर्गा की पूजा फूल, फल, मिठाई, खिचडी और
02:18दूसरे शाकाहरी भोग से करते हैं।
02:21इसी तरह बंगाल में सभी लोग एक जैसी पूजा पद्दती नहीं अपनाते हैं।
02:25कुछ परिवार वैशनो परमपराओं का पालन करते हैं, जिन में शाकाहर और सात्यक भोजन का महत्व है।
02:31इसलिए ये कहना गलत है कि हर बंगाली दुर्गा पूजा में नौन्रिज खाता है।
02:35याद रखें, मादुर्गा की भक्ती का कोई एक ही भोजन नियम सभी पर लागू नहीं होता।
02:40अलग-अलग परिवार अपनी धार्मिक मानिताओं और परमपराओं के नुसार ही पूजा करते हैं।
02:45आखिरकार भक्ती का अर्थ केवल ठाली में क्या है क्या नहीं इस पर निर्भर नहीं करता। बलकि श्रद्धा आचरण और
02:52दूसरों की मानिताओं की प्रती सम्मान भी है।
02:55फिल हाल असे वीडियो में इतना ही। वीडियो को लाइक और शेयर करें। साथी चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूलें।