00:00इस भयानक तुफानी रात में बर्सों से बंद पड़ा ये पुराना रेडियो अचानक जिन्दा हो गया।
00:06क्या ये महस कोई इत्फाक था या पिर किसी नामुम्किन मनसूबे की शुरुआत।
00:11जिम सदमे से बुथ बना उसे घूर रहा था।
00:14उसे अपने कानों पर यकीन नहीं आ रहा था।
00:17रेडियो की पुरानी ट्यूब्स चमकने लगी और कमरे में एक बेहंगम खरखराहट गुंचने लगी।
00:23फिर अचाना कमरे में गुंचता ये शौर थम गया।
00:26और इन जामिद लहरों के बीचों बीच एक कमजोर लेकिन हकी इनसानी आवाज उपरी।
00:31ये सिगनल कोई हादसा नहीं था।
00:34जेड को इस तूफान में गए कई घंटे गुजर चुके थे।
00:37ये उनकी कई रातों की मिहनत और एक इंतहाई खुफिया खतरनाक मनसूबे का नतीजा था।
00:43रेडियो से आने वाली ये मधहम सी आवाज बेशक बहुत कमजोर थी।
00:47लेकिन जिम के लिए ये इस बात का हत्मी सबूत था कि तमाम तर मुश्किलात के बावजूद उनका बनाया हुआ
00:53वो नामुम्किन मनसूबा बिलाखिर काम कर रहा था।
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