00:00गनी और तारीक जंगल की बीचों बीच मौचूद ये जंग अलूद धाती कमरा, क्या वाकिस खौफनाक रात में किसी की
00:07जान बचा सकता है?
00:08ये शख्स खौफ से कामता हुआ एक कोने में दुबक कर बैठा है। उसे लगता है कि यही धाती दिवारें
00:14उसकी आखरी पनागा है। लेकिन जैसे जैसे रात का अंधेरा गहरा होता है, बाहर खौफनाक दरिंदे जमा होना शुरू हो
00:21जाते हैं।
00:38जिन्दा कबर बन चुकी है। इस लमहे उसके अंदर जीने की आखरी उमीद भी मुकमल तोर पर दम तोड़ देती
00:44है। फरार का कोई रास्ता नहीं बचा। मौत अब महस चंद सांसों की दूरी पर है। जिस धाती कमरे को
00:50वो अपनी पनागा समझ जाहा था, तरसल उसी ने
00:54उसी चारू तरफ से कैद करके मौत की खूनी जब्रों में धगेल दिया है।