00:10पित्र पक्ष का अंतिम दिन 10 अक्टूबर को मनाय जा रहा है तो वहीं साल का अंतिम शनी अमावस्य भी
00:18इसी दिन पढ़ रहे हैं
00:19तो ये दुरलब और अत्यन्त फल्दाई पित्र शनी महायोग बनाती है।
00:24जोतिश और वैदिक शास्त्रों में शनीदेव कर्म फल्दाता होने के साथ साथ पित्रों के देव आरेमा और यमराज के भ्राता
00:32भी है।
00:33इस दिन पित्रों का अतरपण करने और शनीदीव की अरातना करने से पित्री दोश साड़ी साती और ढईया के कश्टों
00:39के साथ मुक्ती मिलती है
00:41आईए जानते हैं कि इस दुरलब दिन पर आपको क्या करना चाहिए और क्या नहीं
00:46सुर्योदय से पहले किसी पवित्र नदी या घर पर ही जल में गंगा जल और काले तिल मिलाकर स्थान करें
00:52ततपश्रात दक्षन दिशा की ओर मूह करके
00:54पित्रों को जल, कुशा और काले तिल से अर्ग यतरपण दें
00:58सुबह साड़े ग्यारा बजे से लेकर दोपहर साड़े बारा बजे की बीज पित्रों के लिमित सात्वे को भूजन बनाएं
01:04इसमें पाँच हिस्से गाय, कुट्ता, कववा, देव और चीटी को निकाल कर भूजन कराएं और ब्राम्भनों को दान दें
01:10संध्याकाल के समय शनीमंदर में जाकर शनीदेव को सरसो का तेल और काले तेल अरपत करें
01:16ऐसा करपाना अगर संभव नहीं है तो शनीदेव का ध्यान करते हुए दान दक्षना जरूर करें
01:21शाम को पीपल के पेड के नीचे सरसो के तेल का चाउमुखा दीपक जलाएं
01:26पीपल की परिक्रमा करते हुए ओम, शन, शन, शन, शराय, नम, और पित्री मंत्रो का जाप करें
01:31घर में भी पित्रो की विदाई के लिए पाच दिये जलाएं
01:35एक कटोरी में सरसों का तेल लेकर उसमें अपना चहरा देखें और उसे किसी निर्धन या शानी मंदर में दान
01:40कर दें इसे छाया दान कहते हैं
01:42इसके अलावा काले उडद, काले वस्तर, लोहे के वर्तल या जूते चपल का दान करने से आपके उपर आ रही
01:50किसी भी तरह की बाधाएं दूर होंगी, रोग भोग से मुक्ती मिलेगी और साथ ही आर्थिक तंगी से भी छुटकारा
01:58होगा
01:58इस दिन लहसुन, ट्याज, मास, मदिर और बासी भूजन ना करें
02:02शनिश्चर ये मावस्या के दिन लोहा, सरसों का तेल, काले कपड़े या राई खरीदना अशुब है, ये वस्तुए एक दिन
02:08पहले ही खरीद ले
02:09ग्रेप्रवेश, नया वाहन, खरीदना, मुन्नन सखाई या कोई भी नया व्यवसाई, कारिक्रम इस दिन शुरू ना करें
02:15इस दिन आप बाल किटवा सकते हैं, शेविंग करवा सकते हैं और नाफुन भी काट सकते हैं
02:20किसी बुजर्ग, असहाई, व्यक्ती, सफाई कर्मी या जानवर को सताय नहीं और नाहीं उनका अनाधर करें
02:27ध्यान रहे, पित्री तरपन और दीपदान करती समय दक्षन दिशा का ध्यान रखे, शनी देव की पूजा करती समय पूर्व
02:33या पश्रिम दिशा उत्तम रहेगी
02:35प्राता से दोपहर एक बज़े तक केवल पित्री कर्म करें, संध्यकाल में शनी पूजा और पीपल दीपदान के लिए निरधारत
02:42कर लें
02:42शनी मंदर में पूजा करते समय सीधे शनी देव की मूर्ती की आखों में न देखें, उनके चरणों की और
02:48देखकर ही प्रातना करें
02:49जब तक पित्रों का तरपन और पंचबली ना निकल जाए तब तक स्वयम अन ग्रहन ना करें
02:54पिलहाल अस वीडियो में इतना ही, वीडियो को लाइक और शेयर करें, साथी चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूलें