00:10दोस्ते है बहुत दुक्ष हुआ, बहुत दुक्ष हुआ।
00:14तीकि हो एक जोन आप मैंको ज़िए से।
00:16एक नर्माल आदमी की तरा चीकता है तो प्रए बागे से आपको वादम पड़े है।
00:21और अपने बहुत लोगे मौदस करते थे दो जहां भी
00:24बहुत है हो पसान हो, और कोई भी हो normative, दूर करो भीनिया।
00:28बाकिन उनके वारे का दया है, कुछह तो यहां नहीं है।
00:32पूल आप दाए जब टाइं, तो अब कॉसा मुझे भी आता है।
00:36अर गॉन हो तो क्या क्यों आ आता है।
00:39आपके सथ से कई.. करहانbbe।
00:44है।
00:44और उसक अलाब भी एहाँ प्रेंग्सिप
00:47फिल्मिनों के वजिर से एसले हम अँग पुछ थे हूए।
00:50नाना पाडिगर कर जहाँ है बहुत ही बाँ बाँ शॉक है
00:54हम सब के लिए क्योंकि जहां तक उनकी हिल्थ का सवाल था जहां तक उनकी
01:00सहत का सवाल था कभी ऐसे कुछ कुछ कंप्रेट सुनने को नहीं मिली थी
01:04तो मैं तो इतना कह सकता हूं कि थेटर जगत, फिल्म जगत, टेलिविजन जगत
01:11और एक फिलिंट्र फिस्ट होने के नाते एक बहुत बड़ा लॉस हमारी इंडिस्टी के लिए
01:15सिर्डर हमारी इंडिस्टी के लिए नहीं है, I think मुझे लगता है कि जहां तक इंसानियत का सवाल है, जहां
01:22तक
01:24अच्छी performance का सवाल है
01:25जहां तक अपने आप में institution होने का सवाल है
01:29मुझे लगता है कि इसी शक्सियत हमें
01:31हमारी industry में मिलेगी
01:34एक throughout round the clock vibrant इंसान
01:37जो हर वक्त एक खोज में था कि
01:39कहां पर किस के लिए खड़ा होना है
01:42कहां पर किस issue में मदद करनी है
01:45इंडिस्ट्री के issues को ले लीजिए
01:47आप किसानों की इंडिस्ट्री को ले ले ले के देख लीजिए
01:52इतना जिंदा इंसान इतना alive इंसान एक ऐसा औरा लेके चलने वारा इंसान जो है
01:56वो बहुत काम देखने को मिलते है
01:59उसके sense of humor
02:01उसके जो brilliant performances theater में
02:03वो देखने को मुझे लगता है कोई performances दे सकता है
02:07उनका नट सामराड देख लिजए आप बराटी में थेटर में
02:10फिल्में देख लिजए उनकी
02:11तो मुझे लगता है कि एक legacy का अंत है
02:14एक institution का अंत है
02:16और जितना लोगों ने उनसे सिखा है
02:19inspired हुए है लोग
02:20मुझे लगता है कि उस legacy को
02:23जिन्दा रखने के लिए वो लोग जो है
02:25जो inspired हुए हूँ है उनसे वो
02:27आगे लेकर चलेंगे उनको
02:30लेकिन सुबह सुबह जब यह सुनने को मिला तो
02:33पहली बात तो यह हुआ कि समझ में नहीं आया
02:35फिर पता चला कि डॉक्टर ने बहुत कोशिश की
02:3740-45 में रेटों का CPR करने कोशिश की
02:40घर में सिफ सर्वेंट था उनका है
02:42और गुवा में जाके गयोंगे अपने
02:46निचर के साथ नजदी करेने के लिए
02:48तो मुझे लगता है कि
02:50लॉस जो है यह पूरी इंडिस्ट्री का जो लॉस है
02:54यह इसका इलाज नहीं कोई
02:56सर को पता चलाज के लिए
03:01सर यह बॉलिवर्ड में और मराइटी इंडिस्ट्री में कितना
03:05इश्यू यह होएगा सर्ण
03:09नाना की दोने के बाद इतना मिक्साल हुआ है
03:25नाना पाटेकर जी का जाना ऐसा लग रहा है
03:28जैसे एक व्यक्ते का ताहगात हो
03:31मुझे मैं उनको भारत वर्ष के
03:36सर्वकालीन सर्विष्ष्ट अभिनाताओ में कहना चाहूंगे
03:41एक ऐसा अभिनेता जिसने अपनी खुद की एक शैली बनाई
03:46ना पहले उनसे कभी नाना पाटेकर हुआ ना बाद में कोई नाना पाटेकर होगा
03:50बोलने का अपना एक अंदाज
03:53और सब उनको बहुत इंटेंस आक्टिंग के लिए जानते थे
03:57उनका देखना उनका अपना बात करने का एक अंदाज
04:01लेकिन कॉमेडी पे आए तो कॉमेडी में सब को पीछे छोड़ दिया
04:05जब थियेट्रिक्स में आए तो उन्होंने सब को पीछे छोड़ दिया
04:10और बहुत अपने उसूलों पे जिन्दगी जीने वाले
04:13मुझे लगता है यह जो उनकी एक खासियत थी व्यक्तित्व की वही उनके अभिने में थी
04:17कि वो अपना सब कुछ देते थे उस रोल को
04:20हैं और कितनी बार लोग कहते एक एक अक्टर एक शैली में टाइप कास्त हो जाता है
04:25लेकिन नाना पाटिकर के संग ऐसा नहीं था लोग नाना को
04:41पर्दे पर देखना चाहते हैं उनके उसे विलक्षन अभिनेशायली के कारण है और यह भी कहना चाहोंगे कि हम सब
04:48लोग उन्हें श्रद्धानजली दे रहे हैं एक असाधारन अभिनेता के रूप में लेकिन वे जितने विलक्षन अभिनेता थे उतने ही
04:56विलक्षन इंसान �
04:58सच्चे देश भागतुब आई फिल एक्स्ट्रीमली सदेंड एन हाट ब्रोकन बाइस दिस न्यूज नाना पाटिकर का जाना हमारी फिल्म जगत
05:13के लिए कलाकार जगत के लिए और मैं ऐसे अपना एक व्यक्तिगत क्षटी भी मानता हूं क्योंकि
05:25मेरा साबका नाना पाटिकर के साथ रहा है और स्मृतियां अब शेश हैं मुझे जब पहली बार जया बच्चन ने
05:36चांस दिया था फिल्म बनाने का अब है उस फिल्म का नाम था
05:42तो स्वर्गिय नाना पाटिकर इश्वरुन की आत्मा को शाग्दी दे जब वो 65-70 लाख रुपया लेते थे एक फिल्म
05:50करने का तब केवल मेरे सब्जेक्ट, कॉंटेंट और स्क्रिप्ट को पढ़कर
05:58मुझे अच्छी तरह से मालूम है क्योंकि मैं प्रोड्यूसर था, डिरेक्टर गुए, उन्होंने मेरी फिल्म अभय केवल 21,000 रुपय
06:08में की थी, ये बात मैं कैसे भूल सकता हूं, बिलकुल नहीं भूल सकता, बीच बीच में मिलना कम होगा,
06:16परंतु निरंतर नाना पाट
06:19करके फोन आते थे, और कारण होता, तेरी याद आ रही थी, इसलिए फोन किया, तु भी इतना बुलता, जो
06:27भी कुछ है, तो मेरे लिए पर्सनल लॉस है, इश्वर, मैं इमेजिन ही नहीं कर पा रहा कि नाना जैसा
06:35फिट आदमी, शारिरिक रूप से इतना, वो इश्वर उ
06:48सेहने की शक्ति पर्दान करे इश्वर, और जीवन का कोई भरोसा नहीं है, सब फिट है, 75 साल आज की
06:56टाइम पर, 75 वर्ष कोई आयू नहीं होती है जाने की, लेकिन जिसने भी आने जाने का जन्म और मृत्यू
07:08का खेल रचा हुआ है, वो तो निश्टर तो है ही.
07:19ॡचा ब्लाटे व्रत मृत्यू