00:00ये को तो यार लगता है कि रहना नहीं देश बिराना है बहुत मन करता है कि मैं क्यों किसी
00:05के पच्छड़े में पढ़ रहा हूँ
00:07छोड़ो ना जिसको अपनी दुर्गती करानी है कराए
00:12मैं कहां तक अपनी सिंदगी अपनी शान्ते दाओं पर लगाऊं
00:21दिन में दस बार ही आता है कि मुझे क्या करना है जैसा है आम आदमी रहने तो उसको खुद
00:30ही अपने लिए नर्क चाहिए तो क्या उसको मैं पुरूप हूँ
00:38देखता हूँ कब तक रोकना है ये तो उसके वाद हमारे सहाब बोली गए ना रहना नहीं देश बिराना है
00:48तो देश बिराना ही हुआ जा रहा है बिराना मने बेगाना दूसरा पराया ठीक है जब दिखाई देगा कि अब
00:58कुछ भी कहना सुनना वेर्थ है
01:01तब रहना नहीं देश बिराना है ये संसार कांटन की जाड़ी उलज उलज मर जाना है
01:08ये संसार कागस की पुडिया बूंद पड़े घुल जाना है
01:15कहें कबीर सुनो वेसाधो राम नाम ठिकाना है