सनातन इतिहास का वो भयानक महायुद्ध, जिसमें मां कालिका ने असुरों को मारा नहीं, बल्कि जिंदा ही चबा लिया! 😱🔱
यह कोई कल्पना या फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि 'दुर्गा सप्तशती' में दर्ज वो सत्य है जो आज भी रोंगटे खड़े कर देता है। जब शुंभ-निशुंभ के दो सबसे खूंखार सेनापति—चंड और मुंड—लाखों असुरों की फौज लेकर आगे बढ़े, तब मां कौशिकी की भृकुटि से साक्षात संहार बनकर प्रकट हुईं मां कालिका।
नरमुंडों की माला, हाथ में खड़ग और भयानक अट्टहास के साथ मां ने असुरों के विशाल हाथियों, घोड़ों और महारथियों को सीधे अपने जबड़ों में पीस डाला। चंड और मुंड का वध करने के कारण ही मां का नाम 'चामुंडा' पड़ा।
यह शक्ति हमें सिखाती है कि जब अधर्म सीमाएं लांघता है, तो ब्रह्मांड का न्याय अत्यंत भयानक और अकाट्य होता है।
अगर आप भी सनातनी हैं और मां के इस रौद्र रूप की शक्ति को महसूस करते हैं, तो कमेंट बॉक्स में पूरी श्रद्धा से 'जय मां चामुंडा' जरूर लिखें और वीडियो को सनातनी भाई-बहनों के साथ शेयर करें! 🚩🙏
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