रोध जब हद से ज़्यादा बढ़ जाए, तो उसे केवल और केवल असीम प्रेम और समर्पण से ही शांत किया जा सकता है! 🔱🙏
नवरात्रि की उस भयानक रात को आखिर ऐसा क्या हुआ था, जब तीनों लोकों के सबसे बड़े संहारक, खुद देवाधिदेव महादेव को मां काली के चरणों तले लेटना पड़ गया था?
जब महापराक्रमी दानव रक्तबीज के वध के बाद राक्षसों का दूषित खून पीते-पीते मां काली का क्रोध अपनी चरम सीमा पार कर गया, तब रणभूमि में उनके महाविनाशकारी तांडव से पूरी सृष्टि कांप उठी थी। तीनों लोकों को भस्म होने से बचाने के लिए जब कोई उपाय शेष न रहा, तो खुद भगवान शिव चुपचाप उस मार्ग पर लेट गए जहाँ मां काली आगे बढ़ रही थीं।
जैसे ही मां काली का चरण शिव जी की छाती पर पड़ा, उन्हें अहसास हुआ कि नीचे उनके अपने पति महादेव हैं। पश्चाताप और लज्जा से मां की जीभ बाहर निकल आई और उनका रौद्र रूप तुरंत शांत हो गया।
आज भी पश्चिम बंगाल के दक्षिणेश्वर और कालीघाट मंदिर में मां के इसी परम कल्याणकारी और दिव्य स्वरूप की पूजा की जाती है।
यदि आप भी सनातन धर्म की इस अलौकिक शक्ति और महादेव के प्रेम पर विश्वास रखते हैं, तो कमेंट बॉक्स में पूरी श्रद्धा के साथ 'हर हर महादेव' और 'जय मां काली' ज़रूर लिखें! 🚩✨
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